Center for Civilisational Studies

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काकोरी क्रांति गाथा"अधिकारों के लिए किया गया सशस्त्र संघर्ष ही राष्ट्र की चेतना को जीवंत रखता है।"भारतीय स्वाधीनता के इत...
15/03/2026

काकोरी क्रांति गाथा
"अधिकारों के लिए किया गया सशस्त्र संघर्ष ही राष्ट्र की चेतना को जीवंत रखता है।"
भारतीय स्वाधीनता के इतिहास में क्रांतिकारी आंदोलनों की धारा अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रही है। 'सभ्यता अध्ययन केंद्र' इस ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को जनसामान्य के समक्ष लाने हेतु संकल्पित है। इसी क्रम में, सभ्यता अध्ययन केंद्र एवं साहित्य कला परिषद (दिल्ली सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में इस विशेष नाट्य प्रस्तुति का आयोजन किया जा रहा है।
क्रांतिकारी आंदोलन की पृष्ठभूमि: बिरसा से बिस्मिल तक
भारतीय सशस्त्र संघर्ष की नींव १८वीं शताब्दी के अंत और १९वीं शताब्दी के प्रारंभ में ही पड़ चुकी थी। हम मानते हैं कि विदेशी दासता के विरुद्ध इस संगठित क्रांति का शंखनाद भगवान बिरसा मुंडा के 'उलगुलान' (महान विद्रोह) और जल-जंगल-ज़मीन के रक्षण हेतु किए गए संघर्ष से हुआ था।
यह नाटक बिरसा मुंडा और तिलका मांझी (१७८०) जैसे महान बलिदानियों द्वारा प्रज्वलित उस मशाल को रेखांकित करता है, जिसने कालांतर में १९२५ के 'काकोरी प्रतिरोघ' के रूप में एक प्रचंड राष्ट्रव्यापी स्वरूप धारण किया। यह मंचन सिद्ध करता है कि काकोरी की घटना कोई आकस्मिक घटना नहीं, अपितु भारतीय जनमानस में व्याप्त निरंतर प्रतिरोध की एक परिपक्व कड़ी थी।
आयोजन विवरण
नाटक: काकोरी क्रांति गाथा
प्रस्तुति: सिल्ली सोल्स फाउंडेशन
दिनांक: आज, १५ मार्च २०२६ (रविवार)
समय: सायं ५:३० बजे
स्थान: अभिमंच सभागार, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), मंडी हाउस, दिल्ली
प्रमुख उपस्थिति एवं नेतृत्व
अतिथिगण: श्री कपिल मिश्रा (कला एवं संस्कृति मंत्री, दिल्ली सरकार), श्री नरेश रावल, श्री वागीश पाठक एवं स्वामी दीपांकर।
रचनात्मक पक्ष: प्रियंका शर्मा (निर्देशन), रवि शंकर (कथानक) एवं कौशल पाण्डेय (संवाद)।
यह प्रस्तुति पंडित रामप्रसाद 'बिस्मिल', अशफ़ाक़ उल्ला खाँ, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह के उन वैचारिक सिद्धांतों पर केंद्रित है, जिन्होंने भारत के लिए न केवल स्वाधीनता, अपितु एक न्यायपूर्ण संविधान का प्रारूप भी प्रस्तुत किया था।
निवेदक: रवि शंकर (निदेशक, सभ्यता अध्ययन केंद्र)
मीडिया पार्टनर: पाञ्चजन्य
आइए, बिरसा मुंडा से लेकर काकोरी के बलिदानियों तक की इस शौर्य-परंपरा का साक्षात्कार करें। आप सपरिवार सादर आमंत्रित हैं।

🌍अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 🌍 #मातृभाषा_दिवस    #भाषाई_विविधताअंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर, हम अपनी भाषाई व...
21/02/2025

🌍अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 🌍
#मातृभाषा_दिवस #भाषाई_विविधता

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर, हम अपनी भाषाई विरासत का सम्मान करते हैं और भाषाओं की विविधता को बनाए रखने का संकल्प लेते हैं। मातृभाषा न केवल हमारी सोच और अभिव्यक्ति का माध्यम है, बल्कि यह हमारी परंपराओं, इतिहास और समाज की आत्मा भी है।
भाषाई विविधता, सभ्यतागत समृद्धि का प्रतीक है। अपनी मातृभाषा के संरक्षण और प्रसार के लिए कार्य करें और सभी भाषाओं का सम्मान करें।

"हर भाषा में बसती है एक अनोखी दुनिया!"

