24/06/2025
उत्तर बिहार के तीन रचनाकारों को इस वर्ष साहित्य अकादमी के प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चुना गया है। खास बात यह है कि इनमें दो प्रतिभाशाली महिलाएं मधुबनी ज़िले से हैं, जिन्होंने अपनी मातृभाषा मैथिली में रचनात्मक योगदान दिया है।
दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. धीरज कुमार पांडेय को उनकी संस्कृत पुस्तक 'पारिभाषिकशब्द स्वारस्यम्' (वेदांत परिभाषा संदर्भ) के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मिलेगा। यह पुस्तक संस्कृत आलोचनात्मक गद्य में एक अहम योगदान मानी जा रही है।
मधुबनी ज़िले की मुन्नी कामत, जो फुलपरास के सुरियाही गाँव से हैं, को उनकी मैथिली बाल कथा संग्रह 'चुक्का' के लिए साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मुन्नी कामत ने बाल मनोविज्ञान और लोक संवेदनाओं को बहुत सरलता से अपनी कहानियों में पिरोया है।
वहीं नेहा झा मणि, जिनका जन्म मंगरौनी, मधुबनी में 28 जून 1991 को हुआ, को उनकी मैथिली कविता संग्रह 'बनारस आ हम' के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है। उनकी कविताओं में बनारस की संस्कृति, स्मृति और संवेदनाएं जीवंत हो उठती हैं।
ये तीनों रचनाकार न सिर्फ़ भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी हैं, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा हैं — कि अगर समर्पण और संवेदना हो, तो गाँव-क़स्बों से भी साहित्य का सूरज उग सकता है।