DYFI DELHI NCR

DYFI DELHI NCR India's Largest Youth Organization DYFI stands for Communal harmony. Job, Education, Health For All D.Y.F.I. Constitutional approval of right to job.

(Democratic Youth Federation of India) was formed on 3rd November 1980 from it's inaugural conference (from 31st October to 3rd November) held at Saheed Kartar Singh Saraba Village, Ludhiana, Punjab,

India's Largest Youth Organization

DYFI stands for Communal harmony. DYFI demands Job for all. Education for all. Health for all. Industrialisation. Proper implementation of self employment project

s. DYFI opposes
Anti-democracy and sectarian movements. Anti-people economic policies guided by IMF-WB-WTO. Imperialist aggression over third war. DYFI fights for
Scientific socialism. To identify the various problems concerning youth and to take proper and timely decisions and measures to resolve them. To organize the youth from all progressive and democratic sections of the people under the banner of the DYFI and to make special efforts to draw and encourage the active participation of young women.

आज 5 मई 2026, CM Shri School, माता सुंदरी रेलवे कॉलोनी, D.D.U  मार्ग आईटीओ में छात्रों, अभिभावकों और साथियों ने मिलकर पे...
05/05/2026

आज 5 मई 2026, CM Shri School, माता सुंदरी रेलवे कॉलोनी, D.D.U मार्ग आईटीओ में छात्रों, अभिभावकों और साथियों ने मिलकर पेयजल के अधिकार के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया।
नया सत्र शुरू हुए एक महीना हो चुका है, लेकिन स्कूल में पीने का पानी ही उपलब्ध नहीं है। बच्चे पूरे दिन बिना पानी के रहने को मजबूर हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, गरिमा और बुनियादी अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। दिल्ली सरकार बड़े-बड़े वादे करती है हकीकत यही है ना पानी है ना किताब है और ना टीचर।
यह स्कूल तो भाजपा के मुख्यालय के पास है और हालात उतने ही खराब है क्या ऐसे बनेगा विकसित दिल्ली?

DYFI और SFI के साथियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सामने लाया, खाली टंकियां, बदहाल व्यवस्था और प्रशासन की लगातार चुप्पी। इसी के खिलाफ आज हस्ताक्षरों के जरिए अपनी आवाज़ बुलंद की गई। पानी कोई सुविधा नहीं, अधिकार है।
और इस अधिकार के लिए लड़ाई जारी रहेगी।

हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है —
* तुरंत स्कूल में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था की जाए
* हर छात्र को लगातार पानी उपलब्ध कराया जाए
* प्रशासन इस गंभीर समस्या पर जवाबदेही तय करे ।

भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI), JMS, CITU उत्तर-पश्चिम जिला कमेटी द्वारा शकूरबस्ती सीमेंट साइडिंग स्थित अग्निकांड पीड़...
05/05/2026

भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI), JMS, CITU उत्तर-पश्चिम जिला कमेटी द्वारा शकूरबस्ती सीमेंट साइडिंग स्थित अग्निकांड पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया। इस मानवीय पहल के माध्यम से संगठन ने उन परिवारों को संबल देने का प्रयास किया, जिन्होंने हाल ही में लगी भीषण आग में अपना सब कुछ खो दिया है।
​सरकार की उदासीनता पर प्रहार
​राहत अभियान के दौरान राज्य अध्यक्ष साथी मृत्युंजय ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
​"एक तरफ भाजपा सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों में विकास का ढोंग रच रही है, वहीं दूसरी ओर शकूरबस्ती जैसे इलाकों में रहने वाले मेहनतकश परिवारों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। सरकार की प्राथमिकता में गरीब और मजदूर कभी रहे ही नहीं। आपदा के समय प्रशासन की अनुपस्थिति यह साबित करती है कि यह सरकार केवल चंद पूंजीपतियों की सेवा में लगी है।"
​राहत अभियान की मुख्य बातें
​वितरण: पीड़ित परिवारों को कपड़े, राशन और अन्य दैनिक उपयोग की अनिवार्य वस्तुएं प्रदान की गईं।
​नेतृत्व: इस अभियान में राज्य अध्यक्ष साथी मृत्युंजय के साथ उत्तर-पश्चिम जिले से साथी केतन और साथी पवन ने मुख्य भूमिका निभाई।
​एकजुटता: जनवादी महिला समिति (AIDWA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हुए पीड़ित महिलाओं और बच्चों को सहायता प्रदान की।
​संघर्ष जारी रहेगा
​DYFI ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिन की सहायता नहीं है। संगठन ने संकल्प लिया है कि जब तक इन परिवारों का उचित पुनर्वास नहीं हो जाता और सरकार इन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं देती, तब तक जनवादी आंदोलन और राहत कार्य जारी रहेगा।
​जारीकर्ता:
जिला कमेटी, DYFI उत्तर-पश्चिम दिल्ली।

