DTC Workers Unity Centre

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"स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छिपाना नहीं चाहता। लेकिन एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूँ, कि म...
28/09/2026

"स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छिपाना नहीं चाहता। लेकिन एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूँ, कि मैं कैद होकर या पाबन्द होकर जीना नहीं चाहता..."

- शहीद भगत सिंह

शहीद भगत सिंह के सपनों को मंज़िल तक पहुंचाएंगे!!
इंकलाब जिंदाबाद!!

• डीटीसी प्रबंधन - दिल्ली सरकार होश में आओ, न्यूनतम वेतन 42,000 रुपये प्रतिमाह लागू करो!!• कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के मा...
26/09/2026

• डीटीसी प्रबंधन - दिल्ली सरकार होश में आओ, न्यूनतम वेतन 42,000 रुपये प्रतिमाह लागू करो!!

• कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के मांगों की अनदेखी बंद करो!! डराना-धमकाना नहीं चलेगा, आंदोलन के दौरान निकाले गए सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को काम पर वापस रखना होगा!! कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को बिना जांच के काम से निकालने और मनमाने तरीके से जारी किये जा रहे चालान पर रोक लगाओ!!

• निजी कंपनियों को लूट की छूट देना बंद करो, सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सीधे डीटीसी के पे-रोल पर लेना होगा!!

• डीटीसी के अपने बेड़े में कम से कम 15000 बसों को लाना होगा !! ESI-PF, बोनस, छुट्टी समेत तमाम अधिकारों का लाभ सुनिश्चित करो !! निजीकरण-ठेका व्यवस्था पर रोक लगाओ !! समान काम का समान वेतन लागू करो, सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करना होगा!!

दिनांक 25 सितंबर को डीटीसी आईपी एस्टेट मुख्यालय पर 'डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर (ऐक्टू)' ने संघर्षरत कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। डीटीसी के प्रबंध निदेशक को मांगों के संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया।
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर ने प्रबंधन के साथ बातचीत में पाया कि डीटीसी प्रबंधन के सर्वोच्च अधिकारी भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगों को लेकर न सिर्फ उदासीन हैं बल्कि उन्हें कॉन्ट्रैक्ट के चालक और संवाहक की दिक्कतों का कोई इल्म नहीं है। डीटीसी को घाटे में पहुंचाने का श्रेय मजदूरों को नहीं जाता, बल्कि दिल्ली में बैठी भाजपा सरकार और इससे पहले की सरकारों की निजीकरण–आउटसोर्सिंग/ठेका व्यवस्था को जाता है। इन गलत नीतियों के चलते ही आज कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों और निगम की हालत इतनी खराब है। अगर डीटीसी और दिल्ली सरकार के खजाने में इतने पैसे हैं कि टाटा, लीलैंड, स्विच मोबिलिटी को हज़ारों करोड़ दिए जा सकते हैं तो कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को उनके श्रम का उचित मूल्य क्यों नहीं दिया जा सकता ?
2018 की डीटीसी स्ट्राइक हो या उसके बाद हुए तमाम आंदोलन, विपक्ष में रहते हुए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने, समान काम का समान वेतन लागू करने जैसे वादे करने वाले कपिल मिश्रा और मनोज तिवारी आज क्यों चुप हैं ? कपिल मिश्रा तो दिल्ली के श्रम मंत्री हैं, वो चाहें तो न्यूनतम वेतन भी बढ़ सकता है, समान काम का समान वेतन भी मिल सकता है, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने की पॉलिसी भी बनाई जा सकती है पर शायद सरकार में मंत्री बनने के बाद उन्हें डीटीसी कर्मचारियों की सुध लेने की जरूरत नहीं है।

*शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो*

संविधान निर्माता बाबासाहेब आंबेडकर ने हमें शिक्षित बनने, संगठित रहने और संघर्ष करने की शिक्षा दी है। हमें पूर्व में हुए अनुभवों से सीखते हुए ही आगे का संघर्ष खड़ा करना है।

डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर आप तमाम आंदोलनरत–जुझारू कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों से अपील करती है कि झूठे नेताओं और उनके इशारों पर आंदोलन को गुमराह करने वाले लोगों से सावधान रहें। डीटीसी कर्मचारियों के लंबे आंदोलन में सत्ताधारी दलों के नेताओं के कूदने और आंदोलन को खराब करके भाग जाने का पुराना इतिहास रहा है। हमारे पास समस्या को पहचानकर सभी कर्मचारियों की मांगों को लेकर, एकताबद्ध आंदोलन खड़ा करने के अलावा कोई उपाय नहीं है। बाँटो और राज करो वाली पार्टी और उसके गठबंधन के सहयोगियों से हमें सावधान रहने की जरूरत है।
आप सभी कॉन्ट्रैक्ट के चालक और संवाहक इतने समझदार हैं कि अपना भला–बुरा सोच सकते हैं, इसलिए किसी भी संघर्ष की तैयारी में मौकापरस्त–मजदूर विरोधी पार्टियों और उनके लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। अपनी एकता को मजबूत करिए, डिपो स्तर पर संघर्ष कमिटियों का निर्माण करिए और समस्त कर्मचारियों की मांगों पर संघर्षों को तेज़ करिए, इससे ही आगे का रास्ता निकलेगा।
हाल ही में दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री के बयानों से यह साफ है कि सरकार और प्रबंधन ये समझते हैं कि डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी संगठित नहीं हैं। इन्हें अलग–अलग श्रेणियों में बांटकर किसी भी संघर्ष को तोड़ा जा सकता है। हमें इन्हें गलत साबित करने की जरूरत है।
डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार ये भूल गए हैं कि डीटीसी में वर्षों से काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों ने कैसे बीच की ठेका कंपनियों को भगाकर एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की थी और सीधे डीटीसी के अनुबंध के तहत बहाल किए गए थे। वो ये भी भूल गए हैं कि जब 2018 में वेतन कटौती की गई तब सिर्फ एक दिन की हड़ताल से न सिर्फ पुराना-बढ़ा हुआ वेतन बहाल हुआ बल्कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को करोड़ों के एरियर का भी भुगतान हुआ।
आनेवाले दिनों में अगर हम बंटने की जगह एकता से काम लेंगे, धर्म–संप्रदाय के नाम पर दंगा कराने वाली पार्टियों की जगह मजदूर हितैषी और संघर्षशील संगठन के साथ चलेंगे और झूठे नेताओं के वायदों को सबक के तौर पर याद रखेंगे, तो हमारी राह आसान होगी एवं जीत निश्चित होगी।

लड़ेंगे जीतेंगे !!
इंकलाब जिंदाबाद !!
मजदूर एकता जिंदाबाद !!

– डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर

25 सितंबर: चलो डीटीसी मुख्यालय ✊समय : सुबह 10:30 बजे सेस्थान : डीटीसी आई पी मुख्यालय के समक्षपूरे काम का पूरा दाम, वरना ...
23/09/2026

25 सितंबर: चलो डीटीसी मुख्यालय ✊

समय : सुबह 10:30 बजे से
स्थान : डीटीसी आई पी मुख्यालय के समक्ष

पूरे काम का पूरा दाम, वरना होगी नींद हराम!!

डीटीसी प्रबंधन - दिल्ली सरकार होश में आओ,
संघर्षरत कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगें पूरी करो!!

मजदूरी की लूट नहीं चलेगी,
न्यूनतम मजदूरी 42,000 रुपये लागू करो!!

सभी के लिए ESI-PF, ओवरटाइम, छुट्टी,
बोनस जैसे मूलभूत अधिकार की गारंटी करो!!

सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सीधे
डीटीसी के पे-रोल पर बहाल करो!!

मनमाने ढंग से कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को
टर्मिनेट करना बंद करो,
गैरकानूनी रूप से निकाले गए
सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को बहाल करो!!

निजीकरण-ठेका व्यवस्था पर रोक लगाओ,
निजी कंपनियों के ऊपर सरकारी खजाना लुटाना बंद करो!!

जनपरिवहन को सुदृढ़ करने के लिए,
डीटीसी के अपने बसों की संख्या 15,000 तुरंत करो!!

समान काम का समान वेतन लागू करो, सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करना होगा!!

डीटीसी प्रबंधन - दिल्ली सरकार शर्म करो, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के वेतन में अविलम्ब बढ़ोतरी करनी होगी!!

डीटीसी कर्मचारियों की एकता जिंदाबाद!!
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर जिंदाबाद!!

