14/09/2024
यह कैर है।
इसके बारे में एक पुरानी कहावत है, कैर और बैर मिटाए से भी नहीं मिटते।
यानी पहले यह खेतों में कहीं भी उग आता था।
काटने पर इसकी अगर छोटी सी जङ भी जमीन में रह जाती थी तो यह फिर से अपना सिर उठा लेता था।
कैर के फलों को स्थानीय भाषा (बारमेर, जेसलमेर ,जोधपुर ,जालोर ,पाली, बलोतरा) में '' केरिया '' कहा जाता है इसके हरे फ़लों का प्रयोग सब्जी और आचार बनाने में किया जाता है। जब इसका फल जितना छोटा होता उतनी ही सब्जी स्वादिष्ट होती है, इसके सब्जी और आचार अत्यन्त स्वादिष्ट होते हैं। पके लाल रंग के फ़ल खाने के काम आते हैं।
बचपन में हम इसकी टहनियां काट कर लाते थे और खाट पर बिछाकर उन पर सेंवइयां सुखाते थे।
सीज़न में इस पर लाल-नारंगी रंग के फूल लगते हैं तो देखने वाले का मन मोह लेते हैं।
इसके फलों जिन्हें हमारे यहां टींड/टींट कहते हैं, का अचार डलता है जो बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है।
जब टींट पक जाता है तो और भी स्वादिष्ट हो जाता है शायद उसे पींजू (अगर मैं ग़लत हूं तो सही कर देना) कहते हैं।
हमारे क्षेत्र से तो यही प्रकृति का नायाब तोहफा लगभग विलुप्त ही हो गया है।
ये सब बातें 40-45 साल पुरानी है और बस यादों में ताज़ा हैं।
ये बीना पत्तों का पेड़ होता है जिसकी लकड़ी मजबूत ओर चिकनी होती है जो ज्यादातर हाथ से चलने वाली चक्की में किल लगाने के काम आती है। पुराने टाइम में कच्चे घरों में छत के लिए इमारती लकड़ी के तौर पर इस्तेमाल होती थी क्योंकि इसमें घुन ओर दीमक भी नहीं लगती।
कैर का उपयोग (Ker Use)
कैर एक ऐसा फल है जिसके सेवन से कई तरह की बीमारियां ठीक होती है। इसका कई तरह से उपयोग किया जा सकता है। कैर को सुखाकर उसको पीसकर इसका चूर्ण बनाकर सुबह खाली पेट लेने से मधुमेह रोग में आराम मिलता है। कैर के डंठल से बने चूर्ण (Ker ka churan) से कफ और खांसी में आराम मिलता है। कैर की छाल के चूर्ण से पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या दूर होती है। यह पेट संबंधी, जोड़ों के दर्द, दांत दर्द, गठिया, दमा, खांसी, सूजन, बार-बार बुखार होना, मलेरिया, डायबिटीज, बदहजमी, एसिडिटी, दस्त और कब्ज में काफी लाभदायक होता है।