Bhartiya Hindu Shuddhi Sabha - भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा

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Bhartiya Hindu Shuddhi Sabha - भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा Bhartiya Hindu Shuddhi Sabha was founded by Swami Shraddhanand Ji on 13th Feb, 1923.

‎श्री कन्हैयालाल मन्घनदास तलरेजा ‎आपका जन्म 10 अगस्त 1936 वर्त्तमान पाकिस्तान (अखण्ड-भारत) के सिन्ध प्रान्त के, सक्खर जि...
10/08/2026

‎श्री कन्हैयालाल मन्घनदास तलरेजा
‎आपका जन्म 10 अगस्त 1936 वर्त्तमान पाकिस्तान (अखण्ड-भारत) के सिन्ध प्रान्त के, सक्खर जिले के, हयात पिताफी (शादानी नगर) में हुआ था |

‎विभाजन के बाद भी आप सिन्ध में ही 17 वर्ष रहे थे | अङ्ग्रेज़ी साहित्य में 1962 में सिन्ध यूनिवर्सिटी से MA प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया |
‎सिन्ध में ही रह कर आपने हिन्दुओं के अधिकार के लिए साहसपूर्ण संघर्ष किया लेकिन 1964 में आप भारत आ गए और श्री चाँदीभाई हिम्मतमल मनसुखानि कॉलेज - उल्लहासनगर (मुम्बई) में अंग्रेजी के प्राध्यापक के रूप में सेवाएँ दीं | निवृत्ति के बाद आप दिल्ली रहने लगे | एक विद्वान् ही नहीं एक शिक्षाविद् होने के साथ आप अच्छे लेखक, वक्ता, पत्रकार, सिद्ध-भाषाविद् (8 भाषाओं के ज्ञाता), इतिहासविद्, राजनेता और समाजसेवी भी थे | आप का अंग्रेजी, हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, अरबी, पर्शियन, सिन्धी और पंजाबी भाषा पर अधिकार था |

‎श्री तलरेजा जी वेद, उपनिषद्, कुरआन, बाइबल, गुरु-ग्रन्थ-साहिब के अच्छे ज्ञाता थे | चार पत्रिकाओं के सम्पादक थे - (1) दीप-सन्देश (2) राष्ट्रीय चेतना (3) Awake and Arise(4) राष्ट्रीय संगठन | वर्ष 2007 में आप शिकागो और न्यूयार्क में वेद की उद्दात्त शिक्षाओं पर व्याख्यान देने गए थे | श्री तलरेजा जी का निधन 27 अप्रैल 2021 के दिन हुआ था |


‎ पवित्र वेद और पवित्र बाइबिल
‎ मूल्य ₹300 (डाक खर्च सहित)

‎इसी पुस्तक का English Edition भी उपलब्ध है.

‎Holy Vedas and Holy Bible
‎MRP ₹250 (Including Postage)

‎Whatsapp on 094855 99275 to buy.

09/08/2026
ईसाई मत पोल खोल मित्रों। मैं अंजनी कुमार सिंह हूँ। मैं सोनभद्र, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। आर्यसमाज पेज के माध्यम से अप...
24/07/2026

