08/04/2026
आप कुछ भी कहिए भाई साहब, पर फिलहाल देश का सबसे रसदार टॉपिक तो "खेड़ा का पेड़ा" बनाना ही है। बड़े दिनों बाद भारत की राजनीति में फागुन चैत उतरा है, वरना हम तो जेठ की तपन और भादो की कीच देख कर बोर हो रहे थे।
पिछले एक दो दशक से देश में यह चलन है कि आप किसी के ऊपर कितना भी बड़ा आरोप लगा सकते हैं। आगे उसकी जिम्मेवारी है कि वह स्वयं को निर्दोष सिद्ध करे, आप बस आरोप लगा कर ही मुक्त हो जाते हैं। इसमें सामने वाले का सारा कैरियर चौपट हो जाय, उसका जीवन तबाह हो जाय, कोई फर्क नहीं पड़ता। आपसे कोई प्रश्न नहीं होगा।
अन्ना आंदोलन के समय दिल्ली में केजरीवाल ने शीला दीक्षित पर हजार आरोप लगाए होंगे। उन आरोपों का ही असर था कि शीला दीक्षित का सफाया हो गया और केजरीवाल स्थापित हो गए। हालांकि दस साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद भी केजरीवाल ने कोई जांच नहीं कराई। क्यों कराते, वे जानते थे कि सारे आरोप फर्जी हैं। लेकिन उन्हीं आरोपों ने केजरीवाल जी को कुर्सी दी, शीशमहल दिलाया।
राजनीति ही नहीं, हर फील्ड में यह नौटंकी चल रही है। शादी के दिन मंडप से उठ जाने वाली वह लड़की भी याद ही होगी जिसने पल भर में दूल्हे के परिवार को विलेन बना दिया था। चार साल बाद उसी के माता पिता ने बताया कि ऐसा उसने केवल अपने प्रेमी से विवाह के लिए किया था। खैर, उसे तो उसका प्रेमी मिल गया, लेकिन दूल्हा सरकार बर्बाद हो गए।
इंस्टा रील, यूट्यूब शॉट्स की दुनिया में तो यह और सहज हो गया है। पुलिस से उलझना, किसी स्कूल टीचर से उलझना, यूं ही किसी लड़की का किसी पुरुष से उलझ जाना... व्यू पाने का सबसे आसान तरीका है किसी पर आरोप लगा कर गाली देते हुए वीडियो बनाना। आरोपित का नाम खेड़ा भले न हो, पर रोज ही सैकड़ों का पेड़ा बन रहा है इंस्टाग्राम पर...
पर भाई साहब। इसे कहीं तो जा कर रुकना होगा न? यदि हेमंता विस्वा सरमा यदि सचमुच अपनी पर अड़े रहे तो एक अच्छा उदाहरण बन सकता है।
इस बात में तो कोई भी संदेह नहीं कि खेड़ा साहब ने यूं ही फेंका है। भारत के सबसे चर्चित मुख्यमंत्रियों में से एक हैं हेमंता सरमा, वे जानते हैं कि उनके जितने प्रशंसक हैं उतने ही विरोधी भी हैं। उनकी पत्नी क्या इस लेबल की गलती करेगी कि तीन तीन देशों का पासपोर्ट रखेगी? यहां मैं हेमंता सरमा के निर्दोष होने की गवाही नहीं दे रहा। वे गलत हो सकते हैं, पर इस लेबल की गलती नहीं कर सकते। ऐसे होते तो वहां नहीं होते।
अब मजे की बात यह है कि हेमंता भाई खेड़ा साहब को रगेद रहे हैं और खेड़ा साहब भगे फिर रहे हैं। हेमंता की भाषा तो मुग्ध करती ही है, और उनके तेवर... अहा... आनंद बरस रहा है। कितने प्यारे प्यारे शब्द हैं... पेड़ा बनाऊंगा, पे...गा, वह गां है... ओहोहो... पहली बार सत्ता आमजन की भाषा बोल रही है।
हम चाहते हैं कि पेड़ा बने। यह पेड़ा ही अपने लाभ के लिए किसी के ऊपर झूठा आरोप लगा कर उसका जीवन तबाह कर देने की प्रवृति पर रोक लगाएगा।
सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।