09/04/2025
मगध हो भारत के शान,
मगही हो हमनी के पहचान,
मगही लोक बस जगा लअ सब अप्पन स्वभीमान,
फिर से करे परतो मानव जाति के कल्याण;
हमनीये के अभिमानवा से होतो इ संसार के उद्धार,
आवा हमनि सबे मिल के मांगहू अप्पन जन्मसिद्ध अधिकार,
बचाहू अप्पन भषवा, रीतिवा आउर इतिहसवा,
फिन से लिखै परतो अप्पन उत्थान आउर बिकास के लखिरवा !
मगही भाषा आंदोलन के संदर्भ मे प्रथम घोषणा यह है कि सम्पूर्ण भारत एवं विश्व में मगही लोक और समाज का प्रतिनिधित्वकर्त्ता 'All India Magahi People's Association' के तत्वाधान मगही भाषा को संविधानिक दर्जा दिलाने, एक स्वतंत्र भाषा आयोग का गठन एवं इस भाषा का अन्य अनुसूचित भाषाओं के संतुल्य संरक्षण व संवर्धन हेतु राजकीय योजनामद राशि का आवांटित किया जाए, इत्यादि के उद्धेश्यों को ज़मिनी रुप देने के लिये 'प्रथम अखिल भारतीय मगही भाषा सम्मेलन' का आयोजन किया गया है और यह कदम मगही भाषा आंदोलन की पहली कड़ी है ! सच बात तो यह है कि भाषा को संविधानिक दर्जा दिलाने की इस लड़ाई कि यह शुरुआत नही है बल्कि इतिहास पे सवाल किये बिना वर्तमान की वस्ताविकता के चुनौतियों से सबक लेकर बीते हुए घटित तमाम असंगठित और असफल निर्णायक प्रयास एवं आंदोलन को पुन: एक ठोस धरातल पर संगठित और मजबूत करने का एक अन्यन प्रयासमात्र है | आज हम सब मगहीजन और मगध अनेकानेक कारको से प्रभावित हुए हैं ई हमारा संघर्ष , बलिदान और योगदान समस्त भारतवर्ष के निर्माण में अभूतपूर्व भूमिका निभाती रही है | हमारे मगही भाई बंधु और परिवार आज समाज के हरेक क्षेत्रों में , हरेक आयामों में और हरेक परिस्थियों व अवस्थाओं में अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाते आ रहें हैं |
Mission Magadh ने अपने शोधों व सर्वे के आधार पर इस तथ्य पर अपना दावा करती है कि मगही परिवार विश्व के दर्जनो देशों में वास करती है जो समकालीन दौर में अंतराष्ट्रिय समुदाय होने का दावा को सत्यापित करता है I एतिहासिक धरातल पर यह उल्लेखनीय एवं गौरवांवित सत्य सर्वाविदित है कि मगही समाज और संस्कृति का उदगम व विकास मगध महाजनपद , महात्मा बुद्ध , मगध सम्राज्य के महामानव से लेकर आधुनिक दौर में बौधिक ,सांस्कृतिक, समाजिक - आर्थिक एवं राजनीतिक पटल पर किसी भी जात धर्म , वेश-भूषा, संस्कृति से भेद करे बिना दूसरे समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में भागीदार रहा है | जहां तक स्वाभीमान और खुद्दारी की बात है हम सब मगही लोग सर्वदा से ही देश और समाज को प्राथमिकता देते अाये हैं I और कभी कभी तो अपने ही भाषा, संस्कृति और इतिहास की आहूति देकर ! आज देश की आजादी के सत्तर सालों के बाद भी हम उतने ही व्यस्थ और स्वार्थी बने बैठें हैं I सच कहा जाये तो कई मायने में हम अपनी भाषा, संस्कृति और समाज को 'हीनता ' और अनन्य की 'श्रेष्ठता' की भ्रमजाल में वशिभूत पड़े हैं हालांकि यह दूर्दशा किसी अकेले व्यक्ति, जात या समुदाय के कारण नही है यह तो हमारी सबकी सामूहिक नकाबिली का सबूत है ! और इस सत्य को जितना जल्दी हो सके मान लेना चाहिए कि मगध वह धरती है जिसकी मानवीय सभ्यता एवं संस्कृति की कोख से ही मानव कल्याण का सूत्रपात हुआ | लेकिन आज इस तकनिकी एवं औद्योगिक काल में वर्तमान खतरे में है मगध का, हमारी मगही भाषा और संस्कृति (लोक गीत , पर्व त्योहार , शादी वियाह, खान पान , वेश भूषा , मेहमानवाजी एवं आपसी भाईचारा ) का |
