30/05/2026
इतिहास में मुगल बादशाह औरंगज़ेब का शासनकाल सबसे अधिक विवादित और चर्चा में रहा है। आम तौर पर इतिहास में उनकी छवि केवल मंदिरों को तोड़ने वाले शासक के रूप में दिखाई जाती है, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और कई प्रमुख इतिहासकारों के शोध से यह बात भी सामने आती है कि औरंगज़ेब ने अपने शासनकाल में कई हिंदू मंदिरों और मठों को जमीन (जागीर), नकद दान और सुरक्षा भी प्रदान की थी।
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर के.एन. पणिक्कर और डॉ. बी.एन. पांडे (जिन्होंने मुगल काल के फरमानों पर गहरा शोध किया) के अनुसार, औरंगज़ेब ने भारत के विभिन्न हिस्सों में हिंदू पुजारियों और मंदिरों को राजकीय संरक्षण दिया था:
वाराणसी (काशी) के मंदिर: बनारस के जंगमबाड़ी मठ को औरंगज़ेब द्वारा जमीन और संरक्षण देने के फरमान आज भी मौजूद हैं। इसके अलावा बनारस के ही बेनी माधव मंदिर के पुजारियों को भी राजकीय मदद के प्रमाण मिलते हैं।
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर: औरंगज़ेब के शासनकाल के ऐसे आधिकारिक दस्तावेज़ (फरमान) मिले हैं, जो दिखाते हैं कि उन्होंने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों को दीप जलाने और पूजा-अर्चना के लिए घी और अन्य सामग्रियां दान में देने का आदेश जारी किया था।
चित्रकूट का बालाजी मंदिर: बुंदेलखंड के चित्रकूट में स्थित बालाजी मंदिर के लिए औरंगज़ेब ने बड़ी जागीर (जमीन) दान में दी थी और मंदिर के रख-रखाव के लिए नियमित रूप से शाही खजाने से मदद भेजी जाती थी।
गुवाहाटी का कामाख्या मंदिर: असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर और उमानंद मंदिर को भी औरंगज़ेब की तरफ से भूमि दान (Land Grants) दिए जाने के ऐतिहासिक प्रमाण असम के राजकीय अभिलेखों में दर्ज हैं।
2. गैर-मुस्लिम धार्मिक स्थलों को भूमि और जागीर
इतिहासकार कैथरीन एशर और ऑड्रे ट्रुश्के के शोध के अनुसार, औरंगज़ेब ने न केवल हिंदू मंदिरों बल्कि जैन और सिख धार्मिक स्थलों को भी सहायता दी थी:
शत्रुंजय और जैन मंदिर: औरंगज़ेब ने गुजरात के पालिटाना में स्थित शत्रुंजय जैन मंदिरों को सुरक्षा प्रदान की थी और जैन मुनियों को भूमि दान में दी थी ताकि वे बिना किसी डर के अपनी धार्मिक यात्राएं कर सकें।
गया (बिहार) के मंदिर: बिहार के गया जिले में रहने वाले हिंदू संन्यासियों और पुजारियों को भूमि अनुदान दिए जाने के आधिकारिक मुगल आदेश आज भी रिकॉर्ड में सुरक्षित हैं।
3. बनारस का प्रसिद्ध फरमान (बनारस फरमान - 1659 ईस्वी)
खलीफा या सुल्तान के रूप में अपनी गद्दी संभालने के तुरंत बाद, 10 मार्च 1659 को औरंगज़ेब ने बनारस के स्थानीय अधिकारियों को एक प्रसिद्ध शाही आदेश (फरमान) जारी किया था। इस फरमान में स्पष्ट लिखा था:
"हमारी पवित्र शरीयत के अनुसार, प्राचीन मंदिरों को गिराया नहीं जाना चाहिए... हमारे शाही दरबार से यह आदेश जारी किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति बनारस और उसके आस-पास के हिंदू पुजारियों और ब्राह्मणों को परेशान न करे, न ही उनके काम में बाधा डाले, ताकि वे शांति से हमारे साम्राज्य की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना कर सकें।"