28/04/2026
सफाई कर्मचारी सुबह घर से निकलते हैं, और शाम को उनके लौटने की कोई गारंटी नहीं होती।
यह ईरान और अमेरिका के बीच जंग की बात नहीं है। यह हमारे देश के उन लाखों दलित सफाई कर्मचारियों के काम की परिस्थितियों की हकीकत है, जो कॉर्पोरेट बिल्डिंगों, हाउसिंग सोसाइटी और हमारे शहरों नालियों, सेप्टिक टैंकों और सीवरों के भीतर उतरकर उस गंदगी को साफ करते हैं, जिसे समाज पैदा करता है — और उसे साफ़ करवाने के लिए दलित समाज के लोगों को बाध्य करता है।
जयपुर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में एक जूलरी फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक में सोने-चाँदी के कण निकालने के लिए उतारे गए चार मज़दूरों की जहरीली गैस से मौत हो गई। मज़दूर टैंक में उतरने से डर रहे थे, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने उन्हें अतिरिक्त पैसों का लालच देकर मजबूर किया। फरवरी 2025 में दिल्ली के नरेला में दो सफाई कर्मचारियों की मौत हुई — एक निजी ठेकेदार द्वारा नियुक्त ये मज़दूर किसी भी सुरक्षा उपकरण के बिना जहरीले गड्ढे में उतारे गए थे। इसके कुछ दिन बाद कोलकाता के बांटला क्षेत्र में तीन और कर्मचारी — फरज़ेम शेख, हाशी शेख और सुमन सरदार — एक नाले की सफाई के दौरान मैनहोल में बह गए।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2017 से अब तक 620 से अधिक सफाई कर्मचारियों की मौत हुई — जिनमें से 539 परिवारों को पूरा मुआवजा मिला, लेकिन 52 परिवारों को एक भी पैसा नहीं मिला। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में मैनुअल स्कैवेंजिंग और खतरनाक सीवर सफाई पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश दिया। लेकिन इस आदेश के बावजूद फरवरी से मई 2025 के बीच कम से कम 20 और मौतें दर्ज हुईं।
विश्व कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ़ दलित एंड आदिवासी ओर्गानाइजेशंस (नैकडोर) मांग करता है:
1. सफाई कर्मचारियों के काम करने के खतरों का तकनीकी हल किया जाए।
2. सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए उनकी नियमित अन्तराल पर स्वास्थ्य जाँच का प्रावधान हो।
3. जो भी ठेकेदार, उनके नियोक्ता या नगर निगम के अधिकारी उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर, सेप्टिक टैंक, नालियों या सड़कों पर सफाई के काम के लिए बाध्य करे, उनके खिलाफ ऍफ़.आई.आर. दर्ज कर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाए;
4. दुर्घटनावश मौत की स्थिति में उनके परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
5. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को सफाई कर्मचारियों के मसलों को और अपने संवैधानिक उद्देश्यों की पूर्ति के प्रति जवाबदेह बनाया जाए।