❖◆ 25 सितम्बर 2026: चलो डीटीसी मुख्यालय!! ◆❖💥 सभी आन्दोलनरत कर्मचारियों से तुरंत बिना शर्त वार्ता करो!!  उनकी मांगों को ...
21/09/2026

❖◆ 25 सितम्बर 2026: चलो डीटीसी मुख्यालय!! ◆❖

💥 सभी आन्दोलनरत कर्मचारियों से तुरंत बिना शर्त वार्ता करो!! उनकी मांगों को पूरा करो, किसी भी कर्मचारी पर किसी प्रकार की दंडात्मक कार्यवाही नहीं चलेगी!!

💥 भयंकर महंगाई को देखते हुए मजदूरी दर कम से कम 42,000 रुपये प्रतिमाह तुरंत लागू करो!!

💥 सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए समान काम का समान वेतन लागू करो और सभी को अविलम्ब पक्का करो!!

💥 ईएसआई की सुविधा सभी कर्मचारियों के लिए लागू करो!!

💥 सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को EL-CL और ओवरटाइम /छुट्टी के दिन काम करने का डबल पेमेंट सुनिश्चित करो!!

💥 निजीकरण की नीति पर तुरंत रोक लगाओ!! डीटीसी में अपनी बसों की संख्या 15,000 करो!!

डीटीसी कर्मचारियों की एकता जिंदाबाद!! ✊
इंकलाब जिंदाबाद!! ✊

डीटीसी प्रबंधन – दिल्ली सरकार होश में आओ, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ धोखेबाजी बंद करो !!इंकलाब जिंदाबाद !!मजदूर एकता...
28/03/2026

डीटीसी प्रबंधन – दिल्ली सरकार होश में आओ, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ धोखेबाजी बंद करो !!
इंकलाब जिंदाबाद !!
मजदूर एकता जिंदाबाद !!

23 मार्च, 2026: शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर ने डीटीसी मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विभिन्न डिपो के चालक और संवाहकों के साथ डिम्ट्स/क्लस्टर के कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों ने भी हिस्सा लिया।

डीटीसी जैसे जन-परिवहन के महत्वपूर्ण संस्थान को लगातार डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार निजीकरण की ओर धकेल रहे हैं। मेंटेनेंस-वर्कशॉप का पूरा काम, टाटा और लीलैंड जैसी निजी कंपनियों को पहले ही दिया जा चुका है जिसके कारण निगम को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ी है। अब नई इलेक्ट्रिक बसों में ड्राइविंग का कार्य निजी कंपनी को दिया जा रहा है - जिससे दिल्ली की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से निजी-कंपनियों के हाथों में चली जाएगी। यह न सिर्फ डीटीसी कर्मचारियों के साथ बल्कि दिल्ली की सारी मेहनतकश-गरीब जनता के साथ धोखाधड़ी है।

पिछले कुछ सालों से दिल्ली सरकार और डीटीसी प्रबंधन की गलत नीतियों के चलते दिल्ली परिवहन निगम के सभी कर्मचारी परेशान हैं। निगम का तेजी से निजीकरण किया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगों पर प्रबंधन बिल्कुल चुप है। दिल्ली सरकार और डीटीसी प्रबंधन ये भूल चुके हैं कि कभी दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाली ब्लू-लाइन बसों से बढ़ती दुर्घटनाओं के चलते उन्हें बंद करना पड़ा था। 2012 में हुए ‘निर्भया’ हादसे ने भी सरकारी जन-परिवहन व्यवस्था के महत्त्व को सबके सामने लाया था। बढ़ते प्रदूषण और नई आबादी वाले क्षेत्रों को देखते हुए डीटीसी के विस्तार की बहुत ज्यादा ज़रुरत है। परंतु यह बहुत दुखद है कि अब डीटीसी बसों के संचालन को पूर्ण रूप से प्राइवेट ऑपरेटरों के माध्यम से करने की पूरी तैयारी हो चुकी है।

