13/08/2026
#आरक्षण_बचाओ_आंदोलन (ABA), रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA) को चुनौती देने के लिए मैदान में!
आरक्षण के कारण यदि कम अंक प्राप्त करके दलित, ओबीसी और आदिवासी नौकरी ले लेते हैं, तो अदला-बदली कर लेनी चाहिए। गंदगी साफ़ करना, मरे हुए जानवरों को उठाना और दफनाना, मज़दूरी, शारीरिक परिश्रम, पुश्तैनी पेशे तथा कृषि-उद्योग के क्षेत्र में श्रम आदि कार्य अब तक बहुजनों के लिए ही आरक्षित रहे हैं। आरक्षण विरोधी सदियों से हड़पे हुए अपने आरक्षण—जैसे पूजा-पाठ, मंदिर, पढ़ाई-लिखाई, धन-दौलत, उच्च न्यायपालिका और मीडिया आदि—बहुजनों के हवाले करें। जब वे स्वयं जाति के आधार पर आरक्षण लेकर बैठे हैं, तो दलित और ओबीसी यदि संवैधानिक जातिगत आरक्षण का लाभ लें, तो उसमें ग़लत क्या है?
GenZ आंदोलन के ठीक बाद रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA) की मुहिम की शुरुआत हुई। इसके पीछे समाज को बाँटने का षड्यंत्र प्रतीत होता है। देखते ही देखते इनके सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लाखों लोग जुड़ गए। ऐसा तभी संभव होता है, जब इसके पीछे कोई बड़ा फ़ंडर हो और बड़ी टीम काम कर रही हो। इसके मुक़ाबले में आरक्षण बचाओ आंदोलन (ABA) सोशल मीडिया पर लॉन्च किया गया है, लेकिन लोग उस संख्या में नहीं जुड़ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़त बनाने के लिए एक मज़बूत तकनीकी टीम की आवश्यकता होती है, और उसके लिए आर्थिक संसाधन भी चाहिए। सोशल मीडिया पर सरकार का प्रभाव और नियंत्रण है, यह बात सभी जानते हैं। इसलिए बहुजनों को और अधिक संगठित होकर, पूरी ताकत के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा। तभी प्रभावी मुक़ाबला किया जा सकेगा।