03/05/2026

भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) द्वारा चलाए जा रहे 'शिक्षा बचाओ अभियान' के दूसरे दिन आज सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाजपा सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी। विडंबना देखिए कि भाजपा के भव्य मुख्यालय के ठीक बगल में स्थित सरकारी स्कूलों तक में बच्चे बिना किताबों के पढ़ने को मजबूर हैं।
​अखबारों में चमकते वादे, स्कूलों में पसरा अंधेरा
​अभियान के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार के 'डिजिटल इंडिया' और 'विश्वगुरु' बनने के दावे केवल अखबारों के विज्ञापनों और समाचारों की हेडलाइंस तक सीमित हैं। हकीकत यह है कि सत्र शुरू हुए महीनों बीत गए, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के पास आज भी उनके सिलेबस की किताबें नहीं पहुंची हैं।
​"तारीख पर तारीख देना बंद करें शिक्षा मंत्री! हमें खोखले वादे नहीं, हाथ में किताबें चाहिए और स्कूल में पढ़ने का अवसर चाहिए।" — छात्र प्रतिनिधि
​बिना किताबों के कैसे पास होगी परीक्षा?
​सैकड़ों विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लेते हुए सरकार से सीधे सवाल पूछे:
​जब बच्चों के पास बुनियादी किताबें ही नहीं हैं, तो सिलेबस कैसे पूरा होगा?
​बिना तैयारी के छात्र परीक्षाएं कैसे पास करेंगे?
​क्या सरकार जानबूझकर सरकारी स्कूलों को बदहाल कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है?
​संघर्ष का संकल्प
​आज के अभियान में सैकड़ों छात्रों ने हस्ताक्षर कर इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का संकल्प लिया है। DYFI और SFI ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हर छात्र के हाथ में किताबें नहीं पहुंचीं, तो यह आंदोलन केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका घेराव सीधे सत्ता के गलियारों तक किया जाएगा।

BJP Delhi Rekha Gupta DYFI - Democratic Youth Federation of India SFI-Delhi Aam Aadmi Party - Delhi CITU DELHI NCR CPIM Delhi

02/05/2026

दिल्ली की सड़कों पर उतरा छात्र आक्रोश: किताबों के बिना कैसे पढ़ेंगे बच्चे? शिक्षा मंत्री जवाब दें!
जमीनी हकीकत को बयां करते हुए एक बढ़िया यूट्यूब चैनल।

भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) द्वारा चलाए जा रहे 'शिक्षा बचाओ अभियान' के दूसरे दिन आज सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाजपा सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी।

विडंबना देखिए कि भाजपा के भव्य मुख्यालय के ठीक बगल में स्थित सरकारी स्कूलों तक में बच्चे बिना किताबों के पढ़ने को मजबूर हैं।
​अखबारों में चमकते वादे, स्कूलों में पसरा अंधेरा
​अभियान के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार के 'डिजिटल इंडिया' और 'विश्वगुरु' बनने के दावे केवल अखबारों के विज्ञापनों और समाचारों की हेडलाइंस तक सीमित हैं। हकीकत यह है कि सत्र शुरू हुए महीनों बीत गए, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के पास आज भी उनके सिलेबस की किताबें नहीं पहुंची हैं।
​"तारीख पर तारीख देना बंद करें शिक्षा मंत्री! हमें खोखले वादे नहीं, हाथ में किताबें चाहिए और स्कूल में पढ़ने का अवसर चाहिए।" — छात्र प्रतिनिधि
​बिना किताबों के कैसे पास होगी परीक्षा?
​सैकड़ों विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लेते हुए सरकार से सीधे सवाल पूछे:
​जब बच्चों के पास बुनियादी किताबें ही नहीं हैं, तो सिलेबस कैसे पूरा होगा?
​बिना तैयारी के छात्र परीक्षाएं कैसे पास करेंगे?
​क्या सरकार जानबूझकर सरकारी स्कूलों को बदहाल कर निजीकरण को बढ़ावा दे रही है?
​संघर्ष का संकल्प
​आज के अभियान में सैकड़ों छात्रों ने हस्ताक्षर कर इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का संकल्प लिया है। DYFI और SFI ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हर छात्र के हाथ में किताबें नहीं पहुंचीं, तो यह आंदोलन केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका घेराव सीधे सत्ता के गलियारों तक किया जाएगा

