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डीटीसी प्रबंधन – दिल्ली सरकार होश में आओ, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ धोखेबाजी बंद करो !!इंकलाब जिंदाबाद !!मजदूर एकता...
28/03/2026

डीटीसी प्रबंधन – दिल्ली सरकार होश में आओ, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ धोखेबाजी बंद करो !!
इंकलाब जिंदाबाद !!
मजदूर एकता जिंदाबाद !!

23 मार्च, 2026: शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर ने डीटीसी मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विभिन्न डिपो के चालक और संवाहकों के साथ डिम्ट्स/क्लस्टर के कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों ने भी हिस्सा लिया।

डीटीसी जैसे जन-परिवहन के महत्वपूर्ण संस्थान को लगातार डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार निजीकरण की ओर धकेल रहे हैं। मेंटेनेंस-वर्कशॉप का पूरा काम, टाटा और लीलैंड जैसी निजी कंपनियों को पहले ही दिया जा चुका है जिसके कारण निगम को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ी है। अब नई इलेक्ट्रिक बसों में ड्राइविंग का कार्य निजी कंपनी को दिया जा रहा है - जिससे दिल्ली की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से निजी-कंपनियों के हाथों में चली जाएगी। यह न सिर्फ डीटीसी कर्मचारियों के साथ बल्कि दिल्ली की सारी मेहनतकश-गरीब जनता के साथ धोखाधड़ी है।

पिछले कुछ सालों से दिल्ली सरकार और डीटीसी प्रबंधन की गलत नीतियों के चलते दिल्ली परिवहन निगम के सभी कर्मचारी परेशान हैं। निगम का तेजी से निजीकरण किया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगों पर प्रबंधन बिल्कुल चुप है। दिल्ली सरकार और डीटीसी प्रबंधन ये भूल चुके हैं कि कभी दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाली ब्लू-लाइन बसों से बढ़ती दुर्घटनाओं के चलते उन्हें बंद करना पड़ा था। 2012 में हुए ‘निर्भया’ हादसे ने भी सरकारी जन-परिवहन व्यवस्था के महत्त्व को सबके सामने लाया था। बढ़ते प्रदूषण और नई आबादी वाले क्षेत्रों को देखते हुए डीटीसी के विस्तार की बहुत ज्यादा ज़रुरत है। परंतु यह बहुत दुखद है कि अब डीटीसी बसों के संचालन को पूर्ण रूप से प्राइवेट ऑपरेटरों के माध्यम से करने की पूरी तैयारी हो चुकी है।

23 मार्च को हुए विरोध प्रदर्शन के माध्यम से डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार के समक्ष हाल ही में कॉन्ट्रैक्ट चालकों के साथ किए जा रहे अन्याय के खिलाफ ज़बरदस्त तरीके से आवाज उठाई गई। बीस साल से भी लम्बे समय से चालक की ड्यूटी करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नंद नगरी में ट्रेनिंग पूरी होने के बावजूद चालक की ड्यूटी नहीं दी जा रही है। इलेक्ट्रिक बसों में थर्ड पार्टी के माध्यम से चालक भर्ती किये जा रहे हैं और डीटीसी प्रबंधन हमें यह बता रहा है कि ड्राइवर ‘सरप्लस’- यानि एक्स्ट्रा हो गए हैं। यह कर्मचारियों के साथ सरासर धोखा नहीं तो क्या है – डीटीसी के पास अब डिम्ट्स की भी बसें हैं, दिल्ली सरकार ने और इलेक्ट्रिक बसों को लाने की बात कही है – फिर चालक ‘सरप्लस’ कैसे हो गए और उन्हें संवाहक बनाने की ज़रुरत क्या है? डीटीसी के तेज़ी से हो रहे निजीकरण को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आज चालकों के साथ अन्याय हो रहा है, कल संवाहकों की बारी आएगी।
कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की लंबे समय से समान काम समान वेतन और पक्का करने की मांग के ऊपर दिल्ली परिवहन निगम और दिल्ली सरकार दोनों चुप हैं। 23 मार्च के विरोध प्रदर्शन में इन दोनों मांगों को प्रमुखता से डीटीसी प्रबंधन के समक्ष रखा गया। इसके अलावा डिम्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों को डीटीसी में नियुक्ति देने के साथ-साथ, स्टाफ बस पुनः चालू करने, डीटीसी कॉलोनी को खाली करने का नोटिस वापस लेने इत्यादि मांगों पर यूनियन के द्वारा डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार को मांग-पत्र भी सौंपा गया।

