18/06/2025
https://youtu.be/SZMFlYKOcRk?si=5NFe_agXiZHHI_5h
https://youtu.be/5AWCtlSg1C0?si=AXRUmEgaGG0ocSwn
[हमारी NGO टीम का वास्तविक अनुभव और डेटा]
यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जो जुग्गी, झोपड़ी या शेड में रहता है, गरीब हो। हमारे अनुभव में केवल 2% से 5% लोग ही वास्तव में ज़रूरतमंद होते हैं।
दिल्ली में करीब 30 लाख लोग झुग्गी बस्तियों में रहते हैं, जबकि कुल जनसंख्या लगभग 3 करोड़ है।
अब तक लगभग 60% लोगों को ही वैकल्पिक आवास मिला है, बाकी लोग अभी भी प्रतीक्षा सूची में हैं – और उन्हें कब घर मिलेगा, इसका कोई निश्चित समय नहीं है।
📊 [आंकड़ों के अनुसार]
30 लाख का 2% से 5% यानी लगभग 60,000 से 1,50,000 लोग ऐसे हैं जो वाकई में ज़िंदगी की मूलभूत ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इनमें से अनुमानित 10,000 से अधिक लोग सड़क पर रहते हैं, जिनके पास न तो छत है, न कोई सरकारी सहायता।
🧍♂️ [ये लोग कौन हैं?]
- बुजुर्ग जिन्हें परिवार ने घर से निकाल दिया है।
- मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग जिन्हें परिवार ने त्याग दिया।
- वे जिनके परिवार के सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहे।
- ठेले, सब्ज़ी या छोटी मज़दूरी से पेट पालने वाले लोग।
- काम की तलाश में यूपी, बिहार या आस-पास के राज्यों से आए प्रवासी मज़दूर।
- कुछ बांग्लादेशी नागरिक भी हो सकते हैं – लेकिन यदि हैं भी, तो इंसानियत के नाते उन्हें सुरक्षित रूप से वापस भेजने की नीति होनी चाहिए।
अधिकतर लोग गांवों में रोजगार न होने के कारण दिल्ली आते हैं – और मजबूरी में झुग्गियों में रहते हैं।
🏚️ [क्या किया जाना चाहिए?]
-> अगर सरकार नए मकान नहीं दे सकती तो पुराने मकानों को जबरन न तोड़ा जाए, क्योंकि तेज़ गर्मी और बारिश में ये झोपड़ियाँ ही लोगों की एकमात्र सुरक्षा हैं।
-> शहर की सुंदरता ज़रूरी है, लेकिन इंसानियत की कब्र पर नहीं।
-> DDA, MCD और रेलवे – ये तीनों विभाग, जो झुग्गियाँ हटाने की मांग करते हैं, दिल्ली की मौजूदा सरकार (BJP) के अंतर्गत आते हैं।
-> सरकार चाहें तो इस कार्रवाई को रोक सकती है।
-> ऐसे ही हालातों से सामाजिक असमानता और अपराध का जन्म होता है – जब इंसान हार मानकर गलत रास्ता चुन लेता है।
-> गरीबी मिटानी चाहिए – लेकिन और गरीब नहीं बनाए जाने चाहिए।
🇮🇳 [हमारी अपील]
-> सरकार शहर का विकास करे – लेकिन "सबका साथ, सबका विकास" के सिद्धांत पर।
-> हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी का नारा है:
"जहाँ झुग्गी, वहीं मकान" – इस पर अमल ज़रूरी है।
Regards
Team NGO
78380-36994 (Whatsapp & Call)
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