23 मार्च को हुए विरोध प्रदर्शन के माध्यम से डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार के समक्ष हाल ही में कॉन्ट्रैक्ट चालकों के साथ किए जा रहे अन्याय के खिलाफ ज़बरदस्त तरीके से आवाज उठाई गई। बीस साल से भी लम्बे समय से चालक की ड्यूटी करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नंद नगरी में ट्रेनिंग पूरी होने के बावजूद चालक की ड्यूटी नहीं दी जा रही है। इलेक्ट्रिक बसों में थर्ड पार्टी के माध्यम से चालक भर्ती किये जा रहे हैं और डीटीसी प्रबंधन हमें यह बता रहा है कि ड्राइवर ‘सरप्लस’- यानि एक्स्ट्रा हो गए हैं। यह कर्मचारियों के साथ सरासर धोखा नहीं तो क्या है – डीटीसी के पास अब डिम्ट्स की भी बसें हैं, दिल्ली सरकार ने और इलेक्ट्रिक बसों को लाने की बात कही है – फिर चालक ‘सरप्लस’ कैसे हो गए और उन्हें संवाहक बनाने की ज़रुरत क्या है? डीटीसी के तेज़ी से हो रहे निजीकरण को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आज चालकों के साथ अन्याय हो रहा है, कल संवाहकों की बारी आएगी।
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की लंबे समय से समान काम समान वेतन और पक्का करने की मांग के ऊपर दिल्ली परिवहन निगम और दिल्ली सरकार दोनों चुप हैं। 23 मार्च के विरोध प्रदर्शन में इन दोनों मांगों को प्रमुखता से डीटीसी प्रबंधन के समक्ष रखा गया। इसके अलावा डिम्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों को डीटीसी में नियुक्ति देने के साथ-साथ, स्टाफ बस पुनः चालू करने, डीटीसी कॉलोनी को खाली करने का नोटिस वापस लेने इत्यादि मांगों पर यूनियन के द्वारा डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार को मांग-पत्र भी सौंपा गया।

कार्यक्रम के दौरान यूनियन के द्वारा निम्नलिखित मांगों के साथ मांग-पत्र सौंपा गया –

1. डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट चालकों की नंदनगरी में इलेक्ट्रिक व्हीकल के सम्बन्ध में हुई ट्रेनिंग के बावजूद, डीटीसी उन्हें इलेक्ट्रिक बसों में चालक के रूप में ड्यूटी नहीं दे रही। इसके विपरीत डीटीसी प्रबंधन द्वारा कॉन्ट्रैक्ट चालकों को अब संवाहक की ट्रेनिंग देने की बात कही जा रही है। अतः इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में आउटसोर्स/बाहर से चालक लाना बंद किया जाए और डीटीसी के अनुभवी चालकों से ही इलेक्ट्रिक बस में चालक की ड्यूटी ली जाए।

2. डीटीसी के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। डीटीसी प्रबंधन, प्राइवेट कंपनियों के ऊपर सरकारी पैसा बहाना बंद करे। डीटीसी की अपनी बसों की संख्या कम से कम 11,000 की जाए।

3. सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का किया जाए और समान काम का समान वेतन लागू हो। लम्बे समय से कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की इन दो मांगों को यूनियन द्वारा उठाया जाता रहा है – परन्तु डीटीसी प्रबंधन ने हमेशा कोई न कोई बहाना बनाकर इन मांगों को मानने से इनकार किया है। यह सरासर गलत है। अतः डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार को जल्द से जल्द कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने और पक्का होने तक समान काम समान वेतन देने की मांग करती है।

4. डिम्ट्स के संवाहकों की जगह डीटीसी के चालकों को संवाहक बनाना सरासर गलत है। एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी की जगह दूसरे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को काम पर रखना कानून के हिसाब से भी ठीक नहीं है। अतः हम ये मांग करते हैं कि किसी भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाए और डिम्ट्स के सभी कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों को डीटीसी में नियुक्ति दी जाए।

5. टर्मिनेट किये हुए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को बिना किसी इन्क्वायरी के काम से निकाला जा रहा है। ज़्यादातर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों द्वारा दिए जा रहे स्पष्टीकरण को ‘असंतोषजनक’ बताकर सीधे खारिज कर दिया जा रहा है। यह न सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है बल्कि गैरकानूनी भी है। अतः किसी भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को बिना निष्पक्ष इन्क्वायरी का मौका दिए किसी प्रकार की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए।

6. सभी सेवानिवृत कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

7. स्टाफ बसों के सम्बन्ध में भी प्रबंधन द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद स्टाफ बसों को चालू नहीं किया गया है। अतः स्टाफ बसों को जल्द से जल्द पुनः चलाया जाए। डीटीसी में सफाई का काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पूरी दिहाड़ी का भी भुगतान नहीं किया जा रहा – सफाई कर्मचारियों को पूरे वेतन का भुगतान किया जाए।

