Sri Maa Baglamukhi

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06/10/2025
30/08/2025

त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देवि देवि ॥

जय जय श्रीमाते, जय जय ललिते,
जय त्रिपुरसुन्दरी, जय राजराजेश्वरि ।

प्रारब्धपापक्षयदा, क्लेशविनाशकारिणी ।
राजराजेश्वरी मातः, त्रिपुरे त्राहि नोऽम्बिके ॥

अभिषेकं च स्नपनं, श्रृङ्गारं सहसार्चनम् ।
पुष्पार्चनं च मातस्ते, भविष्यति शुभप्रदम् ॥

श्रीसूक्तपाठशतको, दशाष्टकसमन्वितः ।
अर्प्यते तव चरणे, सम्पदां प्रददासि नः ॥

धनं विना न धर्मोऽस्ति, कार्याणि न सिध्यति ।
त्वद्भक्तानां कृपाकान्ते, भवतां सुखजीवितम् ॥

त्वदीयाज्ञावशेनैव, कर्माण्येतानि शक्यते ।
श्रद्धासुमनसा सार्धं, सेवामः तव पादयोः ॥

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हिंदी भावानुवाद (श्लोकानुसार)

हे माँ राजराजेश्वरी! आप प्रारब्ध पापों का क्षय करने वाली और समस्त क्लेशों का नाश करने वाली हैं। त्रिपुराम्बिका! हमें कृपा प्रदान कीजिए।

कल आपका अभिषेक, स्नापन, श्रृंगार, सहस्रार्चन और पुष्पार्चन होगा, जो सबको मंगलदायी होगा।

माँ! आपके चरणों में १०८ बार श्रीसूक्त का पाठ अर्पित किया जाएगा, जिससे आप भक्तों को सम्पत्ति, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्रदान करें।

धन के बिना धर्मकार्य नहीं हो सकते, अतः आपकी कृपा से भक्तों का जीवन सुखी एवं सफल बने।

आपके आदेश से ही ऐसे पुण्यकर्म सम्भव होते हैं। हम श्रद्धा-सुमन अर्पित कर, आपके श्रीचरणों की सेवा में जीवन को सरल, सुगम और सुखमय बनाने हेतू सम्मलित होंगे.

प्रात 9 बजे से 4 बजे तक
रविवार 31 अगस्त 2025

कामख्या योनि पीठम
श्री माँ बगलामुखी मन्दिरम
स्वामी आलोक महाराज जी
जंगपुरा दिल्ली
# 9818133665

09/08/2025

रक्षा बंधन का यह पावन पर्व — रक्षा का सच्चा अर्थ"

रक्षा बंधन…
सिर्फ एक धागा नहीं,
बल्कि एक विश्वास है —
एक संकल्प है —
एक प्रार्थना है।

आज के दिन हर कोई अपने-अपने भावों के साथ ईश्वर के सम्मुख उपस्थित होता है।
जिसका जैसा मन, जिसकी जैसी चाह —
वही वह अपने प्रभु से माँगता है।

कोई धन-समृद्धि की रक्षा की कामना करता है।
कोई संतान की कुशलता के लिए निवेदन करता है।
कोई अपने परिवार, अपने घर-आँगन, अपने सुख-संपत्ति की सुरक्षा चाहता है।

परंतु संतजन…
उनकी प्रार्थना कुछ और ही होती है।
वे कहते हैं —

"हे प्रभु! मेरी रक्षा इस संसार के लोभ, माया और मोह से करना। कहीं ऐसा न हो कि इन भटकाने वाले आकर्षणों में फँसकर मैं तुझसे दूर हो जाऊँ।
मेरी साधना, मेरी भक्ति, और तेरे प्रति मेरा प्रेम — यही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है, इसकी रक्षा करना।"

क्योंकि सांसारिक रक्षा अस्थायी है,
पर आत्मिक रक्षा शाश्वत है।
धन-संपत्ति साथ नहीं जाएगी,
पर ईश्वर-प्रेम और भक्ति अमर रहेगी।

आज रक्षा पर्व के पावन अवसर पर,
हम माँ बगलामुखी के चरणों में यह प्रार्थना करते हैं —
हे माँ जिस-जिस प्रकार की रक्षा जिसकी आवश्यकता है,
आप उसी रूप में अपनी कृपा और आशीर्वाद बरसाएँ।

कोई सांसारिक रक्षा चाहता है, कोई आध्यात्मिक;
कोई तन की रक्षा चाहता है, कोई मन की;
कोई घर की रक्षा चाहता है, कोई अपने विश्वास की।

हे माँ! सबकी रक्षा करें…
सबको अपने संरक्षण में रखें…
और हमें इस जीवन यात्रा में सही राह दिखाती रहें।

जय माँ बगलामुखी
रक्षा बंधन की बधाई,
महामाई आप सभी साधको को आंनद प्रदान करें.

स्वामी आलोक महाराज जी
श्री माँ बगलामुखी साधना केंद्र
जंगपुरा नई दिल्ली

07/08/2025

जब गुरु ही बन जाएं सच्चे मित्र...

जब आपका आध्यात्मिक गुरु ही आपका सच्चा मित्र बन जाए,
तो जीवन की हर दिशा में दिव्यता उतर आती है।

ऐसे संबंध में न अपेक्षा होती है, न कोई स्वार्थ। केवल प्रेम, मार्गदर्शन और ईश्वर से जुड़ाव होता है।

गुरु का सान्निध्य जब मित्रता की गर्माहट से मिल जाए, तो स्वयं प्रभु भी आपके जीवन में सहभागी बन जाते हैं। फिर न कोई अकेलापन रहता है, न जीवन में किसी और मित्र की आवश्यकता।

यह वही दिव्य अवस्था है
जहाँ प्रेम, शांति और आत्मा की पूर्णता का अनुभव होता है।

गुरु, मित्र और ईश्वर – जब ये तीन एक हो जाएं,
तो जीवन धन्य हो जाता है।

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