अखिल भारतीय संस्कृत छात्र परिषद

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अखिल भारतीय संस्कृत छात्र परिषद Sanskrit student Union

07/07/2026

राष्ट्रपति, इंडोनेशिया के द्वारा संस्कृत के लिए दिया गया आज का वक्तव्य।

। जयतु संस्कृतम्।
Narendra Modi
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17/04/2026
03/02/2026

श्रद्धांजलि: आधुनिक भारत के ऋषि प्रो. विनीत चैतन्य जी (1944–2026)

अत्यंत भारी मन और अगाध श्रद्धा के साथ हमें यह कहना पड़ रहा है कि भारत में संगणकीय भाषाविज्ञान (Computational Linguistics) के जनक, मनीषी और हम सबके मार्गदर्शक प्रो. विनीत चैतन्य जी अब हमारे बीच नहीं रहे। 31 जनवरी 2026 की रात 8:26 बजे, 81 वर्ष की आयु में रतलाम (म.प्र.) स्थित अपने पैतृक निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनका जाना केवल एक वैज्ञानिक का जाना नहीं है, बल्कि उस सेतु का टूट जाना है जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के बीच मजबूती से खड़ा था।

1. भाषाविज्ञान एवं संगणक भाषा के पुरोधा: 'संगणकीय पाणिनीय व्याकरण' के मर्मज्ञ प्रो. चैतन्य जी ने उस दौर में भारतीय भाषाओं के लिए भारत में NLP (Natural Language Processing) में अनुसंधान की नींव रखी, जब दुनिया बड़े भाषाई मॉडलों (LLMs) की कल्पना भी नहीं कर पा रही थी। उन्होंने महर्षि पाणिनि के व्याकरण को कंप्यूटर की तर्कसंगत भाषा में ढालकर 'संगणकीय पाणिनीय व्याकरण' का सिद्धांत दिया। आईआईटी कानपुर और आईआईआईटी हैदराबाद (IIITH) जैसे संस्थानों में उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी दुनिया भर में 'लो-रिसोर्स भाषाओं' के लिए शोध का आधार हैं।

2. आचार्य विनीत जी केवल एक प्रोफेसर नहीं थे; वे चिन्मय मिशन के एक दीक्षित सच्चे संन्यासी और सच्चे कर्मयोगी थे। उनका व्यक्तित्व एवं उनकी सादगी सभी को श्रद्धावनत् कर लेती थी। उनके लिए कंप्यूटर कोडिंग और शास्त्र चिंतन अलग-अलग नहीं थे। वे 'शब्द' को 'ब्रह्म' मानते थे और कोडिंग को उस ब्रह्म की अभिव्यक्ति का एक आधुनिक माध्यम।

3. प्राचीन शास्त्रों का सामयिक प्रासंगिकता में अनुप्रयोग- उन्होंने हमें सिखाया कि 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' (IKS) केवल इतिहास की वस्तु नहीं है, बल्कि वह समकालीन समस्याओं को सुलझाने का सबसे सटीक वैचारिक स्रोत है। उन्होंने व्याकरण और नव्य-न्याय जैसे कठिन शास्त्रों की गहराई में उतरकर यह दिखाया कि कैसे 'ज्ञान का प्रतिनिधित्व' (Knowledge Representation) भारतीय दृष्टिकोण से अधिक प्रभावी हो सकता है।

4. तकनीक के साथ मानवीय चेतना का मेल - आज के AI के दौर में भी वे 'Human Understandable Machine Learning' के पक्षधर थे। उनका मानना था कि तकनीक ऐसी होनी चाहिए जिसे इंसान समझ सके और जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक के काम आए। वे अक्सर 'हाइब्रिड मॉडल' (व्याकरण और मशीन लर्निंग का संगम) पर जोर देते थे, ताकि भाषा की शुद्धता और तकनीक की गति साथ-साथ चल सके।

5. एक प्रेरक मार्गदर्शक के रूप मे - हम जैसे अनेक शिक्षक, आचार्य, शोधार्थी और छात्र भाग्यशाली रहे जिन्हें उनका सानिध्य मिला। वे केवल पढ़ाते नहीं थे, बल्कि सोचने की दृष्टि देते थे। उनकी तीक्ष्ण बुद्धि और हर विषय की जड़ तक जाने की उनकी जिज्ञासा हमें हमेशा अचंभित करती थी। उन्होंने एक ऐसी पीढ़ी तैयार की है, जो विश्व स्तर पर न केवल संस्कृत और भारतीय भाषाओं को तकनीकी से जोड़ने पर कार्य कर रही है अपितु भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों के विविध स्तर पर कार्यरत है।

आचार्य विनीत चैतन्य जी का जीवन, ज्ञान, विज्ञान, कर्मयोग, भक्तियोग एवं ज्ञानयोग का अद्भुत समन्वय रहा। यद्यपि आज वे पार्थिव रूप में हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके द्वारा जिया गया जीवन भारतीयता का अवबोध, आने वाले पीढ़ियों को दिशा देने वाला होगा।

भगवद्रूप को प्राप्त आचार्य विनीत चैतन्य जी के प्रति हम सभी की हृदय से श्रद्धांजलि॥

"यथा नद्यः स्यन्दमानाः समुद्रेऽस्तं गच्छन्ति नामरूपे विहाय ।
तथा विद्वान्नामरूपाद्विमुक्तः परात्परं पुरुषमुपैति दिव्यम्॥"

हरि ॐ! 🙏

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गङ्गानाथ झा परिसर, प्रयागराज

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