8. डीटीसी कॉलोनी को खाली करने का नोटिस वापस लिया जाए। कर्मचारियों से उनके आवास के अधिकार को छीनना बंद किया जाए।

आम आदमी पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान दिल्ली सरकार के मौजूदा श्रम मंत्री कपिल मिश्रा और फ़िलहाल उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी दोनों ही डीटीसी कर्मचारियों के मुद्दों के ऊपर तरह-तरह की बयानबाजी करते थे। आज जब दिल्ली में ट्रिपल-इंजन की सरकार विराजमान है – तो दोनों ही भाजपा नेता डीटीसी कर्मचारियों पूरी तरह से भूल गए हैं। अब जब सरकार में रहते हुए इन नेताओं को कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने का पूरा अधिकार है, तब भाजपा के नेता ऐसे ही गायब हो गए हैं जैसे कभी केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज डीटीसी कर्मचारियों को बेवक़ूफ़ बनाकर गायब हो गए थे।

धर्म-संप्रदाय के नाम पर लोगों के बीच ज़हर घोलकर राज करने के अलावा, शायद ही भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र और दिल्ली की सरकारें मजदूरों के बारे में सोचती हैं। बहुत समझाने के बाद भी जो कॉन्ट्रैक्ट और पक्के कर्मचारी इनसे उम्मीद लगाए बैठे हैं, उन्हें समझ लेना होगा कि 29 अत्यंत ज़रूरी श्रम कानूनों को ख़त्म करके 4 मजदूर-विरोधी लेबर कोड लाने वाली भाजपा सरकार कम से कम मजदूर के हित की बात तो नहीं कर सकती है।

इन लेबर कोड कानूनों के आने के बाद ‘फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट’ कानूनी होगा – मतलब की कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी जीवन भर कॉन्ट्रैक्ट प्रथा के चलते गुलामी जैसे हालातों में ड्यूटी करने को मजबूर होंगे। केंद्र सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट लेबर ऐक्ट, मिनिमम वेजेस ऐक्ट, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट ऐक्ट समेत 29 जरूरी श्रम कानूनों को खत्म करके चार नए कानून लागू करने की घोषणा कर दी है। इन चार नए लेबर कोड कानूनों के लागू होने के बाद कच्चे कर्मचारियों के लिए कोर्ट/ट्रिब्यूनल से राहत मिल पाना और कठिन हो जाएगा। हड़ताल करना और यूनियन बनाना - दोनों ही चीजें कानूनी रूप से मुश्किल हो जाएंगी।

आये दिन कभी बस मार्शल, कभी मोहल्ला क्लीनिक के कर्मचारी तो कभी डिम्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों की छटनी की खबरें आप सभी ने सुनी होगी। डिम्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट संवाहक लगातार अवैध छटनी के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं – इससे पहले मोहल्ला क्लिनिक के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और बस मार्शल उठा रहे थे। आनेवाले दिनों में जब नए लेबर कोड क़ानून लागू हो जाएंगे तो ऐसी छटनी की घटनाएं और ज्यादा घटित होने लगेंगी। ऐसे में डीटीसी के सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को कमर कस लेने की ज़रुरत है – आने वाला कल काफी मुश्किल होने वाला है परंतु यदि हम एकता बनाकर संघर्ष करेंगे तो निश्चित रूप से हमारी जीत होगी।

पानीपत से लेकर सूरत और सिंगरौली इत्यादि जगहों पर जिस तरह से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों ने 12 घंटे के काम, कम मजदूरी और हर रोज़ होनेवाले शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाई है, वो भविष्य के संघर्षों की एक झलक मात्र है। भारी महंगाई और बेरोज़गारी के डर के बीच काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी निश्चित तौर पर पूरी डीटीसी के अन्दर एक सशक्त आन्दोलन खड़ा करेंगे। कार्यक्रम में आनेवाले सभी डीटीसी और डिम्ट्स कर्मचारियों का धन्यवाद।

- पुरुषोत्तम कुमार ओझा
कार्यकारी अध्यक्ष
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर

- नरेश कुमार
महासचिव
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर

📢  23 मार्च: चलो डीटीसी मुख्यालय!! 📢समय : सुबह 10:30 बजे से, स्थान : डीटीसी मुख्यालय, आई पी एस्टेटसाम्राज्यवाद से लड़ते ...
19/03/2026

📢 23 मार्च: चलो डीटीसी मुख्यालय!! 📢

समय : सुबह 10:30 बजे से, स्थान : डीटीसी मुख्यालय, आई पी एस्टेट

साम्राज्यवाद से लड़ते हुए शहीद होनेवाले सभी क्रांतिकारियों की विरासत अमर रहे!!
अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम!!

