Sanatan Sanskriti Sangh सनातन संस्कृति संघ

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Sanatan Sanskriti Sangh सनातन संस्कृति संघ शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, नारी जागरण, पर्यावरण, व्यसन एवं कुरीति उन्मूलन के लिए कार्यरत।

सनातन संस्कृति संघ (ट्रस्ट) परिचय
शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, नारी जागरण, पर्यावरण, व्यसन एवं कुरीति उन्मूलन के लिए कार्यरत धर्मार्थ ट्रस्ट

सनातन संस्कृति संघ एक गैर सरकारी, सामाजिक, स्वयंसेवी ट्रस्ट हैं। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, नारी जागरण, पर्यावरण, व्यसन एवं कुरीति उन्मूलन के कार्य करना है।


संसार के जन कल्याणार्थ मानवीय, नैतिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों को निजी, व्यवसायिक तथा सार्वजनिक जीवन में बढ़ावा देना। गौशालाओं एवं गुरूकुलों की स्थापना व संचालन करना। यह संस्था जिन क्षेत्रों में शिक्षायें एवं प्रशिक्षण दे रही है, वे हैं-


राष्ट्र जागरण, स्वदेशी स्वाभिमान, मूल्यनिष्ठ शिक्षा, चरित्र निर्माण, योग प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन, विश्व बंधुत्व, सम्पूर्ण स्वास्थ्य, गौवंश एवं ग्राम आधारित अर्थतंत्र की व्यवस्था, पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागृति, व्यक्तित्व विकास, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक पुनर्निर्माण, नशीले पदार्थो से मुक्ति, अंधविश्वास एवं कुप्रथा निवारण, सकारात्मक चिंतन, वैज्ञानिक- आध्यात्मिक अनुभूति तथा जीने की कला।


सनातन संस्कृति संघ को दिये गये दान पर आयकर की धारा 80G के अंतर्गत टैक्स में छूट प्राप्त की जा सकती हैं।


सनातन संस्कृति संघ (ट्रस्ट) को अंशदान देने के इच्छुक दानदाता पंजाब नेशनल बैंक की स्थानीय सी0बी0एस0 शाखा में पहुंचकर


खाता संख्या A/C no :- 4579002100002930
IFSC - PUNB 0457900

Branch Code 457900 में अपना अंशदान जमा कर सकते है।


खाते में धन जमा करवाते समय खाते का नाम एवं शाखा का स्थान (सनातन संस्कृति संघ, पंजाब नैशनल बैंक, करावल नगर, दिल्ली) अवश्य जाँच कर ले।


अधिक जानकारी हेतु हमसे 09149105534 पर सम्पर्क कर सकते है।


वन्दे मातरम्

भारत माता की जय

25/09/2026

हमने 2 वर्ष पहले एक हिन्दू पापी कथावाचक के मुंह से अमीर खुसरो की रचना “छाप तिलक सब छीनी रे” सुनी थी, वहीं रचना कल एक हिन्दू बालक से मुंह से सुनने को मिली, तो आंतरिक कष्ट हुआ और साथ ही चिंता भी हुई कि सूफी-जिहाद कितनी तेजी से हिन्दुओ में फैल रहा हैं।

अमीर खुसरो की रचना के प्रति उत्तर में हमने आज "कुरआन कलमा सब छूटा" शीर्षक से एक श्रीकृष्ण भजन लिखा है, जोकि आपके सामने प्रस्तुत है, गीत पर अपने विचार दें, शीघ्र ही हम औरंगजेब की बेटी जेबुन्निसा बेगम तथा भतीजी ताज बेगम पर भी भजन जारी करेंगे, वे दोनों इस्लाम को त्यागकर श्रीकृष्ण भक्त बन गई थी।
जय श्रीकृष्ण, जय सनातन

कुरआन कलमा सब छूटा, जबसे तेरा दर्शन पाया…
श्याम तेरी मुरली सुनकर, मन ने तुझको अपना पाया। 🦚🙏

