23/06/2026
**मंदिरों का धन, केवल मंदिरों के लिए!**
तमिलनाडु की विजय थलपति सरकार द्वारा मंदिर निधि से बनने वाले ₹245.85 करोड़ के 46 प्रोजेक्ट निरस्त कर मंदिरों के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर धन खर्च करने का निर्णय एक महत्वपूर्ण नीति-चर्चा का विषय बन गया है। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि मंदिरों के संसाधनों का उपयोग मंदिरों और भक्तों के हित में प्राथमिकता से किया जाएगा।
राष्ट्रीय सनातन पार्टी का स्पष्ट मत है कि **मंदिरों की आय पर पहला और सर्वोच्च अधिकार मंदिरों, उनकी धार्मिक परंपराओं और हिन्दू समाज का है।**
जब तमिलनाडु का ईसाई मुख्यमंत्री हिन्दू हित में मंदिरों की लूट बंद करने का साहस कर सकता है, तो यदि स्वयं को हिन्दू हितैषी कहने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भाजपा सरकारें वास्तव में सनातन धर्म के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें पूरे देश में यह नीति लागू करनी चाहिए कि—
🔸 मंदिरों का धन केवल मंदिरों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास में लगे।
🔸 वेद पाठशालाओं, संस्कृत शिक्षा, गोशालाओं और धर्म शिक्षा को मंदिर निधि से सशक्त बनाया जाए।
🔸 निर्धन हिन्दू परिवारों, संत-महात्माओं तथा धार्मिक संस्थानों के कल्याण में मंदिर संसाधनों का उपयोग हो।
🔸 मंदिरों की भूमि, संपत्ति और आय की पूर्ण पारदर्शिता तथा प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
🔸 मंदिरों के धन का उपयोग किसी भी ऐसे कार्य में न हो जिसका मंदिरों और हिन्दू समाज के हित से प्रत्यक्ष संबंध न हो।
**राष्ट्रीय सनातन पार्टी की मांग है कि पूरे भारत में "मंदिर निधि संरक्षण नीति" लागू की जाए, जिससे प्रत्येक रुपये का उपयोग सनातन धर्म, मंदिरों और हिन्दू समाज के उत्थान के लिए ही सुनिश्चित हो।**
**मंदिर बचेंगे — तो संस्कृति बचेगी। संस्कृति बचेगी — तो राष्ट्र सशक्त बनेगा।**
**राष्ट्रीय सनातन पार्टी**
**राष्ट्रहित सर्वोपरि**
https://www.rashtriyasanatanparty.org
#सनातन_अधिकार_आंदोलन