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भक्त पुकार- "तीर्थ में उत्तराखंड का पांचवा धाम, शिक्षा में दूनघाटी तथा आयुर्वेदिक वन बने गुरु माणिकनाथ परिक्रमा क्षेत्र"
"जय श्री गुरुमाणिकनाथ जी की"
नाथ सम्प्रदाय के सहस्त्र सिद्ध योगियों में ओंकारेश्वरआदिनाथसाक्षात् शिव के प्रथम अवतार थे| स्वयं को शिव का अन्स्हज मानने वाले ९ नाथ एवं ८४ स
िद्ध योगी गुरुऔ ने विलक्षण शक्तियों को सिद्ध कर जनहित में उपयोग किया| नाथ संप्रदाय के शिवअवतारी श्री गुरुमाणिकनाथ जी का सिद्धपीठस्थल उत्तराखंड, टिहरी गढ़वाल के घनसाली ब्लाक में ग्राम कोटी (फैगुल), पोo ओ0 मगरों, जो समुद्र ताल से २५०० मीo की ऊंचाई की दुर्गम पहाड़ी पर स्थित है|
दैवीय संकेत चिन्ह:
(क): सिद्धपीठ पर्वत दूर से योगलीन शिव व पास नंदी बैठे हुए दिखाई देते हैं|
(ख): प्राकृतिक गुफा के अन्दर गुरूजी की सिद्ध शक्ति से उपजित शिवलिंग है, जिसका आकर "गुरु यात्रा" एवं सांवन के महीने में बढ़ा प्रतीत होता है|
(ग): दुर्गम पहाड़ी के अन्दर बनी प्राकृतिक सुरंग में देवभोग हेतु पानी होना दैवीय चमत्कार ही है| कीमती खनिजों में तांम्बे की खान है व जीवन दायिनी औषाधि भण्डार छेत्र है|
(घ): मांस मदिरा एवं लहसुन प्याज का त्यागकर जो भक्त गुरूजी के नित्य नियम से गुरूजी का ध्यान करता है उसे गुरूजी का दर्शन एवं मार्गदर्शन आज भी किसी ना किसी रूप में होता है|
(च): सिद्धपीठ स्थल का दर्शन करने के पश्चात भक्त को मानसिक एवं शारीरिक दुखों से मुक्ति की अनुभूति होती है|
गुरुकृपा विशेष: श्री माधोसिंह भंडारी (मलेथा) के पिता श्री कालू भंडारी को टिहरी नरेश श्री शाह ने भूटान- तिब्बत विजय पर इनाम में जागीर मांगने को कहा, वीर - भड श्री कालू भंडारी ने अपने लिए "माणिकनाथ का दांडा" में गुरुसेवा व ग्राम पिलखी के बगीचे से मलेथा तक की जागीर मांगी, श्री कालू भंडारी के नाम से ग्राम कोटी (फैगुल) को कालू की कोटी भी बोलते हैं| पिता की तरह महानगढ़ नायक एवं अदभुत इंजिनियर श्री माधो सिंह भंडारी गुरूजी के सर्मपित एवं संयमित भक्त थे व अपने हर कार्य को शुरू करने से पहले सिद्धपीठ पर अर्जी लगाने व जात पर सोने का छतर भेंट करते थे| श्री गुरुमाणिकनाथ जी के आर्शीवाद से मलेथा गांव की खेती के लिए पानी कर सुरंग बनाकर अजर अमर हैं| वहां खेतों में रोपाई श्री गुरुमाणिकनाथ जी को रोट चढ़वाने के बाद शुरू होती है|
दर्शन:
श्री गुरुमाणिकनाथ जी के सिद्धपीठ के दर्शन एवं आर्शीवचन प्राप्त करने के लिए भक्तों को कम से कम ४८ घंटे के अंतराल तक लहसुन प्याज, मीट - मदिरा का भोग नही करना होता है| श्री गुरुमाणिकनाथ जी की गुफा में चमड़े का सामान, जूते चप्पल व स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है, जिससे उन्हें दूर रहकर ही आर्शीवचन प्राप्त होते हैं| श्री गुरुमाणिकनाथ जी के नियम व्रत का पालन करने वाला भक्त यदि "ॐ गुरुवे नमो नमः, श्री सत गुरुमाणिकनाथ नमो नमः, जय गुरुदेवाय: नमो नमः, श्री गुरुमाणिकनाथ नमो नमः" का जप करे, उस पर गुरूजी का नित्य आर्शीवाद रहता है| उपस्थित भक्तजनों की आराधना एवं निम्न सदस्यों के पूजन आहवान पर ही श्री गुरुमाणिकनाथ जी भगत पर प्रकट होते हैं|
१. भगत :- श्री गुरुमाणिकनाथ जी ग्राम कोटी के रावत जाति पर प्रकट होते हैं| आज भी ९२ वर्षीय श्री उदय सिंह रावत जी गुरूजी के नियम व्रत का पालन करते हुए सिद्धपीठ स्थल की चढ़ाई बिना किसी सहारे के चढ़ते व उतरते हैं, तथा आजीवन नंगे पैर ही सर्दी/गर्मी में रहते हैं|
२. रावल पुजारी :- श्री गुरुमाणिकनाथ जी ग्राम कोटी के भन्डारियों में से अपने रावल व पुजारी को चुनते हैं, जिन्हें नित्य नियम से गुरु पूजा करनी होती है| वर्तमान में श्री दयाल सिंह भंडारी पुजारी हैं व श्री अजमेर सिंह भंडारी रावल हैं, वे शंख एवं नाद की ध्वनि से गुरुदेव का आहवान करते हैं|