कार्यक्रम के दौरान यूनियन के द्वारा निम्नलिखित मांगों के साथ मांग-पत्र सौंपा गया –

1. डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट चालकों की नंदनगरी में इलेक्ट्रिक व्हीकल के सम्बन्ध में हुई ट्रेनिंग के बावजूद, डीटीसी उन्हें इलेक्ट्रिक बसों में चालक के रूप में ड्यूटी नहीं दे रही। इसके विपरीत डीटीसी प्रबंधन द्वारा कॉन्ट्रैक्ट चालकों को अब संवाहक की ट्रेनिंग देने की बात कही जा रही है। अतः इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में आउटसोर्स/बाहर से चालक लाना बंद किया जाए और डीटीसी के अनुभवी चालकों से ही इलेक्ट्रिक बस में चालक की ड्यूटी ली जाए।

2. डीटीसी के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। डीटीसी प्रबंधन, प्राइवेट कंपनियों के ऊपर सरकारी पैसा बहाना बंद करे। डीटीसी की अपनी बसों की संख्या कम से कम 11,000 की जाए।

3. सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का किया जाए और समान काम का समान वेतन लागू हो। लम्बे समय से कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की इन दो मांगों को यूनियन द्वारा उठाया जाता रहा है – परन्तु डीटीसी प्रबंधन ने हमेशा कोई न कोई बहाना बनाकर इन मांगों को मानने से इनकार किया है। यह सरासर गलत है। अतः डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर डीटीसी प्रबंधन और दिल्ली सरकार को जल्द से जल्द कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने और पक्का होने तक समान काम समान वेतन देने की मांग करती है।

4. डिम्ट्स के संवाहकों की जगह डीटीसी के चालकों को संवाहक बनाना सरासर गलत है। एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी की जगह दूसरे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को काम पर रखना कानून के हिसाब से भी ठीक नहीं है। अतः हम ये मांग करते हैं कि किसी भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाए और डिम्ट्स के सभी कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों को डीटीसी में नियुक्ति दी जाए।

5. टर्मिनेट किये हुए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को बिना किसी इन्क्वायरी के काम से निकाला जा रहा है। ज़्यादातर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों द्वारा दिए जा रहे स्पष्टीकरण को ‘असंतोषजनक’ बताकर सीधे खारिज कर दिया जा रहा है। यह न सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है बल्कि गैरकानूनी भी है। अतः किसी भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को बिना निष्पक्ष इन्क्वायरी का मौका दिए किसी प्रकार की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए।

6. सभी सेवानिवृत कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

7. स्टाफ बसों के सम्बन्ध में भी प्रबंधन द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद स्टाफ बसों को चालू नहीं किया गया है। अतः स्टाफ बसों को जल्द से जल्द पुनः चलाया जाए। डीटीसी में सफाई का काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पूरी दिहाड़ी का भी भुगतान नहीं किया जा रहा – सफाई कर्मचारियों को पूरे वेतन का भुगतान किया जाए।

8. डीटीसी कॉलोनी को खाली करने का नोटिस वापस लिया जाए। कर्मचारियों से उनके आवास के अधिकार को छीनना बंद किया जाए।

