SRUTI

SRUTI SRUTI is committed to empowering marginalized people to lead a dignified life with access to livelihood, resources, rights and justice.

SRUTI – Society for Rural, Urban and Tribal Initiative, established in 1983, is a not-for-profit organisation that works towards social change at the grassroots, across rural and urban India, through its Fellowship Programme. It supports people-oriented initiatives for the alleviation of poverty and discrimination among some of the most disadvantaged communities in India. From food security to edu

cation; rights to natural resources to livelihood generation; land alienation to urban concerns; untouchability to governance, agricultural issues to labour rights, SRUTI Fellows engage in a wide range of activities including awareness-raising; organizing communities; perspective training and capacity building; documentation and advocacy across rural and urban India.

11 फरवरी को ' विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस' (International Day of Women and Girls in Science) ...
11/02/2026

11 फरवरी को ' विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस' (International Day of Women and Girls in Science) मनाया जाता है ताकि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके और लैंगिक असमानताओं को दूर किया जा सके। यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए भी मनाया जाता है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से विज्ञान में उनके योगदान को नजरअंदाज किया गया है।

#विज्ञान_में_महिलाएं_दिवस

#वैज्ञानिक_चेतना

सामाजिक संस्थाओं में टीम बनाना और मज़बूत करना एक सतत प्रक्रिया है। यह प्रकिया व्यक्ति और संस्था, दोनों के बीच आकार लेती ह...
06/02/2026

सामाजिक संस्थाओं में टीम बनाना और मज़बूत करना एक सतत प्रक्रिया है। यह प्रकिया व्यक्ति और संस्था, दोनों के बीच आकार लेती है। अगली पीढी के नेतृत्व की पहचान के लिए संस्था को बहुत धैर्य और खुले विचारों के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।

यह लेख आपको इस प्रक्रिया को समझने और लीडरशिप बेहतर बनाने में कारगर साबित होगा। शुक्रिया India Development Review टीम .

सामाजिक संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन केवल प्रबंधन का नहीं, विचार और राजनीति का सवाल है। इसके लिए संस्थाओं को प्र....

01/01/2026

The SRUTI Team wishes you a joyful, healthy, and peaceful New Year.
Here’s to renewed hope, deeper solidarities, and meaningful engagements in 2026 🌿

झारखण्ड सामाजिक परिवर्तन शाला का दूसरा शिविर चिल्गु में संपन्न हुआ। यह शिविर 11 दिसंबर से 15 दिसंबर तक किया गया, सभी प्र...
16/12/2025

झारखण्ड सामाजिक परिवर्तन शाला का दूसरा शिविर चिल्गु में संपन्न हुआ। यह शिविर 11 दिसंबर से 15 दिसंबर तक किया गया, सभी प्रतिभागियों ने निर्जीव से सजीव बनने और मनुष्य के विकास क्रम को जाना साथ ही एक दिवसीय सीख भ्रमण किया गया इस भ्रमण में प्रतिभागियों ने चांडिल का इतिहास को जानने और गांव के लोगों द्वारा मछली पालन के काम को जाना, साथ ही नौका विहार का भी लुप्त उठाया।

सामाजिक परिवर्तन शाला उत्तराखंड - 31अक्टूबर से 3 नवम्बर 2025 तक आयोजित इस चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण नैनीताल जिले के भव...
06/11/2025

सामाजिक परिवर्तन शाला उत्तराखंड -
31अक्टूबर से 3 नवम्बर 2025 तक आयोजित इस चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण नैनीताल जिले के भवाली में किया गया।
शिविर में विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने लगभग 25-30 लाख वर्ष पहले अफ्रीका में होमो हैबिलिस (Homo habilis) नामक प्रारंभिक मानव प्रजाति का उद्भव हुआ। इसके बाद होमो इरेक्टस और फिर होमो सेपियन्स सेपियन (आज का मनुष्य) कैसे विकसित हुए।
किस तरह से इंसान ने धीरे-धीरे सीधा चलना शुरू किया और औज़ार बनाना और बोलना सीखा।
शिकार और संग्रह, पशुपालन से लेकर कृषि और स्थायी जीवन और लगभग 10,000 वर्ष पहले मानव ने खेती और पशुपालन शुरू की और स्थायी बस्तियाँ बनीं, जिससे परिवार बनने और गाँव बनने के सफर को फिल्म, एक्टिविटी और वादविवाद के माध्यम से जाना और समझा।

दामोदर दा को अंतिम जोहार* जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज, संस्कृति और अपनी भाषा के संरक्षण को समर्पित कर दिया — दामोदर सि...
29/10/2025

