13/01/2026
नागरिकता पाना में कठिन देशों की सूची ये है-
🇶🇦 क़तर — 25 साल निवास, अरबी भाषा का ज्ञान जरूरी , पुरानी नागरिकता छोड़नी होगी
🇻🇦 वेटिकन सिटी — केवल पादरी और राजनयिक
🇧🇹 भूटान — 20 साल, राजा की इच्छा पर निर्भर
🇸🇦 सऊदी अरब — 10+ साल, अरबी का ज्ञान जरूरी ,बहुत चयनात्मक, लगभग नामुमकिन
🇰🇼 कुवैत — 20 साल, मुस्लिम होना ज़रूरी, दोहरी नागरिकता नहीं चलेगी
🇨🇭 स्विट्ज़रलैंड — 10 साल, स्थानीय वोट में कड़ी परीक्षा
🇨🇳 चीन — बहुत ही दुर्लभ सरकारी अपवादों में
🇰🇵 उत्तर कोरिया — लगभग असंभव
🇯🇵 जापान — 5 साल, पुरानी नागरिकता छोड़नी होगी
🇦🇪 यूएई — 30 साल, बेहद चयनात्मक
🇦🇹 ऑस्ट्रिया — 10 साल, जर्मन भाषा (B2 स्तर)
और नागरिकता पाना सबसे आसान देशों की सूची-
🇦🇷 अर्जेंटीना — 2 साल निवास, भाषा परीक्षा नहीं
🇵🇾 पैराग्वे — 3 साल, न्यूनतम रहने की शर्त
🇺🇾 उरुग्वे — 3–5 साल, लचीले निवास नियम
🇧🇷 ब्राज़ील — 4 साल, पुर्तगाली का बुनियादी ज्ञान
🇵🇹 पुर्तगाल — 5 साल, A2 स्तर की पुर्तगाली, दोहरी नागरिकता मान्य
🇲🇽 मेक्सिको — 5 साल, बुनियादी स्पेनिश
🇵🇪 पेरू — 2 साल निवास
🇨🇱 चिली — 5 साल, सीधी और स्पष्ट प्रक्रिया
🇨🇴 कोलंबिया — 5 साल (लैटिन मूल होने पर 2 साल)
🇮🇹 इटली — 3 साल (वंश के आधार पर), दोहरी नागरिकता मान्य
🇮🇪 आयरलैंड — 5 साल निवास
🇪🇨 इक्वाडोर — 3 साल निवास
🇩🇴 डोमिनिकन रिपब्लिक — 2 साल निवास
🇧🇪 बेल्जियम — 5 साल, सामाजिक/एकीकरण का प्रमाण
इस से क्या नतीजे निकलते है-
पहला-
जो देश अपनी पहचान को नस्ल, भाषा, धर्म या राजसत्ता से जोड़कर देखते हैं, वहाँ नागरिकता का दरवाज़ा जानबूझकर संकरा रखा गया है।
क़तर, सऊदी, कुवैत जैसे देशों में संदेश साफ़ है— हम में तुम घुलमिल नहीं सकते! रह लो, काम कर लो, किंतु नागरिक नहीं बनोगे!
दूसरा-
जहाँ आबादी चाहिए, वहाँ नागरिकता आसान है। यहाँ नागरिकता भावनात्मक नहीं, व्यावहारिक नीति है।
तीसरा-
निवास और नागरिकता दो अलग चीज़ें हैं। कई देशों में दशकों रहने के बाद भी नागरिकता नहीं मिलती (यूएई, क़तर),जबकि कुछ जगहों पर 2–3 साल में ही पासपोर्ट मिल जाता है (अर्जेंटीना, पेरू)।
और कुछ दिलचस्प पहलू और जानिये!
भूटान जैसा देश तक अपनी नागरिकता किसी को भी नहीं देता चाहे भूटानी महिला किसी विदेशी से विवाह क्यों ना कर ले।
इजराइल में हर यहूदी को ऑटोमैटिकली नागरिकता देने का प्रावधान है चाहे वो किसी भी देश का क्यों ना हो!
पाकिस्तान में यही पाकिस्तानी मर्द विदेशी महिला से निकाह कर ले तो महिला को नागरिकता मिल जाएगी। किंतु यदि पाकिस्तानी महिला किसी काफ़िर मर्द से विवाह करें तो मर्द को उधर की नागरिकता नहीं मिलेगी- आसानी से! ठीक यही नियम बांग्लादेश में लागू है!
अफ़ग़ानिस्तान तक में गैर-मुस्लिमों को नागरिकता मिलना लगभग असंभव है।
रही भारत की- तो किसी ने शायद कड़वा सच ऐसे बयान किया है-
सब का खून शामिल है इस मिट्टी में,
किसी के अब्बा का हिन्दुस्थान थोड़ी ही है!!
इधर बांग्लादेशी आ सकता है, रोहिंग्या आ सकता है , नागरिकता ले सकता है , बस किसी और मुल्क का हिंदू आसानी से नहीं ले सकता.
Mann Jee