The Indian Pride

The Indian Pride Unity in diversity: India is a land of diversity — in terms of religion, geography, culture, creed , languages,dialect and traditions etc. We are proud Indians.

We have Pride on our India 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🚩 India is a land of diversity & Culture. We are home to more than 100 languages & have a history that goes back thousands of years.

17/08/2026

*Dimagi Naxal*
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अगर कोई पूछे

दिमाग़ी नक्सल से
मुझे क्या लेना देना?

तो उससे कहना

बहुत कुछ..

क्योंकि बंदूक उठाने वाला
शायद तुम्हारे दरवाजे तक
कभी न पहुंचे...

लेकिन
उस बंदूक को सही ठहराने वाला विचार
तुम्हारे बच्चे के कमरे तक
पहुंच सकता है...

और विचारों की दुनिया में
खाली जगह कभी खाली नहीं रहती...

अगर तुम
अपने बच्चे को भारत का अर्थ नहीं समझाओगे

कोई और
उसे भारत से नफरत का अर्थ समझा देगा।

अगर तुम
उसे लोकतंत्र की कमियां बताओगे
लेकिन उसकी ताकत नहीं बताओगे

कोई और
उसे लोकतंत्र की कमियां दिखाकर
उसका भरोसा छीन लेगा...

अगर तुम
राष्ट्रवाद को सिर्फ झंडे तक रखोगे..

कोई और
उसे सिर्फ नारे तक सीमित कर देगा...

इसलिए राष्ट्रवाद
सिर्फ गर्व नहीं है..

राष्ट्रवाद एक जिम्मेदारी है..

एक विचार के सामने
दूसरा विचार खड़ा करने की जिम्मेदारी..

एक झूठ के सामने
सत्य खड़ा करने की जिम्मेदारी..

एक हिंसक स्वप्न के सामने
एक लोकतांत्रिक भविष्य खड़ा करने की जिम्मेदारी..

और शायद

यही सबसे शांत
लेकिन सबसे निर्णायक युद्ध है..

जहां
कोई सीमा नहीं,

कोई वर्दी नहीं,

कोई गोली नहीं।

सिर्फ
दो विचार आमने-सामने हैं

एक कहता है,

तोड़ दो..

दूसरा कहता है,

सुधारो..

एक कहता है,

जला दो..

दूसरा कहता है,

बनाओ..

एक कहता है,

बंदूक उठाओ..

दूसरा कहता है,

संविधान..

और एक राष्ट्रवादी का उत्तर
इतना ही होना चाहिए..

मैं अपने देश की हर कमी से लड़ूंगा,
लेकिन अपने देश से नहीं..

क्योंकि

राष्ट्र को बचाने के लिए
राष्ट्र को मिटाने वाली हिंसक विचारधारा के सामने
खड़ा होना जरूरी है..

सीमा पर सैनिक का कर्तव्य है
देश की सीमा बचाना..

समाज में नागरिक का कर्तव्य
देश के मन को बचाना..

और शायद
दिमाग़ी नक्सल के विरुद्ध
सबसे बड़ा उत्तर भी यही है..

17/08/2026
"दिमागी नक्सली जंगलों में नहीं... हमारे बीच रहकर दिमाग पर हमला करते हैं!"UP के पूर्व DGP ब्रिज लाल ने "दिमागी नक्सलियों"...
17/08/2026

"दिमागी नक्सली जंगलों में नहीं... हमारे बीच रहकर दिमाग पर हमला करते हैं!"

UP के पूर्व DGP ब्रिज लाल ने "दिमागी नक्सलियों" को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि ये हथियार लेकर जंगलों में नहीं घूमते, बल्कि समाज के बीच रहकर अपनी विचारधारा फैलाते हैं।

ब्रिज लाल के मुताबिक, ऐसे लोग लेख लिखते हैं, कॉन्फ्रेंस और सेमिनार करते हैं और वहां युवाओं के मन में हिंसक विचारधारा भरने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इनका असली निशाना युवाओं का भरोसा है। संविधान, न्यायपालिका और सेना जैसी संस्थाओं के खिलाफ उनके मन में अविश्वास पैदा किया जाता है।

बंदूक वाला नक्सल सामने दिख जाता है... ब्रिज लाल की चेतावनी उस सोच से है, जो उनके मुताबिक युवाओं के दिमाग में चुपचाप बारूद भरती है।

PM Modi outlines his vision for India Inc: "I want 50 Indian companies to be a part of the 'Fortune 500' group.
16/08/2026

PM Modi outlines his vision for India Inc: "I want 50 Indian companies to be a part of the 'Fortune 500' group.

