Mahadev Shivshakti Sewa Trust:MSST

Mahadev Shivshakti Sewa Trust:MSST The MAHADEV SHIVSHAKTI SEWA TRUST a Trust is a grass root level social welfare organization working directly with the rural poor ....

The MAHADEV SHIVSHAKTI SEWA TRUST a Trust is a grass root level social welfare organization working directly with the rural poor, facilitating the utilization of their skills and knowledge to develop sustainable solutions to poverty. It also initiates efforts in various interconnected socio-economic fields such as education, livelihoods, natural resources, health, women empowerment, and social jus

tice. The focus is in on 'convenience, reliability, continuity and flexible range of services for the poor people in our society.

महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा रक्तदान महादान की एक कोशिश जय शिवशक्ति
08/04/2026

महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा रक्तदान महादान की एक कोशिश

जय शिवशक्ति

हर हर महादेव
09/02/2026

हर हर महादेव

14 नवंबर 2025,  महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट का अवतरण दिवस पर बच्चों के द्वारा आनंद और पौधारोपण का सुखद अनुभव।  जय शिवशक्...
16/11/2025

14 नवंबर 2025, महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट का अवतरण दिवस पर बच्चों के द्वारा आनंद और पौधारोपण का सुखद अनुभव।

जय शिवशक्ति

स्वच्छता अभियान 2 अक्तूबर 2025 को संस्कार गुरुकुलम आवासीय विद्यालय अरेराज में संपन्न करते छात्र  । cleancorp के रूप में ...
11/10/2025

स्वच्छता अभियान 2 अक्तूबर 2025 को संस्कार गुरुकुलम आवासीय विद्यालय अरेराज में संपन्न करते छात्र । cleancorp के रूप में स्वच्छता के प्रहरी बनकर स्वच्छ गाँव स्वच्छ समाज बनाने के दिशा में बच्चों का अद्भुत प्रयास सराहनीय है।

जय शिवशक्ति

महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित यह गुरुकुल पद्धति से संचालित,  अनुशासन का पर्याय अपना विद्यालय संस्कार गुरुकु...
13/08/2025

महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित यह गुरुकुल पद्धति से संचालित, अनुशासन का पर्याय अपना विद्यालय संस्कार गुरुकुलम है जहां दूर दूर कई जिलों से आकर बच्चे अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है पूरा विद्यालय परिवार।

first look for our celebration

12/08/2025

एक बहुत प्रसिद्ध लामा ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि जब मैं पांच वर्ष का था, तो मुझे विद्यापीठ में पढ़ने के लिए भेजा गया।

तब मैं कुल पांच वर्ष का था— रात को मेरे पिता ने मुझसे कहा कि कल सुबह चार बजे तुझे विद्यापीठ भेजा जाएगा। और स्मरण रहे, सुबह तेरी विदाई के लिए न तो तेरी मां होगी और न मैं मौजूद रहूंगा।
मां इसलिए मौजूद नहीं रखी जा सकती कि उसकी आंखों में आंसू आ जाएंगे। और रोती हुई मां को छोड़ कर तू जाएगा तो तेरा मन पीछे की तरफ, पीछे की तरफ होता रहेगा और हमारे घर में ऐसा आदमी कभी पैदा नहीं हुआ जो पीछे की तरफ देखता हो।
मैं इसलिए मौजूद नहीं रहूंगा कि अगर तूने एक भी बार घोड़े पर बैठ कर पीछे की तरफ देख लिया, तो तू फिर मेरा लड़का नहीं रह जाएगा, फिर इस घर का दरवाजा तेरे लिए बंद हो जाएगा।
नौकर तुझे विदा दे देंगे सुबह। और स्मरण रहे, घोड़े पर से पीछे लौट कर मत देखना। हमारे घर में कोई ऐसा आदमी नहीं हुआ जो पीछे की तरफ लौट कर देखता हो। और अगर तूने पीछे की तरफ लौट कर देखा, तो समझ लेना इस घर से फिर तेरा कोई नाता नहीं।

