31/07/2026
#आत्मबोध अर्थात #आत्मज्ञान
समस्त जीव-जंतु पशु-पक्षि मानव आदि हम सभी एक ही ब्रह्म की साधना उपासना विपासना आदि करते हैं, फिर एक-दूसरे के साथ युद्ध क्यों करते हैं और घृणा का भाव क्यों रखते हैं‼️
यदि कोई अन्तर हैं, तो वो अलग-अलग भाषाओं का हैं और एक-दूसरे के खान-पान पर आधारित हैं और भाषाओं पर आधारित पर विष्लेषण करने की क्षमता एक-दूसरे में नहीं हैं... यही युद्ध और द्वंद्व का मूलभूत कारण हैं‼️
संन्यासी पीर फकीर मौलाना - इन सबका लक्ष्य याफिर उद्देश्य एक-ही हैं, लेकिन सब के सब भटके हुए पशु तुल्य हैं, यह सभी एक अवोध वालक की भांति अपने वास्तविक स्वरूप से भटके हैं, इन्होंने स्वयं में स्वयं की खोज नहीं की... जिसके लिए जरूरी हैं #गुरुदीक्षा और #गुरु के प्रति #समर्पण का भाव‼️
मैं उसे ही अपना शिष्य बनाऊंगा जिसमे त्याग और समर्पण का भाव मौजूद होंगा‼️
#श्रीहरिशरणम्
शिष्य #ब्रह्मलीन स्वामी नारदानंद सरस्वती जी महाराज, नैमिष व्यास पीठाधीश्वर, नैमिषारणय, ज़िला सीतापुर - उत्तर प्रदेश।
#राजधानी लखनऊ
दिव्यदृष्टा_श्रीश्री1008
Brahmrishi Swami Ramanand Sarswati ji Maharaj
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(अन्न परित्याग 78-79 वर्षिय संन्यासी)
Mobile +91- 9540666000