02/05/2026

के राज्य अध्यक्ष मृत्युंजय।
काम के घंटे 8 , मेहनत के पूरे दाम,
पूंजीपतियों के गुलाम में नहीं सहेंगे।

🔥 मजदूर दिवस पर एकजुटता की पुकार: मदद का हाथ बढ़ाएं! 🔥साथियों,आज जब हम मजदूर दिवस (May Day) मना रहे हैं, दिल्ली के शकूरबस...
30/04/2026

🔥 मजदूर दिवस पर एकजुटता की पुकार: मदद का हाथ बढ़ाएं! 🔥
साथियों,
आज जब हम मजदूर दिवस (May Day) मना रहे हैं, दिल्ली के शकूरबस्ती सीमेंट साइडिंग से एक हृदयविदारक खबर आई है। भीषण आग के कारण लगभग 100 झुग्गियांजलकर राख हो गई हैं। हमारे मजदूर भाइयों और उनके परिवारों का सब कुछ—छत, राशन, कपड़े—सब इस आग की भेंट चढ़ गया है।
इस संकट की घड़ी में केवल नारे नहीं, बल्कि **ठोस मदद** की जरूरत है।
आइए, इस मई दिवस पर हम अपनी वर्ग-एकजुटता दिखाते हुए इन परिवारों के आंसू पोंछने का प्रयास करें।
# #हमें आपकी इन वस्तुओं की आवश्यकता है:**
*पहनने लायक कपड़े: (पुराने हों या नए, बस साफ और पहनने योग्य हों)
* **राशन:** (आटा, दाल, चावल, तेल, मसाले आदि)
* **हाइजीन किट:** सेनेटरी नैपकिन, साबुन, पेस्ट।
* **स्टेशनरी:** बच्चों की पढ़ाई के लिए किताबें, कॉपी, पेन।
* **आर्थिक मदद:** सीधे सहायता कोष में योगदान दें।

📍 **सामान कहाँ जमा करें?**
**HKS सुरजीत भवन**, ITO, नई दिल्ली।
# # # 📞 **संपर्क सूत्र:**
मदद पहुँचाने या अधिक जानकारी के लिए इन नंबरों पर संपर्क करें:
* 8527253690
* 9873291856
* 9811461327
* 8053573573
**निवेदक:**
DYFI - JMS - CITU - SFI

मजदूर की मदद ही सच्चा मजदूर दिवस है।"
इस संदेश को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि मदद समय पर पहुँच सके। ✊🚩

**प्रेस विज्ञप्ति****दिनांक:** 28 अप्रैल, 2026, नई दिल्लीबिना किताबों के कैसे बनेगा 'विकसित दिल्ली' और 'विश्व गुरु'? शिक...
28/04/2026

**प्रेस विज्ञप्ति**
**दिनांक:** 28 अप्रैल, 2026, नई दिल्ली

बिना किताबों के कैसे बनेगा 'विकसित दिल्ली' और 'विश्व गुरु'? शिक्षा व्यवस्था पर दिल्ली सरकार की विफलता के खिलाफ DYFI का हल्ला बोल।

**नई दिल्ली:** राजधानी के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) को शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन कक्षा 1 से 8वीं तक के हजारों छात्र आज भी बुनियादी किताबों के लिए तरस रहे हैं। भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI) की दिल्ली राज्य कमेटी ने विभिन्न जिलों के स्कूलों का दौरा करने के बाद इस गंभीर स्थिति का खुलासा किया है और दिल्ली सरकार के 'शिक्षा मॉडल' के खोखले दावों की पोल खोल दी है।

