अभिव्यंजना : वाद-विवाद, कविता एवं रचनात्मक लेखन समाज

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अभिव्यंजना : वाद-विवाद, कविता एवं रचनात्मक लेखन समाज सोच और एहसास की अभिव्यक्ति को उजागर करता एक उत्तम ऊर्जा श्रोत- अभिव्यंजना।

शायद कुछ सफ़र मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि कुछ ऐसे लोगों से मिलने के लिए लिखे जाते हैं जो हमेशा के लिए हमारी कहा...
24/07/2026

शायद कुछ सफ़र मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि कुछ ऐसे लोगों से मिलने के लिए लिखे जाते हैं जो हमेशा के लिए हमारी कहानी का हिस्सा बन जाते हैं।

आप लोग अभिव्यंजना छोड़ रहे हैं, लेकिन अभिव्यंजना आप लोगों को कभी नहीं छोड़ेगी। आने वाली हर पीढ़ी में कहीं न कहीं आपकी मेहनत, आपकी सोच और आपकी छाप ज़रूर दिखाई देगी। इस घर को आपने सिर्फ़ समय नहीं दिया, आपने इसे अपना एक हिस्सा दिया है।

अंत में, उबैदुल्लाह अलीम का एक शेर, जो शायद आज के दिन से बेहतर कोई और बात कह ही नहीं सकता-

"आँख से दूर सही, दिल से कहाँ जाएगा,
ओ जाने वाले, तू हमें याद बहुत आएगा।"

आप सबका दिल से धन्यवाद।
आपका यह सफ़र ख़त्म नहीं हुआ, बस एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।

जय अभिव्यंजना।
हर हर अभिव्यंजना। 🤍

शायद कुछ सफ़र मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि कुछ ऐसे लोगों से मिलने के लिए लिखे जाते हैं जो हमेशा के लिए हमारी कहा...
24/07/2026

शायद कुछ सफ़र मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि कुछ ऐसे लोगों से मिलने के लिए लिखे जाते हैं जो हमेशा के लिए हमारी कहानी का हिस्सा बन जाते हैं।

आप लोग अभिव्यंजना छोड़ रहे हैं, लेकिन अभिव्यंजना आप लोगों को कभी नहीं छोड़ेगी। आने वाली हर पीढ़ी में कहीं न कहीं आपकी मेहनत, आपकी सोच और आपकी छाप ज़रूर दिखाई देगी। इस घर को आपने सिर्फ़ समय नहीं दिया, आपने इसे अपना एक हिस्सा दिया है।

अंत में, उबैदुल्लाह अलीम का एक शेर, जो शायद आज के दिन से बेहतर कोई और बात कह ही नहीं सकता-

"आँख से दूर सही, दिल से कहाँ जाएगा,
ओ जाने वाले, तू हमें याद बहुत आएगा।"

आप सबका दिल से धन्यवाद।
आपका यह सफ़र ख़त्म नहीं हुआ, बस एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।

जय अभिव्यंजना।
हर हर अभिव्यंजना। 🤍

प्रितेश सिंह"कुछ लोग विदा नहीं होते, बस भूमिका बदल लेते हैं।"अभिव्यंजना का यह अध्याय आपके बिना वैसा नहीं रहेगा।नेतृत्व क...
24/07/2026

प्रितेश सिंह

"कुछ लोग विदा नहीं होते, बस भूमिका बदल लेते हैं।"

अभिव्यंजना का यह अध्याय आपके बिना वैसा नहीं रहेगा।
नेतृत्व का अर्थ पद नहीं, विश्वास होता है यह आपसे बेहतर कौन सीखा पायेगा।
आपके हिस्से की रौशनी अब भी इन गलियारों में ठहरी रहेगी।
शुक्रिया, भैया।
यह रिश्ता पद से कहीं बड़ा है।

हार्दिक दाधीच"कुछ लोग अपनी मौजूदगी से हर सफ़र को ख़ास बना देते हैं।"हर बहस में आपका उत्साह, हर आयोजन को लेकर आपकी फ़िक्र...
24/07/2026

हार्दिक दाधीच

"कुछ लोग अपनी मौजूदगी से हर सफ़र को ख़ास बना देते हैं।"

हर बहस में आपका उत्साह, हर आयोजन को लेकर आपकी फ़िक्र और हर छोटी-सी बात को दिल से लेना , यही आपकी सबसे ख़ूबसूरत पहचान रही।

कई बार आपकी बेचैनी आपकी मुस्कान से बड़ी हो जाती थी, लेकिन शायद वही इस बात का सबसे सच्चा प्रमाण था कि अभिव्यंजना आपके लिए केवल एक सोसाइटी नहीं, बल्कि अपना परिवार थी।