🌍 विश्व सामाजिक न्याय दिवस 🌍 #सामाजिक_न्याय    "न्याय वही होता है जो समानता और गरिमा को बनाए रखे!"विश्व सामाजिक न्याय दि...
20/02/2025

🌍 विश्व सामाजिक न्याय दिवस 🌍
#सामाजिक_न्याय


"न्याय वही होता है जो समानता और गरिमा को बनाए रखे!"

विश्व सामाजिक न्याय दिवस हमें यह याद दिलाता है कि एक समावेशी, समान और न्यायसंगत समाज बनाने के लिए हमें सभी भेदभाव, असमानता और अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।

सामाजिक न्याय केवल कानूनी अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी आधार है।

🌿 स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती पर शत-शत नमन 🙏    उन्होंने आध्यात्मिक साधना के माध्यम से प्रेम, करुणा और समर्पण का संदेश ...
18/02/2025

🌿 स्वामी रामकृष्ण परमहंस जयंती पर शत-शत नमन 🙏


उन्होंने आध्यात्मिक साधना के माध्यम से प्रेम, करुणा और समर्पण का संदेश दिया, जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देता है। उनकी शिक्षाएँ हमें मानवता, भक्ति और धर्म की सच्ची भावना को अपनाने की प्रेरणा देती हैं।

इस पावन अवसर पर, आइए हम उनके विचारों को आत्मसात कर जीवन में आध्यात्मिक चेतना जागृत करें।

संथाल समाज: परंपरा, नृत्य और संस्कृति की अनोखी विरासत
18/02/2025

संथाल समाज: परंपरा, नृत्य और संस्कृति की अनोखी विरासत

🌿 संथाल समाज: परंपरा, नृत्य और संस्कृति की अनोखी विरासत🌿भारत की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति, संथाल समुदाय, की संस्कृति, ....

चेरो जनजाति का अनसुना इतिहास
13/02/2025

चेरो जनजाति का अनसुना इतिहास

चेरो जनजाति का अर्थ होता है "चुना गया रक्षक", और यह जनजाति भारत की प्राचीनतम जनजातियों में से एक है। इस वीडियो में हम ...

✨ विश्व रेडियो दिवस  ✨रेडियो केवल एक संचार माध्यम नहीं, बल्कि सभ्यताओं की आवाज़ है! इसने इतिहास को आकार दिया है, जन आंदो...
13/02/2025

✨ विश्व रेडियो दिवस ✨

रेडियो केवल एक संचार माध्यम नहीं, बल्कि सभ्यताओं की आवाज़ है!
इसने इतिहास को आकार दिया है, जन आंदोलनों को दिशा दी है, और हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया है।

आज विश्व रेडियो दिवस पर, हम इस सशक्त माध्यम को नमन करते हैं, जिसने अतीत से लेकर वर्तमान तक संवाद, ज्ञान और मनोरंजन का सेतु बनाया है।

रेडियो सुनें, संवाद बनाएँ, और अपनी सभ्यता की धरोहर को जीवंत रखें!
#विश्वरेडियोदिवस

🕉️ पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी पुण्यतिथि 🕉️राष्ट्रवादी विचारक और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पु...
11/02/2025

🕉️ पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी पुण्यतिथि 🕉️

राष्ट्रवादी विचारक और एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
उन्होंने भारतीय संस्कृति, समाज और राजनीति में नैतिकता और राष्ट्रीयता के समावेश पर बल दिया। उनका दर्शन, ‘एकात्म मानववाद’, संपूर्ण समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
#पंडितदीनदयालउपाध्याय #एकात्ममानववाद #अंत्योदय

जातीय सद्भाव: भूत, वर्तमान, भविष्य
07/02/2025

जातीय सद्भाव: भूत, वर्तमान, भविष्य

इस वीडियो में "जातीय सद्भाव : भूत, वर्तमान, भविष्य" विषय पर आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की प्रमुख चर्चाओं, वि...

