30/08/2025
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देवि देवि ॥
जय जय श्रीमाते, जय जय ललिते,
जय त्रिपुरसुन्दरी, जय राजराजेश्वरि ।
प्रारब्धपापक्षयदा, क्लेशविनाशकारिणी ।
राजराजेश्वरी मातः, त्रिपुरे त्राहि नोऽम्बिके ॥
अभिषेकं च स्नपनं, श्रृङ्गारं सहसार्चनम् ।
पुष्पार्चनं च मातस्ते, भविष्यति शुभप्रदम् ॥
श्रीसूक्तपाठशतको, दशाष्टकसमन्वितः ।
अर्प्यते तव चरणे, सम्पदां प्रददासि नः ॥
धनं विना न धर्मोऽस्ति, कार्याणि न सिध्यति ।
त्वद्भक्तानां कृपाकान्ते, भवतां सुखजीवितम् ॥
त्वदीयाज्ञावशेनैव, कर्माण्येतानि शक्यते ।
श्रद्धासुमनसा सार्धं, सेवामः तव पादयोः ॥
---
हिंदी भावानुवाद (श्लोकानुसार)
हे माँ राजराजेश्वरी! आप प्रारब्ध पापों का क्षय करने वाली और समस्त क्लेशों का नाश करने वाली हैं। त्रिपुराम्बिका! हमें कृपा प्रदान कीजिए।
कल आपका अभिषेक, स्नापन, श्रृंगार, सहस्रार्चन और पुष्पार्चन होगा, जो सबको मंगलदायी होगा।
माँ! आपके चरणों में १०८ बार श्रीसूक्त का पाठ अर्पित किया जाएगा, जिससे आप भक्तों को सम्पत्ति, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्रदान करें।
धन के बिना धर्मकार्य नहीं हो सकते, अतः आपकी कृपा से भक्तों का जीवन सुखी एवं सफल बने।
आपके आदेश से ही ऐसे पुण्यकर्म सम्भव होते हैं। हम श्रद्धा-सुमन अर्पित कर, आपके श्रीचरणों की सेवा में जीवन को सरल, सुगम और सुखमय बनाने हेतू सम्मलित होंगे.
प्रात 9 बजे से 4 बजे तक
रविवार 31 अगस्त 2025
कामख्या योनि पीठम
श्री माँ बगलामुखी मन्दिरम
स्वामी आलोक महाराज जी
जंगपुरा दिल्ली
# 9818133665