26/05/2026
डॉ. आर. श्रीधर — जिन्होंने रेडियो को केवल तरंगों तक नहीं, बल्कि दिलों तक पहुँचाया।
राष्ट्रपति महोदया के करकमलों से पद्मश्री 2026 से सम्मानित होने का यह गौरवपूर्ण क्षण केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन करोड़ों आवाज़ों की जीत है जिन्हें वर्षों तक सुनने वाला कोई मंच नहीं मिला था।
5 दशकों से अधिक के अपने अद्भुत अनुभव, समर्पण और दूरदर्शी सोच के साथ डॉ. आर. श्रीधर ने भारत में संचार की दुनिया को एक नई दिशा दी। उन्हें यूँ ही “भारत में कम्युनिटी रेडियो के जनक” नहीं कहा जाता। वर्ष 2004 में उन्होंने भारत के पहले कम्युनिटी रेडियो स्टेशन की कल्पना की, उसका डिज़ाइन तैयार किया और उसे स्थापित कर यह सिद्ध कर दिया कि रेडियो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की एक सशक्त आवाज़ भी बन सकता है। उनकी अथक मेहनत, जनसेवा की भावना और ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के संकल्प ने देशभर में 300 से अधिक कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन स्टेशनों ने गाँवों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और दूर-दराज़ के समुदायों को अपनी बात कहने, अपनी पहचान बनाने और अपने सपनों को उड़ान देने का मंच प्रदान किया।
डॉ. श्रीधर का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि जब उद्देश्य समाज की भलाई हो और इरादे मजबूत हों, तो एक व्यक्ति भी पूरे देश में परिवर्तन की लहर ला सकता है। उनका सफर समर्पण, नवाचार और सेवा की ऐसी मिसाल है जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी। उनकी उपलब्धियाँ केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन अनगिनत मुस्कानों, आत्मविश्वास भरी आवाज़ों और जागरूक समुदायों में जीवित हैं, जिन्हें उन्होंने अपनी सोच और प्रयासों से नई पहचान दी।
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