24/07/2026
शायद कुछ सफ़र मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि कुछ ऐसे लोगों से मिलने के लिए लिखे जाते हैं जो हमेशा के लिए हमारी कहानी का हिस्सा बन जाते हैं।
आप लोग अभिव्यंजना छोड़ रहे हैं, लेकिन अभिव्यंजना आप लोगों को कभी नहीं छोड़ेगी। आने वाली हर पीढ़ी में कहीं न कहीं आपकी मेहनत, आपकी सोच और आपकी छाप ज़रूर दिखाई देगी। इस घर को आपने सिर्फ़ समय नहीं दिया, आपने इसे अपना एक हिस्सा दिया है।
अंत में, उबैदुल्लाह अलीम का एक शेर, जो शायद आज के दिन से बेहतर कोई और बात कह ही नहीं सकता-
"आँख से दूर सही, दिल से कहाँ जाएगा,
ओ जाने वाले, तू हमें याद बहुत आएगा।"
आप सबका दिल से धन्यवाद।
आपका यह सफ़र ख़त्म नहीं हुआ, बस एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।
जय अभिव्यंजना।
हर हर अभिव्यंजना। 🤍