मानव सेवा दल निष्काम, नि:स्वार्थ, समर्पित तथा अनुशासित स्वयंसेवकों का एक ऐसा संगठन है जो जातीय, संप्रदायिक, धार्मिक एवं अध्यात्मिक कट्टरता आदि मतभेदों से ऊपर उठकर मानव सेवा को ही अपनी आराधना, पूजा और यजन मानता है। वह मानव ही नहीं, बल्कि प्राणीमात्र के प्रति संवेदनशील रहते हैं । वे यथासंभव हर प्रकार की सेवा हेतु सदैव तत्पर, गतिशील एवं कृतसंकल्प रहते हैं। ऐसा ही जिनका सहज स्वभाव, गौरव, परितोष हो और सामाजिक, धर्म-निरपेक्ष, राष्ट्रीय भावनाओं तथा आध्यात्मिक गुणों से ओत-प्रोत हो, ऐसे संवेदनशील व विश्लेषणात्मक व्यक्तित्व से पूर्ण स्वयंसेवकों का संगठन ही वास्तविक रूप में मानव व प्राणीमात्र की सेवा में निष्काम रूप से अग्रसर हो सकता है।
प्राणिमात्र के प्रति सेवा - प्रेम की वह क्रियात्मक अभिव्यक्ति है जिसके बदले समाजसेवी की कोई निज अभिलाषा न हो क्योंकि निष्काम सेवा ही मानसिक शांति, आत्मज्ञान, आचरण - तृप्ति एवं आत्म-साक्षात्कार प्रकटीकरण का संवेदनात्मक राजद्वार है।
दल के उद्देश्यों की पूर्णरुपेण पूर्ति हेतु समस्त सदस्यों का ध्येय "निष्काम समर्पित व्यक्तित्व" हो। निष्काम समर्पित व्यक्तित्व वाले कार्यकर्ताओं में आदर्श नेतृत्व व नैतिकता आदि विभिन्न आकर्षक अद्भुत गुण स्वाभिक रूप से प्रकट होते हैं। समर्पित व्यक्तित्व से ही संगठन में सदैव तरो - ताजगी वह उत्साह में वृद्धि होती रहेगी। निष्काम समर्पित व्यक्तित्व ही संगठन का गौरव और उसका चरित्र दर्पण होता है।
मानव सेवा दल के सभी स्वयंसेवकों को मेरा यही संदेश है कि पुस्तक में लिखित नियमावली का अनुसरण करते हुए निष्काम सेवा का ऐसा रचनात्मक मार्ग प्रशस्त करें जिसके प्रतिबिंब से समाज स्वयंमेव प्रभावित हो तथा आदर्श समाज के निर्माण हेतु स्वच्छ विचारधारा का प्रभाव निरंतर गतिमान रहे जिससे प्रभावित होकर सेवा - भाव वाले मानव संगठन में सेवा हेतु आकर्षित होंगे और निश्चय ही कर्मठ स्वयंसेवकों की शक्ति में वृद्धि होगी।
अतः संस्था के सदस्य समाज सेवा का स्वर्णिम उदाहरण प्रस्तुत करें, जिससे भविष्य के लिए निष्काम सेवा का मार्ग प्रशस्त हो।