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पहले सरकारी फरमान आया था जब यूट्यूबर्स और पत्रकार सरकारी फरमान के आगे नहीं झुके तो नहीं डरे तो अब कोर्ट से कहलाया गया है...
04/09/2026

पहले सरकारी फरमान आया था जब यूट्यूबर्स और पत्रकार सरकारी फरमान के आगे नहीं झुके तो नहीं डरे तो अब कोर्ट से कहलाया गया है!

सरकारी स्कूलों में बिना लिखित अनुमति के बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया यूजर्स के प्रवेश, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइवस्ट्रीमिंग पर बैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया है।

जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान कॉक्रोच जनता पार्टी के लोगों ने कहा था कि प्रोटेस्ट में BJP के द्वारा गुंडे भेजे गए थे, ये ...
04/09/2026

जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान कॉक्रोच जनता पार्टी के लोगों ने कहा था कि प्रोटेस्ट में BJP के द्वारा गुंडे भेजे गए थे, ये बात अब एकदम सच होती दिख रही है। स्वतंत्र भारद्वाज नामक युवक ने एक पॉडकास्ट यहां तक दावा किया कि उसने प्रोटेस्ट करने वालों पर हमले के लिए दिल्ली पुलिस का डंडा और जूता तक इस्तेमाल किया।

कितना दुखद है ये देखना कि कैमरे के सामने ठहाके लगाता एक चेहरा और बैकग्राउंड में कराहती हमारी न्याय व्यवस्था...स्वतंत्र भारद्वाज का वायरल वीडियो किसी भी संवेदनशील एवं प्रगतिशील नागरिक की रूह कंपा देने के लिए काफी है। जिस देश की पहचान संविधान और कानून की बराबरी से है, वहां एक बुजुर्ग के लहूलुहान सिर पर हँसता ये स्वतंत्र का दानवरूपी चेहरा और 60 टांकों की बर्बरता पर सीना ठोककर तालियां पीटी जा रही हैं। यह सिर्फ एक हिंसक वारदात का कबूलनामा नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है।

एक बेबस बुजुर्ग को मरणासन्न हालत में एम्बुलेंस में छोड़ देने वाला शख्स आज खुलेआम हंसते हुए हत्या के प्रयास (धारा 307) की नुमाइश कर रहा है। उससे भी ज्यादा खौफनाक और घिनौना उसका यह दावा है कि सत्ता और सियासत उसकी जेब में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, चिराग पासवान और भाजपा नेता कपिल मिश्रा के नाम की आड़ लेकर वह कानून को ललकार रहा है कि ‘एक फोन’ पर पुलिस की लाठियां झुक गईं और हथकड़ियां खुल गईं।

यदि सत्ता की छांव में पलते ऐसे गुंडे खुलेआम अपराध का उत्सव मनाएंगे और कानून तमाशबीन बना रहेगा, तो इंसाफ की चौखट पर माथा टेकने वाली आम जनता का भरोसा हमेशा के लिए टूट जाएगा।

यह दिल्ली पुलिस और अदालतों की साख की अंतिम परीक्षा है। इस वायरल वीडियो का अविलंब स्वतः संज्ञान लेकर स्वतंत्र भारद्वाज को जेल की सलाखों के पीछे धकेला जाए। अगर आज यह रसूखदार गुंडागर्दी नहीं थमी, तो तय मानिए कि इस मुल्क में इंसाफ जिंदा नहीं, सिर्फ एक खोखला ढोंग बनकर रह गया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने महाराष्ट्र में प्राथमिक शिक्षा की बिगड़ती स्थिति और बंद हो रहे मराठी माध्य...
25/08/2026

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने महाराष्ट्र में प्राथमिक शिक्षा की बिगड़ती स्थिति और बंद हो रहे मराठी माध्यम के स्कूलों पर गहरी चिंता जताई है।