DYFI के राज्य सचिव अमन सैनी ने आज प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार शिक्षा विरोधी है, आम और गरीब छात्रों को शिक्षा से बाहर करने चाहती है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। अमन सैनी ने तीखा हमला करते हुए कहा:
> "क्या बिना किताबों के दिल्ली विकसित बनेगी? सरकार को पता था कि सत्र 1 अप्रैल से शुरू होना है, फिर किताबों का प्रबंध पहले क्यों नहीं किया गया? यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश है। भाजपा और सत्ताधारी दल चाहते हैं कि सरकारी स्कूलों की स्थिति इतनी बदतर हो जाए कि लोग मजबूरन अपने बच्चों को वहां से निकाल लें और अंततः इन स्कूलों पर ताला लग जाए।"

DYFI के नेताओं (मुनाजिर, शाइन, अर्शी, अभिषेक, राहुल, राजीव) ने यमुना विहार और अन्य जिलों के स्कूलों का दौरा किया। छात्रों और अभिभावकों से बातचीत में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
कक्षा 6, 7 और 8 के छात्रों के पास एक भी किताब नहीं है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे बाजार से महंगी किताबें खरीद सकें।

वानिया, मेघा, अंजलि, ज़िक्रा, ज़ुनेरा और अफशा जैसे अनेक छात्रों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि 10 तारीख से गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं। बिना किताबों के वे छुट्टियों का होमवर्क कैसे करेंगे? इससे न केवल उनका सिलेबस पिछड़ जाएगा, बल्कि आने वाली परीक्षाओं के परिणामों पर भी इसका घातक असर पड़ेगा।

DYFI ने रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा पर होने वाले खर्च को बचाने के लिए जानबूझकर देरी की जा रही है। एक तरफ बड़े-बड़े विज्ञापनों में 'विश्व स्तरीय शिक्षा' की बात की जाती है, तो दूसरी तरफ बच्चों के पास पढ़ने के लिए पन्ने तक नहीं हैं। यह विडंबना है कि देश की राजधानी में बच्चे बिना संसाधनों के 'विश्व गुरु' बनने का सपना देखने को मजबूर हैं।

इस दिशा में शिक्षा को लेकर काम कर रहे हैं वरिष्ठ एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने भी हाई कोर्ट रुखा किया है, फिर भी सरकार की नींद नहीं खुली है।

भारत की जनवादी नौजवान सभा सरकार को स्पष्ट चेतावनी देती है: सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक की पाठ्यपुस्तकें सुनिश्चित की जाएं। यदि दो-तीन दिनों के भीतर किताबों का वितरण शुरू नहीं हुआ, तो DYFI पूरी दिल्ली में बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ मिलकर एक बड़ा जनसंपर्क अभियान चलाएगी। इसके बाद दिल्ली सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

जारीकर्ता:
राहुल, कोषाध्यक्ष

भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI),
राज्य कमेटी, दिल्ली।

23 अप्रैल को AILU, SFI और DYFI दिल्ली द्वारा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नोएडा औद्...
26/04/2026

23 अप्रैल को AILU, SFI और DYFI दिल्ली द्वारा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस द्वारा की जा रही बर्बर दमनकारी कार्रवाई और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की कड़ी निंदा की गई।

अप्रैल में मज़दूर-विरोधी लेबर कोड्स लागू होते ही पहले हफ्ते में गुरुग्राम और दूसरे हफ्ते से नोएडा में मजदूरों ने अपने जायज़ अधिकारों—बेहतर वेतन और सम्मानजनक काम की शर्तों—के लिए शांतिपूर्ण और स्वतःस्फूर्त आंदोलन शुरू किया। इसके जवाब में सरकार और प्रशासन ने दमन का रास्ता चुना। सैकड़ों मजदूरों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है। CITU नोएडा के नेता गंगेश्वर शर्मा ने बताया कि कई ट्रेड यूनियन नेताओं को दो हफ्तों से अधिक समय तक गैर-संवैधानिक तरीके से नजरबंद रखा गया है। यहां तक कि जमानत प्रक्रिया में मदद करने वाले वकीलों को भी निशाना बनाया गया है।