16/08/2026

She is just a Pakistani puppet

16/08/2026

Dimagi Naxal = Naxalandu

आज से 10 साल पहले जब इन्हें लिबरल बनने का कीड़ा काटने लगा था तब लिबरांडू शब्द हमने इन्हें दिया था..अब वक़्त आ गया है कि इन्हें "नक्सलांडू" शब्द से सुशोभित किया जाये 😌🫶🏻❤️

अगर दम है तो इस व्यक्ति से सीखिये ____________________________________इस 17 सितंबर को यह व्यक्ति छिहत्तर वर्ष का हो जाएग...
16/08/2026

अगर दम है तो इस व्यक्ति से सीखिये
____________________________________

इस 17 सितंबर को यह व्यक्ति छिहत्तर वर्ष का हो जाएगा। यह व्यक्ति पिछले चार दशकों से खुली राजनीति में है। जिनमें से लगभग 26 वर्ष बिलकुल सत्ता की राजनीति की है और कभी मुँह की नहीं खाई। कुछ तो बात होगी। कोई तो करिश्मा होगा।

उन आलोचकों की तरह मूर्खता की भाषा मत बोलिये कि दो धर्मों को लड़वा के वोट लिए / झूठ बोलता है / फेंकता है / मीडिया मैनेज करता है।

सारी बातों को पीछे धकेल दीजिये। आप विपक्षी या विरोधी हैं, तब भी "सब्जेक्टिव अप्रोच" से इस व्यक्ति को देखिये।

सब कुछ खिलाफ़ था।

यह व्यक्ति गुजरात की राजनीति में भी उपेक्षित था। एक "चांस" की बात है कि भारतीय जनता पार्टी ने वहाँ भेजा। उसके बाद 26 वर्ष से यह व्यक्ति या तो गुजरात की सत्ता में रहा या केंद्र की सत्ता में।

कितने ही नेता लाइन में थे।

आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ, वेंकय्या, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी। लेकिन यह व्यक्ति सब को पीछे छोड़ देता है। इसके भीतर कितनी तेज़ ललक रही होगी। कितनी ऊर्जा। कितना जोश। कितनी चतुराई। कितना धैर्य।

यह व्यक्ति कितनी जल्दी परिस्थिति में ढल जाता है। इसे कड़क / रिजिड कहने वाले सचमुच भोले हैं। यह व्यक्ति राम मंदिर के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाता है। 370 हटाता है। तीन तलाक़ हटाता है। मिलिट्री ओपरेशन करवाता है। लेकिन जब हालात हाथों से बाहर निकलते हैं तो रिवर्स गियर ले लेता है। कितनी चतुराई से किसान आंदोलन निपटाया। कितनी योजना से जंतर मंतर को उसी ज़हर से काटा, जो ज़हर बोया जा रहा था।

पिचहत्तर वर्ष की आयु में अचानक इंस्टाग्राम पर आ जाना। यह जानते हुए भी कि जेन ज़ी को कंविन्स करना आसान नहीं, कोशिश करना। अपने मंत्री का इस्तीफ़ा ले लेना। बिलकुल चुप हो जाना। फिर एक दिन कुछ बोल कर यह बता देना कि मुझे सब जानकारी है।

यह व्यक्ति कितना संवाद कुशल है। बारह बरस से केंद्रीय सत्ता का केंद्र। और चाहे तो आगे भी रह सकता है। यानी ऐसी कोई गोपन तकनीक है ज़रूर कि सत्ता के सारे समीकरण साध लेता है। यह तकनीक नेहरू के पास भी थी लेकिन इतनी "वाईब्रैंट" नहीं। अटल के पास भी। लेकिन उनका समय दूसरा था।

यह व्यक्ति "प्रिसिजन" से वार करता है। इस व्यक्ति को कैमरे के एंगल से लेकर पूजा में बैठने के ढंग तक, सब कुछ पर "कमांड" है।

यह कला ऐसे ही नहीं आती।

मैं तो सबसे कुछ न कुछ सीखता हूँ। मुझे कम बैक करना नरेन्द्र मोदी ने ही सिखाया। अपने विरोधी को चुभना मगर उसे पूरी तरह लाचार कर देना। झटके नहीं हलाल का इस्तेमाल करना।

मीडिया - संस्थान - संसद - मन्त्रिमंडल - विधायक - जनता - अंतर्राष्ट्रीय राजनीति तक, सब कुछ पर एक साथ नज़र। यदि कभी मुँह की खानी पड़ भी जाए तो हाथों हाथ सम्भल जाना। यह मैंनेजमेंट आसान नहीं है। इसके लिए आपके पास ईश्वर - प्रदत्त - प्रतिभा होनी चाहिए।

सोने पर सुहागा राहुल जैसा ढीला और बेहद गैर-ज़िम्मेदार और मरा हुआ विपक्ष।

फिर कहता हूँ। इस व्यक्ति को एक "इंस्टिट्यूट" की तरह देखिये। 2002 से 2026 तक यह व्यक्ति भारत में सबसे अधिक चर्चा में रहा है। मुझे लगता है 2032 तक रहेगा। कहने में क्या जाता है कि जब तक जीवित रहेगा, आकर्षण और समाचारों का केंद्र रहेगा।