दामोदर दा को अंतिम जोहार*

जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज, संस्कृति और अपनी भाषा के संरक्षण को समर्पित कर दिया — दामोदर सिंह हांसदा जी, झारखण्ड के सरायकेला खरसावां के कोटवाल साई गाँव के रहने वाले थे। उनकी असमय और दुखद मृत्यु ने पूरे समाज को गहरे शोक में डाल दिया है।
दामोदर सिंह हांसदा जी केवल एक व्यक्ति नहीं थे — वे एक विचार थे, एक आंदोलन थे, और एक प्रेरणा थे। उन्होंने कोल्हान क्षेत्र के हो आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति और पहचान को बचाने और सशक्त बनाने का जो बीड़ा उठाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन गया।

सन 2005 में उन्होंने हो आदिवासी महासभा की स्थापना की — एक ऐसा मंच जिसने हो समाज को एक नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में अनेक क्षेत्रीय अभियान चलाए गए, जिनका उद्देश्य था — हमारी *हो भाषा* और *वारंग लिपि* को सम्मान और पहचान दिलाना।
उनकी अटूट मेहनत, निस्वार्थ भावना और संघर्ष ने समाज में आत्मगौरव की एक नई चेतना जगाई। उनकी सरलता, मज़बूत व्यक्तित्व, और हमेशा लोगों की मदद करने के लिए तत्पर रहने की भावना से सबलोग परिचित थे।

दामोदर जी भलीभांति जानते थे कि किसी भी समाज का भविष्य उसके युवाओं में निहित होता है। इसलिए उन्होंने *हो आदिवासी युवा समाज* की स्थापना की, ताकि नवयुवक अपने समाज की भाषा, संस्कृति और इतिहास को जानें, समझें और आगे बढ़ाएँ।

सन 2005 से 2008 के बीच, उन्होंने युवाओं के साथ मिलकर चक्रधरपुर और कोचाई प्रखंडों के लगभग 100 गाँवों में अभियान चलाया — यह प्रयास केवल भाषा का प्रचार नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान और एकता की पुकार थी।

उनका सपना था कि हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिले, और इसे औपचारिक शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जाए। उन्होंने इसके लिए लगातार संघर्ष किया, दस्तक दी, आवाज उठाई — क्योंकि वे मानते थे कि अपनी भाषा में शिक्षा ही सच्ची स्वतंत्रता है।

वे इंस्टिट्यूट ऑफ एंशिएंट कल्चर एंड साइंस (आदि संस्कृति एवं विकास संस्था), सरायकेला खरसावां से जुड़े हुए थे, जहां वे अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे थे। भाषा आंदोलन को आगे बढाने के लिए पिछले झारखण्ड चुनाव में लोकसभा प्रत्याशी के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा।

आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो लगता है जैसे समाज का एक मजबूत स्तंभ गिर गया हो। पर सच यह है कि दामोदर हांसदा जी जैसे लोग कभी जाते नहीं — वे अपनी सोच, अपने कार्यों और अपने सपनों के रूप में हमेशा हमारे बीच जीवित रहते हैं। हम उन्हें सभी श्रुति साथी और उनके सामाजिक परिवर्तन शाळा के साथियों के तरफ से अंतिम सलाम करते हैं।

उनकी हर स्मृति, हर विचार, हर प्रयास हमें याद दिलाता रहेगा कि भाषा और संस्कृति हमारी आत्मा है — और उसे जीवित रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम प्रार्थना करते हैं कि उनके परिवार को इस गहरे दुःख को सहने की शक्ति मिले।

उनकी प्रेरणा से हम सब मिलकर उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाएँगे — ताकि आने वाली पीढ़ियाँ गर्व से कह सकें कि हम दामोदर सिंह हांसदा जी की विरासत के वाहक हैं।

सामाजिक परिवर्तन शाला महाराष्ट्र- 16 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित इस चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण नागपुर में किया...
22/10/2025

सामाजिक परिवर्तन शाला महाराष्ट्र-
16 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित इस चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण नागपुर में किया गया।
शिविर में विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने गरीबी, सामाजिक असमानता, प्राकृतिक संसाधनों, व्यापार और बैंकिंग व्यवस्था पर गहराई से चर्चा की।
प्रतिभागियों ने समूहों में विभाजित होकर गरीबी के कारण, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग, वैश्विक उपनिवेशवाद और आर्थिक असमानता पर खेल और प्रेजेंटेशन फिल्में के जरिये समझ बनाई।
प्रतिभागियों ने बैंकिंग, 1969 में राष्ट्रीयकरण और मिश्रित अर्थव्यवस्था की अवधारणा पर चर्चा की। सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के लाभ और हानि पर समूह गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई गई।

On 3rd September 2025, SRUTI’s team gathered at our Delhi office for a training workshop on “Recasting Civic Actions in ...
03/09/2025

On 3rd September 2025, SRUTI’s team gathered at our Delhi office for a training workshop on “Recasting Civic Actions in the Changing Climate Regime” led by Prof. Priyanshu Gupta.

A powerful space to rethink strategies, strengthen grassroots voices, and prepare for the challenges of a changing climate.

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303/4, Second Floor, Sona Apartment, Kaushalya Park, Hauz Khas
Delhi
110016

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