आम आदमी पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान दिल्ली सरकार के मौजूदा श्रम मंत्री कपिल मिश्रा और फ़िलहाल उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी दोनों ही डीटीसी कर्मचारियों के मुद्दों के ऊपर तरह-तरह की बयानबाजी करते थे। आज जब दिल्ली में ट्रिपल-इंजन की सरकार विराजमान है – तो दोनों ही भाजपा नेता डीटीसी कर्मचारियों पूरी तरह से भूल गए हैं। अब जब सरकार में रहते हुए इन नेताओं को कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने का पूरा अधिकार है, तब भाजपा के नेता ऐसे ही गायब हो गए हैं जैसे कभी केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज डीटीसी कर्मचारियों को बेवक़ूफ़ बनाकर गायब हो गए थे।

धर्म-संप्रदाय के नाम पर लोगों के बीच ज़हर घोलकर राज करने के अलावा, शायद ही भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र और दिल्ली की सरकारें मजदूरों के बारे में सोचती हैं। बहुत समझाने के बाद भी जो कॉन्ट्रैक्ट और पक्के कर्मचारी इनसे उम्मीद लगाए बैठे हैं, उन्हें समझ लेना होगा कि 29 अत्यंत ज़रूरी श्रम कानूनों को ख़त्म करके 4 मजदूर-विरोधी लेबर कोड लाने वाली भाजपा सरकार कम से कम मजदूर के हित की बात तो नहीं कर सकती है।

इन लेबर कोड कानूनों के आने के बाद ‘फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट’ कानूनी होगा – मतलब की कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी जीवन भर कॉन्ट्रैक्ट प्रथा के चलते गुलामी जैसे हालातों में ड्यूटी करने को मजबूर होंगे। केंद्र सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट लेबर ऐक्ट, मिनिमम वेजेस ऐक्ट, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट ऐक्ट समेत 29 जरूरी श्रम कानूनों को खत्म करके चार नए कानून लागू करने की घोषणा कर दी है। इन चार नए लेबर कोड कानूनों के लागू होने के बाद कच्चे कर्मचारियों के लिए कोर्ट/ट्रिब्यूनल से राहत मिल पाना और कठिन हो जाएगा। हड़ताल करना और यूनियन बनाना - दोनों ही चीजें कानूनी रूप से मुश्किल हो जाएंगी।

आये दिन कभी बस मार्शल, कभी मोहल्ला क्लीनिक के कर्मचारी तो कभी डिम्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों की छटनी की खबरें आप सभी ने सुनी होगी। डिम्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट संवाहक लगातार अवैध छटनी के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं – इससे पहले मोहल्ला क्लिनिक के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और बस मार्शल उठा रहे थे। आनेवाले दिनों में जब नए लेबर कोड क़ानून लागू हो जाएंगे तो ऐसी छटनी की घटनाएं और ज्यादा घटित होने लगेंगी। ऐसे में डीटीसी के सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को कमर कस लेने की ज़रुरत है – आने वाला कल काफी मुश्किल होने वाला है परंतु यदि हम एकता बनाकर संघर्ष करेंगे तो निश्चित रूप से हमारी जीत होगी।

पानीपत से लेकर सूरत और सिंगरौली इत्यादि जगहों पर जिस तरह से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों ने 12 घंटे के काम, कम मजदूरी और हर रोज़ होनेवाले शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाई है, वो भविष्य के संघर्षों की एक झलक मात्र है। भारी महंगाई और बेरोज़गारी के डर के बीच काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी निश्चित तौर पर पूरी डीटीसी के अन्दर एक सशक्त आन्दोलन खड़ा करेंगे। कार्यक्रम में आनेवाले सभी डीटीसी और डिम्ट्स कर्मचारियों का धन्यवाद।

- पुरुषोत्तम कुमार ओझा
कार्यकारी अध्यक्ष
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर

- नरेश कुमार
महासचिव
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर

📢  23 मार्च: चलो डीटीसी मुख्यालय!! 📢समय : सुबह 10:30 बजे से, स्थान : डीटीसी मुख्यालय, आई पी एस्टेटसाम्राज्यवाद से लड़ते ...
19/03/2026

📢 23 मार्च: चलो डीटीसी मुख्यालय!! 📢

समय : सुबह 10:30 बजे से, स्थान : डीटीसी मुख्यालय, आई पी एस्टेट

साम्राज्यवाद से लड़ते हुए शहीद होनेवाले सभी क्रांतिकारियों की विरासत अमर रहे!!
अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम!!