महाराष्ट्र के धुले जिले में एक हाई स्कूल के कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस वराले ने कहा कि अगर सरकार धार्मिक आयोजनों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर होने वाले खर्च का मामूली हिस्सा भी शिक्षा पर लगाती, तो राज्य भर में 100 से 125 मराठी स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था।

सरकारी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए जस्टिस वराले ने बताया कि सरकार नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 32,000 से 34,000 करोड़ रुपये और कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के लिए 11,000 करोड़ रुपये आवंटित करती है।

उन्होंने कहा कि यदि इस भारी भरकम राशि का सिर्फ 0.01 प्रतिशत हिस्सा, यानी लगभग 32 करोड़ रुपये, भी मराठी माध्यम के स्कूलों पर खर्च किया गया होता, तो फंड की कमी से बुंद हो चुके 100 से 125 स्कूलों का अस्तित्व बचाया जा सकता था।

जस्टिल वराले ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने खुद कक्षा 10वीं तक की शिक्षा म्युनिसिपल और जिला परिषद के मराठी स्कूलों से ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करने से उनके करियर में कोई बाधा नहीं आई, बल्कि इससे उनका दृष्टिकोण और व्यापक हुआ।

जस्टिस वराले ने इस बात पर भी निराशा व्यक्त की कि राज्य में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा का बजट घटने के कारण कई सालों से 13 प्रतिशत के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाया है।

उन्होंने बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर प्रकाश डालते हुए एक दुखद घटना का उल्लेख किया, जहां जमीन पर सोने को मजबूर तीन छात्राओं की सांप के काटने से मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान देना बेहद आवश्यक है।

Uttar Pradesh के Ayodhya के सरकारी स्कूलों में बिना पूर्व अनुमति के यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और किसी भी बाह...
20/08/2026

Uttar Pradesh के Ayodhya के सरकारी स्कूलों में बिना पूर्व अनुमति के यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने जारी किए आदेश। आदेश में कहा गया कि विद्यालय परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी भी बिना अनुमति के नहीं की जा सकेगी।

Photo Courtesy: News Pinch
UP News l Uttar Pradesh l CM Yogi Adityanath l

सच को आईना दिखाती एक viral तस्वीर...
23/07/2026

सच को आईना दिखाती एक viral तस्वीर...

वेतन और भत्तों में असमानता के कारण डॉक्टर्स कर रहे हैं रिजाइन...लखनऊ के चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में ड...
19/06/2026

वेतन और भत्तों में असमानता के कारण डॉक्टर्स कर रहे हैं रिजाइन...लखनऊ के चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में डॉक्टरों के इस्तीफे का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब न्यूरो सर्जरी विभाग के एक और डॉक्टर ने संस्थान से किनारा कर लिया है। नियमित चिकित्सक डॉ. मयंक सिंह ने नौकरी छोड़ दी है। SGPGI में सेलेक्शन के बाद उन्होंने रिजाइन कर दिया। इससे दिमाग में ट्यूमर, ब्रेन कैंसर और जटिल न्यूरो संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना है।

कैंसर संस्थान में कुल 32 नियमित डॉक्टर हैं। आठ बांड के तहत डॉक्टर तैनात हैं। जबकि एक महिला डॉक्टर कानपुर से प्रतिनियुक्त पर हैं। कुल 41 डॉक्टर हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग में अभी तक तीन नियमित व दो बांड के तहत डॉक्टर तैनात थे। इनमें नियमित डॉ. मयंक सिंह ने नौकरी छोड़ दी है। उनका पीजीआई में चयन हो गया है।

