Siddha-Yoga

Siddha-Yoga Spread­ing the teach­ings of Guru is also a Guruseva.

Siddha-Yoga destination for all Siddha-yogis of HH Ramlal ji Maharaj , HH ChandraMohan ji Maharaj and Acharya Chandrahas Ji
A Request: Please share these posts on your Face­book pages.

06/09/2026

Delhi RK Puram Ashram: Conclusion of Rudra Mahayagya. Aadarniya Mataji's Pravachan Part 3

06/09/2026

Delhi RK Puram Ashram: Conclusion of Rudra Mahayagya. Aadarniya Mataji's Pravachan Part 2

06/09/2026

Delhi RK Puram Ashram: Conclusion of Rudra Mahayagya. Aadarniya Mataji's Pravachan. Part 1

17/08/2026
28/07/2026

श्री गुरुदेव जी की कृपा और माता जी की आज्ञा से आगामी गुरु पूर्णिमा का पर्व एकदिवसीय सत्संग के रूप मे दिनांक 29 जुलाई 2026 के दिन मनाया जाएगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा निम्नलिखित है।

प्रातः 10:00 आरती
10:30 से 01:00 सत्संग
01:00 से 3:00 भोजनप्रसाद एवं विश्राम
3:00 से 4:00 तक संकीर्तन
4:00 से 4:30 आरती।

आप सभी सत्संग के कार्यक्रम में अपने बाल गोपाल सहित सम्मिलित हो आनंद प्राप्त करे ।

To join the meeting on Google Meet, click this link:
https://meet.google.com/dnm-ihha-mus

Or open Meet and enter this code: dnm-ihha-mus

Guru Purnima Satsang : July 29, 2026 : 10 am onwards

22/07/2026
02/03/2026

"योगेश्वर प्रभु रामलाल जी का जीवन प्रकाश" नामक पुस्तक से उद्धृत"

प्रभु जी के पूर्वज़ व आज तक की वंशावली

वंश-जोशी, ब्राह्मणों में उच्च जाति ।

प्रवर मुख्य - ऑङ्गिरस ऋषि
गौत्र- मौद्गल्य
शाखा- माध्यन्दिनी (सारस्वत ब्राह्मण) और सूत्र कात्यायनी

योगेश्वर प्रभु राम लाल जी के वंश का लेखा जोखा पूरा-पूरा नहीं मिलता परन्तु पांच पीढ़ियों से आज तक वृत्तान्त निम्नलिखित है।

1. पंडित चढ़त राम जी : पंडित चड़त राम जी जालन्धर के गांव धिहाड़ा में रहते थे। एक बार सतलुज नदी में बाढ़ आ गई। पंडित जी गांव छोड़ कर लाहौर जिले के गांव नौशहरा में बस गये। जो आजकल पाकिस्तान में है। पंडित जी अनन्य प्रभु भक्त थे। संसार से विरक्त थे।

एक दिन गांव के बाहर तालाब पर स्नान कर रहे थे तो गांव के ही वासी ने आकर पंडित जी को बताया कि आप के घर पुत्र हुआ है। उन्होंने प्रभु जी का शुक्रिया किया तथा वहीं से भक्ति करने के लिये जंगलों में चले गये। उसके पश्चात् उनका कोई पता नहीं चला।

2. पंडित साई दत्त जी : पंडित चढ़त राम जी के पुत्र का नाम साई दत्त रखा। एक वर्ष एक गांव नौशहरा में माता जी के साथ रहे परन्तु पिता चढ़त जी का जब कोई पता नहीं चला तो माता जी अपने मायके बग्याना (लाहौर) में आ गई। आप की माता जी ने ही आप की परवरिश व पढाई करवाई।