ऐसा चक्रवर्ती भाग्य मैंने तो किसी का नहीं देखा।

हाँ, बहुत कमियाँ हैं। कहीं - कहीं अलोकतांत्रिक हो जाना। अटेंशन सीकर होना। बहुत महत्वाकांक्षी होना। बहुत बड़े दावे करना। लेकिन फिर वही बात कि परफेक्ट कोई नहीं होता। मोदी भी नहीं है। लेकिन परफेक्ट होने का पीछा ज़रूर किया जा सकता है।

यदि मैं राहुल गाँधी होता तो मन ही मन मोदी को गुरु मान लेता। हार मान लेता कि भाई हमसे आप नहीं सध सकते। लेकिन हार मानने के बाद मैं मोदी की तकनीक अपना कर ही मोदी की जगह पहुँचता। तू - तड़ाक नहीं करता। मेलोनी - फेलोनी वाली सस्ती नौटंकी नहीं करता। टी-शर्ट पहनकर तफ़री नहीं करता। संसद को गंभीरता से लेता और अठारह घंटे नहीं तो बारह घंटे ज़रूर काम करता।

मोदी से ही सीखता कि इतने बड़े जन-समुदाय को कैसे अपने पीछे किया जाता है। मोदी से ही सीखता कि कब, क्या, कैसे कौन-सी बात बोलनी है। क्या बोलनी है और क्या छुपा जानी है।

मोदी भारतीय राजनीति के लिए ही बने हैं। मोदी के भीतर "प्रेडिक्शन" और "जजमेंट" और "टाइमिंग" जैसी तीनों चीज़ें हैं।

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मैं बहुत सामान्य व्यक्ति हूँ। एक प्राइवेट कॉलेज में लेक्चरर। थोड़ी - बहुत कविता भी कर लेता हूँ। लेकिन मैं जब भी किसी मुसीबत में फंस जाता हूँ तो यही सोचता हूँ कि मोदी यहाँ होते तो क्या करते? क्या वह "रियेक्ट" करते ? या, चुप रह जाते? या, ध्यान ही नहीं देते!

बहुत सारी बातें हैं।

आप मुझे भक्त / अंधभक्त या "अंडभक्त" भी कह सकते हैं। लेकिन हर पीढ़ी का एक हीरो होता है। मेरा भी है। मैं इसे आपसे क्यों छुपाऊँ। छुपाकर बेईमानी ही करूँगा।

आप भले ही मोदी से नफ़रत करें, लेकिन लक्ष्मण भी तो रावण के पास कुछ सीखने ही गए थे। यदि आप मोदी को विश्वामित्र समझकर राम की तरह नहीं जा सकते तो रावण समझकर लक्ष्मण की तरह ही चले जाइये।

आपका क़द छोटा नहीं हो जाएगा। उलटे यह विनम्रता आपको लाभ ही देगी।

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दोस्तो!

अपने "रिसीविंग हैंड" को हमेशा खुला रखिये। यह जीवन को बहुत सरल और सुविधाजनक बनाता है और मुश्किलों से उबार भी लेता है।

बाक़ी आप पर।

हाँ, मुझे मोदीजी को केवल मोदी कहना पड़ा, इसके लिए क्षमा! यह केवल समझाने के लिए था।

और आख़िरी बात। अमित शाह जैसा एक दोस्त ज़रूर बनाइये। दोस्ती कीजिये। दोस्ती निभाइये। आख़िरी हद तक निभाइये। मैंने अपने जीवन में मोदी और शाह से बढ़कर दोस्त नहीं देखे। यह दोनों तो ख़ून के रिश्ते को भी पीछे छोड़ चुके।

शुक्रिया!

ये हैं टुकडे गैंग वाली नेहा बोरा का बॉयफ्रेंड हमद जो जम्मू कश्मीर का रहने वाला है जो आतंकी का सपोर्ट करता है हिंदुओ को द...
14/08/2026

ये हैं टुकडे गैंग वाली नेहा बोरा का बॉयफ्रेंड हमद जो जम्मू कश्मीर का रहने वाला है जो आतंकी का सपोर्ट करता है हिंदुओ को देखना नही चाहता काश्मीर में यह बोरा इसी के चंगुल में फंसी है आपने बाप से 10 साल से बात नही कर रही इसे भी कुछ मूर्खो आइडल मानते हैं...

इसमें नेहा की जितनी गलती है उतनी ही गलती नेहा के माता पिता की भी है जिन्होंने नेहा पर कभी ध्यान ही नहीं दिया होगा और नेहा जैसी लाखों हिंदू लड़कियों के मां बाप है जो अपनी बच्ची पर ध्यान नहीं देते और जब बात हाथ से निकल जाती है तब रोते है...

याद रहे मुस्लिम कल भी हमारे घर की इज्जत पे नजर रक्खे थे और आज भी इनकी यही नीति है इसलिए हमे अपने बच्चों पर ध्यान देना होगा काम के बाद रात में २ घंटे अपने बच्चों से बात करे उनकी समस्या समझे...

11/08/2026

#𝘎𝘈𝘋𝘋𝘈𝘙

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