पांच वर्ष के बच्चे से ऐसी अपेक्षा? पांच वर्ष का बच्चा सुबह चार बजे उठा दिया गया और घोड़े पर बिठा दिया गया। नौकरों ने उसे विदा कर दिया।

चलते वक्त नौकर ने भी कहा बेटे होशियारी से! मोड़ तक दिखाई पड़ता है, पिता ऊपर से देखते हैं। मोड़ तक पीछे लौट कर मत देखना। इस घर में सब बच्चे ऐसे ही विदा हुए, लेकिन किसी ने पीछे लौट कर नहीं देखा। और जाते वक्त नौकर ने कहा कि तुम जहां भेजे जा रहे हो वह विद्यापीठ साधारण नहीं है। वहां देश के जो श्रेष्ठतम पुरुष......उस विद्यापीठ से पैदा होते हैं। वहां बड़ी कठिन परीक्षा होगी प्रवेश की। तो चाहे कुछ भी हो जाए, हर कोशिश करना कि उस प्रवेश-परीक्षा में प्रविष्ट हो जाओ। क्योंकि वहां से असफल हो गए तो इस घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं रह जाएगी।

पांच वर्ष का लड़का, उसके साथ ऐसी कठोरता! वह घोड़े पर बैठ गया और उसने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मेरी आंखों में आंसू झरने लगे, लेकिन पीछे लौट कर कैसे देख सकता हूं उस घर को, पिता को......जिस घर को छोड़ कर जाना पड़ रहा है मुझे अनजान में। इतना छोटा हूं। लेकिन लौट कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि मेरे घर में कभी किसी ने लौट कर नहीं देखा। और अगर पिता ने देख लिया तो फिर इस घर से हमेशा के लिए वंचित हो जाऊंगा, इसीलिए कड़ी हिम्मत रखी और आगे की तरफ देखता रहा, पीछे लौट कर नहीं देखा।

इस बच्चे के भीतर कोई चीज पैदा की जा रही है। इस बच्चे के भीतर कोई संकल्प जगाया जा रहा है, जो इसके नाभिकेंद्र को मजबूत करेगा। यह बाप कठोर नहीं है, यह बाप बहुत प्रेम से भरा हुआ है। हमारे सब मां-बाप गलत हैं जो प्रेम से भरे हुए दिखाई पड़ रहे हैं, वे भीतर के सारे केंद्रों को शिथिल किए दे रहे हैं। भीतर कोई बल, कोई संबल खड़ा नहीं किया जा रहा है।

वह स्कूल में पहुंच गया। पांच वर्ष का छोटा सा बच्चा, उसकी क्या सामर्थ्य और क्या हैसियत! स्कूल के प्रधान ने, विद्यापीठ के प्रधान ने कहा कि यहां की प्रवेश-परीक्षा कठिन है। दरवाजे पर आंख बंद करके बैठ जाओ और जब तक मैं वापस न आऊं तब तक आंख मत खोलना, चाहे कुछ भी हो जाए। यही तुम्हारी प्रवेश-परीक्षा है। अगर तुमने आंख खोल ली तो हम वापस लौटा देंगे, क्योंकि जिसका अपने ऊपर इतना भी बल नहीं है कि कुछ देर तक आंख बंद किए बैठा रहे, वह और क्या सीख सकेगा? उसके सीखने का दरवाजा खत्म हो गया, बंद हो गया। फिर तुम उस काम के लायक नहीं हो, फिर तुम जाकर और कुछ करना। पांच वर्ष के छोटे से बच्चे को...!

