Nirantar- Centre for Gender and Education

Nirantar- Centre for Gender and Education Women's Literacy, Education, Gender and Sexuality are some of our focus areas.

Nirantar Trust is a New Delhi-based organisation that works towards empowering women through education—by enabling access to information, promoting literacy and engendering education processes. We achieve this through direct field interventions, creating educational resources, research and advocacy, and training. Actively involved with the women’s movement and other democratic rights movements, Ni

rantar brings concerns central to these movements into its educational work. Nirantar has been actively involved with the women’s movement since its inception in 1993.

Nirantar Trust invites you to apply for the “Jeevat Fellowship" (2026–27). This is an 18-month fellowship, starting in J...
18/03/2026

Nirantar Trust invites you to apply for the “Jeevat Fellowship" (2026–27). This is an 18-month fellowship, starting in June 2026.

Who can apply:

• The fellowship is open to youth from Delhi, Haryana, Rajasthan, Maharashtra, Uttarakhand, Uttar Pradesh, Bihar, Jharkhand, Madhya Pradesh, and Chhattisgarh.
• Women, non-binary, and trans persons will be given priority. Individuals from diverse socio-cultural, economic, and geographical backgrounds, other gender identities, and persons with disabilities are strongly encouraged to apply.
• Applicants must be between 20 to 30 years of age.
• Applicants should come from marginalized backgrounds and have a minimum of 1–3 years of experience working with marginalized communities.
• All applicants must have a working understanding of spoken and written Hindi.

Please read the detailed concept note carefully before filling out the application form.
• Links to the form - https://forms.gle/apnxT9jR19pb5vB2A
• Concept Note - https://drive.google.com/file/d/170DcLVyWpKggGQQN9QOoUkYBiYVjA14m/view?usp=drive_link

निरंतर ट्रस्ट आपको अपने "जीवट फेलोशिप" (2026–27) के लिए आवेदन करने हेतु आमंत्रित करता है। इस फेलोशिप की अवधि 18 महीने है...
18/03/2026

निरंतर ट्रस्ट आपको अपने "जीवट फेलोशिप" (2026–27) के लिए आवेदन करने हेतु आमंत्रित करता है। इस फेलोशिप की अवधि 18 महीने है, जिसकी शुरुआत जून 2026 से होगी।

आवेदन कौन कर सकते हैं:

• यह फेलोशिप केवल दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए है।
• फेलोशिप में महिलाओं, नॉन-बाइनरी व्यक्तियों और ट्रांस-व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी। अलग-अलग सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक और भौगोलिक परिवेशों, अन्य जेन्डर पहचानों, एवं विकलांग व्यक्तियों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
• वो युवा जो 20 से 30 उम्र के हैं, केवल वे ही आवेदन कर सकते हैं।
• वो युवा जो हाशिये से आते हैं और हाशिये के समुदाय के साथ काम करने का न्यूनतम एक से तीन साल तक का अनुभव रखते हैं, वे ही आवेदन कर सकते हैं।
• आवेदन करने वाले सभी प्रतिभागियों को मौखिक एवं लिखित हिन्दी भाषा की समझ होनी चाहिए।

कृपया फॉर्म भरने से पहले, फेलोशिप के बारे में दिए गए कान्सेप्ट नोट को अच्छी तरह पढ़ लें।
फॉर्म का लिंक - https://forms.gle/apnxT9jR19pb5vB2A
कान्सेप्ट नोट का लिंक - https://drive.google.com/file/d/170DcLVyWpKggGQQN9QOoUkYBiYVjA14m/view?usp=drive_link

निरंतर के महिला साक्षरता कार्यक्रम के तहत साक्षरता कैम्प, 2026 में पेडागोजी या फिर पढ़ने-पढ़ाने की पद्धति के अलग-अलग तरीके...
17/03/2026

निरंतर के महिला साक्षरता कार्यक्रम के तहत साक्षरता कैम्प, 2026 में पेडागोजी या फिर पढ़ने-पढ़ाने की पद्धति के अलग-अलग तरीके अपनाए गए , क्योंकि सेंटर में आने वाली हर महिला एक जैसी नहीं होती और उनके सीखने का रफ्तार भी । कोई सुनकर जल्दी सीखती हैं, कोई देखकर, कोई लिखकर तो कोई ज्यादा से ज्यादा बात और चर्चा करके।