डीटीसी के निजीकरण पर रोक लगाओ!!
प्राइवेट कंपनियों के ऊपर सरकारी पैसा बहाना बंद करो, डीटीसी की अपनी बसों की संख्या 11,000 करो!!

सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करो, समान काम का समान वेतन लागू करो!!

डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट चालकों को संवाहक बनाना नहीं चलेगा!! थर्ड पार्टी से कॉन्ट्रैक्ट चालकों की बहाली नहीं चलेगी, इलेक्ट्रिक बसों में डीटीसी के चालकों को ड्यूटी दो!!

डिम्ट्स के संवाहकों की जगह डीटीसी के चालकों को संवाहक बनाना बंद करो!!
डिम्ट्स के सभी कॉन्ट्रैक्ट संवाहकों को डीटीसी में नियुक्ति दो!!

डीटीसी प्रबंधन - दिल्ली सरकार होश में आओ, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ धोखेबाज़ी नहीं चलेगी!!

डीटीसी कॉलोनी को खाली करने का नोटिस वापस लो,
कर्मचारियों के आवास को छीनना बंद करो!!

परिवहन कर्मचारियों की एकता जिंदाबाद!!

12 फरवरी 2026: अखिल भारतीय आम हड़ताल सफल करो!!मज़दूर विरोधी श्रम कोड कानून रद्द करो!!संसद में पेश किया गया बजट-2026 एक स...
02/02/2026

12 फरवरी 2026: अखिल भारतीय आम हड़ताल सफल करो!!
मज़दूर विरोधी श्रम कोड कानून रद्द करो!!

संसद में पेश किया गया बजट-2026 एक सीधा संदेश है कि केंद्र सरकार अपने मज़दूर और जनता विरोधी एजेंडे से जरा भी पीछे नहीं हटेगी।

पेश बजट में कंपनियों को टैक्स की सीधी छूट दी गई है। मालिकों और कंपनियों को केंद्र सरकार से मिल रहे अनुदान में पिछले साल के मुकाबले लगभग 50% इजाफा किया गया है। पब्लिक सेक्टर का आक्रामक निजीकरण कर, जन संपत्ति को निजी कंपनियों के हवाले करने की योजना पेश की गई है।

बेरोज़गारी पर काम करने के लक्ष्य 2047 के हैं और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी जन सुविधाओं पर प्रस्तावित खर्च में भारी कटौती की गई है। केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में जनहित के लिए एक भी प्रस्ताव नहीं है।

इन हालातों में यह बात एकदम साफ है कि मोदी सरकार इस देश के लोगों की मेहनत चूसने की तैयारी में सन '47 से पहले की अंग्रेज़ी सत्ता को भी पीछे छोड़ने के लिए तैयार है।

देश के मज़दूरों-किसानो ने मोदी सरकार की इन जन-विरोधी नीतियों का जवाब, 12 फ़रवरी 2026 को होने जा रही देशव्यापी आम हड़ताल से देने का निर्णय कर लिया है। दिल्ली भर के औद्योगिक क्षेत्रों और मज़दूर बस्तियों में लगातार ज़ोरदार प्रचार चलाया जा रहा है। उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर, समयपुर बादली, नरेला, मुकुंदपुर, संत नगर, झड़ौदा, बुराड़ी से लेकर दक्षिणी दिल्ली के ओखला, कुसुमपुर पहाड़ी और पूर्वी दिल्ली के मानसरोवर पार्क, पटपड़गंज समेत कई इलाकों में पर्चा वितरण, रैली, ई रिक्शा प्रचार को मज़दूरों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

मज़दूर-विरोधी, जनता-विरोधी मोदी सरकार मुर्दाबाद!!
हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे!!
मज़दूर एकता जिंदाबाद!!
ऐक्टू जिंदाबाद!!

