18/10/2026
प्रेस विज्ञप्ति
संविधान बचाने के लिए देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, 13 दिसंबर को दिल्ली में विशाल रैली : डॉ. उदित राज
डोमा परिसंघ के राष्ट्रीय सम्मेलन में 20 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल, सामाजिक न्याय की लड़ाई में एकजुट होने का आह्वान
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026।
दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी संगठनों के परिसंघ (डोमा परिसंघ) द्वारा आज एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल, नई दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें 20 राज्यों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए डोमा परिसंघ के राष्ट्रीय चेयरमैन एवं पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने सवाल उठाया कि हम अपने अधिकारों की लड़ाई लगातार क्यों हारते जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि फुले, शाहू और अंबेडकर के नाम पर आंदोलन चलाने वाले अनेक नेताओं ने सत्ता प्राप्ति के लिए अपनी-अपनी जातियों को गोलबंद किया। इससे बहुजन समाज की एकता मजबूत होने के बजाय बिखराव बढ़ा और सामाजिक न्याय का आंदोलन कमजोर हुआ।
डॉ. उदित राज ने कहा, “जब युवा, विद्यार्थी, वकील और नागरिक समाज संविधान बचाने के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, तो दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी मूकदर्शक कैसे बने रह सकते हैं? संविधान से सबसे अधिक अधिकार पाने वालों की जिम्मेदारी भी इसे बचाने की सबसे अधिक है।”
सम्मेलन में वक्ताओं ने संविधान और लोकतंत्र पर बढ़ते खतरों को लेकर चिंता जताई। दलितों और अल्पसंख्यकों के वोट बड़े पैमाने पर काटे जाने के आरोपों पर सवाल उठाए गए। ओबीसी की जातिगत जनगणना होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।
एफसीआरए (FCRA) संशोधन को अल्पसंख्यक संस्थाओं की स्वायत्तता के खिलाफ साजिश बताते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आरएसएस ईसाई और मुस्लिम संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। इसके विरोध में देश और विदेश में जनजागरण एवं आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया।
सम्मेलन में सर्वसम्मति से 13 दिसंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल ‘संविधान बचाओ रैली’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
डॉ. उदित राज ने कहा, “अब केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। जातियों में बँटकर नहीं, बल्कि एकजुट होकर सड़कों पर उतरना होगा। संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए निर्णायक जनआंदोलन ही रास्ता है।”
जारीकर्ता:
डोमा परिसंघ (DOMA PARISANGH)
नई दिल्ली