06/09/2026
☭ कॉमरेड स्वपन मुखर्जी को लाल सलाम!! ☭
“1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में, वे (कॉमरेड स्वपन मुखर्जी) उन अनेक युवाओं में शामिल थे, जो नक्सलबाड़ी संघर्ष से प्रेरित होकर मार्क्सवादी-लेनिनवादी आंदोलन से जुड़े। कॉलेज में स्नातक के विद्यार्थी रहते हुए ही वे एक प्रतिबद्ध क्रांतिकारी बन गए थे। उन्होंने आज़ादपुर क्षेत्र और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के कर्मचारियों के बीच तथा शिक्षकों और छात्रों के बीच काम किया।
वे पार्टी के एक अत्यंत प्रतिभाशाली संगठनकर्ता थे। वे हमेशा सहजता से उपलब्ध रहते और चर्चा, बहस तथा नए विचारों के लिए खुले रहते थे। साथियों और पार्टी इकाइयों को पार्टी की लाइन समझने और उसे लागू करने में मार्गदर्शन देने के लिए उनके भीतर धैर्य और दृढ़ता का अथाह भंडार था।
दिल्ली, मुंबई, पंजाब और चंडीगढ़ में पार्टी के लिए काम करने वाले अनेक युवा उन्हें विशेष रूप से याद करेंगे, जिन्होंने उनके मार्गदर्शन और सहकारिता से बहुत कुछ सीखा और लाभ उठाया।
एक संगठनकर्ता के रूप में वे सूक्ष्म और सुविचारित योजना बनाने के सिद्धांत के प्रतीक थे। वे सभी योजनाओं को पूरी तरह लागू करने के लिए प्रतिबद्ध रहते और स्वयं आगे बढ़कर नेतृत्व करते थे।
वे धैर्यवान और विनम्र विद्यार्थी तथा श्रोता थे। विभिन्न वैचारिक धाराओं, जन आंदोलनों, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों तथा वामपंथी और लोकतांत्रिक पार्टियों से जुड़े अनेक कार्यकर्ताओं के साथ उनके बीच परस्पर सम्मान और प्रशंसा का संबंध था।
कॉमरेड स्वपन का निधन केवल 𝐂𝐏𝐈(𝐌𝐋) के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आंदोलनों के पूरे व्यापक दायरे के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
लाल सलाम कॉमरेड स्वपन मुखर्जी!
आपकी क्रांतिकारी विरासत को लाल सलाम!"
{मूल रूप से अक्टूबर 2016 में प्रकाशित — लिबरेशन}