Shri Shiv Shakti Jyotish Kendra

Shri Shiv Shakti Jyotish Kendra #श्रीशिवशक्तिज्योतिषकेंद्र
श्री शिव शक्ति मंदिर सी-8 ब्लाक यमुना विहार दिल्ली-53
राष्ट्रीय अध्यक्ष
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज,भारत

श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज समाजकिक संस्था द्वारा संचालित श्री शिव शक्ति मंदिर , ब्लाक सी-8 एवं सी-10 के मध्य यमुना विहार ,दिल्ली
सनातन धर्म का प्रचार प्रसार एवं भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए सभी सनातनी परिवार को एकजुट करना।
पंडित कौशल पाण्डेय
राष्ट्रीय अध्यक्ष

14/09/2026

_गणेश जी का असली सिर कहां पर है ?_ 🤔

14/09/2026

_गणेश जी का असली सिर कहां पर है ?_ 🤔

🕉️🚩

12/09/2026

🚩 **जय श्री राम** 🚩

सभी सनातनी भाई-बहनों से विनम्र निवेदन है कि अधिक से अधिक संख्या में **राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा दल** संगठन से जुड़कर सनातन धर्म को सशक्त बनाने में अपना सहयोग दें।
याद रखिए, **एकता में ही शक्ति है।** आज हिन्दू समाज अनेक स्तरों पर बिखरा हुआ दिखाई देता है। जब समाज एक मंच पर संगठित होकर अपनी बात रखता है, तब उसकी आवाज़ अधिक प्रभावी ढंग से सुनी जाती है।
आइए, हम सब एक साथ मिलकर सनातन धर्म के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करें और संगठन से जुड़कर समाज के हित में अपनी सहभागिता निभाएँ।

**पंडित कौशल पाण्डेय**
**संरक्षक एवं अध्यक्ष**
राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा दल

#राष्ट्रीय_हिन्दू_रक्षा_दल


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“एकता और संगठन ही शक्ति है।हम सब मिलकर धर्म और संस्कृति की रक्षा करेंगे।”

श्राद्ध 2026  :- पंडित कौशल पाण्डेय भाद्रपद (भादों मास) की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक कुल सोलह त...
11/09/2026

