07/10/2025
हेमू शाह जी के विजय दिवस पर रौनियार वैश्य समाज का ऐतिहासिक संकल्प: एकजुट होकर संघर्ष की राह अपनाएं ✍️ Vijay Gupta
7 अक्टूबर 2025 – भारत के गौरवशाली इतिहास में एक ऐसा नाम जो साहस, बुद्धिमत्ता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, वह है शिरोमणि हेमचंद्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू शाह जी। 16वीं शताब्दी में दिल्ली के सिंहासन पर विराजमान अंतिम हिंदू सम्राट के रूप में विख्यात हेमू जी ने मुगल साम्राज्य की चूलें हिला दी थीं। 5 नवंबर 1556 को पानीपत के द्वितीय युद्ध में अकबर की विशाल सेना को परास्त कर उन्होंने 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की और पूरे उत्तर भारत को हिंदू शासन का स्वर्णिम अध्याय समर्पित किया। आज, उनके इस विजय दिवस पर रौनियार वैश्य समाज के सभी भाई-बंधु एकत्रित होकर संकल्प ले रहे हैं कि हम संगठित, एकजुट और संघर्षशील बनकर अपने गौरव को पुनर्जीवित करेंगे।
हेमू जी का जीवन मात्र एक योद्धा की कहानी नहीं, बल्कि एक साधारण वैश्य पुत्र की असाधारण उपलब्धि का जीवंत प्रमाण है। रौनियार वैश्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले हेमू जी ने जन्म से ही व्यापारिक बुद्धिमत्ता और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। बिहार के इस वीर ने सूर्यवंशी राजा हेमचंद्र के रूप में दिल्ली को हिंदू राजधानी बनाया। उनकी सेना में 1,500 युद्ध-कुशल हाथी, 1,30,000 सैनिक और 1,000 तोपें थीं, जिन्होंने मुगल सेना के 1,00,000 सैनिकों को धूल चटा दी। यह विजय न केवल सैन्य सफलता थी, बल्कि हिंदू संस्कृति और वैश्य समाज की उद्यमशीलता का प्रतीक बनी। दुर्भाग्यवश, पानीपत के मैदान में एक दुर्घटना ने उनके साम्राज्य को छोटा कर दिया, लेकिन उनकी वीरता की गाथा आज भी प्रेरणा स्रोत है।
रौनियार वैश्य समाज, जो सदियों से व्यापार, कृषि और सामाजिक उत्थान में अग्रणी रहा है, हेमू जी को अपना आदर्श मानता है। आज के दौर में जब सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां समाज को विखंडित करने का प्रयास कर रही हैं, हेमू जी के विजय दिवस का अवसर हमें एकजुट होने का संदेश देता है। समाज के युवा उद्यमी, किसान और पेशेवर एक मंच पर आकर संगठित प्रयास करें, ताकि वैश्य समाज की आर्थिक शक्ति को मजबूत किया जा सके।
"हेमू जी ने सिद्ध किया कि वैश्य समाज का पुत्र भी सम्राट बन सकता है। आज हमें उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा। "हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। विजय उत्सव हमें याद दिलाता है कि संघर्ष से ही विजय प्राप्त होती है।"
विजय उत्सव की हार्दिक बधाई!
यह उत्सव न केवल इतिहास की स्मृति है, बल्कि भविष्य की नींव भी। आइए, हेमू जी के आदर्शों पर चलकर एक मजबूत, समृद्ध और संघर्षशील समाज का निर्माण करें। जय हेमू! जय रौनियार वैश्य समाज! जय हिंद!
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