३. ग्राम पुरोहित :- श्री गुरुमाणिकनाथ जी का विधिविधान से आहवान एवं यज्ञ श्रेष्ट पुरोहित द्वारा नित्य यात्रा पर किया जाता है, वे धूप दीप से गुरुदेव का आहवान करते हैं|
४. ग्राम-दास :- (हरिदास) श्री गुरुमाणिकनाथ जी के हर कार्य में ग्राम कोटी के हरिदास ढोल-दमाऊं बजाकर आहवान करते हैं व गुरूजी को प्रकट करवाते हैं|
भोग/प्रसाद:
श्री गुरुमाणिकनाथ जी को बर्तनों या घर से बनाया भोग नही लगता है| पवित्र अंगारों में पकाया गया "रोट" गुरूजी का भोग है| रोट को घी, ढूध, गुड, चीनी, आटा व पंच मेवा को मिश्रित कर बनाया जाता है|
भेंट/ चढ़ावा:
श्री गुरुमाणिकनाथ जी को भक्तजन नया अन्न (आटा, चावल, दाल, फल सब्जी) तथा गुड, चीनी, घी, मक्खन/तेल पंचमेवा के साथ हवन हेतु जौ-तिल अर्पित करते हैं, चन्दन की लकड़ी को तिलक लगाया जाता है, गेरुए रंग वस्त्र (साडी ४.४ मीटर लम्बा तथा १.४ मीटर चौड़ा) का वस्त्र निशान हेतु चढ़ाते हैं| पूर्वकाल में सबसे अधिक सोने चांदी के आभूषण (चांदी के सिक्के, छतर) श्री माधो सिंह भंडारी द्वारा चढ़ाया गया है|
पूजन:
श्री गुरुमाणिकनाथ जी के पुजारी द्वारा प्रतिदिन नियमित आरती ग्राम कोटी में स्थित मंदिर में शुद्ध मक्खन/घी से की ज़ाती है, तथा रावल के द्वारा सिद्धपीठ स्थल उपजित शिवलिंग की पूजा की ज़ाती है, तत्पश्चात नाथ भूत देवता एवं घंडियाल देवता, वीर देवता का आहवान पूजन होता है|
नोट: रावल पुजारी व भूमिया धार्मिक समिति कोटी से संपर्क कर भक्तगण अपनी विशेष पूजा सिद्धपीठ स्थल पर करते हैं| आदिकाल से ग्राम कोटी, पालीखाल, रैतासी व स्यालकुण्ड के ग्रामवासियों ने लहसुन व प्याज की खेती का त्याग किया है| ग्राम जाख, बणचुरी, मुयाल गाँव, पंड्यागाँव, मैखरी (ख़ासपट्टी) द्वारी जखन्याली एवं रैतासी डागर- कोठार के मंदिरों में भी माणिकनाथ जी की पूजा की ज़ाती है, समय समय पर हर गाँव की यात्रा में भक्त सिद्धपीठ गुफा पर सपरिवार आते हैं| ग्राम बनचुरी द्वारी व कोटी के घंडियाल देवता "जात" एक साथ होती है|
यात्रा:
श्री गुरुमाणिकनाथ जी के वर्ष भर परंपरागत निम्न यात्रायों का आयोजन किया जाता है|
१. प्रतिमाह संक्रांति को रावल द्वारा सिद्धपीठ स्थित शिवलिंग का पंचामृत स्नान एवं रोट का भोग दिया जाता है|
२. वैशाख १ गते से ४ गते तक प्रतिदिन श्री गुरुमाणिकनाथ जी के मंदिर से श्री घंडियाल देव जी के मंदिर तक व फिर वापिस श्री गुरुमाणिकनाथ जी के मंदिर तक दंड अभ्यास (एडो) यात्रा|
३. वैशाख ६ गते (जखोर) पौखाल तथा ७ गते कांडीखाल मेला यात्रा, पूर्व में यह मेला यात्रा श्री गुरुमाणिकनाथ जी की परिक्रमा छेत्र में पड़ने वाले हर गाँव के मेले में होती है, अर्थातम जाख से नैखरी जाखी गवाना रैतासी डागर कोठार तक|
४. ज्येष्ठ माह की तय तिथि को श्री गुरुमाणिकनाथ जी के सिद्धपीठ स्थल पर यात्रा| इस दिन ग्राम सभा की धान की रोपाई का दिन घोषित किया जाता है| इस दिन सिद्धपीठ में श्रमदान हेतु हर भक्त परिवार अपना योगदान देते हैं|
५. सावन मास के तय तिथि को सिद्धपीठ स्थल में हरियाली पूजन कार्यक्रम यात्रा| इस दिन गौमुख के भक्तों द्वारा लाया गया जल का जलाभिषेक होता है|
६. आश्विन मास में सिद्धपीठ स्थल में ९ दिन तक नवरात्र पूजन हरियाली डाली ज़ाती है जिसमे दूर दूर से भगत रात्री जागरण हेतु आते हैं|
७. माघ महीने में सिद्धपीठ स्थल, घंडियाल देवता मंदिर, श्री गुरुमाणिकनाथ जी मंदिर कोटी, श्री नाथबूद मंदिर कोटी, श्री वीर देवता मंदिर पलुनी में एक एक दिन का सामूहिक हवन यज्ञ किया जाता है| उपरोक्त समस्त कार्यक्रम का संयुक्त संचालन श्री गुरुमाणिकनाथ धार्मिक समिति के द्वारा किया जाता है, जिसमे ग्राम सभा कोटी पालीखाल एवं स्यालकुण्ड की जनता की विशेष भागीदारी होती है|