श्राद्ध 2026 :- पंडित कौशल पाण्डेय
भाद्रपद (भादों मास) की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक कुल सोलह तिथियां श्राद्ध पक्ष की होती है। इस पक्ष में सूर्य कन्या राशि में होता है। इसीलिए इस पक्ष को कन्यागत अथवा कनागत भी कहा जाात है। श्राद्ध का ज्योतिषीय महत्त्व की अपेक्षा धार्मिक महत्व अधिक है क्योंकि यह हमारी धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। पितृलोक के स्वामी अर्यमा सभी मृत (आत्मा) प्राणियों को अपने-अपने स्थान पर श्राद्ध का अवसर प्रदान करते हैं।
आश्विन कृष्ण पक्ष में जब सूर्य कन्या राशि पर गोचर कर रहा हो, तब पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किया गया दान, तर्पण, भोजन पिण्ड आदि उन्हें मिलता है।
जिस तिथि में जिस पूर्वज का स्वर्गवास हुआ हो उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है जिनकी परलोक गमन तिथि ज्ञान न हो, उन सबका श्राद्ध अमावस्या को किया जाता है।
पितृ पक्ष 2026 श्राद्ध की तिथियां
26 सितंबर 2026शनिवार पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026रविवार प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर 2026सोमवार द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026मंगलवार तृतीया श्राद्ध एवं महाभरणी श्राद्ध
30 सितंबर 2026बुधवार चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026गुरुवार षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026शुक्रवार सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026शनिवारअष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026रविवारनवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026सोमवार दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026मंगलवार एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026बुधवार द्वादशी श्राद्ध (मघा श्राद्ध सहित)
8 अक्टूबर 2026गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026शनिवारसर्वपितृ अमावस्या / पितृ पक्ष समापन
पितृ पक्ष का अन्तिम दिन सर्वपित्रू अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से जाना जाता है। पितृ पक्ष में महालय अमावस्या सबसे मुख्य दिन होता है।
पुराण और स्मृतिग्रंथों के अनुसार श्राद्ध कौन कर सकता है :-
किसी भी मृतक के ‘अन्तिम संस्कार’ और श्राद्धकर्म की व्यवस्था के लिए प्राचीन वैदिक ग्रन्थ ‘गरुड़पुराण’ में कौन-कौन से सदस्य पुत्र के नहीं होने पर श्राद्ध कर सकते है, उसका उल्लेख अध्याय ग्यारह के श्लोक सख्या- 11, 12, 13 और 14 में विस्तार से किया गया है, जैसे-
पुत्राभावे वधु कूर्यात ..भार्याभावे च सोदनः।
शिष्यो वा ब्राह्मणः सपिण्डो वा समाचरेत॥
ज्येष्ठस्य वा कनिष्ठस्य भ्रातृःपुत्रश्चः पौत्रके।
श्राध्यामात्रदिकम कार्य पु.त्रहीनेत खगः॥
अर्थात “ज्येष्ठ पुत्र या कनिष्ठ पुत्र के अभाव में बहू, पत्नी को श्राद्ध करने का अधिकार है। इसमें ज्येष्ठ पुत्री या एकमात्र पुत्री भी शामिल है। अगर पत्नी भी जीवित न हो तो सगा भाई अथवा भतीजा, भानजा, नाती, पोता आदि कोई भी यह कर सकता है। इन सबके अभाव में शिष्य, मित्र, कोई भी रिश्तेदार अथवा कुल पुरोहित मृतक का श्राद्ध कर सकता है। इस प्रकार परिवार के पुरुष सदस्य के अभाव में कोई भी महिला सदस्य व्रत लेकर पितरों का श्राद्ध व तर्पण और तिलांजली देकर मोक्ष कामना कर सकती है।
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य :-
जिन व्यक्तियों की सामान्य मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध केवल पितृ पक्ष की त्रयोदशी अथवा अमावस्या को किया जाता है। जिन व्यक्तियों की अकाल-मृत्यु (दुर्घटना, सर्पदंश, हत्या, आत्महत्या आदि) हुई हो, उनका श्राद्ध केवल चतुर्दशी तिथि को ही किया जाता है। सुहागिन स्त्रियों का श्राद्ध केवल नवमी को ही किया जाता है।
नवमी तिथि माता के श्राद्ध के लिए भी उत्तम है।
संन्यासी पितृगणों का श्राद्ध केवल द्वादशी को किया जाता है।
पूर्णिमा को मृत्यु प्राप्त व्यक्ति का श्राद्ध केवल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा अथवा आश्विन में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को किया जाता है।
नाना-नानी का श्राद्ध केवल आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को किया जाता है।
पितरों के श्राद्ध के लिए ‘गया’ को सर्वोत्तम माना गया है, इसे “तीर्थों का प्राण” तथा “पाँचवा धाम” भी कहते है।
माता के श्राद्ध के लिए काठियावाड़ में ‘सिद्धपुर’ को अत्यन्त फलदायक माना गया है। इस स्थान को ‘मातृगया’ के नाम से भी जाना जाता है।
गया में पिता का श्राद्ध करने से पितृऋण से तथा सिद्धपुर में माता का श्राद्ध करने से मातृऋण से सदा-सर्वदा के लिए मुक्ति प्राप्त होती है।