साल 2026 अधिकार, बराबरी, सम्मान, अमन और खुशहाली के लिए ज़ोरदार संघर्षों का वर्ष हो !!
01/01/2026

साल 2026 अधिकार, बराबरी, सम्मान, अमन और खुशहाली के लिए ज़ोरदार संघर्षों का वर्ष हो !!

28.09.2025 : अमर शहीद भगत सिंह के जन्मदिवस और शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी के शहादत दिवस पर दिनांक 28 सितंबर को दिल्ली क...
29/09/2025

28.09.2025 : अमर शहीद भगत सिंह के जन्मदिवस और शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी के शहादत दिवस पर दिनांक 28 सितंबर को दिल्ली के विभिन्न इलाकों में काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने “ठेका श्रमिकों का शोषण और संघर्ष की दशा और दिशा” विषय पर नरेला स्थित 'श्रमिक भवन' में एक परिचर्चा का आयोजन किया. मीटिंग का संचालन भाकपा(माले) दिल्ली राज्य कमिटी से कामरेड सुरेन्द्र पांचाल. ऐक्टू दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष कामरेड वीकेएस गौतम, कामरेड अपूर्वा व अन्य साथियों ने अपनी बात रखते हुए दिल्ली में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की मांगों पर संघर्ष तेज़ करने की बात की. कार्यक्रम में आये कई मजदूर साथियों ने ठेका-प्रथा के शोषण पर अपनी बातें रखी.
दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों और केंद्र सरकार की अलग-अलग संस्थाओं में काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की हालत लगातार खराब होते जा रही है. भारत में एक ऐसी बीमारी ने मजदूरों को परेशान कर रखा है, जिसके चलते आज़ाद देश में रहते हुए भी मजदूर वर्ग गुलामी के दंश को झेलने के लिए मजबूर है. ठेकेदारी प्रथा - जहां मजदूरों के सारे अधिकार छीन लिए जाते हैं, न तो पूरा वेतन मिलता है और न ही नौकरी की गारंटी. मजदूरों-गरीबों के वोटों से चुनकर आई सरकार संसद में बैठकर, मजदूर-विरोधी ‘श्रम कोड क़ानून’ पास कर रही है और रेल, सड़क, डिफेंस, स्टील, कोयला, बिजली इत्यादि जैसे ज़रूरी क्षेत्रों को निजी-पूंजीपतियों के हाथ बेच रही है. तेज़ी से हो रहे निजीकरण के कारण अब दिल्ली के नौजवानों को पक्की नौकरी की जगह केवल कॉन्ट्रैक्ट की गुलामी करनी पड़ रही है. कॉन्ट्रैक्ट बदलने पर या तो कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की छटनी की जा रही है या उनसे घूस लिया जा रहा है. कई मालिक और कंपनियां - तो मजदूरों को ESI, PF, छुट्टी या बोनस देने से मना कर देते हैं. ऐसी स्थिति में अगर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी, अपने मैनेजमेंट के सामने कोई छोटी सी भी मांग रखता है तो - उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. दिल्ली सरकार के श्रम विभाग में न्याय के लिए गुहार लगाने पर भी कोई फायदा नहीं होता. बोनस और मेडिकल/पेंशन जैसे मूलभूत अधिकार जो पहले से ही पुराने श्रम क़ानूनों में हैं - उसे भी मालिक और सरकार की मिलीभगत से छीन लिया जाता है. जिस काम को कोई सरकारी कंपनी या विभाग सीधे करवा सकते थे, उसके लिए कभी एक तो कई बार एक से ज्यादा लालची ठेकेदारों को ठेका दे दिया जाता है.
ऐसे दौर में जब संघ-भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार तेज़ी से मजदूरों और किसानों पर अपने हमले बढ़ा रही है – हमें सांप्रदायिक-फासीवादी ताकतों के खिलाफ, भगत सिंह और शंकर गुहा नियोगी जैसे अमर शहीदों से सीख लेते हुए हर संभव प्रयास करने की ज़रुरत है. जैसा कि पाश अपनी कविता की पंक्तियों में कहते हैं -