इसलिए गाना-बजाना , खेल-कूद, मुद्दा आधारित चर्चा, पत्र लिखना आदि को मिलाकर पढ़ने -लिखने की प्रक्रिया महिलाओं के साथ करवाई जाती है। यही हमारे साक्षरता कैम्प की पेडागोजी या पद्धति की खासियत है।

👉साक्षरता कैम्प 2026 इस बार महिलाओं के लिए इन पाँच दिनों का मतलब सिर्फ़ एक कैंप का हिस्सा होना नहीं था, बल्कि सीखने और स...
23/02/2026

👉साक्षरता कैम्प 2026

इस बार महिलाओं के लिए इन पाँच दिनों का मतलब सिर्फ़ एक कैंप का हिस्सा होना नहीं था, बल्कि सीखने और सिखाने की प्रक्रिया व खुद को नए सिरे से समझने की एक साझा यात्रा थी।

हँसी, खेल, बातचीत और कई सारी गतिविधियों के बीच भाषा और गणित की नई समझ बनी, डिजिटल दुनिया से परिचय हुआ और पैसों, बाज़ार व हिसाब-किताब को समझने का अभ्यास किया गया। डर धीरे-धीरे कम हुआ और आत्मविश्वास भी बढ़ा। कई महिलाओं के लिए यह अपने बारे में सोचने की शुरुआत थी। यह सिर्फ़ साक्षरता नहीं थी - यह साथ सीखने, सवाल करने और अपनी आवाज़ को पहचानने की प्रक्रिया थी।

इतिहास से जुड़ी कुछ ऐसी औरतों को जानें, जिन्होंने ज्ञान और शिक्षा के अलग मायने गढ़े हैं।इतिहास में ऐसी औरतें हैं जो औपचा...
20/02/2026

इतिहास से जुड़ी कुछ ऐसी औरतों को जानें, जिन्होंने ज्ञान और शिक्षा के अलग मायने गढ़े हैं।

इतिहास में ऐसी औरतें हैं जो औपचारिक शिक्षा के दायरे से बाहर रहीं और जिन्होंने अपने ज्ञान से समाज को नई दिशा दिखाई। दरअसल ज्ञान के सृजन का अधिकार किसे है, इसे तय करते हैं सत्ता के ढाँचे। लेकिन जेंडर, जाति, धर्म, यौनिकता, भाषा, क्षेत्र आदि के नियम-कायदों को चुनौती देते हुए ढेर सारी औरतों ने अपनी पहचान बनाई है।

आज इस प्रदर्शनी में हम अलग अलग दौर की जिन औरतों को याद कर रहे हैं, उन्होंने समाज की बनावट पर, स्त्री जीवन की बाध्यताओं पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने अलग-अलग माध्यम से अलग-अलग भाषा में अपनी बात कही है। इस प्रदर्शनी में कई औरतें हैं जिनका स्वर आपको मौखिक परंपराओं में मिलेगा। यह प्रदर्शनी स्त्री-स्वर की विविधता को उभारने की एक छोटी-सी कोशिश है। ये नारीवादी मुद्दे हैं जिनकी समझ औरतों के ज्ञान, शिक्षा और स्वर की विविधता एवं व्यापकता को उभारे बगैर अधूरी है।

इस प्रॉजेक्ट और प्रदर्शनी को तैयार करने की प्रक्रिया में हमें यह भी अहसास हुआ कि इन औरतों के बारे में प्रायः बहुत कम जानकारी दर्ज है और अभी तक इनका चित्रण बहुत सीमित तरीकों से हुआ है। इनके लिए जिन विशेषणों और प्रतीकों का इस्तेमाल होता आ रहा है वे प्रायः पितृसत्तात्मक सोच को ही दर्शाते हैं। ऐसे में हमारी कोशिश यह रही कि हम अपनी नारीवादी कल्पना से इन औरतों को चित्रित करें।

इस प्रदर्शनी की आखिरी कड़ी में प्रस्तुत हैं -
11) बिब्बो
12) बेगम समरु
13) थोइबी देवी
14) बीबी आयशा
15) जेरुषा झिरद