कितना हास्यापद बात है कि हमारी भाषा, संस्कृति और लोग भारतीय समाज के निर्माण में अभुतपूर्व एवं निर्णायक भूमिका अदा करता आया है और हमारा प्राचीन मगध इतिहास आज सम्पूर्ण भारतवर्ष का प्राचीन इतिहास है I आज देश के तमाम
सत्ता और शक्ति को सांकेतिक औचित्यता व वैधता हमारे मगध और इसकी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं, उद्धाहरण के तौर पर आशोक स्तंभ हो या फिर हो तिरंगे का चक्र ! यही है हम सब मगहियों की एतिहासिक विरासात और पहचान! आज हर एक विकसित भारतीय सभ्यतायें एवं उनकी भाषायें व संस्कृतियां अपने को एकजूट व संगठित कर चुके हैं और कर रहे हैं I एक हैं हम मगही जन जो अपने को जातिवाद और व्यक्तिवाद की स्वार्थ सिद्धी राजनीति तथा तथाकथित 'बिहारी ' गाथा के नाम पर तीन विकसित संस्कृतियों और क्षेत्राधिकारों (मगध, पूर्वांचाल और मिथलांचाल) को पूर्णरूपेण फलने फूलने से रोका जाता रहा है | यहाँ सवाल आपसी प्रतिस्पर्धा का कतई नही है बल्कि अस्तिव और असमिता को अछुन्न रखने व समानता के आधार पर यह हक़ की बात है | आज हमें अपने भाषा, संस्कृति एवं लोगों की रक्षा करने के लिये एकजूट होना एक नितांत आवश्यक कड़ी बन बैठी है |
हमारी जीत की शुरुआत व्यक्तिगत मगही स्वचेतना पर पूरी तरह निर्भर है दरकार है तो बस इस बात की कि जब कोई कहीं भी, किधर भी यह सवाल करे कि 'आप कहाँ से हैं ?' तो इसका केवल हमारे संचेतन से जवाब निकले -' जी ! हम मगध से हैं |' और यह सवाल कि 'आप कौन हैं ?' तो इसका उत्तर होना चाहिए कि-'जी ! मगही हूँ |'.... स्वं की संचेतना एक दिन सम्पूर्ण मगही जन परिवारों की संचेतना मे समाहित हो जायेगी |
'मगही जनमानस चेतना समिति' समस्त भारत और विश्व में रहने वाले मगही जन एवं परिवारों से सहृद्य निवेदन करती है कि हमसब मिलकर एक व्यापक और मजबूत एकता के अटूट सूत्र में बंधे | आज मगही युवा शक्ति के कंधों पर सारा भार आ गया है कि वो अपनी भाषा और संस्कृति का संरक्षण एवं विस्तार कैसे करें | कहने पर अत्यंत हर्ष हो रहा है कि आज मगहीभाषी अपनी प्रतिभा और कौशल के दम पर अपना परचम व्यापार से लेकर तकनिकी क्षेत्र तक, नौकाशाही से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक, शोध से लेकर समाजसेवा तक और अर्थव्यवास्था हो या फिर राजनीति या मेहनतकश मजदूर वर्ग !
'All India Magahi People's Association' समस्त मगहीजनों को सादर आमांत्रित करता है कि आईये हमसब मिलकर अपनी भाषा एवं संस्कृति को नवसृजित करें और अपने मगही युवा भाईयों और माताओं एवं बहनों की हर संभव सहायता करें | अपने मगध को पुन : समृद्ध करें, इसमे ही हमसब का कल्याण है | आईये हम सब मिलकर मगही भाषा को संविधानिक दर्जा दिलाय I
निवेदक,
All India Magahi People's Association
परामर्शकर्त्ता
Dr. Nirdosh Kumar aka Neil
मगही जनमानस चेतना समिति
For our motherland Magadh, join the hands together, kindly become a part of our movement. We united shall always be victorious. Jai Magadh Jai Bharat