यह भावपूर्ण श्रीकृष्ण भक्ति गीत भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति की अनुभूति को व्यक्त करता है। श्याम की मनमोहक मुरली, मोर मुकुट, पीताम्बर और रुक्मिणी-कृष्ण के दिव्य प्रेम का स्मरण मन को भक्ति से भर देता है।

इस भजन में भक्त अपने आराध्य श्रीकृष्ण की शरण में आकर सांसारिक मोह से ऊपर उठने और उनके नाम-स्मरण में सच्चा सुख पाने की भावना व्यक्त करता है।

🦚 भजन की प्रमुख भावनाएँ:
• श्रीकृष्ण भक्ति
• श्याम की मुरली
• रुक्मिणी-कृष्ण प्रेम
• कृष्ण नाम-स्मरण
• भगवान श्रीकृष्ण की शरणागति
• सनातन भक्ति और आध्यात्मिक प्रेम

🙏 यदि आपको यह कृष्ण भजन पसंद आए तो वीडियो को Like करें, अपने प्रियजनों के साथ Share करें और ऐसे ही भक्ति गीतों के लिए चैनल को Subscribe करें।

https://youtu.be/Jxn7HE6TIaw?si=FMV0bCJ4LAZsloPF

जय श्रीकृष्ण 🙏🦚
राधे राधे 🌸

#कृष्णभजन #श्यामभजन #श्रीकृष्ण #कृष्णभक्ति #रुक्मिणीकृष्ण

जाति-आधारित भेदभाव "संविधान पर एक कलंक" है।भारत की सनातन संस्कृति में जन्म-आधारित भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है और एक मज...
23/09/2026

जाति-आधारित भेदभाव "संविधान पर एक कलंक" है।

भारत की सनातन संस्कृति में जन्म-आधारित भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है और एक मज़बूत व एकजुट समाज बनाने के लिए संवैधानिक जातिगत भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए, और इसकी शुरुआत होगी जाति प्रमाणपत्र की समाप्ति से।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी के साथ जुड़कर भारत संविधान के माथे से जातिवाद का कलंक हटाएं।

विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय सनातन पार्टी
https://www.rashtriyasanatanparty.org

23/09/2026

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का परिवार निरंतर बढ रहा है, हम भारत के राजनैतिक दृष्टिकोण को अवश्य बदलेगें।
जय रासपा
जय शिवशक्ति🙏
https://www.rashtriyasanatanparty.org

सोलह संस्कार — प्रत्येक मनुष्य का सांस्कृतिक अधिकारसनातन धर्म के सोलह संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य क...
14/09/2026

सोलह संस्कार — प्रत्येक मनुष्य का सांस्कृतिक अधिकार

सनातन धर्म के सोलह संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को संस्कारित, अनुशासित और श्रेष्ठ बनाने वाली भारतीय जीवन-पद्धति की अमूल्य परंपरा हैं। जन्म से लेकर जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ावों तक ये संस्कार व्यक्ति को परिवार, समाज, संस्कृति और राष्ट्र से जोड़ने का कार्य करते हैं।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का स्पष्ट मत है कि सोलह संस्कारों का पालन करने की स्वतंत्रता प्रत्येक सनातनी स्त्री और पुरुष का सांस्कृतिक एवं धार्मिक अधिकार है। किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के अनुसार इन संस्कारों को अपनाने, संपन्न करने या अपनी संतानों को संस्कारित करने से रोकना भारतीय सभ्यता और धार्मिक स्वतंत्रता की भावना के विरुद्ध है।

जो लोग किसी मनुष्य को उसकी आस्था और परंपरा के अनुसार सोलह संस्कारों से वंचित करने का प्रयास करते हैं, वे केवल एक धार्मिक परंपरा में बाधा नहीं डालते, बल्कि व्यक्ति की आस्था, संस्कृति और स्वतंत्रता के अधिकार पर आघात करते हैं। ऐसे कृत्यों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी की सरकार बनने पर सोलह संस्कारों की सनातन परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित किया जाएगा। समाज में संस्कार आधारित जीवन-पद्धति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आवश्यक सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही, किसी भी स्त्री या पुरुष को उसकी इच्छा के विरुद्ध सोलह संस्कारों का पालन करने से रोकने, धमकाने, हिंसा करने या सामाजिक अराजकता फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

