24/09/2026
🌳 वो बुज़ुर्ग रोज़ पार्क जाते थे…
शायद उन्हें ताज़ी हवा से ज़्यादा किसी के साथ की तलाश थी।
वो रोज़ उसी बेंच पर बैठते, लोगों को आते-जाते देखते…
शायद इंतज़ार करते कि कोई पास आए, दो बातें करे और पूछे—
“कैसे हैं आप?” 💔
लेकिन पार्क में उन्हें कोई जानता नहीं था।
लोग आते रहे, जाते रहे…
और उनकी खामोशी वहीं बैठी रही।
फिर Abhinav Samaj उनके पास आया। ❤️
अब रोज़ कोई उनका हाल-चाल पूछता है,
उनकी बातें सुनता है,
उनकी छोटी-छोटी ज़रूरतों को समझता है।
कभी-कभी किसी की ज़िंदगी बदलने के लिए
बहुत कुछ करने की ज़रूरत नहीं होती…
बस रोज़ एक बार पूछना पड़ता है — “आप कैसे हैं?” 🤝
क्योंकि बुज़ुर्गों को सिर्फ लोगों के बीच होना नहीं,
किसी के लिए मायने रखना भी ज़रूरी है। 🌿
Abhinav Samaj — जहाँ बुज़ुर्ग अकेले नहीं, सब अपने हैं। ❤️
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