आखिर में इस प्रदर्शनी से यही उम्मीद है कि इसका चित्रांकन हमारी कल्पनाओं, हमारे सपनों, हमारे विश्वासों और हमारी सीखों में नए रंग भरे।

इतिहास से जुड़ी कुछ ऐसी औरतों पर नज़र डालते हैं, जिन्होंने ज्ञान और शिक्षा के अलग मायने गढ़े हैं।इतिहास में ऐसी औरतें हैं...
13/02/2026

इतिहास से जुड़ी कुछ ऐसी औरतों पर नज़र डालते हैं, जिन्होंने ज्ञान और शिक्षा के अलग मायने गढ़े हैं।

इतिहास में ऐसी औरतें हैं जो औपचारिक शिक्षा के दायरे से बाहर रहीं और जिन्होंने अपने ज्ञान से समाज को नई दिशा दिखाई। दरअसल ज्ञान के सृजन का अधिकार किसे है, इसे तय करते हैं सत्ता के ढाँचे। लेकिन जेंडर, जाति, धर्म, यौनिकता, भाषा, क्षेत्र आदि के नियम-कायदों को चुनौती देते हुए ढेर सारी औरतों ने अपनी पहचान बनाई है।

आज इस प्रदर्शनी में हम अलग अलग दौर की जिन औरतों को याद कर रहे हैं, उन्होंने समाज की बनावट पर, स्त्री जीवन की बाध्यताओं पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने अलग-अलग माध्यम से अलग-अलग भाषा में अपनी बात कही है। इस प्रदर्शनी में कई औरतें हैं जिनका स्वर आपको मौखिक परंपराओं में मिलेगा। यह प्रदर्शनी स्त्री-स्वर की विविधता को उभारने की एक छोटी-सी कोशिश है। ये नारीवादी मुद्दे हैं जिनकी समझ औरतों के ज्ञान, शिक्षा और स्वर की विविधता एवं व्यापकता को उभारे बगैर अधूरी है।

इस प्रॉजेक्ट और प्रदर्शनी को तैयार करने की प्रक्रिया में हमें यह भी अहसास हुआ कि इन औरतों के बारे में प्रायः बहुत कम जानकारी दर्ज है और अभी तक इनका चित्रण बहुत सीमित तरीकों से हुआ है। इनके लिए जिन विशेषणों और प्रतीकों का इस्तेमाल होता आ रहा है वे प्रायः पितृसत्तात्मक सोच को ही दर्शाते हैं। ऐसे में हमारी कोशिश यह रही कि हम अपनी नारीवादी कल्पना से इन औरतों को चित्रित करें।

इस प्रदर्शनी की दूसरी कड़ी में प्रस्तुत हैं -
6) लल देद
7) आतुकुरी मोल्ला
8) रानी अब्बक्का
9) सहिफ़ा बानो
10) शेख रंगरेज़िन

आखिर में इस प्रदर्शनी से यही उम्मीद है कि इसका चित्रांकन हमारी कल्पनाओं, हमारे सपनों, हमारे विश्वासों और हमारी सीखों में नए रंग भरे। एक आखिरी कड़ी के लिए बने रहिए हमारे साथ!

महिला शिक्षा, साक्षरता और सशक्तीकरण कार्यक्रम की एक खास और मज़ेदार गतिविधि है - साक्षरता कैंप।5–8 दिनों तक चलने वाला यह ...
07/02/2026

महिला शिक्षा, साक्षरता और सशक्तीकरण कार्यक्रम की एक खास और मज़ेदार गतिविधि है - साक्षरता कैंप।

5–8 दिनों तक चलने वाला यह कैंप महिलाओं को सीखने का पूरा समय, सुरक्षित जगह और एक-दूसरे का साथ देता है।टीचर रोज़ गाँव के सेंटर से महिलाओं को साथ लेकर आती हैं।

कैंप दो तरह से आयोजित होता है -
• डे कैंप, जो सभी महिलाओं की सहूलियत के अनुसार तय की गई जगह पर होता है
• आवासीय कैंप, जो ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया जाता है