कैंसर संस्थान के 11 विभागों में एक भी डॉक्टर नहीं है। इन विभागों में न तो कोई जांच हो रही है न ही इलाज। जबकि डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। कई विभागों में तो करोड़ों की मशीन हैं। जो कि ताले में बंद धूल फांक रही हैं। मेडिकल आंकोलॉजी, मेडिकल फिजिस्स, डेंटेस्ट्री, न्यूक्लीयर मेडिसिन, बायोकेमेस्ट्री, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, पैलिएटिव केयर, पीएमआर, त्वचा, हीमैटोलॉजी व रेडियोडायग्नोसिस विभाग है।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में मरीज और उनके तीमारदार हर दिन उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों में कई ऐसे होते हैं, जिनमें समय पर सर्जरी न होने पर बीमारी तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी मरीजों की परेशानी को और बढ़ा सकती है। कैंसर संस्थान से अब तक 28 से ज्यादा डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। वहीं कई अन्य डॉक्टर भी संस्थान छोड़ने की तैयारी में हैं। लगातार हो रहे पलायन से संस्थान की कई महत्वपूर्ण सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

डॉक्टरों की नाराजगी की बड़ी वजह वेतन और भत्तों में असमानता बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि केजीएमयू, पीजीआई व लोहिया संस्थान में तैनात डॉक्टरों और कैंसर संस्थान के विशेषज्ञों की योग्यता समान है। लेकिन वेतन-भत्तों में अंतर है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं। विशेषज्ञों के जाने का असर सीधे मरीजों पर पड़ रहा है। दूर-दराज जिलों से आने वाले कैंसर मरीजों को तारीख मिलने का इंतजार करना पड़ता है। कई मरीज ऐसे भी हैं, जिनके लिए हर गुजरता दिन बीमारी के बढ़ने का खतरा लेकर आता है।

फिरोजाबाद में बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के ब्रांच में गोल्ड लोन के बदले ग्राहकों की ओर से गिरवी रखे गए 96 सोने के पैकेट तिजोर...
18/06/2026

फिरोजाबाद में बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के ब्रांच में गोल्ड लोन के बदले ग्राहकों की ओर से गिरवी रखे गए 96 सोने के पैकेट तिजोरी से गायब मिले।

इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब बैंक का एक स्टाफ बिना किसी सूचना के 17 दिन से गायब चल रहा था। इसकी सूचना मैनेजर ने आगरा जोनल कार्यालय को दी। जोनल कार्यालय के अधिकारी जब बैंक पहुंचकर डुप्लीकेट चाभी से तिजोरी खोली तो 96 सोने के पैकेट गायब मिले। इसके बाद मुख्य प्रबंधक ने बैंक के तीन अधिकारियों के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज करवाया। पुलिस ने गुरुवार की दोपहर तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उनके पास से पीली धातु की एक करधनी और दो दस्ती बरामद हुई।

इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया। यह घटना जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर अरांव थाना क्षेत्र की है।

लखीमपुर में एक करोड़ के सोने के जेवर बारिश में खराब हो गए। बाकी बचे जेवरों को बंदर उठा ले गए। यह तर्क सदर कोतवाली की पुलि...
18/06/2026

लखीमपुर में एक करोड़ के सोने के जेवर बारिश में खराब हो गए। बाकी बचे जेवरों को बंदर उठा ले गए। यह तर्क सदर कोतवाली की पुलिस ने कोर्ट में दिया। मामला 19 साल पुराना दहेज हत्या का है। कोर्ट ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे बरी किया था। पुलिस को जब्त जेवरों को ससुराल वालों को सौंपने के निर्देश दिए थे, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जेवरों से भीगी पोटली को मालखाने की छत पर सुखाने के लिए रखा था. ज्यादातर जेवर भीगने से खराब होकर गल गए। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा- लग रहा जेवरों को पुलिसकर्मियों ने अपने हित में प्रयोग किया...

24/05/2026

किसके किसके शहर/गाँव में बिजली की दिक्कत हो रही है? कमेंट में बताइये कहाँ पर कितने घंटे बिजली आती है..

23/05/2026

सिस्टम के दीमक Vs कॉकरोच
जब एक कॉकरोच सिस्टम के दीमकों से भिड़ गया..

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