ईसाई मत पोल खोल
मित्रों। मैं अंजनी कुमार सिंह हूँ। मैं सोनभद्र, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। आर्यसमाज पेज के माध्यम से अपनी आपबीती सुनना चाहता हूँ।
दोस्तों मैं अपने साथ घटित एक घटना को आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। शायद यह घटना आपके साथ भी घटी हो---
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ये घटना जुलाई 2016 की है।
मेरा छोटा भाई malaria PF बुखार से पीड़ित था। मैंने रेनुकूट के hindalco hospital, gov. hospital के साथ कई हॉस्पिटल में भर्ती कराया लेकिन सब ने हाथ खड़े कर दिए।
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अंत मे हम रॉबर्ट्सगंज(सोनभद्र) के "JIVAN JYOTI CHRISTIAN HOSPITAL" गये। जहाँ उसे हमनें एमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया।
उस समय मैं ये देख कर हैरान रह गया कि एमरजेंसी वार्ड के कमरों में वो भोंपू लगे हुए थे जो कि सामान्यतया रेलवे स्टेशनों पर अनाउंसमेंट के लिए उपयोग किया जाता है। भोंपू से तेज आवाज में कोई गाना बजाया जा रहा था जो कि शायद बाइबिल से संबंधित था।
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सामने से एक नर्स आ रही थी।उससे मेरी बहस हो गयी।
मैं-"आप इस भोंपू को बंद क्यों नहीं करती"
नर्स- क्यों बंद करें आपको क्या परेशानी है।
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मैं-"मैं पहली बार ऐसा हॉस्पिटल देख रहा हूँ इमरजंसी वार्ड में रेलवे का लाउडस्पीकर लगा है इससे मरीजों को परेशानी होती है"
इस बात पर काफी बहस हुई अंत में डॉक्टर आये और कहा ये दो मिनट बाद बंद हो जाएगा।
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फिर जब मेरे भाई की तबियत ज्यादा खराब हो गयी। और वो बुखार से छटपटाने लगा।
(तब वे अपनी औकात पर आ गए और अपना conversion card खेला। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं था कि ये कितनी तकलीफ में हैं।)
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तभी एक काली सी औरत हमारे पास आयी और बोली--
"मैं आपके बेटे के लिये परमेश्वर(जीसस) से प्रार्थना करूँ।"
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हमने रुआंसे हुए हामी भर दी। और वो प्रार्थना करने लगी।
"हे परमेश्वर अमित बहुत बीमार है उसका भाई और माँ आपकी शरण में आये हैं उसके भाई को ठीक कर दे परमेश्वर"
तभी एक नर्स आयी और बड़ी चालाकी से fevastin(paracitamol) का इंजेक्शन दे दिया।
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(मैं उनका कारनामा ध्यान से देख और समझ रहा था लेकिन कुछ कहा नहीं)
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नर्स-"मैंने आपके बेटे के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की है अब वो जल्दी ही ठीक हो जाएगा। आप केवल परमेश्वर(जीसस) पर विश्वास कीजिये।
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फिर मेरी माँ ने कहा,"हम तो सभी भगवान को एक ही मानते है बस उनके रूप अलग अलग हैं। हैम मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा सब में विश्वास करते हैं"
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इस बात पर वो भड़क गई और बोली--
"इतने सारे भगवान पर विश्वास मत कीजिये ऐसे कोई भी बचाने को नहीं आएगा। केवल परमेश्वर(जीसस) पर भरोसा कीजिये।"
लेकिन मेरी मां ने वापस अपनी बात दोहराई।
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इस पर खीझ कर वो कहने लगी--
"आपको सभी पर विश्वास आपको ही मुबारक हो और एक कुतर्क भी दिया।"
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मैंने अब इसकी ढोल बजाने की सोंची
और कहा--
"मैं उस ईश्वर में विश्वास रखता हूँ जो कि निराकार है सृष्टि की रचना करने वाला है,सबको एक समान समझता है,सबका भला चाहता है,आपके परमेश्वर की तरह नहीं जो............???"
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मैं इसके आगे बोलता उससे पहले ही वो वहाँ से बड़बड़ाते हुए भाग गई। और फिर दिखाई नहीं दी"
फिर हम अपने भाई को वहाँ से डिस्चार्ज कराके BHU वाराणसी ले गए।
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तो आप लोग अब समझ सकते हैं कि किस तरह से ये मिशनरी वाले लोगों को बेवकूफ बना कर धर्म परिवर्तन करते हैं, (PARACETAMOLखिला कर)
वैसे ये लोग धर्म परिवर्तन का काम एक वर्ग विशेष के साथ ही करते हैं लेकिन हमारी तकलीफ देखकर वे हम पर भी हाथ आजमाने चले आये।
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ऐसे लोगों पर ध्यान दें और उनको मुँहतोड़ जवाब दे।

Dealing with evangelical Christians the Hindu wayAbout six months ago there was a knock on my door and I opened it to fi...
21/07/2026