और हम लड़ेंगे साथी
हम लड़ेंगे कि लड़े बग़ैर कुछ नहीं मिलता
हम लड़ेंगे कि अब तक लड़े क्यों नहीं
हम लड़ेंगे अपनी सज़ा कबूलने के लिए
लड़ते हुए मर जाने वाले की
याद ज़िन्दा रखने के लिए
हम लड़ेंगे

ये लड़ाई निश्चित तौर पर हमें जीतनी होगी – और हम ज़रूर जीतेंगे.
कामरेड शंकर गुहा नियोगी को लाल सलाम !!
शहीद भगत सिंह अमर रहें !!
इन्कलाब जिंदाबाद !!
मजदूर एकता जिंदाबाद !!

"हमें अपने राजनीतिक लोकतंत्र को सामाजिक लोकतंत्र में भी बदलना होगा। जब तक सामाजिक लोकतंत्र नहीं होगा, तब तक राजनीतिक लोक...
14/04/2025

"हमें अपने राजनीतिक लोकतंत्र को सामाजिक लोकतंत्र में भी बदलना होगा। जब तक सामाजिक लोकतंत्र नहीं होगा, तब तक राजनीतिक लोकतंत्र टिक नहीं सकता।"

- बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में दिए गए भाषण से (26 नवंबर, 1949)

8 मार्च : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जिंदाबाद!!कई दशकों पहले आज ही के दिन महिला मज़दूरों ने दुनियाभर की महिलाओं के अधिकार...
08/03/2025

8 मार्च : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जिंदाबाद!!

कई दशकों पहले आज ही के दिन महिला मज़दूरों ने दुनियाभर की महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई थी।
आज डीटीसी समेत दिल्ली भर की कामकाजी महिलाओं के संघर्षों को तेज़ करने की ज़रूरत है।

• डीटीसी की सभी महिला कर्मचारियों को उनके आवास के निकट ड्यूटी दो !!
• डीटीसी समेत दिल्ली के सभी बस डिपो/टर्मिनल पर महिला कर्मचारियों के लिए अलग से रेस्ट रूम, साफ़-शौचालय, क्रेच-सुविधा उपलब्ध कराओ !!
• गर्भावस्था एवं माहवारी के दौरान सवेतन छुट्टी देना होगा !!
• मातृत्व अवकाश अधिनियम को सख्ती से लागू करो !!
• डीटीसी में PoSH अधिनियम { महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम 2013} के प्रावधानों को सख्ती से लागू करो !!
• डीटीसी में महिलाओं की समस्याओं व लैंगिक-भेदभाव व शोषण को रोकने के लिए जेंडर सेल का निर्माण करो !!
• सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करो, समान काम का समान वेतन लागू करो !!

इंकलाब जिंदाबाद!!
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर जिंदाबाद!!
ऐक्टू जिंदाबाद!!

24 फरवरी 2025– चलो तालकटोरा !!ऐक्टू के 11वें अखिल भारतीय सम्मेलन को सफल करो !!मजदूर–किसान विरोधी सभी कानूनों को वापस लो ...
16/02/2025

24 फरवरी 2025– चलो तालकटोरा !!

ऐक्टू के 11वें अखिल भारतीय सम्मेलन को सफल करो !!

मजदूर–किसान विरोधी सभी कानूनों को वापस लो !!

सांप्रदायिक नफरत–हिंसा की राजनीति नहीं चलेगी, लोकतंत्र और संविधान पर हमला बंद करो !!

सभी मजदूरों के लिए जीने लायक वेतन और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी करो !!

कॉन्ट्रैक्ट प्रथा खत्म करो !!
सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करो!!

इंकलाब जिंदाबाद !!
मजदूर एकता जिंदाबाद !!
ऐक्टू जिंदाबाद !!

वेतन बढ़ोतरी से संबंधित घोषणा : कहीं कर्मचारी फिर से मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच फुटबॉल न बन जाएँ - कर्मचारियों को स...
10/12/2024

वेतन बढ़ोतरी से संबंधित घोषणा : कहीं कर्मचारी फिर से मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच फुटबॉल न बन जाएँ - कर्मचारियों को सतर्क रहने की ज़रुरत !!

