17/08/2024
"भारत का वर्तमान सिविल कोड एक कम्युनल सिविल कोड है।"
- #प्रधानमंत्री मोदी, लाल किले से, 15 अगस्त 2024, स्वतंत्रता दिवस
1947 में जब #भारत का बंटवारा हुआ, तो वो मजहब के आधार पर हुआ था। #मुस्लिम लीग ने 1946 के प्रांतीय चुनावों में अलग मुल्क की मांग की थी और उन्हें मुसलमानों का जबरदस्त समर्थन भी मिला। नतीजा? भारत के दो टुकड़े हुए और पाकिस्तान बना। मतलब, #पाकिस्तान उन लोगों के लिए था, जो मानते थे कि #हिंदू और मुस्लिम एक साथ बराबरी से नहीं रह सकते। जिन्हें कुरान और शरिया के हिसाब से चलने वाला देश चाहिए था।
तो ठीक है, उन्हें उनका देश मिल गया।
लेकिन सवाल ये उठता है कि जब 87% मुसलमानों ने पाकिस्तान के लिए वोट दिया, तो वे खुद पाकिस्तान क्यों नहीं गए? मद्रास प्रेसीडेंसी की सभी सीटें मुस्लिम लीग ने जीतीं, पर एक भी मुसलमान पाकिस्तान नहीं गया। आज के पाकिस्तान या बांग्लादेश में एक भी तमिल, तेलुगु, कन्नड़, या मलयालम बोलने वाला मुसलमान नहीं मिलेगा। क्योंकि वे यहीं रुक गए।
हिंदुओं ने तो इसका कोई ऐतराज नहीं किया। उन्होंने कहा, "हमने तो नहीं कहा था कि तुम अलग हो जाओ, पर अब यदि यहीं रहना चाहते हो, तो रहो। मिल-जुल कर रहो, पर संविधान के हिसाब से चलना होगा, शरिया के हिसाब से नहीं।"
फिर भी, उस समय एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) क्यों नहीं लागू की गई, यह मेरी समझ से परे है। जो मुसलमान भारत में रुके, उन्हें तो पता था कि इस देश में सबके लिए एक समान कानून बनेगा। जो इस्लामिक कानूनों के हिसाब से चलना चाहते थे, वो तो पाकिस्तान चले गए थे। फिर भी, संविधान निर्माताओं ने यह सोच कर इसे टाल दिया कि मुसलमान अभी तैयार नहीं हैं।
यह उनकी अदूरदर्शिता थी। अगर उसी समय Uniform Civil Code लागू किया गया होता, तो यह काम आसानी से हो जाता।
अब, जब प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से Communal Civil Code का ज़िक्र किया, तो उन्होंने सच का सही नामकरण किया। जब तक हम Uniform Civil Code की बात करते रहे, असली मुद्दा लोगों तक पहुंच नहीं पाया। पर Communal Civil Code कहने से बात सीधी समझ में आती है। अब देश और दुनिया दोनों समझेंगे कि जो लोग की बात करते हैं, उन्होंने इस देश पर Communal Civil Code थोप रखा है।
अब वक्त आ गया है कि हम Secular Civil Code की मांग करें और इस देश में सही मायनों में समानता लाएं।
भारत का वर्तमान सिविल कोड एक कम्युनल सिविल कोड है।