डीटीसी के निजीकरण पर रोक लगाओ!!
प्राइवेट कंपनियों के ऊपर सरकारी पैसा बहाना बंद करो, डीटीसी की अपनी बसों की संख्या 11,000 करो!!

सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करो, समान काम का समान वेतन लागू करो!!

डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट चालकों को संवाहक बनाना नहीं चलेगा!! थर्ड पार्टी से कॉन्ट्रैक्ट चालकों की बहाली नहीं चलेगी, इलेक्ट्रिक बसों में डीटीसी के चालकों को ड्यूटी दो!!

डिम्ट्स के संवाहकों की जगह डीटीसी के चालकों को संवाहक बनाना बंद करो!!
डिम्ट्स के सभी कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों को डीटीसी में नियुक्ति दो!!

डीटीसी प्रबंधन - दिल्ली सरकार होश में आओ, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ धोखेबाज़ी नहीं चलेगी!!

डीटीसी कॉलोनी को खाली करने का नोटिस वापस लो,
कर्मचारियों के आवास को छीनना बंद करो!!

परिवहन कर्मचारियों की एकता जिंदाबाद!!

12 फरवरी 2026: अखिल भारतीय आम हड़ताल सफल करो!!मज़दूर विरोधी श्रम कोड कानून रद्द करो!!संसद में पेश किया गया बजट-2026 एक स...
02/02/2026

12 फरवरी 2026: अखिल भारतीय आम हड़ताल सफल करो!!
मज़दूर विरोधी श्रम कोड कानून रद्द करो!!

संसद में पेश किया गया बजट-2026 एक सीधा संदेश है कि केंद्र सरकार अपने मज़दूर और जनता विरोधी एजेंडे से जरा भी पीछे नहीं हटेगी।

पेश बजट में कंपनियों को टैक्स की सीधी छूट दी गई है। मालिकों और कंपनियों को केंद्र सरकार से मिल रहे अनुदान में पिछले साल के मुकाबले लगभग 50% इजाफा किया गया है। पब्लिक सेक्टर का आक्रामक निजीकरण कर, जन संपत्ति को निजी कंपनियों के हवाले करने की योजना पेश की गई है।

बेरोज़गारी पर काम करने के लक्ष्य 2047 के हैं और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी जन सुविधाओं पर प्रस्तावित खर्च में भारी कटौती की गई है। केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में जनहित के लिए एक भी प्रस्ताव नहीं है।

इन हालातों में यह बात एकदम साफ है कि मोदी सरकार इस देश के लोगों की मेहनत चूसने की तैयारी में सन '47 से पहले की अंग्रेज़ी सत्ता को भी पीछे छोड़ने के लिए तैयार है।

देश के मज़दूरों-किसानो ने मोदी सरकार की इन जन-विरोधी नीतियों का जवाब, 12 फ़रवरी 2026 को होने जा रही देशव्यापी आम हड़ताल से देने का निर्णय कर लिया है। दिल्ली भर के औद्योगिक क्षेत्रों और मज़दूर बस्तियों में लगातार ज़ोरदार प्रचार चलाया जा रहा है। उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर, समयपुर बादली, नरेला, मुकुंदपुर, संत नगर, झड़ौदा, बुराड़ी से लेकर दक्षिणी दिल्ली के ओखला, कुसुमपुर पहाड़ी और पूर्वी दिल्ली के मानसरोवर पार्क, पटपड़गंज समेत कई इलाकों में पर्चा वितरण, रैली, ई रिक्शा प्रचार को मज़दूरों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

मज़दूर-विरोधी, जनता-विरोधी मोदी सरकार मुर्दाबाद!!
हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे!!
मज़दूर एकता जिंदाबाद!!
ऐक्टू जिंदाबाद!!

साल 2026 अधिकार, बराबरी, सम्मान, अमन और खुशहाली के लिए ज़ोरदार संघर्षों का वर्ष हो !!
01/01/2026

साल 2026 अधिकार, बराबरी, सम्मान, अमन और खुशहाली के लिए ज़ोरदार संघर्षों का वर्ष हो !!

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