01/04/2026
📢भूमि विवाद, अतिक्रमण एवं किसान हित में त्वरित न्याय हेतु जनहित याचिका के समर्थन में वक्तव्य📢
भूमि से जुड़े विवाद केवल संपत्ति के नहीं, बल्कि अन्नदाता किसानों के अस्तित्व, सम्मान और आजीविका से जुड़े अत्यंत संवेदनशील विषय हैं। वर्तमान परिस्थितियों में यह व्यापक रूप से अनुभव किया जा रहा है कि राजस्व न्यायालयों—नायब तहसीलदार से लेकर मंडलायुक्त स्तर पर निस्तारित होने वाले वादों में अपेक्षित निष्पक्षता, विधिक गहराई एवं त्वरित न्याय का अभाव परिलक्षित होता है। अनेक प्रकरणों में निर्णय प्रक्रिया प्रशासनिक दबावों एवं बाहरी प्रभावों से प्रभावित होने की आशंका भी जनमानस में गहरी होती जा रही है।
यह एक कटु सत्य है कि एक साधारण नागरिक अथवा किसान द्वारा प्रारंभ किया गया वाद, निचली अदालतों से होते हुए उच्च न्यायालय तक पहुँचने में वर्षों नहीं, बल्कि दशकों (लगभग 20-25 वर्ष) का समय ले लेता है। इस विलंब के पीछे प्रशासनिक उदासीनता, बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार की जाने वाली अनावश्यक हड़तालें, तथा न्यायिक पदों पर विधिक विशेषज्ञता के अभाव जैसे कारण प्रमुख हैं। परिणामस्वरूप, न्याय की प्रक्रिया स्वयं पीड़ितों के लिए एक दंड बन जाती है।
ऐसी स्थिति में राजस्व संबंधी वादों के निस्तारण हेतु एक स्वतंत्र, सशक्त एवं विधिक रूप से प्रशिक्षित न्यायिक तंत्र की स्थापना समय की मांग है—जहाँ निर्णय केवल वाद की मेरिट, साक्ष्य एवं विधिक सिद्धांतों के आधार पर, बिना किसी राजनीतिक अथवा प्रशासनिक दबाव के पारित किए जाएँ।
इस परिप्रेक्ष्य में दायर की गई जनहित याचिका न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि यह देश के अन्नदाता किसानों, गरीबों एवं वंचित वर्गों के न्याय के अधिकार की एक सशक्त आवाज भी है। यह पहल न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं समयबद्ध निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है।
हमारा संगठन इस जनहित याचिका का पूर्ण समर्थन करता है और माननीय सर्वोच्च न्यायालय से यह अपेक्षा करता है कि वह इस विषय की गंभीरता को समझते हुए ऐसे ठोस एवं दूरगामी निर्देश पारित करे, जिससे—
➡️राजस्व वादों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित हो,
➡️अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्यवाही हो,
तथा किसानों के अधिकारों की विधिक रूप से सुदृढ़ सुरक्षा हो सके।
🔅अब समय केवल विचार का नहीं, बल्कि निर्णायक परिवर्तन का है।🔅
हम सभी नागरिकों, विशेषकर किसान हितैषियों से आह्वान करते हैं कि इस जनहित अभियान से जुड़ें, अपनी आवाज बुलंद करें और इस संदेश को अधिक से अधिक साझा कर जनजागरण का हिस्सा बनें।
“न्याय में विलंब, न्याय से वंचित करना है—और अब यह अन्याय स्वीकार नहीं होगा।”
मनीष राय सिन्टू ✍🏻
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
RTI Activist Association Of India
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