06/12/2025
🇮🇳✨ एक विचारणीय बात…
भारत में एक विदेशी राष्ट्रपति आए हैं।
सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय भोज आयोजित किया है —
यह परंपरा है, प्रोटोकॉल है।
लेकिन सवाल यह भी उठता है—
क्या लोकतंत्र में यह भोज सिर्फ़ सरकार का होना चाहिए,
या राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करना चाहिए?
राजकीय भोज सत्ता और शासन का प्रतीक है —
जहाँ सरकार मेज़बान होती है।
राष्ट्रीय भोज पूरे देश की आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है —
जहाँ मेज़बान सिर्फ़ सरकार नहीं,
बल्कि जनता और राष्ट्रभाव होता है।
महत्वपूर्ण अतिथि चाहे कोई भी हो,
स्वागत सिर्फ़ सत्ता की ओर से नहीं,
राष्ट्र की ओर से होना चाहिए।
✔️ यही सोच इस वाक्य में छिपी है:
सरकार को राजकीय भोज नहीं, राष्ट्रीय भोज देना चाहिए।
क्योंकि लोकतंत्र का सौंदर्य यही है—
सम्मान, प्रतिनिधित्व और सहभागिता सिर्फ़ सरकार के नाम पर नहीं,
राष्ट्र के नाम पर हो। 🇮🇳✨