खेती-किसानी से फ़ुर्सत के दिनों में प्लान किया गया यह कैंप, पढ़ने-लिखने में रफ़्तार लाने और लगन के साथ सीखने के लिए है। कैंप के दौरान भाषा, गणित और डिजिटल स्किल्स (ऐप चलाना, फोटो खींचना, वीडियो बनाना, कॉन्फ़्रेंस कॉल करना) पर काम किया जाता है।

साथ ही, फिल्मों, कहानियों, खेलों और चर्चाओं के ज़रिए महिलाएँ जाति, जेंडर, यौनिकता, संगठन और अपने ख़ुद के मुद्दों को समझती हैं।

कैंप की अनोखी बात यह है कि हर महिला रोज़ एक पत्र लिखती है - दिनभर की बातचीत और अनुभवों पर। इन पत्रों में झलकती हैं उनकी ज़िंदगी, रिश्ते, संघर्ष, हिंसा के अनुभव, सपने और सुख-दुख।

इन 5–8 दिनों में महिलाएँ सिर्फ़ पढ़ना नहीं सीखतीं, बल्कि एक-दूसरे से गहरा रिश्ता भी बना लेती हैं जो कैंप के आख़िरी दिन गले मिलने और नम आँखों में साफ़ दिखता है।

आइए, इतिहास से जुड़ी कुछ ऐसी औरतों को जानें, जिन्होंने ज्ञान और शिक्षा के अलग मायने गढ़े हैं।इतिहास में ऐसी औरतें हैं जो...
06/02/2026

आइए, इतिहास से जुड़ी कुछ ऐसी औरतों को जानें, जिन्होंने ज्ञान और शिक्षा के अलग मायने गढ़े हैं।

इतिहास में ऐसी औरतें हैं जो औपचारिक शिक्षा के दायरे से बाहर रहीं और जिन्होंने अपने ज्ञान से समाज को नई दिशा दिखाई। दरअसल ज्ञान के सृजन का अधिकार किसे है, इसे तय करते हैं सत्ता के ढाँचे। लेकिन जेंडर, जाति, धर्म, यौनिकता, भाषा, क्षेत्र आदि के नियम-कायदों को चुनौती देते हुए ढेर सारी औरतों ने अपनी पहचान बनाई है।

आज इस प्रदर्शनी में हम अलग अलग दौर की जिन औरतों को याद कर रहे हैं, उन्होंने समाज की बनावट पर, स्त्री जीवन की बाध्यताओं पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने अलग-अलग माध्यम से अलग-अलग भाषा में अपनी बात कही है। इस प्रदर्शनी में कई औरतें हैं जिनका स्वर आपको मौखिक परंपराओं में मिलेगा। यह प्रदर्शनी स्त्री-स्वर की विविधता को उभारने की एक छोटी-सी कोशिश है। ये नारीवादी मुद्दे हैं जिनकी समझ औरतों के ज्ञान, शिक्षा और स्वर की विविधता एवं व्यापकता को उभारे बगैर अधूरी है।

इस प्रॉजेक्ट और प्रदर्शनी को तैयार करने की प्रक्रिया में हमें यह भी अहसास हुआ कि इन औरतों के बारे में प्रायः बहुत कम जानकारी दर्ज है और अभी तक इनका चित्रण बहुत सीमित तरीकों से हुआ है। इनके लिए जिन विशेषणों और प्रतीकों का इस्तेमाल होता आ रहा है वे प्रायः पितृसत्तात्मक सोच को ही दर्शाते हैं। ऐसे में हमारी कोशिश यह रही कि हम अपनी नारीवादी कल्पना से इन औरतों को चित्रित करें।

इस प्रदर्शनी की पहली कड़ी में प्रस्तुत हैं -
1) पुन्निका थेरी
2) कराइक्कल अम्मैयर
3) अमाइबि
4) खाना
5) संत सोयराबाई

आखिर में इस प्रदर्शनी से यही उम्मीद है कि इसका चित्रांकन हमारी कल्पनाओं, हमारे सपनों, हमारे विश्वासों और हमारी सीखों में नए रंग भरे। बाकी दो कड़ियों के लिए बने रहिए हमारे साथ!