Dealing with evangelical Christians the Hindu way
About six months ago there was a knock on my door and I opened it to find two evangelical Christians there.
I knew they were evangelicals because they had that fake friendly smile on their faces, which all evangelicals have when they are trying to convert someone.
This was the third time that month that evangelists had come knocking on my door and disturbing me so I decided to teach them a lesson.
Good morning’ they said. ‘Good morning’ I replied.
‘Have you heard about the Lord Jesus Christ’? they asked.
‘I know something about him but I am a Hindu and I’m not really interested in knowing more’ I said. But like all evangelists, they took no notice of my wishes and proceeded to talk about their beliefs.
So I said, ‘I don’t think you are qualified to speak to me about Jesus’. They looked very astonished and asked, ‘Why not’? ‘Because’, I said, ‘you have no faith’. ‘Our faith in Jesus is as strong as a rock’ they insisted. ‘I don’t think it is’ I said with a smile.
'Please open your Bible and read the Gospel of Mark, chapter 16, verse 16, 17 and 18′ I said and while they flicked through their Bibles I went quickly inside and came out again.
One of them found the passage and I asked him to read it out loud.
It said, ‘He who believes and is baptized will be saved but he who does not believe shall be condemned. And these signs will follow those who believe in my name. They shall cast out devils, they shall speak in tongues, they will handle snakes and if they drink poison it will not hurt them and they will lay hands on the sick and they will recover’.
When he finished I said, ‘In that passage Jesus says that if you have real faith you will be able to drink poison and not die’.
I took a bottle of liquid detergent from behind my back, held it up and said, ‘Here is some poison. Demonstrate to me the strength of your faith and I will listen to anything you have to say about Jesus’.
You should have seen the looks on their faces!
They didn’t know what to say.
'What’s the problem’? I asked. ‘Is your faith not strong enough’?
They hesitated for a few moments and then one of them replied, ‘The Bible also says that we must not test God’.
‘I’m not testing God’, I said, ‘I’m testing you.
You love to witness for Jesus and now is your big opportunity’.
Finally one of then said, ‘We will go and speak to our pastor about this matter and come back and see you.
‘I’ll be waiting for you’ I said as they scurried away. Of course they never came back again.
Here is a bit of advice.
Keep a copy of this Bible reference - Gospel of Mark,
chapter 16,
verses 16, 17 and 18′
- and a bottle of detergent ready and every time the evangelists come to your door to harass ...
Do give them this test.

आर्यसमाज का सेवक 'श्री हाजी अल्ला रखीया रहीम तुल्ला'-प्रियांशु सेठआर्यसमाज ने विभिन्न सम्प्रदायों के अनुयायियों की शुद्ध...
19/07/2026

आर्यसमाज का सेवक 'श्री हाजी अल्ला रखीया रहीम तुल्ला'

-प्रियांशु सेठ

आर्यसमाज ने विभिन्न सम्प्रदायों के अनुयायियों की शुद्धि कर उन्हें वैदिक धर्म में दीक्षित करके उनपर महान् उपकार किये हैं। ईश्वर के सत्य स्वरूप से परिचित कराकर उसको पाने का वेदोक्त मार्ग बतलाना आर्यसमाज का जन सामान्य पर सबसे बड़ा उपकार है। आर्यसमाज के वेदोक्त विचारों ने जहां अपना प्रभाव सत्यप्रेमी और निष्पक्ष जनों के हृदय में स्थापित किया, उन्हीं में इसके एक समर्थक और प्रशंसक श्री हाजी साहब थे।
हाजी साहब कच्छ के रहने वाले थे। पेशे से आप सोने का व्यापार किया करते थे। आप सर्वदा कहा करते थे कि संसार में धर्म वैदिक धर्म ही है। जब कोई आपसे कहता था कि आप शुद्ध क्यों नहीं होते तो आप उत्तर दिया करते थे कि मैं अशुद्ध नहीं हूं। आप आर्यसमाज के सत्संग में नियमपूर्वक जाया करते थे और आर्यसमाज के सिद्धान्तों से अभिज्ञ थे। आप सर्वदा विद्यार्थियों को पुस्तकें और छात्रवृत्ति दिया करते थे। निर्धनों को सहायता आपसे प्राप्त होती थी। आप आर्यसमाज में कई बार अपने पुत्रों को भी ले जाया करते थे। एक बार आपने एक स्नातक से कोई प्रश्न किया था, तो इसका उत्तर उसने गलत दिया। इसकी पुष्टि के लिए जब सत्यार्थप्रकाश मंगवाया और दिखाया तो आपका पक्ष सही सिद्ध हुआ और उस स्नातक ने अपनी गलती स्वीकार की। हाजी साहब ने कहा- आपने तप किया है, जंगल में रहे हैं, और गुरुओं के पास रहे हैं परन्तु आपने ऋषि दयानन्द लिखित वैदिक सिद्धान्तों का परिचय प्राप्त नहीं किया।