वाद-विवाद के प्रति आपका जुनून, आपकी ऊर्जा और हर मंच को बेहतर बनाने की आपकी कोशिशें हमेशा याद रहेंगी। आपने केवल अपनी ज़िम्मेदारियाँ नहीं निभाईं, बल्कि अपने समर्पण से हम सबको प्रेरित भी किया।

दिल से शुक्रिया, भैया।

सुमित राज तेजस्वी"रुख़्सत के बाद भी कुछ लोग सफ़र में शामिल रहते हैं।"हर कठिन मोड़ पर आपका धैर्य याद आयेगा आपने संस्था को...
24/07/2026

सुमित राज तेजस्वी

"रुख़्सत के बाद भी कुछ लोग सफ़र में शामिल रहते हैं।"

हर कठिन मोड़ पर आपका धैर्य याद आयेगा आपने संस्था को केवल संभाला नहीं, उसे अपनी पहचान का हिस्सा बनाया है।
यादें अक्सर नाम नहीं लेतीं, लेकिन चेहरों को कभी नहीं भूलतीं।
दुआ है,
हर नई मंज़िल आपको पहचान ले ~

गोपाल राणा"अल्फ़ाज़ ख़ामोश हो सकते हैं, उनका असर नहीं।"आपने केवल लिखना नहीं सिखाया, बल्कि लिखे हुए शब्दों को आवाज़ देना ...
24/07/2026

गोपाल राणा

"अल्फ़ाज़ ख़ामोश हो सकते हैं, उनका असर नहीं।"

आपने केवल लिखना नहीं सिखाया, बल्कि लिखे हुए शब्दों को आवाज़ देना भी सिखाया।
हर रचना के पीछे एक व्यक्तित्व और एक संवेदना छिपी होती है आपके साथ हुई साहित्यिक और अनौपचारिक चर्चाओं ने हमारे विचारों को नई दिशाएँ दीं और दृष्टि को नया विस्तार।

आपकी तहरीरों की महक अभिव्यंजना में हमेशा रहेगी,
दिल से शुक्रिया ~

सृष्टि मेहता"कुछ लोग मंच पर नहीं दिखते, मगर हर मंच उनकी मौजूदगी से मुकम्मल होता है।"ज़िम्मेदारियाँ उम्र नहीं, नीयत देखती...
24/07/2026

सृष्टि मेहता

"कुछ लोग मंच पर नहीं दिखते, मगर हर मंच उनकी मौजूदगी से मुकम्मल होता है।"

ज़िम्मेदारियाँ उम्र नहीं, नीयत देखती हैं।
आपने अपने समर्पण से इस विश्वास को सार्थक किया है।
अभिव्यंजना के इस सफ़र में आपका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
अभी तो यह सिर्फ़ इब्तिदा है,
आगे गुलशन और भी है ~

कभी-कभी लगता है कि सफ़र का शुरू होना अधिक आवश्यक होता है या उसे पूरा कर मंज़िल तक पहुँचना,सफ़र कहकशाँ तक मुस्कुराते हुए ...
24/07/2026

कभी-कभी लगता है कि सफ़र का शुरू होना अधिक आवश्यक होता है या उसे पूरा कर मंज़िल तक पहुँचना,
सफ़र कहकशाँ तक मुस्कुराते हुए चला और अब
जब यह अपनी मंज़िल पर आ पहुँचा है,
तो बस एक ही ख़याल आता है काश कुछ और आसमान देख लेते, फिर ठहरते ख़ैर -

बहरहाल, अब यह सफ़र अपनी मंज़िल पर है।

हमें आपकी याद नहीं आएगी, ज़रा-सी भी नहीं आएगी।
क्योंकि याद तो उनकी आती है ना जिन्हें भुला पाना मुमकिन हो, नहीं?

अब गुलदस्ते देने का समय भी बीत चुका है।
सारे फूल अपने-अपने नए बागों की ओर रवाना हो चुके हैं,
बस यही कामना है कि आप जिस भी बाग़ के फूल बनें,
वहाँ उतनी ही ख़ूबसूरती से खिलें, जितनी ख़ूबसूरती से आप इस घर को महकाते रहे हैं।

वैसे तो हम दरवाज़े रखते नहीं हैं,
और अगर होते भी,
तो उन्हें तोड़कर भीतर आने की इजाज़त आप सबको हमेशा रहेगी।
"दया दरवाजा तोड़ दो" :)

जय अभिव्यंजना।
हर हर अभिव्यंजना।

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