Next stop on the Agrima Fellowship journey: our second 6-day residential workshop in Rajgir, Bihar ✨This time, the sessi...
05/02/2026

Next stop on the Agrima Fellowship journey: our second 6-day residential workshop in Rajgir, Bihar ✨

This time, the sessions focused on the themes of gender, sexuality, patriarchy, its intersections with caste, history, region and how to locate oneself in these realities. Developing a critical perspective, with an innate lens of gender and sexuality, is crucial for the fellows’ feminist leadership journey, as they begin to work on chosen social issues in their communities.

Embedding travel in our workshop design and strategically selecting the venues with roots in anti-caste history, addressed the unexplored or misunderstood aspects of Bihar. Our visit to the Bihar Museum, Patna and later to the ruins of the old Nalanda Mahavihara was helpful as it set the context of the pluralist history of Bihar, especially the Girmitiya migration history and the emergence of Buddhism as a rational thought challenging the archaic realities of caste.

In the past 4 months, the fellows worked towards mapping their own areas, recording important places and interacting with diverse groups of people from their areas. This was an intentional exercise in their feminist leadership journey, as looking deeply into the ‘what’ and ‘why’ of their own communities helps them in looking at social issues more holistically and critically. This was quite challenging for our fellows - facing questions, comments and people unwilling to engage. But they found ways to navigate, tried different approaches and eventually were able to create detailed socio-cultural and historical curations of their areas in the form of ‘broadsheets’, bringing in their unique perspectives. The broadsheet presentations were powerful learning experiences for both the fellows and the team.

The workshop concluded with an inspiring session by our friends Priyanka and Laxmi from Jan Jagran Shakti Sangathan (JJSS), Araria, who shared their Sangathan’s journey over the years, the start of their work with young people and the different ways they engage with them.
The discussion helped fellows further strengthen their pre-prepared project ideas.

And finally...the conversations on Women’s Education (स्त्री शिक्षा) move from screen to page. presents you the book tit...
30/01/2026

And finally...the conversations on Women’s Education (स्त्री शिक्षा) move from screen to page.

presents you the book titled "इतिहास रचती आवाज़ें: स्त्री शिक्षा", an addition to the video series on Women's education.
When we began working on a multimedia project in 2021 titled "स्त्री शिक्षा – इतिहास पर एक नज़र”, we realised that women’s voices are given very little space in mainstream narratives of education. Against this backdrop, “इतिहास रचती आवाज़ें : स्त्री शिक्षा” is a book based on different aspects of women's education and their lived experiences. In this process, we looked at both formal and informal education systems, along with oral traditions. The aim was to bring together stories and images of women’s struggles and dreams in one place.
This book is an integral part of a mobile exhibition, which includes 3 videos, posters of 15 women and a quiz card. The objective of the book is to spark curiosity and encourage dialogue with young people on women's education

जब हमने 2021 में "स्त्री शिक्षा – इतिहास पर एक नज़र" नाम की मल्टीमीडिया परियोजना पर काम शुरू किया, तो हमें यह महसूस हुआ कि शिक्षा की मुख्य धारा में स्त्रियों के स्वर को बहुत कम जगह मिलती है। इस पृष्ठभूमि में "इतिहास रचती आवाज़ें : स्त्री शिक्षा" एक ऐसी किताब है जो स्त्री शिक्षा के विभिन्न पहलुओं और औरतों के अनुभवों पर आधारित है। इस प्रक्रिया में हमने औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों शिक्षा व्यवस्था पर निगाह डाली। इसके साथ ही मौखिक परंपराओं को भी देखा। मकसद था कि महिलाओं के संघर्ष और सपनों की कहानियाँ और तस्वीरें एक जगह इकट्ठा हो सकें।
यह किताब एक मोबाइल प्रदर्शनी का अभिन्न हिस्सा है जिसमें तीन वीडियो, 15 महिलाओं के पोस्टर और एक प्रश्नोत्तरी कार्ड हैं। इसका उद्देश्य युवाओं में जिज्ञासा जगाना और स्त्री शिक्षा पर संवाद को प्रोत्साहित करना है।

Address

B 74, Sarvodaya Enclave
Delhi
110017

Opening Hours

Monday 9:30am - 6pm
Tuesday 9:30am - 6pm
Wednesday 9:30am - 6pm
Thursday 9:30am - 6pm
Friday 9:30am - 6pm

Telephone

+911126966334

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