Sanatan Sanskriti Sangh सनातन संस्कृति संघ

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Sanatan Sanskriti Sangh सनातन संस्कृति संघ शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, नारी जागरण, पर्यावरण, व्यसन एवं कुरीति उन्मूलन के लिए कार्यरत।

सनातन संस्कृति संघ (ट्रस्ट) परिचय
शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, नारी जागरण, पर्यावरण, व्यसन एवं कुरीति उन्मूलन के लिए कार्यरत धर्मार्थ ट्रस्ट

सनातन संस्कृति संघ एक गैर सरकारी, सामाजिक, स्वयंसेवी ट्रस्ट हैं। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, नारी जागरण, पर्यावरण, व्यसन एवं कुरीति उन्मूलन के कार्य करना है।


संसार के जन कल्याणार्थ मानवीय, नैतिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक मू

ल्यों को निजी, व्यवसायिक तथा सार्वजनिक जीवन में बढ़ावा देना। गौशालाओं एवं गुरूकुलों की स्थापना व संचालन करना। यह संस्था जिन क्षेत्रों में शिक्षायें एवं प्रशिक्षण दे रही है, वे हैं-


राष्ट्र जागरण, स्वदेशी स्वाभिमान, मूल्यनिष्ठ शिक्षा, चरित्र निर्माण, योग प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन, विश्व बंधुत्व, सम्पूर्ण स्वास्थ्य, गौवंश एवं ग्राम आधारित अर्थतंत्र की व्यवस्था, पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागृति, व्यक्तित्व विकास, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक पुनर्निर्माण, नशीले पदार्थो से मुक्ति, अंधविश्वास एवं कुप्रथा निवारण, सकारात्मक चिंतन, वैज्ञानिक- आध्यात्मिक अनुभूति तथा जीने की कला।


सनातन संस्कृति संघ को दिये गये दान पर आयकर की धारा 80G के अंतर्गत टैक्स में छूट प्राप्त की जा सकती हैं।


सनातन संस्कृति संघ (ट्रस्ट) को अंशदान देने के इच्छुक दानदाता पंजाब नेशनल बैंक की स्थानीय सी0बी0एस0 शाखा में पहुंचकर


खाता संख्या A/C no :- 4579002100002930
IFSC - PUNB 0457900

Branch Code 457900 में अपना अंशदान जमा कर सकते है।


खाते में धन जमा करवाते समय खाते का नाम एवं शाखा का स्थान (सनातन संस्कृति संघ, पंजाब नैशनल बैंक, करावल नगर, दिल्ली) अवश्य जाँच कर ले।


अधिक जानकारी हेतु हमसे 09149105534 पर सम्पर्क कर सकते है।


वन्दे मातरम्

भारत माता की जय

23/06/2026

**मंदिरों का धन, केवल मंदिरों के लिए!**

तमिलनाडु की विजय थलपति सरकार द्वारा मंदिर निधि से बनने वाले ₹245.85 करोड़ के 46 प्रोजेक्ट निरस्त कर मंदिरों के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर धन खर्च करने का निर्णय एक महत्वपूर्ण नीति-चर्चा का विषय बन गया है। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि मंदिरों के संसाधनों का उपयोग मंदिरों और भक्तों के हित में प्राथमिकता से किया जाएगा।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का स्पष्ट मत है कि **मंदिरों की आय पर पहला और सर्वोच्च अधिकार मंदिरों, उनकी धार्मिक परंपराओं और हिन्दू समाज का है।**

जब तमिलनाडु का ईसाई मुख्यमंत्री हिन्दू हित में मंदिरों की लूट बंद करने का साहस कर सकता है, तो यदि स्वयं को हिन्दू हितैषी कहने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाजपा सरकारें वास्तव में सनातन धर्म के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें पूरे देश में यह नीति लागू करनी चाहिए कि—

🔸 मंदिरों का धन केवल मंदिरों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास में लगे।
🔸 वेद पाठशालाओं, संस्कृत शिक्षा, गोशालाओं और धर्म शिक्षा को मंदिर निधि से सशक्त बनाया जाए।
🔸 निर्धन हिन्दू परिवारों, संत-महात्माओं तथा धार्मिक संस्थानों के कल्याण में मंदिर संसाधनों का उपयोग हो।
🔸 मंदिरों की भूमि, संपत्ति और आय की पूर्ण पारदर्शिता तथा प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
🔸 मंदिरों के धन का उपयोग किसी भी ऐसे कार्य में न हो जिसका मंदिरों और हिन्दू समाज के हित से प्रत्यक्ष संबंध न हो।

**राष्ट्रीय सनातन पार्टी की मांग है कि पूरे भारत में "मंदिर निधि संरक्षण नीति" लागू की जाए, जिससे प्रत्येक रुपये का उपयोग सनातन धर्म, मंदिरों और हिन्दू समाज के उत्थान के लिए ही सुनिश्चित हो।**

**मंदिर बचेंगे — तो संस्कृति बचेगी। संस्कृति बचेगी — तो राष्ट्र सशक्त बनेगा।**

**राष्ट्रीय सनातन पार्टी**
**राष्ट्रहित सर्वोपरि**

https://www.rashtriyasanatanparty.org



#सनातन_अधिकार_आंदोलन

॥ धर्म शिक्षा ही धर्म रक्षा का प्रथम आधार है ॥आज भारत में सनातन धर्म और हिन्दू राष्ट्र की चर्चा सर्वत्र सुनाई देती है। प...
23/06/2026

॥ धर्म शिक्षा ही धर्म रक्षा का प्रथम आधार है ॥

आज भारत में सनातन धर्म और हिन्दू राष्ट्र की चर्चा सर्वत्र सुनाई देती है। परन्तु जब प्रश्न किया जाता है कि सनातन धर्म क्या है? या हिन्दू राष्ट्र का स्वरूप कैसा होगा?, तो अधिकांश लोग स्पष्ट और शास्त्रसम्मत उत्तर नहीं दे पाते। इसका सबसे बड़ा कारण है—धर्म शिक्षा का अभाव।