विकास और समाज - श्रीमती ममता रानी #बेहतर_भविष्य  #समाज_की_आवाज़  #संयुक्त_परिवार  #अकेलापनहाल ही में एक खबर आई कि जापान ...
07/02/2025

विकास और समाज - श्रीमती ममता रानी

#बेहतर_भविष्य #समाज_की_आवाज़ #संयुक्त_परिवार #अकेलापन

हाल ही में एक खबर आई कि जापान में बुजुर्ग महिलाये अपना अकेलापन दूर करने के लिए छोटे मोटे अपराध करके जेल चली जाती हैं। जेल में उन्हें ज्यादा सुरक्षित महसूस होता है। जेल के जीवन को वे ज्यादा सुविधाजनक अनुभव करती हैं। पढ़ कर मेरा मन बड़ा व्यथित हुआ कि क्या जापान जैसे विकसित कहे और माने जाने वाले देश में बुजुर्गों का रहना इतना कठिन है? कैसा समाज है वहां का? यह विकास है या विनाश समझना बड़ा कठिन लगता है।

विचारणीय है कि क्या भारत में भी कभी ऐसा था कि किसी महिला को अकेलापन इतना भयानक लगे कि वह जेल में रहने की सोचने लगे? मैने अपने गांव में परिवारों में कई महिलाओं को देखा है जो बाल विधवा थीं या जिनके पति उनकी युवावस्था (बीस बाइस वर्ष) में ही पति चल बसे। उनके बच्चे भी नहीं थे। कुछ समय के बाद माता पिता भी चल बसे। भाई बहन अपने अपने परिवार में मस्त हो गए। यानी अपना कहने को कोई नहीं होने पर भी उनका जीवन आराम से सुचारू रूप से चल रहा था।

उसका सबसे बड़ा कारण था संयुक्त परिवार तीन-तीन, चार-चार पीढ़ियां एक साथ एक घर अथवा गाँव में रहती थीं। एक आंगन अथवा गाँव में रहने के कारण किसी को अकेलापन नहीं सताता था लोग अपने जीवन में व्यस्त रहने पर भी एक-दूसरे की इतनी चिंता और सहयोग तो करते ही थे कि उन्हें अकेलापन नहीं लगता था। जीवन में सुख दुख तो लगा ही रहता है किसी का बच्चा पढ़ने गया है किसी की बेटी की शादी हो गयी यह सब चीजें निरंतर चलते रहती हैं, परंतु सब लोग अपने सुख दुख एक दूसरे से साझा करते रहते थे।

आज विकास के नाम पर हम देश में युवाओं को जिस खानाबदोशी की ओर ढकेल रहे हैं, वह कहीं न कहीं हमें जापान की स्थिति की ओर ही ले जाएगा।

क्या यही विकास है? अकेलापन और विकास का दुष्चक्र! #सोचने_वाली_बात  #संयुक्त_परिवार  #अकेलापनजापान में बुजुर्ग महिलाएं अके...
06/02/2025

क्या यही विकास है?
अकेलापन और विकास का दुष्चक्र!
#सोचने_वाली_बात #संयुक्त_परिवार #अकेलापन

जापान में बुजुर्ग महिलाएं अकेलेपन से बचने के लिए जानबूझकर छोटे अपराध कर जेल चली जाती हैं, क्योंकि वहां वे ज्यादा सुरक्षित और कम अकेला महसूस करती हैं।

हमारे समाज में कभी संयुक्त परिवारों ने बुजुर्गों को यह अहसास नहीं होने दिया। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हम भी कहीं वही गलती तो नहीं दोहरा रहे?

विकास की दौड़ में मानवीय रिश्ते ना खो दें!

गोत्र और पितरों का महत्त्व मानती है असुर जनजाति
31/01/2025

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