वह बैठ गया दरवाजे पर आंख बंद करके। मक्खियां उसे सताने लगीं, लेकिन आंख खोल कर नहीं देखना है, क्योंकि आंख खोल कर देखा तो मामला खत्म हो जाएगा। छोटे-मोटे जो दूसरे बच्चे स्कूल में आ-जा रहे हैं, कोई उसे धक्का देने लगा है, कोई उसको परेशान करने लगा है, लेकिन आंख खोल कर नहीं देखना है, क्योंकि आंख खोल कर देखा तो मामला फिर खराब हो जाएगा। और नौकरों ने आते वक्त कहा है कि अगर प्रवेश-परीक्षा में असफल हो गए तो यह घर भी तुम्हारा नहीं।

एक घंटा बीत गया, दो घंटे बीत गए, वह आंख बंद किए बैठा है और डरा हुआ है कि कहीं भूल से भी आंख न खुल जाए और आंख खोलने के सब टेम्पटेशन मौजूद हैं वहां। रास्ते पर लोग चल रहे हैं, बच्चे निकल रहे हैं, मक्खियां सता रही हैं, कोई बच्चे उसे धक्के देते जा रहे हैं, कोई बच्चा कंकड़ मार रहा है। उसे आंख खोलने का सब मन होता है कि देखे......कि अब तक गुरु नहीं आया। एक घंटा, दो घंटा, तीन घंटा, चार घंटा—उसने लिखा है कि छह घंटे!

अंततः छह घंटे बाद गुरु आये और कहा बेटे, तेरी प्रवेश-परीक्षा पूरी हो गई। तू भीतर आ, तू संकल्पवान युवक बनेगा। तेरे भीतर संकल्प है, तेरे भीतर इच्छाशक्ति है, तू जो चाहे कर सकता है। पांच-छह घंटे इस उम्र में आंख बंद करके बैठना बड़ी बात है। उसे छाती से लगा लिया और कहा तू हैरान मत होना, वे बच्चे तुझे सताने नहीं.. सता नहीं रहे थे, वे बच्चे भेजे गए थे। उन्हें कहा गया था कि तुझे थोड़ा परेशान करेंगे ताकि तेरा आंख खोलने का खयाल आ जाए।

उस लामा ने लिखा है : उस वक्त तो मैं सोचता था मेरे साथ बड़ी कठोरता बरती जा रही है, लेकिन अब जीवन के अंत में, मैं धन्यवाद से भरा हूं उन लोगों के प्रति जो मेरे प्रति कठोर थे। उन्होंने मेरे भीतर कुछ सोई हुई चीजें पैदा कर दीं, कोई सोया हुआ बल जग गया।

लेकिन हम उलटा कर रहे हैं—बच्चे को डांटना भी मत, मारना भी मत! और अभी तो सारी दुनिया में कार्पोरल पनिशमेंट बिलकुल बंद कर दिया गया है। बच्चे को कोई चोट नहीं पहुंचाई जा सकती, कोई शारीरिक दंड नहीं दिया जा सकता। यह निहायत बेवकूफी से भरी बात है,

क्योंकि जिन बच्चों को किसी तरह का दंड नहीं दिया जा सकता—दंड अत्यंत प्रेमपूर्ण था, वह शत्रुता नहीं थी बच्चों के प्रति—क्योंकि उनके भीतर सोए हुए कुछ बिन्दु उसी के अंतर्गत जागते थे। उनके भीतर रीढ़ खड़ी होती थी, मजबूत होती थी। उनके भीतर कोई बल पैदा होता था। उनके भीतर क्रोध भी जगता था और अभिमान भी जगता था और उनके भीतर कोई रीढ़ खड़ी होती थी।

#ओशो

📜 संस्कृत दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 📜🌺 महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट 🌺के पावन मार्गदर्शन में वेदपाठी बच्चों का मुण्डन संस...
12/08/2025

📜 संस्कृत दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 📜

🌺 महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट 🌺
के पावन मार्गदर्शन में वेदपाठी बच्चों का मुण्डन संस्कार कराकर उन्हें वेद अध्ययन हेतु प्रेरित किया गया। विदित हो कि ब्राह्मण कुमारों को वेद पढ़ने का सम्पूर्ण खर्च ट्रस्ट के समर्पित सदस्यों द्वारा वहन किया जा रहा है।

