Nirman Mazdoor Sangh Delhi

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Nirman Mazdoor Sangh Delhi Registered in Trade Union act 1926 and we registered construction worker inThe Delhi Building and Other Construction Workers Welfare Board, is committed to the safety, health etc.

09/07/2025
09/07/2025

यह रहा 09 जुलाई 2025 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का संक्षेप में पॉइंट वाइज सारांश:

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🛑 हड़ताल का आयोजन और भागीदारी

25 करोड़ से अधिक लोगों ने हड़ताल, रास्ता रोको, रेल रोको में भाग लिया।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी संख्या में लोग जुड़े।

छात्र, युवा, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

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🏭 हड़ताल में शामिल क्षेत्र

कोयला, NMDC, स्टील, बैंक, बीमा, पेट्रोलियम, बिजली, डाक, टेलीकॉम, पोर्ट, सीमेंट, परिवहन, डिफेंस, रेल आदि।

स्कीम वर्कर्स (आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मील), घरेलू कामगार, ठेला-रेहड़ी, टैक्सी, ऑटो चालक भी शामिल।

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📍 राज्यवार असर

पूरी तरह बंद: पुडुचेरी, असम, बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, पंजाब, केरल, बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, गोवा, मणिपुर, मेघालय।

आंशिक बंद: राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश।

औद्योगिक/क्षेत्रीय हड़ताल: मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात।

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🧾 मुख्य मुद्दे

1. सरकारी नीतियों द्वारा निजीकरण, कॉरपोरेट को फायदा और सार्वजनिक क्षेत्र की अनदेखी।

2. महंगाई, बेरोजगारी, आत्महत्या के बढ़ते मामले।

3. लेबर कोड्स द्वारा मजदूर अधिकारों का हनन:

हड़ताल का अधिकार सीमित।

यूनियन रजिस्ट्रेशन जटिल।

लेबर कोर्ट हटाकर ट्रिब्यूनल लाना।

फैक्ट्री एक्ट में बदलाव से मजदूर सुरक्षा खत्म।

फिक्स्ड टर्म जॉब्स में कोई सुरक्षा नहीं।

ठेका व आउटसोर्सिंग को सामान्य बना देना।

4. सरकारी नौकरियों में नियुक्ति नहीं, रिटायर्ड को रखा जा रहा।

5. ELI स्कीम से रोजगार नहीं बल्कि नियोक्ताओं को सब्सिडी दी जा रही।

6. सोशल सिक्योरिटी स्कीम को कमजोर किया जा रहा है।

7. प्रवासी मजदूरों को वोट से वंचित करने का प्रयास।

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📣 मांगें

सभी सरकारी विभागों में खाली पदों पर तुरंत भर्ती।

औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में रोजगार निर्माण।

मनरेगा के काम और वेतन में वृद्धि, शहरी क्षेत्र के लिए कानून।

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा।

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🏛️ दिल्ली की रैली

जंतर-मंतर पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने रैली

08/07/2025

भारत सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड (4 Labour Codes) में श्रमिकों के अधिकारों को एकसमान और सरल बनाने की कोशिश की गई है, लेकिन इन कानूनों में कुछ महत्वपूर्ण कमियाँ (कमजोरियाँ) भी हैं, जिनकी आलोचना कई मजदूर संगठनों और विशेषज्ञों ने की है। नीचे मुख्य कमियाँ बिंदुवार (point-wise) दी गई हैं:

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🔴 1. स्थायी (Permanent) नौकरी और सुरक्षा में कमी

नए कोड्स के तहत कंपनियों को 300 तक श्रमिकों को रखने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है (Industrial Relations Code)।

इससे छँटनी और लॉकआउट आसान हो जाता है, जो श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा को खतरे में डालता है।

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🔴 2. सामूहिक सौदेबाजी (Collective Bargaining) पर असर

यूनियन को मान्यता देने के लिए कम से कम 51% मजदूरों का समर्थन जरूरी है।

इससे मजदूर यूनियनों की शक्ति कमजोर होती है, और प्रबंधन पर दबाव डालना कठिन हो जाता है।

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🔴 3. अनौपचारिक (Informal) क्षेत्र को लाभ कम

लगभग 90% श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं, लेकिन इन कोड्स में उनके लिए विशेष प्रावधानों की कमी है।

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर, गिग वर्कर, घरेलू कामगार जैसे वर्गों को कम सुरक्षा और अधिकार मिलते हैं।

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🔴 4. काम के घंटे (Working Hours) बढ़ाने की छूट

नए कोड्स में 12 घंटे तक काम करने की छूट राज्य सरकारों को दी गई है (Code on Wages, OSH Code)।