दिल्ली सरकार, निजीकरण और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करने को लेकर अपना रुख स्पष्ट करे : डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर (ऐक्टू) द्वारा कर्मचारियों के संघर्षों को तेज़ करने के लिए, दिनांक 2 दिसम्बर से चलाये जा रहे गेट मीटिंग में हिस्सा ज़रूर लें

कुछ दिनों पहले ही डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट चालक साथियों के लिए इलेक्ट्रिक बस चलाने की ट्रेनिंग शुरू की गई है. हमारी यूनियन - डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर(ऐक्टू) – ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाते हुए जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था और कर्मचारियों के बीच प्रचार अभियान भी चलाया था. आप सभी साथियों को संघर्ष में मिली इस जीत की बधाई.
कल दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा की है. आप सभी साथियों – विशेषकर महिला कर्मचारियों के जुझारू संघर्ष के कारण ही यह संभव हो सका है. परन्तु हम सभी को ये याद रहना चाहिए कि घोषणाओं से किसी का पेट नहीं भरता – वेतन को लेकर हुई इस घोषणा के मूर्त रूप लेने तक हमें संघर्ष जारी रखना होगा. इससे पहले भी दिल्ली में CM-LG के बीच चल रही खींचातानी के चलते दिल्ली में अनेक फैसले रुके हुए हैं. अगर इस बार भी ऐसा हुआ तो हमें सावधान रहने की ज़रुरत है.

डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर ने पहले भी इस बात को जोर देकर कहा है कि – कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करना, समान काम का समान वेतन, डीटीसी की अपनी बसों की संख्या में वृद्धि और डीटीसी के निजीकरण पर रोक लगाना – ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें सबसे पहले उठाने की ज़रुरत है. बीस-बीस साल से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों को बेसिक-डी.ए. देकर फुसलाने की कोशिश – वो भी ठीक दिल्ली चुनाव से पहले, इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि कर्मचारियों में व्याप्त गुस्से को कुछ देर के लिए (कम से कम दिल्ली चुनाव तक) शांत करने के इरादे से ही दिल्ली की मुख्यमंत्री ने ऐसी घोषणा की है. हम सभी इस बात से वाकिफ हैं कि टाटा और लीलैंड जैसी कंपनियों को भुगतान करते-करते निगम की हालत पतली हो चुकी है. इसके बावजूद निगम को लगातार निजीकरण की ओर धकेलने की कोशिश यह स्पष्ट करता है कि बड़े पूंजीपतियों और सरकारों के बीच घनिष्टता काफी आगे बढ़ चुकी है.
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर (ऐक्टू) दिनांक 2 दिसम्बर से चल रहे गेट मीटिंग में लगातार संघर्षों को तेज़ करने के लिए कर्मचारियों के बीच जा रही है. हमारी कोशिश रहेगी कि 15 दिसम्बर तक सभी डिपो पर गेट मीटिंग की जाए. आप सभी साथियों से अपील है कि इस अभियान में हमारा साथ दें.

मजदूर एकता जिंदाबाद !!
सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करो !!
डीटीसी के निजीकरण पर रोक लगाओ !!
डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर जिंदाबाद !!

भ्रष्ट प्रबंधन और उदासीन सरकार से परेशान कर्मचारियों से अपील - आइये डीटीसी के निजीकरण और ठेका-व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष त...
23/11/2024

भ्रष्ट प्रबंधन और उदासीन सरकार से परेशान कर्मचारियों से अपील - आइये डीटीसी के निजीकरण और ठेका-व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !!

2 दिसंबर 2024 से सभी डिपो पर होनेवाले गेट मीटिंग में हिस्सेदारी अवश्य करें।

डीटीसी के निजीकरण पर रोक लगाओ!!

सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करो!!

डीटीसी कर्मचारियों की एकता जिंदाबाद!!

डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर जिंदाबाद!!

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Delhi
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