26/09/2026
• डीटीसी प्रबंधन - दिल्ली सरकार होश में आओ, न्यूनतम वेतन 42,000 रुपये प्रतिमाह लागू करो!!
• कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के मांगों की अनदेखी बंद करो!! डराना-धमकाना नहीं चलेगा, आंदोलन के दौरान निकाले गए सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को काम पर वापस रखना होगा!! कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को बिना जांच के काम से निकालने और मनमाने तरीके से जारी किये जा रहे चालान पर रोक लगाओ!!
• निजी कंपनियों को लूट की छूट देना बंद करो, सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सीधे डीटीसी के पे-रोल पर लेना होगा!!
• डीटीसी के अपने बेड़े में कम से कम 15000 बसों को लाना होगा !! ESI-PF, बोनस, छुट्टी समेत तमाम अधिकारों का लाभ सुनिश्चित करो !! निजीकरण-ठेका व्यवस्था पर रोक लगाओ !! समान काम का समान वेतन लागू करो, सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करना होगा!!
दिनांक 25 सितंबर को डीटीसी आईपी एस्टेट मुख्यालय पर 'डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर (ऐक्टू)' ने संघर्षरत कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। डीटीसी के प्रबंध निदेशक को मांगों के संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया।
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर ने प्रबंधन के साथ बातचीत में पाया कि डीटीसी प्रबंधन के सर्वोच्च अधिकारी भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगों को लेकर न सिर्फ उदासीन हैं बल्कि उन्हें कॉन्ट्रैक्ट के चालक और संवाहक की दिक्कतों का कोई इल्म नहीं है। डीटीसी को घाटे में पहुंचाने का श्रेय मजदूरों को नहीं जाता, बल्कि दिल्ली में बैठी भाजपा सरकार और इससे पहले की सरकारों की निजीकरण–आउटसोर्सिंग/ठेका व्यवस्था को जाता है। इन गलत नीतियों के चलते ही आज कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों और निगम की हालत इतनी खराब है। अगर डीटीसी और दिल्ली सरकार के खजाने में इतने पैसे हैं कि टाटा, लीलैंड, स्विच मोबिलिटी को हज़ारों करोड़ दिए जा सकते हैं तो कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को उनके श्रम का उचित मूल्य क्यों नहीं दिया जा सकता ?
2018 की डीटीसी स्ट्राइक हो या उसके बाद हुए तमाम आंदोलन, विपक्ष में रहते हुए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने, समान काम का समान वेतन लागू करने जैसे वादे करने वाले कपिल मिश्रा और मनोज तिवारी आज क्यों चुप हैं ? कपिल मिश्रा तो दिल्ली के श्रम मंत्री हैं, वो चाहें तो न्यूनतम वेतन भी बढ़ सकता है, समान काम का समान वेतन भी मिल सकता है, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने की पॉलिसी भी बनाई जा सकती है पर शायद सरकार में मंत्री बनने के बाद उन्हें डीटीसी कर्मचारियों की सुध लेने की जरूरत नहीं है।
*शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो*
संविधान निर्माता बाबासाहेब आंबेडकर ने हमें शिक्षित बनने, संगठित रहने और संघर्ष करने की शिक्षा दी है। हमें पूर्व में हुए अनुभवों से सीखते हुए ही आगे का संघर्ष खड़ा करना है।
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर आप तमाम आंदोलनरत–जुझारू कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से अपील करती है कि झूठे नेताओं और उनके इशारों पर आंदोलन को गुमराह करने वाले लोगों से सावधान रहें। डीटीसी कर्मचारियों के लंबे आंदोलन में सत्ताधारी दलों के नेताओं के कूदने और आंदोलन को खराब करके भाग जाने का पुराना इतिहास रहा है। हमारे पास समस्या को पहचानकर सभी कर्मचारियों की मांगों को लेकर, एकताबद्ध आंदोलन खड़ा करने के अलावा कोई उपाय नहीं है। बाँटो और राज करो वाली पार्टी और उसके गठबंधन के सहयोगियों से हमें सावधान रहने की जरूरत है।
आप सभी कॉन्ट्रैक्ट के चालक और संवाहक इतने समझदार हैं कि अपना भला–बुरा सोच सकते हैं, इसलिए किसी भी संघर्ष की तैयारी में मौकापरस्त–मजदूर विरोधी पार्टियों और उनके लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। अपनी एकता को मजबूत करिए, डिपो स्तर पर संघर्ष कमिटियों का निर्माण करिए और समस्त कर्मचारियों की मांगों पर संघर्षों को तेज़ करिए, इससे ही आगे का रास्ता निकलेगा।
हाल ही में दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री के बयानों से यह साफ है कि सरकार और प्रबंधन ये समझते हैं कि डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी संगठित नहीं हैं। इन्हें अलग–अलग श्रेणियों में बांटकर किसी भी संघर्ष को तोड़ा जा सकता है। हमें इन्हें गलत साबित करने की जरूरत है।
डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार ये भूल गए हैं कि डीटीसी में वर्षों से काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों ने कैसे बीच की ठेका कंपनियों को भगाकर एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की थी और सीधे डीटीसी के अनुबंध के तहत बहाल किए गए थे। वो ये भी भूल गए हैं कि जब 2018 में वेतन कटौती की गई तब सिर्फ एक दिन की हड़ताल से न सिर्फ पुराना-बढ़ा हुआ वेतन बहाल हुआ बल्कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को करोड़ों के एरियर का भी भुगतान हुआ।
आनेवाले दिनों में अगर हम बंटने की जगह एकता से काम लेंगे, धर्म–संप्रदाय के नाम पर दंगा कराने वाली पार्टियों की जगह मजदूर हितैषी और संघर्षशील संगठन के साथ चलेंगे और झूठे नेताओं के वायदों को सबक के तौर पर याद रखेंगे, तो हमारी राह आसान होगी एवं जीत निश्चित होगी।
लड़ेंगे जीतेंगे !!
इंकलाब जिंदाबाद !!
मजदूर एकता जिंदाबाद !!
– डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर