28/04/2026
**प्रेस विज्ञप्ति**
**दिनांक:** 28 अप्रैल, 2026, नई दिल्ली
बिना किताबों के कैसे बनेगा 'विकसित दिल्ली' और 'विश्व गुरु'? शिक्षा व्यवस्था पर दिल्ली सरकार की विफलता के खिलाफ DYFI का हल्ला बोल।
**नई दिल्ली:** राजधानी के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) को शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन कक्षा 1 से 8वीं तक के हजारों छात्र आज भी बुनियादी किताबों के लिए तरस रहे हैं। भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI) की दिल्ली राज्य कमेटी ने विभिन्न जिलों के स्कूलों का दौरा करने के बाद इस गंभीर स्थिति का खुलासा किया है और दिल्ली सरकार के 'शिक्षा मॉडल' के खोखले दावों की पोल खोल दी है।
DYFI के राज्य सचिव अमन सैनी ने आज प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार शिक्षा विरोधी है, आम और गरीब छात्रों को शिक्षा से बाहर करने चाहती है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। अमन सैनी ने तीखा हमला करते हुए कहा:
> "क्या बिना किताबों के दिल्ली विकसित बनेगी? सरकार को पता था कि सत्र 1 अप्रैल से शुरू होना है, फिर किताबों का प्रबंध पहले क्यों नहीं किया गया? यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश है। भाजपा और सत्ताधारी दल चाहते हैं कि सरकारी स्कूलों की स्थिति इतनी बदतर हो जाए कि लोग मजबूरन अपने बच्चों को वहां से निकाल लें और अंततः इन स्कूलों पर ताला लग जाए।"
DYFI के नेताओं (मुनाजिर, शाइन, अर्शी, अभिषेक, राहुल, राजीव) ने यमुना विहार और अन्य जिलों के स्कूलों का दौरा किया। छात्रों और अभिभावकों से बातचीत में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
कक्षा 6, 7 और 8 के छात्रों के पास एक भी किताब नहीं है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे बाजार से महंगी किताबें खरीद सकें।
वानिया, मेघा, अंजलि, ज़िक्रा, ज़ुनेरा और अफशा जैसे अनेक छात्रों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि 10 तारीख से गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं। बिना किताबों के वे छुट्टियों का होमवर्क कैसे करेंगे? इससे न केवल उनका सिलेबस पिछड़ जाएगा, बल्कि आने वाली परीक्षाओं के परिणामों पर भी इसका घातक असर पड़ेगा।
DYFI ने रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा पर होने वाले खर्च को बचाने के लिए जानबूझकर देरी की जा रही है। एक तरफ बड़े-बड़े विज्ञापनों में 'विश्व स्तरीय शिक्षा' की बात की जाती है, तो दूसरी तरफ बच्चों के पास पढ़ने के लिए पन्ने तक नहीं हैं। यह विडंबना है कि देश की राजधानी में बच्चे बिना संसाधनों के 'विश्व गुरु' बनने का सपना देखने को मजबूर हैं।
इस दिशा में शिक्षा को लेकर काम कर रहे हैं वरिष्ठ एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने भी हाई कोर्ट रुखा किया है, फिर भी सरकार की नींद नहीं खुली है।
भारत की जनवादी नौजवान सभा सरकार को स्पष्ट चेतावनी देती है: सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक की पाठ्यपुस्तकें सुनिश्चित की जाएं। यदि दो-तीन दिनों के भीतर किताबों का वितरण शुरू नहीं हुआ, तो DYFI पूरी दिल्ली में बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ मिलकर एक बड़ा जनसंपर्क अभियान चलाएगी। इसके बाद दिल्ली सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
जारीकर्ता:
राहुल, कोषाध्यक्ष
भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI),
राज्य कमेटी, दिल्ली।