हमारा संकल्प है—
सनातन परंपरा की रक्षा, संस्कारों का सम्मान और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संस्कृति के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता।

सोलह संस्कार — संस्कारित जीवन, सशक्त समाज और गौरवशाली राष्ट्र की आधारशिला।

https://www.rashtriyasanatanparty.org



मेरठ में राष्ट्रीय सनातन पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन ने तेज की सक्रियता, कृष...
10/09/2026

मेरठ में राष्ट्रीय सनातन पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन ने तेज की सक्रियता, कृष्ण कुमार सूद को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी

मेरठ। राष्ट्रीय सनातन पार्टी द्वारा ग्राम अमानुल्लापुर, जिला मेरठ में आयोजित महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्यक्रम में आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में पार्टी के संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्वजीत सिंह अनंत ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कृष्ण कुमार सूद को उत्तर प्रदेश प्रदेश प्रभारी नियुक्त करने की घोषणा की। उन्हें प्रदेश में संगठन को और अधिक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने तथा आगामी चुनाव की तैयारियों को गति देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्वजीत सिंह अनंत ने कहा कि उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय सनातन पार्टी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रदेश है। पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को केवल चुनावी दृष्टि से नहीं, बल्कि संगठन विस्तार, जनजागरण और राष्ट्रहित की वैचारिक राजनीति को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक पार्टी की नीतियों और विचारों को पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरण सिंह गुरूजी, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राहुल चौधरी, उत्तर प्रदेश महासचिव नितिन यादव, राष्ट्रीय संगठन मंत्री ठाकुर धर्म सिंह सनातनी, अर्जक पुजारी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष प्रमोद कुमार, राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार मंत्री श्वेता खन्ना, उत्तर प्रदेश संगठन मंत्री भारत सिंह, दिल्ली प्रदेश महासचिव विकास भारतीय, दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक शर्मा, मेरठ जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार एडवोकेट, अलीगढ़ जिला अध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह, हापुड़ जिला अध्यक्ष डॉ. राजपाल सिंह, मुकेश सिंघानिया, रवि कुमार प्रजापति सहित पार्टी के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इसके अलावा मांगेराम प्रधान जी, संजय सेठ जी, सुनील सूद, सूरज सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं पार्टी कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उपस्थिति रही।

कृष्ण कुमार सूद की नियुक्ति के साथ ही पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को और अधिक व्यवस्थित एवं सक्रिय रूप देने का संकेत दिया है। पार्टी नेतृत्व ने संगठन के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर जमीनी स्तर पर सक्रिय होने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का संकल्प — राष्ट्रहित सर्वोपरि।

🔥 इतिहास, विचार और राजनीतिक जवाबदेही पर सवालक्या भारत के राजनीतिक इतिहास के कुछ अध्याय आज भी अधूरे हैं?25 दिसंबर 1927 को...
09/09/2026

🔥 इतिहास, विचार और राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल

क्या भारत के राजनीतिक इतिहास के कुछ अध्याय आज भी अधूरे हैं?

25 दिसंबर 1927 को महाराष्ट्र के महाड़ में सनातन धर्म को जानबूझकर अपमानित करने के लिए की गई मनुस्मृति दहन की घटना भारतीय सामाजिक इतिहास की एक कलंकित घटना थी। गंगाधर नीलकंठ सहस्रबुद्धे द्वारा मनुस्मृति जलाए जाने का उल्लेख ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है।

लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठता है—सहस्रबुद्धे का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से औपचारिक या सक्रिय संबंध कितना प्रमाणित है? इस प्रश्न का उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रमाणों से खोजा जाना चाहिए।

इसी प्रकार नाथूराम जी गोडसे के संघ से संबंध को लेकर भी इतिहास में लंबे समय से बहस होती रही है। इसलिए किसी भी व्यक्ति के संगठनात्मक संबंध को प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर ही स्वीकार या अस्वीकार किया जाना चाहिए।

आज सवाल केवल मनुस्मृति दहन का नहीं है।

सवाल यह भी है कि स्वतंत्र भारत की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था में—

🔸 अल्पसंख्यक विशेषाधिकारों की नीतियाँ
🔸 धर्म एवं सामाजिक पहचान से जुड़े विवाद
🔸 SC/ST Act के कठोर प्रावधान
🔸 UGC तथा उच्च शिक्षा से जुड़े नियामकीय प्रावधान
🔸 और ऐसे अन्य विवादित कानून एवं नीतियाँ

इनके निर्माण, समर्थन अथवा विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार (संघ+जनसंघ+भाजपा) की वास्तविक भूमिका क्या रही?

