24/12/2025
शुभचिंतक स्थापना दिवस,
कल 25 दिसंबर 2025 का सूर्योदय हमारे लिए केवल एक नई सुबह नहीं, बल्कि सेवा के एक महान दशक की पूर्णता का प्रतीक है।
वो पहली मीटिंग: आज से ठीक 10 साल पहले, इंडिया गेट की उसी ठंडी शाम में मनीष शर्मा के आह्वान पर हम सब एकत्र हुए थे। अमित चौधरी भैया के सादगीपूर्ण मार्गदर्शन में विपिन गुप्ता, शाज़िया मदार, पूजा यादव और हमने मिलकर जिस 'शुभचिंतक' नाम का बीज बोया था, आज उसका लोगो समाज में भरोसे का प्रतीक बन चुका है।
हमारी यात्रा के 10 प्रमुख स्तंभ:
🍱 'खोजो-खिलाओ' : एम्स और सफदरजंग जैसे अस्पतालों में मानव सेवा में मरीजों-परिजनों की भूख मिटाते हुए हमने 147 सफल सेवा पड़ाव पूरे किए।
💻 विद्या-दान कुटिया: 3 राज्यों में संचालित हमारी कुटियाएँ गरीब किसानों और मज़दूरों के बच्चों के भविष्य को संवार रही हैं। अगले वर्ष से हम इन्हें High-Tech बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
🌾 बुजुर्गों का संबल: हर महीने की 6 तारीख को बेसहारा बुजुर्गों को कच्चा राशन पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है।
🧥 वस्त्रवचन: कड़ाके की ठंड में हज़ारों ज़रूरतमंदों तक कम्बल आदि गर्म वस्त्र पहुँचाने का हमारा निरंतर प्रयास।
🌱 ग्रीन चिंतक: आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा और हरियाली देने का हमारा वादा।
🚫 अन्न-पूर्णा का सम्मान: पार्टियों और समारोहों में बच जाने वाले भोजन को बर्बाद होने से बचाकर ज़रूरतमंदों तक पहुँचाना।
🛡️ आपदा में सारथी: कोरोना काल जैसी आपदाओं में राशन, मास्क और सैनिटाइजर के ज़रिए समाज की रक्षा।
🎒 शिक्षा का अधिकार: 100 से अधिक झुग्गियों के बच्चों को मुख्यधारा के स्कूलों से जोड़ना।
आज हमारे पास हज़ारों शुभचिंतकों का परिवार है।
"बिना मैदान में उतरे, धूल की खुशबू नहीं मिलती।
सिर्फ दूर से राह देखने से, कभी मंज़िल नहीं मिलती।"
शुभचिंतक संस्था (पंजीकृत) पंजी. संख्या - S/RS/SW/1505/2016
"हम चाहें, 'शुभ-समाज'"