एक बार मुम्बई आर्यसमाज में तत्कालीन प्रधान श्री विजयशंकर जी ने साप्ताहिक सत्संग में कहा कि मन्दिर के पिछले भाग में मकान बनवाने में आर्यसमाज पर ऋण हो गया है। अब अन्य कार्यों के साथ-साथ आर्यसमाज को यह ऋण भी उतारना होगा। हाजी साहब ने उठकर पूछा कि आर्यसमाज पर ऋण कितना है? प्रधान जी ने कहा रु० ५००० है। हाजी साहब ने तुरन्त कहा कि मेरी दुकान से आकर ले लो। प्रधान जी के जाने पर उन्होंने शीघ्र ही उन्हें ५००० रु० का चैक दे दिया। उस मकान पर जो शिला लगाई गई थी जिस पर दानियों के नाम हैं, उसमें सबसे प्रथम हाजी जी का ही नाम है।

आपके नाम से प्रत्येक उनको वैदिक धर्मी समझने में संकोच करेगा लेकिन हाजी अल्लारखीया रहीमतुल्ला जी उतने ही वैदिक धर्मी थे जितना कि कोई वैदिक धर्मी हो सकता है।
-'सार्वदेशिक' १९४२ के अंक से साभार
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विस्तार से जानने के लिए पढ़िए-
आर्यसमाज और शुद्धि आंदोलन

◆ What do you say?"If Christ was a man, he did not rise from the dead, for dead men have the uniform habit of staying de...
15/07/2026

◆ What do you say?

"If Christ was a man, he did not rise from the dead, for dead men have the uniform habit of staying dead. If he was God, he could not and did not die, and therefore, he could not and did not rise from the dead".

-- Marshall J. Gauvin

Ravikumar and his wife, Sirisha, were living happily with their minor children in Warangal district, Telangana.One day, ...
12/07/2026

Ravikumar and his wife, Sirisha, were living happily with their minor children in Warangal district, Telangana.

One day, the couple was found dead on a railway track. Police later began investigating the case.

Their children revealed to the police that their neighbors, Venkat and Pramila, had been repeatedly asking their parents to convert to Christianity. They also kept inviting them to attend church. Out of friendship, the couple went to church and joined Sunday prayers, but they clearly told their neighbors that they did not want to convert their religion. This led to small arguments between them.

Later, Venkat and Pramila convinced Ravikumar to invest in a ready-mix concrete business. They promised that the business would make good profits. Trusting them, Ravikumar mortgaged his wife's gold jewelry at a bank and gave Venkat Rs 20 lakh to buy a ready-mix concrete vehicle.

Venkat promised to pay Ravikumar Rs 20,000 every month from the business. However, he paid the money for only two or three months and then stopped. He also did not return the Rs 20 lakh.

As the bank interest on the pledged gold kept increasing, Ravikumar and Sirisha came under severe financial and mental stress. Their children also said that Venkat and Pramila continued to pressure them to convert to Christianity.

Unable to bear the financial loss and the harassment, the couple decided to leave their home. They later died by su***de after jumping in front of a speeding train near Ghatkesar railway station.

Police said that call records show Ravikumar spoke with the accused Venkat for a long time, about 30 minutes before the couple died. Their children are now pleading for justice for their parents.

Both accused Venkat and Pramila are currently absconding, and the police are searching for them.

May justice be served for Ravikumar and Sirisha.

शंका- क्या वेदों में ईसा मसीह का वर्णन है?समाधान- अनेक विदेशी एवं उनका अंधानुसरण करने वाले भारतीय लेखक वेदों में इतिहास ...
06/07/2026

शंका- क्या वेदों में ईसा मसीह का वर्णन है?