अभय कुमार दुबे (सीवान) एवं ऋतिक कुमार पांडेय (गोपालगंज) अरेराज की पावन भूमि संस्कार गुरुकुलम् विद्यालय में रहकर वेद की शिक्षा के साथ-साथ सीबीएसई बोर्ड की शिक्षा भी प्राप्त कर रहे हैं।

आज संस्कृत दिवस के पावन अवसर पर यह उल्लेखनीय है कि संस्कार गुरुकुलम् विद्यालय में सभी बच्चों को संस्कृत में परिचय देने तथा संस्कृत शब्दों के उच्चारण की शक्ति का नियमित अभ्यास कराया जाता है। ॐ की ध्वनि पर प्रतिदिन शोध किया जाता है तथा मंत्रों को विभिन्न तरीकों से सरल बनाकर बोलने के लिए तैयार कराया जाता है।

संस्कार गुरुकुलम् विद्यालय के लिए प्रत्येक दिन संस्कृत दिवस के समान है, क्योंकि यहाँ प्रतिदिन त्रिसंध्या का आयोजन किया जाता है। भाषा को मज़बूत करने के लिए अनुस्वार, मात्राएँ और विसर्ग मात्राओं से बोले जाने वाले शब्दों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

संस्कृत भाषा के तथ्यों को उजागर करने हेतु अंग्रेज़ी–संस्कृत अनुवाद का अभ्यास भी कराया जाता है। वेदपाठियों को देवानंद बाजपेई जी द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

हमारा मंत्र और तंत्र:
"सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥"

जय शिवशक्ति
महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट
COOL*******BUT CREATIVE
कार्यालय- 50-51, GROUND FLOOR, SINGH ADARSH ENCLAVE, PREM NAGAR- III, KIRARI, NEW DELHI 110086
099346 73005

11/08/2025

महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट की टीम द्वारा आज पुच्छरिया बाढ़ का निरीक्षण किया गया।
स्थानीय लोगों से मुलाक़ात कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली गई। ग्रामीणों के अनुसार, उपजाऊ खेत का बड़ा हिस्सा गंडक नदी के कटाव में विलीन हो रहा है।

लगभग 60–70 परिवार ऊँचे स्थानों पर किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
ट्रस्ट की ओर से संबंधित सरकारी विभागों से अनुरोध किया गया है कि इस पर शीघ्र ध्यान दें तथा प्रभावित परिवारों के क्षति-पूर्ति हेतु आवश्यक कदम उठाएँ।

महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट की टीम द्वारा आज पुच्छरिया बाढ़ का निरीक्षण किया गया।स्थानीय लोगों से मुलाक़ात कर बाढ़ की स्...
11/08/2025

महादेव शिवशक्ति सेवा ट्रस्ट की टीम द्वारा आज पुच्छरिया बाढ़ का निरीक्षण किया गया।
स्थानीय लोगों से मुलाक़ात कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली गई। ग्रामीणों के अनुसार, उपजाऊ खेत का बड़ा हिस्सा गंडक नदी के कटाव में विलीन हो रहा है।

लगभग 60–70 परिवार ऊँचे स्थानों पर किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
ट्रस्ट की ओर से संबंधित सरकारी विभागों से अनुरोध किया गया है कि इस पर शीघ्र ध्यान दें तथा प्रभावित परिवारों के क्षति-पूर्ति हेतु आवश्यक कदम उठाएँ।

जय शिवशक्ति

A very special program organised by Dainik Jagran and sponsorship by our respective Mahadev Shivshakti Sewa Trust.  Did....
05/08/2025

A very special program organised by Dainik Jagran and sponsorship by our respective Mahadev Shivshakti Sewa Trust. Did. 26th July 2025 people of Areraj enjoyed cultural program and stage singer performances by Golu Raja and Anupama Yadav.

Nice Moments

जय शिवशक्ति

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