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का प्रश्न है—

राजनीति में जवाबदेही होनी चाहिए या नहीं?

यदि किसी संगठन ने किसी नीति, कानून या आंदोलन का समर्थन किया है तो उसके प्रमाण सार्वजनिक होने चाहिए।
यदि नहीं किया है, तो उस पर लगाए गए आरोप भी प्रमाण सहित खारिज किए जाने चाहिए।

इतिहास को छिपाने से नहीं,
इतिहास को प्रमाणों के साथ सामने रखने से राष्ट्र मजबूत होता है।

सत्य की खोज करें।
तथ्यों को परखें।
प्रश्न पूछें।
और किसी भी संगठन या विचारधारा को अंधभक्ति से नहीं, उसके वास्तविक इतिहास और कार्यों से परखें।

विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय सनातन पार्टी

https://www.rashtriyasanatanparty.org


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राष्ट्रीय सनातन पार्टी देश की जनता से एक सीधा सवाल पूछना चाहती है—यदि किसी धार्मिक ग्रंथ में स्त्रियों या किसी वर्ग के प...
01/09/2026

राष्ट्रीय सनातन पार्टी देश की जनता से एक सीधा सवाल पूछना चाहती है—

यदि किसी धार्मिक ग्रंथ में स्त्रियों या किसी वर्ग के प्रति भेदभावपूर्ण माने जाने वाले विचारों के विरोध में प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, तो विरोध के मानदंड सभी धर्मों और सभी ग्रंथों के लिए समान क्यों नहीं होने चाहिए?

यदि मनुस्मृति का दहन उसके कथित भेदभावपूर्ण विचारों के विरोध के प्रतीक के रूप में किया जाता है, तो फिर कुरआन, त्रिपिटक, बीजक, बाइबल आदि में मौजूद ऐसे अंशों या व्याख्याओं पर भी समान कसौटी से चर्चा और विरोध क्यों नहीं?

विरोध हो तो समान हो, सवाल हो तो सभी से हो और कसौटी भी सबके लिए एक हो।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का प्रश्न किसी धर्म का अपमान करना नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और विरोध के दोहरे मापदंडों पर सार्वजनिक बहस की मांग करना है।

क्या लोकतंत्र में विरोध के भी अलग-अलग पैमाने होने चाहिए?

योगी आदित्यनाथ के भीमराज में अंबेडकर प्रतिमा के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है।योगी का चेहरा मीडिया में चमकाने के लिए भरपूर ...
16/08/2026

योगी आदित्यनाथ के भीमराज में अंबेडकर प्रतिमा के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है।

योगी का चेहरा मीडिया में चमकाने के लिए भरपूर फंड है।

लेकिन बच्चों के स्कूलों व भोजन के लिए फंड की कमी है।

बंद होते प्राथमिक स्कूल और बच्चों के खाने के लिए निर्धारित प्रति छात्र 6 रुपए 78 पैसे का बजट योगी के भीमराज की पोल‌ खोलने के लिए पर्याप्त है।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी जानना चाहती है कि आखिर योगी आदित्यनाथ सरकार के पास ऐसा कौन सा जादुई फार्मूला है, जिससे 6-7 रूपए में बच्चों को पौष्टिक आहार मिल रहा हैं!

बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी, उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय सनातन पार्टी की सरकार बनने पर स्कूली शिक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा तथा खाने का बजट प्रति छात्र 25 रूपए किया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधरे तथा बच्चों को पौष्टिक आहार मिल सकें।

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*15 अगस्त – अपूर्ण स्वतंत्रता का सच और हिन्दू स्वाभिमान का संकल्प*- विश्वजीत सिंह अनंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सनातन...
15/08/2026

*15 अगस्त – अपूर्ण स्वतंत्रता का सच और हिन्दू स्वाभिमान का संकल्प*
- विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय सनातन पार्टी

पंद्रह अगस्त का दिन हमें केवल स्वतंत्रता का उल्लास नहीं, बल्कि अधूरी मुक्ति का स्मरण कराता है। 1947 में अंग्रेज़ भारत छोड़कर नहीं गए थे—बल्कि उन्होंने सत्ता का हस्तांतरण (Transfer of Power) किया था। यह कोई युद्ध में जीती हुई पूर्ण स्वतंत्रता नहीं थी, बल्कि Indian Independence Act, 1947 के तहत एक संधि थी, जिसे ब्रिटिश संसद ने पारित किया और जिसमें स्पष्ट रूप से भारत व पाकिस्तान को “डोमिनियन स्टेट्स” घोषित किया गया।

अर्थात भारत पूर्ण संप्रभु राष्ट्र नहीं, बल्कि ब्रिटिश क्राउन के अधीनस्थ एक राज्य था, जो कॉमनवेल्थ के ढांचे में बंधा हुआ था। यही कारण है कि ब्रिटेन की महारानी आज भी भारत की “मानद नागरिक” जैसी विशेष स्थिति रखती हैं, और बिना वीज़ा के भारत आ सकती हैं, जबकि भारत के प्रधानमंत्री तक ब्रिटेन जाने के लिए वीज़ा लेते हैं।

गुलामी के चिह्न आज भी जीवित हैं

राजा साहब बच्चूसिंह जिन्हें अंग्रेज़ अपनी सत्ता के लिए ख़तरनाक मानते थे, आज़ादी के बाद भी 80 वर्षों बाद भी संसद में उनकी प्रतिमा नहीं लग सकी, भारत रत्न दिया जाना तो बहुत दूर की बात हैं।

भारत का नाम “इंडिया” अंग्रेज़ी उपनिवेशवाद की ईस्ट इंडिया कंपनी की स्मृति को ढोता है। स्वतंत्रता के बाद इसे बदलने का अवसर था, लेकिन सत्ता हस्तांतरण संधि का दबाव हावी रहा।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसे महान योद्धा की वापसी अंग्रेज़ों की शर्तों से रोक दी गई। आज़ाद हिंद फौज को भुला दिया गया।

अखंड भारत का विखंडन और हिन्दू जनसंख्या का संकट

इतिहास प्रमाण है—अखंड भारत की भूमि बौद्ध और इस्लामी आक्रमणों के कारण पहले ही खंडित हो चुकी थी।

बौद्ध लोगों ने म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका, तिब्बत आदि के रूप में भारत को खंडित कर अपने हिस्से अलग कर लिए।

इस्लामी आक्रमणकारियों ने अफगानिस्तान, कज़ाकिस्तान, ईरान तक कब्ज़ा कर लिया।

१९४७ में शेष भारत से पाकिस्तान और बांग्लादेश अलग हुए।

यदि बौद्ध और मुस्लिम देशों की कुल जनसंख्या व क्षेत्रफल को जोड़ दें, तो वर्तमान भारत भौगोलिक व जनसंख्या की दृष्टि से बहुत छोटा रह गया है। और वास्तविकता यह है कि हिन्दू, बौद्ध+मुस्लिम जनसंख्या के सामने आज अल्पसंख्यक हो चुके हैं।

अल्पसंख्यक विशेषाधिकार – संविधान की विकृति

संवैधानिक धाराएं:

अनुच्छेद 29(1) – किसी भी समुदाय को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को संरक्षित रखने का अधिकार।

अनुच्छेद 30(1) – अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का विशेष अधिकार।

अनुच्छेद 30(2) – राज्य किसी भी अल्पसंख्यक-प्रबंधित शैक्षणिक संस्था को सरकारी अनुदान देने में भेदभाव नहीं करेगा।

वास्तविक स्थिति:

