15/04/2026
पर्पल पेन' और 'कनुप्रिया पब्लिशर्स' द्वारा आयोजित
'एक शाम सीमाब सुल्तानपुरी के नाम' ~
'पर्पल पेन' संस्था एवं 'कनुप्रिया पुब्लिशेर्स' के संयुक्त तत्वावधान में प्रेस क्लब ऑफ इण्डिया में दिनांक 12 अप्रैल, 2026 को 'एक शाम सीमाब सुल्तानपुरी के नाम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उस्ताद शायर श्री सीमाब साहब के हिन्दी ग़ज़ल संग्रह -- आइनों के दरमियां -- के द्वितीय लोकार्पण के पश्चात उनकी शायरी, साहित्यिक यात्रा, और पुस्तक पर अतिथिगण ने वक्तव्य दिया। साथ ही सीमाब साहब के चुनिंदा अशआर और ग़ज़ल पढ़े। श्री सीमाब सुल्तानपुरी ने अपने साहित्यिक जीवन के रोचक क़िस्से साझा किया और अपनी कुछ ग़ज़लें पेश की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर ग़ज़लकार डॉ. केवल कृष्ण ऋषि ने की। प्रसिद्ध कवि श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेई मुख्य अतिथि एवं विख्यात कवयित्री सुश्री ममता किरण विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे। पर्पल पेन संस्था की अध्यक्ष एवं कनुप्रिया पब्लिशर्स की संस्थापक वसुधा कनुप्रिया द्वारा सीमाब सुल्तानपुरी सहित गणमान्य अतिथिगण को 'पर्पल पेन नूर-ए-ग़ज़ल' सम्मान से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम में दिल्ली/एनसीआर से कविगण -- सर्व श्री/सुश्री डॉ. रंजना अग्रवाल, डॉ. रश्मि अग्रवाल, शारदा मदरा, अनिल मीत, प्रमोद शर्मा असर, मिलन सिंह मधुर, शाक़िर देहलवी, अरविन्द असर, डॉ. ख़ुर्रम नूर (वेटेरन), जगदीश मीणा, गीता भाटिया, दिनेश आनंद, लिज़ा ख़ान, ब्रह्म भरद्वाज हशमत, राजीव उपाध्याय कामिल, भूपेंद्र कुमार, ओम प्रकाश शुक्ल, असलम बेताब, गोपाल गुप्ता, दीपक वर्मा, गोल्डी ग़ज़ब, अभिषेक कुमार अम्बर, मोहित नेगी मुन्तज़िर और हेमलता शर्मा की भी उपस्थिति रही। सभी ने मग्न हो कर सीमाब साहब से उनके संस्मरण और ग़ज़ल सुनी। वसुधा 'कनुप्रिया' ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
सीमाब साहब ने बताया कब, कहाँ उन्होंने शायरी की शुरुआत की, कब उन्हें ग़ज़ल के पहला नकद ईनाम मिला, कहाँ और कैसे उनकी अपने उस्ताद साहब से मुलाक़ात हुई; आपने यह भी बताया कि उस्ताद के तौर पर कैसे पाँच दिन में आप बहुत से लोगों को उर्दू पढ़ना सिखा चुके। सीमाब साहब से उनके रुचिकर संस्मरण और अश्आर सुनकर सभी बहुत आनंदित हुए।
डाॅ ऋषि, श्री बाजपेई, सुश्री ममता किरण ने सीमाब साहब की मयारी शायरी और उनकी अज़ीम शख़्सियत के बारे में बताया। सभी ने कनुप्रिया पब्लिशर्स द्वारा सीमाब साहब के हिन्दी ग़ज़ल संग्रह के प्रकाशन पर बधाई दी।
'एक शाम सीमाब सुल्तानपुरी के नाम' एक ख़ूबसूरत, शानदार और यादगार शाम बन सभी को बरसों याद रहेगी।
सादर,
वसुधा कनुप्रिया