पंडित साई दत्त जी ईश्वर भक्त थे। एक चालिस दिनों के अनुष्ठान के लिये वे बिना बताये घर से नदी किनारे एक कुटिया में अनुष्ठान के लिये गये। सारे गांव वाले भी पंडित जी को ढूंढते रहे परन्तु उनका कुछ पता नहीं चला। एक दिन गांव वासियों को पता चला कि साई दत्त जी नदी किनारे कुटिया में रह रहे हैं। उस गांव बासी ने साई दत्त जी के मामा को बताया तो वो उसी समय नदी पर पहुंचे। मामा जी ने देखा कि वह अनुष्ठान में मग्न है तो मामा जी ने आवाज लगाई तथा घर चलने को कहा परन्तु साई दत्त जी ने कहा मामा जी आज 39 दिन हो गये हैं अनुष्ठान करते हुये। कल घर आ जाऊंगा। परन्तु मामा जी ने डांटते हुये कहा
घर चलो। साई दत्त जी अनुष्ठान छोड़कर उसी समय मामा जी के साथ घर आ गये।
एक दिन गांव के मुखिया के पुत्र की खेलते-खेलते अचानक मृत्यु होगई। जब संस्कार के लिये उसे श्मशान लेकर जा रहे थे तो पंडित साई दत्त जी के घर के सामने से गुजरते या पंडित ने पूछा किस का देहान्त हुआ है तो पता चला कि गांव के मुखिया के पुत्र का देहान हुआ है। परन्तु उन्होंने शव यात्रा को रुकवा कर शव को देखा। उन्होंने शव के चारों तरफ जल छिड़का तथा चावलों को भी मन्त्रों के साथ शव के दक्षिण पर फेका। कुछ समय के पश्चात् एक कुरूप स्त्री (चुडेल) आकर खड़ी हो गई। पंडित जी के पूछने पर कि इस बालक की तूने जान क्यों ली है। इसे इसी समय जीवित कर वरना तेरे साथ अच्छा नहीं होगा। वह चुडेल स्त्री डर गई तथा उसने कहा इस कार्य के लिये किसी की बलि देनी होगी। बाद में एक पशु की बलि दी। कुछ समय बाद वह बालक जीवित हो गया। उस स्त्री ने फिर ऐसा कर्म न करने की प्रतिज्ञा की तथा उसको पंडित जी ने क्षमा कर दिया।

3. पंडित कन्हैया लाल जी : पंडित साई दत्त जी के घर दो पुत्र हुये। पंडित सुख दयाल तथा पंडित कन्हैया लाल जी। साई दत्त जी लगभग 52 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गये। पंडित सुख दयाल जी उच्च कोटि के विद्वान थे। पंडित कन्हैया लाल जी दयालु स्वभाव के वैद्य थे।

4. पंडित गण्डा राम जी : विः सवंत् 1904 (सन् 1848 ई.) कार्तिक कृष्ण नवमी चन्द्रवार को पंडित कन्हैया लाल जी के यहां पुत्र हुआ। जिस का नाम गण्डा राम रखा। पंडित गंडा राम जी अपने माता-पिता के अकेले पुत्र थे। उन्होंने अमृतसर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु दास जी से विद्या ग्रहण की। कन्हैया जी सवत् 1938 में स्वर्गवास हो गये। (सन् 1881 ई.) विःसम्वत् 1933 ( सन् 1877 ई.) 29 वर्ष की आयु में पंडित गंडा राम जी ने कटड़ा भाई संत सिंह अमृतसर में एक दुकान किराये पर ली तथा वहां ज्योतिष का कार्य करने लगे। उसके पश्चात् नौशहरा में अपने पिता की आज्ञा से अपना परिवार अमृतसर ले आये। उस समय आप के दो बच्चे थे। एक पुत्र तीर्थराम तथा दूसरी पुत्री इसरो देवी जी। विःसवत् 1942 (सन् 1886 ई.) को पंडित गंडा राम जी के यहां जुड़वा पुत्र हुये। पंडित रामशरण दास जी व हरिकृष्ण जी। हरिकृष्ण जी का बाल्यकाल में ही देहान्त हो गया था। इस समय गंडा राम जी भाईया वाली गली नजदीक बेरी गेट रहने लगे थे। सन् 1907 व संवत् 1964 ई. में अपने धाम स्वर्ग सिधार गये।

5. इसी मकान में योगेश्वर प्रभु राम लाल जी का वि. सम्वत् 1945 (सन् 1888 ई.) में जन्म हुआ। प्रभु जी की अपनी कोई सन्तान नहीं हुई।
प्रभु जी का जन्म पंचांग के हिसाब से राम नवमी 19 अप्रैल सन् 1888, समय इष्ट 6 घड़ी 56 पल, वृहस्पतिवार, वृषभ लग्न, चैत्र शुक्ल नवमी सम्वत 1945, मकान नं. 764/4. भाईया वाली गली नजदीक बेरी गेट ( कटड़ा भाई सन्त सिंह) अमृतसर में हुआ।

पंचांग के हिसाब से राम नवमी 19-20 अप्रैल सन् 1888 ई. बनती है। इस हिसाब से शुक्रवार बनता है परन्तु काक नाड़ी ग्रंथ के अनुसार वीरवार है। कई वार पंडित लोग एक त्यौहार को दो-दो दिनों तक मान लेते हैं। ग्रह नक्षत्रों के अनुसार। परन्तु ऋषि कांक भुषुण्ड़ी जी के अनुसार वीरवार लिखा है। इस लिये वीरवार ही मान्य है। पिता गंडा राम जी ने प्रभु राम लाल जी की जन्म पत्री देख कर कहा कि ये बहुत उच्च आत्मा है। जन्म पत्री में ऐसे ग्रह भगवान् के होते हैं।

योगेश्वर सद्गुरु चरणकमलेभ्यो नमः

Address

F 41, Jeevan Park, Pankha Road, Uttam Nagar
Delhi
110059

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Siddha-Yoga posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share