धर्म की रक्षा केवल भावनाओं, नारों या उत्साह से नहीं होती; उसके लिए ज्ञान, विवेक, चरित्र और शास्त्रबोध आवश्यक है।

इसी उद्देश्य से हमने समस्त सनातनी हिन्दुओं तथा विशेष रूप से राष्ट्रीय सनातन पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए "धर्म शिक्षा : सफल, सुरक्षित एवं समृद्ध जीवन का मार्ग" शीर्षक से यह पुस्तक लिखी है। यह पुस्तक सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों, कर्तव्यों, जीवन मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में धर्म की भूमिका को सरल एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।

पुस्तक डाउनलोड करने के लिए राष्ट्रीय सनातन पार्टी के फेसबुक समूह पर जाएँ: https://www.facebook.com/share/p/1EM6DSUdLB/

धर्म को जानिए।
धर्म को समझिए।
धर्म का आचरण कीजिए।
तभी धर्म की रक्षा कीजिए।

"धर्म शिक्षा लो, ताकि धर्म की रक्षा कर सको।"

जय सनातन धर्म!
हर हर महादेव!

— विश्वजीत सिंह अनंत (आर्यवीर सिंह अनंत)
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय सनातन पार्टी

21/06/2026
20/06/2026

इस पावन पृथ्वी पर संस्कृति का प्रथम सूर्योदय कहाँ हुआ था?

विश्व में ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, सभ्यता और संस्कारों का अमृतमय प्रकाश सर्वप्रथम कहाँ से प्रस्फुटित हुआ था?

मानवता को धर्म, कर्तव्य, सत्य, करुणा और आत्मोन्नति का दिव्य संदेश किस भूमि ने दिया था?

वह पुण्यभूमि, जहाँ गंगा, सरस्वती, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, यमुना, गंडकी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और महानदी की पावन धाराएँ अनादिकाल से प्रवाहित हो रही हैं;

जहाँ दक्षिण में हिन्द महासागर अपनी विराट गर्जना से राष्ट्र की महिमा का गान करता है;

जहाँ उत्तर में देवात्मा हिमालय अपनी गौरवमयी श्वेत शृंखलाओं के साथ सनातन संस्कृति का प्रहरी बनकर खड़ा है;

वह दिव्य, भव्य, पुण्य और गौरवशाली भूमि हमारी मातृभूमि भारत है।

यही वह धरती है जहाँ ऋषियों ने वेदों का दिव्य ज्ञान मानवता को प्रदान किया, जहाँ धर्म ने जीवन को दिशा दी, जहाँ संस्कृति ने मानव को मानवता का पाठ पढ़ाया, और जहाँ से “वसुधैव कुटुम्बकम्” का अमर संदेश सम्पूर्ण विश्व में प्रसारित हुआ।

आज आवश्यकता है कि इस महान सनातन संस्कृति के पवित्र स्वर को पुनः जन-जन तक पहुँचाया जाए। धर्म-शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के चरित्र, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया जाए।

आइए, हम सब मिलकर धर्म-शिक्षा के दीप प्रज्वलित करें और सनातन संस्कृति के उस दिव्य महाघोष को पुनः गुंजायमान करें, जो मानवता को सत्य, शान्ति, समृद्धि और कल्याण का मार्ग दिखाता है।
क्रमश: जारी......

धर्म शिक्षा : सफल, सुरक्षित एवं समृद्ध जीवन का मार्ग
लेखक : श्री विश्वजीत सिंह अनंत (आर्यवीर सिंह अनंत)
प्रकाशक : सनातन धर्म न्यास

19/06/2026

उत्तर प्रदेश में कानून का राज या अपराधियों का आतंक?

आगरा के जैतपुर क्षेत्र में श्रीमद्भागवत कथा के मुख्य आयोजक प्रदीप मिश्रा की मंदिर परिसर में गोली मारकर हत्या की घटना अत्यंत दुखद, चिंताजनक और कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। जिस समय वे पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में दीपक रखने गए थे, उसी समय घात लगाए हमलावर ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। उपचार के लिए ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई।

यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह प्रश्न भी है कि यदि धार्मिक आयोजन के बीच, मंदिर परिसर में भी कोई व्यक्ति सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा की अपेक्षा किससे करे?

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार स्वयं को कानून-व्यवस्था के मामले में देश की सबसे सशक्त सरकारों में से एक बताती रही है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं सरकार के दावों की वास्तविकता पर प्रश्न खड़े करती हैं। यदि अपराधी खुलेआम धार्मिक आयोजनों तक में हत्या करने का साहस कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि अपराध का भय पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

सरकार का दायित्व केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकना भी है। प्रत्येक हत्या के बाद जांच, गिरफ्तारी और मुठभेड़ की घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। जनता यह जानना चाहती है कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं और अपराधियों में कानून का भय क्यों कम दिखाई देता है।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का मानना है कि प्रत्येक नागरिक को जीवन, आस्था और पूजा का सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या कोई भी धार्मिक स्थल अपराध का केंद्र नहीं बनना चाहिए। सरकार को निष्पक्ष और प्रभावी कानून-व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए ताकि कोई भी अपराधी यह न समझे कि वह खुलेआम हत्या करके बच सकता है।

हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि इस हत्या की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराकर सभी दोषियों को शीघ्र कठोर दंड दिलाया जाए। साथ ही राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कानून का राज केवल भाषणों से नहीं, बल्कि नागरिकों की वास्तविक सुरक्षा से सिद्ध होता है।


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