AILU दिल्ली राज्य नेता कॉ. सुनील, संजय और अद्रिजा ने बताया कि उनकी तथ्य-जांच टीमों ने पाया है कि हिरासत की पूरी प्रक्रिया में कानून का खुला उल्लंघन हुआ है—बिना अरेस्ट मेमो के गिरफ्तारियां; परिवारों को सूचना दिए बिना दिनों तक जेल में कैद रखना; महिला मजदूरों पर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा, आदि। न्याय नीति फाउंडेशन के एडवोकेट ऋषि ने FIR में जमानत प्रक्रिया की मनमानी को उजागर करते हुए बताया कि गिरफ्तार लोगों को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर, और वे कितनी बेल राशि जमा कर सकते हैं, इस पर जमानत दी जा रही हैं। इसका सीधा मतलब है कि सबसे गरीब लोग, जिनके पास जमानत की राशि जुटाने के साधन नहीं हैं, वे जेल में ही बंद रहेंगे।

SFI की नेता कॉ. अचिंत्या ने कहा की मजदूरों की जायज़ मांगों को सुनने के बजाय, यूपी सरकार और पुलिस एक झूठा दुष्प्रचार अभियान चला रही है। इस आंदोलन को ‘साजिश’ और ‘नक्सल लिंक’ बताकर बदनाम किया जा रहा है। जो लोग शांतिपूर्ण विरोध की अपील कर रहे थे, उन्हें ही ‘मास्टरमाइंड’ बताकर अलग-अलग राज्यों में गिरफ्तार किया जा रहा है। जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी पर मजदूरों और उनके समर्थकों पर यह दमन हमें उस काले इतिहास की याद दिलाता है। यह संयोग नहीं, बल्कि सत्ता का असली चेहरा है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने जनविरोधी लेबर कोड्स को थोपने और अपनी नाकामी छुपाने के लिए कानून और लोकतंत्र दोनों को कुचल रही है। मजदूरों की आवाज दबाने के लिए उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ घोषित करना बेहद शर्मनाक है।

भारत की जनवादी नौजवान सभा,दिल्ली राज्य कमेटी सदस्य उपासना ने कहा कि DYFI इस दमन और झूठे प्रचार का कड़ा विरोध करती है और साफ शब्दों में चेतावनी देती है कि मजदूरों के इस वैध आंदोलन को ‘साजिश’ बताकर बदनाम करने की सुनियोजित कोशिशें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। हमारी स्पष्ट मांगें:

- नोएडा आंदोलन से जुड़े सभी मजदूरों, कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को तुरंत रिहा किया जाए। ‘साजिश’ और ‘नक्सल लिंक’ के झूठे आरोप तुरंत वापस लिए जाएं।
- हजारों ‘अज्ञात’ लोगों के नाम पर दर्ज मुकदमों की witch-hunt बंद की जाए।
- पुलिस की बर्बरता, खासकर महिला मजदूरों पर हिंसा, की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो।
- रिहा किए गए मजदूरों से जब्त किया गया सामान—फोन, आभूषण (चेन, अंगूठी आदि)—तुरंत वापस किया जाए।
- मजदूरों की जायज़ मांगों पर तुरंत कार्रवाई हो—NCR में न्यूनतम वेतन ₹26,000 लागू किया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार की बनाई किसी भी उच्च स्तरीय समिति (High Powered Committee) में सभी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
- जनविरोधी, मजदूर-विरोधी लेबर कोड्स वापस लिए जाएं।

मजदूरों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। दमन का हर प्रयास और ज्यादा मजबूत प्रतिरोध को जन्म देता है।

23/04/2026

PRESS CONFERENCE

ON MASS ARRESTS, DETENTIONS AND VIOLATION OF CONSTITUTIONAL SAFEGUARDS IN GAUTAM BUDHH NAGAR

23RD APRIL 2026
PRESS CLUB OF INDIA

ALL INDIA LAWYERS UNION
Ailu Delhi State

DEMOCRATIC YOUTH FEDERATION OF INDIA
DYFI DELHI NCR

STUDENTS FEDERATION OF INDIA SFI-Delhi
CITU DELHI NCR DYFI - Democratic Youth Federation of India

Address

SURJEET BHAWAN, ITO
Delhi
110002

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when DYFI DELHI NCR posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to DYFI DELHI NCR:

Share