23/08/2026
आज रविवार 23 अगस्त 2026 के हरिद्वार संत सम्मेलन में स्वामी रामदेव जी ने
'एक राष्ट्र–एक चुनाव'
का स्पष्ट समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षकों का लगभग 25–30 प्रतिशत समय चुनाव कराने में चला जाता है, जिसके कारण शिक्षा प्रभावित होती है। उनके अनुसार बार-बार होने वाले चुनावों के कारण व्यवस्था और विकास भी प्रभावित होते हैं।
स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि देश में चुनावी ड्यूटी के कारण शिक्षकों का लगभग 25–30 प्रतिशत समय चुनाव कराने में चला जाता है। इससे शिक्षा प्रभावित होती है। उनका तर्क था कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों तो शिक्षकों सहित सरकारी तंत्र को बार-बार चुनावी ड्यूटी में लगाने की आवश्यकता कम होगी और शिक्षा को अधिक समय मिल सकेगा।
स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि केवल
One Nation–One Election
ही नहीं, बल्कि
One Nation–One Education
की दिशा में भी विचार होना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में Indian Knowledge System अर्थात भारतीय ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देने की बात उन्होंने रखी।
उनके अनुसार सबसे बड़ा आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि देश की शिक्षा, भाषा और ज्ञान-व्यवस्था में भारतीयता और स्वाभिमान को मजबूत किया जाए।
उन्होंने वंदे मातरम् को भारत माता के प्रति सम्मान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने भारत माता को शक्ति, समृद्धि और विद्या के विभिन्न स्वरूपों से जोड़ा।
स्वामी जी ने जाति और वर्ग के आधार पर किसी भी व्यक्ति के अपमान का विरोध किया। उनका कहना था कि समाज के किसी भी वर्ग—SC, ST, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, ब्राह्मण या संन्यासी—का अपमान नहीं होना चाहिए।
उनके भाषण का मूल संदेश है कि बार-बार होने वाले चुनावों में देश की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था का बहुत समय और संसाधन लगता है। एक साथ चुनाव होने से चुनावी व्यवधान कम हो सकते हैं और शिक्षा तथा विकास के कार्यों को अधिक गति मिल सकती है। साथ ही भारत को अपनी शिक्षा और ज्ञान परंपरा के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।
वन्देमातरम।
भारत माता की जय।।