इन अधिकारों का लाभ बौद्ध, मुस्लिम और ईसाई समुदाय को मिला।

हिन्दू समाज के मंदिर, शिक्षा संस्थान और दान-पुण्य पर सरकारी नियंत्रण।

सरकारी अनुदान और छूट से वंचित रहना।

समान नागरिक होने के बावजूद धर्म के आधार पर भेदभाव।

राष्ट्रीय सनातन पार्टी का स्पष्ट संकल्प

1. धर्म आधारित अल्पसंख्यक विशेषाधिकार समाप्त – सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार, समान कानून।

2. सनातन धर्म को संवैधानिक संरक्षण – हिन्दू धर्म के अस्तित्व, मंदिरों, परंपराओं और धार्मिक संपत्ति की सुरक्षा हेतु स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान।

3. भारत का वास्तविक स्वराज्य – कॉमनवेल्थ से अलग होकर भारत को पूर्ण संप्रभु राष्ट्र बनाना।

4. भारत नाम की पुनर्स्थापना – उपनिवेशवादी “इंडिया” नाम को हटाकर, “भारत” को ही आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय नाम बनाना।

5. हिन्दू जनसंख्या व संस्कृति की सुरक्षा – जनसंख्या संतुलन नीति, धर्मांतरण विरोधी कानून, और मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त करना।

ऐतिहासिक प्रमाण सूची

1. Indian Independence Act, 1947 – ब्रिटिश संसद का रिकॉर्ड (UK Parliament Archives)।

2. Constitution of India – Articles 29 & 30 – भारत का संविधान, मूल पाठ।

3. Commonwealth Charter – UK Government official website।

4. Transfer of Power Agreements, 1947 – National Archives of India।

5. Netaji Subhas Chandra Bose files – National Archives, India (Declassified Documents)।

6. Constituent Assembly Debates – वंदे मातरम् और राष्ट्रगीत पर बहस (Vol. XII, 1949)।

हमारा आह्वान

15 अगस्त हमें केवल सावतंत्रता का उत्सव मनाने के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण स्वराज्य और हिन्दू स्वाभिमान की पुनर्स्थापना के लिए संकल्प लेने का दिन बनना चाहिए।
राष्ट्रीय सनातन पार्टी इस अधूरी सावतंत्रता को पूर्ण करने का व्रत लेकर आगे बढ़ रही है—
राष्ट्रहित सर्वोपरि, सनातन धर्म सर्वोपरि।

राजा साहब बच्चूसिंह अमर रहें।

*राष्ट्रीय सनातन पार्टी हिन्दुओ के लिए सर्वोत्तम राजनीतिक विकल्प है। सनातन धर्म को संवैधानिक संरक्षण देकर बहुसंख्यक समाज के धन, धर्म और जीवन की रक्षा करना राष्ट्रीय सनातन पार्टी का मूल ध्येय है। पार्टी से जुडे और राष्ट्रहित की राजनीति करें।*

राष्ट्रीय सनातन पार्टी में अधिक जानने तथा सदस्य बनने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाए

https://www.rashtriyasanatanparty.org

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#राष्ट्रीय_सनातन_पार्टी


पुस्तक : कांवर साधना और शिवशक्तिअध्याय 1 —महादेव : करुणा और कृपा के सागरलेखक श्री विश्वजीत सिंह अनंतसनातन धर्म में भगवान...
11/08/2026

पुस्तक : कांवर साधना और शिवशक्ति
अध्याय 1 —महादेव : करुणा और कृपा के सागर
लेखक श्री विश्वजीत सिंह अनंत

सनातन धर्म में भगवान शिव केवल देवताओं के देव नहीं, भक्त के अत्यंत निकट रहने वाले आराध्य हैं। वे महादेव हैं और इसी कारण भोलेनाथ भी हैं।

उनके स्वरूप में एक अद्भुत सरलता है—जटाओं में गंगा, मस्तक पर चंद्रमा, गले में सर्प और शरीर पर भस्म। न राजसी वैभव, न प्रदर्शन। फिर भी वे महादेव हैं।