श्राद्ध में आमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोकर आदर सहित आसन पर बैठाना चाहिए तथा तर्जनी से चंदन-तिलक लगाना चाहिए। श्राद्धकर्म में अधिक से अधिक तीन ब्राह्मण पर्याप्त माने गये हैं।
श्राद्ध के लिए बने पकवान तैयार होने पर एक थाली में पाँच जगह थोड़े-थोड़े सभी पकवान परोसकर हाथ में जल, अक्षत, पुष्प, चन्दन, तिल ले कर पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देवता, पिपीलिका) के लिए संकल्प करना चाहिए।
पंचबलि निकालकर कौआ के निमित्त निकाला गया अन्न कौआ को, कुत्ते का अन्न कुत्ते को तथा अन्य सभी अन्न गाय को देना चाहिए। तत्पश्चात् ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
ब्राह्मण भोजन के पश्चात उन्हें अन्न, वस्त्र, ताम्बूल (पान का बीड़ा) एवं दक्षिणा आदि देकर तिलक कर चरणस्पर्श करना चाहिए। ब्राह्मणों के प्रस्थान उपरान्त परिवार सहित स्वयं भी भोजन करना चाहिए।
श्राद्ध के लिए शालीन, श्रेष्ठ गुणों से युक्त, शास्त्रों के ज्ञाता तथा तीन पीढि़यों से विख्यात ब्राह्मण का ही चयन करना चाहिए। योग्य ब्राह्मण के अभाव में भानजे, दौहित्र, दामाद, नाना, मामा, साले आदि को आमंत्रित किया जा सकता है।
श्राद्ध के लिए आमंत्रित ब्राह्मण की जगह किसी अन्य को नहीं खिलाना चाहिए। श्राद्धभोक्ता को भी प्रथम निमंत्रण को त्यागकर किसी अन्य जगह नहीं जाना चाहिए। भोजन करते समय ब्राह्मण को मौन धारण कर भोजन करना चाहिए तथा हाथ के संकेत द्वारा अपनी इच्छा व्यक्त करनी चाहिए।
विकलांग अथवा अधिक अंगों वाला ब्राह्मण श्राद्ध के लिए वर्जित है। श्राद्धकर्ता को सम्पूर्ण पितृ पक्ष में दातौन करना, पान खाना, तेल लगाना, औषध-सेवन, क्षौरकर्म (मुण्ड़न एवं हजामत) मैथुन-क्रिया (स्त्री-प्रसंग), पराये का अन्न खाना, यात्रा करना, क्रोध करना एवं श्राद्धकर्म में शीघ्रता वर्जित है। माना जाता है कि पितृ पक्ष में मैथुन (रति-क्रीड़ा) करने से पितरों को वीर्यपान करना पड़ता है।
श्राद्धकर्ता को प्रतिदिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए स्नान के बाद तर्पण करना चाहिए। श्राद्धकर्म में दौहित्र (पुत्री का पुत्र), कुतप (मध्यान्हः का समय), काले तिल एवं कुश अत्यन्त पवित्र माने गये है। संध्या और रात्रि के समय श्राद्ध नहीं करना चाहिए, किंतु ग्रहण काल में रात्रि को भी श्राद्ध किया जा सकता है। गया, गंगा, प्रयाग, कुरुक्षेत्र तथा अन्य प्रमुख तीर्थों में श्राद्ध करने से पितर सर्वदा सन्तुष्ट रहते हैं। श्राद्धकर्म में श्रद्धा, शुद्धता, स्वच्छता एवं पवित्रता पर विशेष ध्यान देना चाहिए, इनके अभाव में श्राद्ध निष्फल हो जाता है। श्राद्धकर्म से पितरों को शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा प्रसन्न एवं तृप्त पितरों के आर्शीवाद से हमें सुख, समृद्धि, सौभाग्य, आरोग्य तथा आनन्द की प्राप्ति होती है
ध्यान रखने योग्य तथ्य :-
श्राद्धकर्म में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाता है, जैसे-
श्राद्ध के दिन पवित्र भाव से पितरों के लिए भोजन बनवाएँ और श्राद्ध कर्म सम्पन्न करें।
मध्याह्न में कुश के आसन पर स्वयं बैठें और ब्राह्मण को भी बिठाएँ। एक थाली में गाय, कुत्ता और कौवे के लिए भोजन रखें। दूसरी थाली में पितरों के लिये भोजन रखें। इन दोनों थाली में भोजन समान ही रहेगा। सबसे पहले एक-एक करके गौ, कुत्ता और कौवे के लिए अंशदान करें और उसके बाद अपने पितरों का
स्मरण करते हुए निम्न मंत्र का तीन बार जाप करें-
“ॐ देवाभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नम: स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव भवन्तु ते।।”
यदि उक्त विधि को करना किसी के लिए संभव न हो, तब वह जल को पात्र में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके तर्पण कर सकता है।
यदि घर में कोई भोजन बनाने वाला न हो, तो फल और मिष्ठान आदि का दान कर सकते हैं.
पंडित कौशल पाण्डेय
(ज्योतिष सलाहकार)
अध्यक्ष
राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा दल (भारत)
#श्राद्ध2026
#पितृ_पक्ष_2026


#राष्ट्रीयहिन्दूरक्षादल

03/09/2026

🌸 **|| जय श्री कृष्णा ||** 🌸

सप्रेम निमंत्रण ,
श्री कृष्ण जन्मोत्सव के पावन पर्व पर आपको सपरिवार सादर आमंत्रित किया जाता है। कृपया पधारकर भगवान श्री कृष्ण जी के दिव्य दर्शन करें एवं महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य के भागीदार बनें।

📍 **स्थान:** श्री शिव शक्ति मंदिर, ब्लॉक C-8, यमुना विहार, दिल्ली
📅 **तिथि:** शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
⏰ **समय:** सायं 7:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक

**निवेदक:**
पंडित कौशल पाण्डेय
महंत एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा दल, भारत
📞 **संपर्क:** 9968550003

Address

Shiv Shakti Mandir C-8 Yamuna Vihar
Delhi
110053

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