समाधान- अनेक विदेशी एवं उनका अंधानुसरण करने वाले भारतीय लेखक वेदों में इतिहास मानते हैं। उनकी इस धारणा के कारण अनेक भ्रम फैल रहे हैं। ऐसा ही एक भ्रम वेदों में इतिहास मानने वाले ईसाई फैला रहे हैं। उनका कहना है कि वेदों में वे ईसा मसीह का वर्णन है।

ईसाई हिन्दुओं को ईसाई बनाने के लिए यह चालाकी करते है और कहते हैं कि वेदों में ईसा मसीह के बारे में भविष्यवाणी कि गयी है। ईसा एक अवतार थे। ईसाई अपनी बात को सिद्ध करने के लिए इस वेदमंत्र का हवाला देते हुए कहते है कि इस वेद मंत्र में ईशावास्यमिदं में ईसा मसीह का वर्णन है।

“ईशावास्यमिदं यत्किंचित जगत्यां जगत “यजुर्वेद -अध्याय 40 मन्त्र 1.

ईसाई इसका अर्थ करते है, कि इस दुनिया में जो कुछ भी है, वह सब ईसा मसीह कि कृपा से है। और वही दुनिया का स्वामी है।

स्वामी दयानन्द इस मन्त्र का मूल अर्थ इस प्रकार से करते है-

जो मनुष्य ईश्वर से डरते हैं कि यह हमको सदा सब और से देखता हैं, यह जगत ईश्वर से व्याप्त और सर्वत्र ईश्वर विद्यमान है। इस प्रकार से अंतर्यामी परमात्मा का निश्चय करके भी अन्याय के आचरण से किसी का कुछ भी द्रव्य ग्रहण नहीं किया चाहते, वे धर्मात्मा होकर इस लोक के सुख और परलोक में मुक्तिरूप सुख को प्राप्त करने सदा आनंद में रहे।

इस मंत्र में ईशा शब्द से सम्पूर्ण ऐश्वर्य से युक्त सर्वशक्तिमान परमेश्वर अर्थ सिद्ध होता है। ईसा मसीह तो सर्वशक्तिमान थे ही नहीं। उन्हें तो सूली पर लटकना पड़ा, दुःख सहना पड़ा, मृत्यु को प्राप्त होना पड़ा। सर्वशक्तिमान ईश्वर मानवीय दुखों से मुक्त है। इसलिए ईसाईयों की यह सोच केवल छल मात्र है।

इसी प्रकार से ईसाई समाज पुरुष सूक्त में वर्णित प्रजापति की तुलना ईसा मसीह से करते है। उनके अनुसार ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में जो प्रजापति बताये गए हैं वो वास्तव में ईसा मसीह ही हैं। चेन्नई के ईसाई प्रचारक स्वयं को साधू कहने वाले साधू चेल्लप्पा ने कहा की वेदों में प्रजापति ईसा मसीह के आने का पूर्वानुमान था इसलिए बिना ईसा मसीह के वेदों की ख़ोज अपूर्ण है-

साधू चेल्लप्पा ने अपने लेख में लिखा है -

“Diwali, the festival of lights, is a Christian Festival; Animal Sacrifice is a Christian culture adopted by Hindus and Gayatri Mantra actually glorifies Jesus. The Vedas, the ancient Indian sacred writings had anticipated the coming of Christ to take away the sins of man. They call Him Purusha Prajapati the creator God who would come as a man to offer himself as a sacrifice. Jesus Christ came to fulfill the Vedic quest of the Indian people, because the Vedas are incomplete without Him, just as the Old Testament was fulfilled at the coming of the Messiah”।

अर्थात दीवाली ईसाईयों का त्यौहार है। पशुबलि भी हिन्दुओं ने ईसाईयों से सीखी है। गायत्री मंत्र में ईसा मसीह का गुणगान है। वेदों में ईसा मसीह के आने का वर्णन है जो पापों को क्षमा करने वाला है। ईसा मसीह को पुरुष प्रजापति , जो सृष्टि का रचीयता है और जो अपना बलिदान देने आएगा के नाम से पुकारा गया है। ईसा मसीह के बिना वेद अधूरे है। अब ईसा मसीह भारतीयों क्षमा करने आएगा। ठीक वैसे जैसा बाइबिल की पुरानी पुस्तक में उनके आने की भविष्यवाणी है।