शायद यही शिव का पहला संदेश है—
ईश्वर के निकट जाने के लिए बाहरी वैभव से अधिक निर्मल हृदय चाहिए।

शिव को “शिव” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे कल्याण के प्रतीक हैं। उनकी उपासना का अर्थ केवल शिवलिंग पर जल चढ़ाना नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी कल्याणकारी भाव जगाना है।

हमारी वाणी किसी को अनावश्यक दुःख न दे। हमारे कर्म से किसी का अहित न हो। जहाँ संभव हो, हम किसी के काम आएँ। और जहाँ सहायता न कर सकें, वहाँ कम-से-कम किसी के दुःख का कारण न बनें।

यहीं से शिवभक्ति पूजा से आगे बढ़कर जीवन-साधना बनती है।

भगवान शिव का नीलकंठ स्वरूप हमें जीवन की एक बड़ी शिक्षा देता है।

जीवन में विष आएगा—कभी अपमान के रूप में, कभी क्रोध के रूप में, कभी ईर्ष्या और कटुता के रूप में। हर परिस्थिति हमारे अनुकूल नहीं होगी।

लेकिन किसी दूसरे के विष को अपने भीतर स्थायी विष बना लेना हमारे हाथ में नहीं होना चाहिए।

शिव का स्मरण हमें संयम की ओर ले जा सकता है—
कटुता मिले, तो कटुता लौटाना आवश्यक नहीं।
अपमान मिले, तो अहंकार में जलना आवश्यक नहीं।

क्रोध आए, तो उसके अनुसार कर्म करना आवश्यक नहीं।
अपने भीतर उठने वाली प्रत्येक प्रतिक्रिया पर थोड़ा ठहर जाना भी साधना है।

महादेव की जटाओं में गंगा का विराजना भी हमें धारण करने की शक्ति का स्मरण कराता है।

कांवर में गंगा अथवा नर्मदा आदि पवित्र नदियों का जल लेकर चलने वाला भक्त यदि इस भाव को अपने साथ रखे, तो उसकी यात्रा और अर्थपूर्ण हो सकती है।

वह स्वयं से पूछ सकता है—
“जिस जल को मैं पवित्र मानकर महादेव को अर्पित करने जा रहा हूँ, क्या मैं अपने मन को भी पवित्र बनाने का प्रयास कर रहा हूँ?”

यही प्रश्न कांवर को केवल यात्रा नहीं रहने देता; उसे साधना की ओर ले जाता है।

महादेव के सामने
शिव के सामने भक्त को अपने आपको बड़ा सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं।

वह अपनी कमजोरी स्वीकार कर सकता है।
अपनी भूल स्वीकार कर सकता है।
अपना दुःख कह सकता है।

और यह प्रार्थना कर सकता है—
“महादेव! मुझे अपने भीतर सुधार करने की शक्ति दीजिए।”
शायद यही सबसे सच्ची प्रार्थनाओं में से एक है।

कांवर यात्रा में भी यही भाव सबसे महत्वपूर्ण है। कांवर कितनी बड़ी है, जल कितना है, यात्रा कितनी कठिन है—इनसे अधिक महत्वपूर्ण है कि उस यात्रा में मन कितना शिवमय है।
किसी की कांवर छोटी है तो उसकी श्रद्धा छोटी नहीं।
किसी की कांवर बड़ी है तो उसकी भक्ति स्वतः बड़ी नहीं हो जाती।

भक्ति का वास्तविक भार कंधे पर नहीं, हृदय में होता है।

आज शिव के सामने केवल एक बात कहिए—
“महादेव, मेरी पूजा मेरे व्यवहार में दिखाई दे और मेरा शिवनाम मेरे जीवन में।”

फिर पूरे दिन किसी एक शिवगुण को जीने का प्रयास कीजिए—शांति, करुणा, संयम या विनम्रता।

यही छोटी-सी शुरुआत आगे चलकर बड़ी साधना बन सकती है।
क्योंकि शिव को जल अर्पित करना भक्ति है—
और शिव के गुणों को जीवन में उतारना, भक्ति को जीना है।
हर हर महादेव!

#कांवर_साधना_और_शिवशक्ति

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