इससे श्रमिकों की थकान, उत्पादकता, और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

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🔴 5. सरकारी नियंत्रण बढ़ा, लेकिन जवाबदेही कम

सरकार को यूनियन रजिस्ट्रेशन, वेतन निर्धारण, और निरीक्षण में अधिक अधिकार दिए गए हैं।

लेकिन श्रमिकों की शिकायतों पर कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं है।

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🔴 6. डिजिटल रजिस्ट्रेशन और रिपोर्टिंग की बाध्यता

सभी नियोक्ताओं को डिजिटल पोर्टल पर श्रमिकों का पंजीकरण करना होगा।

लेकिन छोटे उद्योगों और असंगठित क्षेत्र में यह संभव नहीं, जिससे कई श्रमिक कवर से बाहर रह सकते हैं।

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🔴 7. गर्भवती महिलाएं और दिव्यांग श्रमिकों के लिए विशेष सुरक्षा की कमी

कोड्स में महिलाओं और विकलांग श्रमिकों के लिए अलग से कोई मजबूत प्रावधान नहीं है।

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🔴 8. Social Security Code में स्पष्टता की कमी

Social Security Code में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल तो किया गया है, लेकिन:

अंशदान (contribution) कैसे और कौन देगा - यह स्पष्ट नहीं।

इनके लिए योजना (scheme) कब और कैसे लागू होगी - समय सीमा नहीं दी गई।

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निष्कर्ष (Conclusion):

चारों श्रम संहिताओं का उद्देश्य सरलीकरण और एकीकरण है, लेकिन इनसे जुड़ी जमीनी हकीकत और कमजोर तबकों की सुरक्षा पर खास ध्यान नहीं दिया गया। श्रमिकों की भागीदारी, सामाजिक सुरक्षा, और न्यूनतम अधिकारों की गारंटी के लिए और सुधार की है

भारत की नई 4 श्रम संहिताओं का लक्ष्य श्रम कानूनों को आसान बनाना है, पर इनमें कई कमियाँ बताई जा रही हैं। मुख्य आलोचनाएँ श...
08/07/2025

भारत की नई 4 श्रम संहिताओं का लक्ष्य श्रम कानूनों को आसान बनाना है, पर इनमें कई कमियाँ बताई जा रही हैं। मुख्य आलोचनाएँ श्रमिक अधिकारों को कमजोर करने, जैसे कि हड़ताल के अधिकार को सीमित करना और छंटनी को आसान बनाना हैं। सामाजिक सुरक्षा विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए अभी भी अपर्याप्त है, और न्यूनतम मजदूरी को लेकर भी चिंताएँ हैं। साथ ही, ट्रेड यूनियनों की भूमिका कमजोर होने और कार्यान्वयन में संभावित राज्यों के बीच मतभेद की आशंका भी है।

As announced in the Union Budget, each gig worker will be registered on the labour ministry’s e-Shram portal and be assi...
07/02/2025

As announced in the Union Budget, each gig worker will be registered on the labour ministry’s e-Shram portal and be assigned a 12 digit universal account number (UAN). Based on this, the gig worker would be identified and the contribution would be deducted from each platform that they work on. Under the scheme, the worker would receive provident fund and pension benefits.

The quantum of contribution is yet to be finalised but it could be in the range of 1% to 2%.

Workers would be registered on e-Shram portal assigned a UAN

दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड (DBOCWWB) की स्थापना 02 सितंबर, 2002 को 'द बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्...
07/02/2025

दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड (DBOCWWB) की स्थापना 02 सितंबर, 2002 को 'द बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (रेगुलेशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विसेज) एक्ट 1996' की धारा 18 (1) के तहत की गई थी। नियमित समयांतराल के बाद इसका पुनर्गठन होता रहा तथा वर्तमान बोर्ड का गठन 29 नवंबर 2024 को हुआ है ।
दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के नेतृत्व में दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, के निर्माण कार्यों में कार्यरत निर्माण मज़दूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कटिबद्ध हैं । इसी दृष्टि से, बोर्ड निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण की सुविधा देता है, निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपायों के पालन का मूल्यांकन करता है एवं निर्माण मज़दूरों को कईं वित्तीय लाभ/योजनाएं प्रदान करता है, जैसे कि निर्माण मज़दूरों के बच्चों की शिक्षा के लिए, मातृत्व लाभ, विवाह पर सहायता, मुफ्त बस पास, टूलकिट के लिए अनुदान, कौशल वृद्धि प्रशिक्षण, वृद्धावस्था पेंशन, विकलांगता एवं मृत्यु लाभ इत्यादि।

Labour Card Banwane or Renewal karane ke liye Call kare 9821658602
07/02/2025

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05/02/2025

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