समीक्षा- पुरुष सूक्त 16 मन्त्रों का सूक्त है जो चारों वेदों में मामूली अंतर में मिलता हैं। पुरुष सूक्त वर्ण व्यस्था को सिद्ध करने का आधारभूत मंत्र है जिसमे “ब्राह्मणोस्य मुखमासीत” ऋग्वेद 10/90 में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र को शरीर के मुख, भुजा, मध्य भाग और पैरों से उपमा दी गयी हैं। इस उपमा से यह सिद्ध होता है कि जिस प्रकार शरीर के यह चारों अंग मिलकर एक शरीर बनाते है, उसी प्रकार ब्राह्मण आदि चारों वर्ण मिलकर एक समाज बनाते है। इस मंत्र में प्रजापति का अर्थ सब का पालन करने वाला है।

प्रजापति से ईसा मसीह का ग्रहण करना अपरिपक्वता का बोधक है।

मैं वेदों में इतिहास के सम्बन्ध में मैं स्वामी दयानन्द की मान्यता को पूर्णत सत्य, व्यवहारिक, तर्क संगत मानता हूँ। स्वामी दयानन्द ने वेदों में इतिहास होने की मान्यता का खंडन किया। उनका कहना था कि वेद शाश्वत हैं। वेद परमात्मा की नित्य वाणी है। वेदों में सृष्टि रचना, वेद रचना आदि नित्य इतिहास ही हो सकता है, किन्तु किसी व्यक्ति विशेष का इतिहास नहीं हो सकता। इस सृष्टि के आदि में चारों वेद ऋषियों के हृदय में प्रकाशित हुए। वेद ज्ञान का भी दूसरा नाम है। वेदों के माध्यम से ईश्वर द्वारा समस्त मानव जाति को ज्ञान प्रदान किया गया जिससे वह अपनी उत्पत्ति के लक्षय को प्राप्त कर सके। यह ज्ञान ईश्वर द्वारा जिस प्रकार से वर्तमान सृष्टि में प्रदान किया गया उसी प्रकार से पूर्व की सृष्टियों में भी दिया जाता रहा और आगे आने वाली सृष्टियों में भी दिया जायेगा। जिस ज्ञान का उपदेश परमात्मा द्वारा सृष्टि के आरम्भ में मनुष्यों को दिया गया उसमें किसी भी प्रकार का इतिहास नहीं हो सकता। क्यूंकि इतिहास किसी रचना में उससे पूर्वकाल में उत्पन्न मनुष्यों का हुआ करता है। सृष्टि के आरम्भ में जब कोई मनुष्य ही नहीं था फिर उनका किसी भी प्रकार का इतिहास वेदों में पहले से ही वर्णित होना संभव ही नहीं है। मनुष्य का ऐतिहासिक क्रम वेदों की उत्पत्ति के पश्चात ही आरम्भ होता है।

यक्ष प्रश्न यह है कि अगर आप वेदों में इतिहास होना ही स्वीकार नहीं करेंगे तो वेद मन्त्रों के उलटे सीधे अर्थ निकाल कर कोई वेदों में ईसा मसीह होने जैसी भ्रांत मान्यताएं नहीं प्रचारित करेगा। खेद है कि भारतीयों ने स्वामी दयानन्द के इस क्रांतिकारी चिंतन से कुछ भी ग्रहण नहीं किया।

#डॉ_विवेक_आर्य

विश्व में लाखों ईसाई जिनमें पादरी, नन, पास्टर आदि शामिल थे, कोरोना के कारण अकाल मौत मर गये। कोई चंगा करने वाला ढोंग काम ...
05/07/2026

विश्व में लाखों ईसाई जिनमें पादरी, नन, पास्टर आदि शामिल थे, कोरोना के कारण अकाल मौत मर गये। कोई चंगा करने वाला ढोंग काम नहीं आया।

आँखें खोलो, अन्धविश्वास त्यागो।

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