01/03/2026
𝐇𝐎𝐋𝐈 𝟐𝟎𝟐𝟔
𝐃𝐫 𝐀𝐫𝐯𝐢𝐧𝐝 𝐊𝐮𝐦𝐚𝐫 𝐏𝐚𝐧𝐝𝐞𝐲
होली का रंग, रक्षा धर्म का संकल्प
'हिंदुस्तान रक्षा धर्म' के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. अरविंद कुमार पांडेय, अपने नाम के अनुरूप ही देश और समाज के प्रति गहरी निष्ठा रखते थे। उनका जीवन देश सेवा के प्रति समर्पित था, और वे हमेशा युवाओं को राष्ट्रहित में काम करने के लिए प्रेरित करते रहते थे।
इस साल होली का त्योहार नजदीक था। डॉ. पांडेय, जो देश के विभिन्न हिस्सों में 'हिंदुस्तान रक्षा धर्म' की शाखाओं का दौरा करते रहते थे, इस बार अपने पैतृक गाँव 'वीरपुर' में होली मनाने का निर्णय लिया। वीरपुर, जो दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक के आदर्शों से प्रेरित रहा था, होली के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन करने की तैयारी कर रहा था।
होली की सुबह, गाँव के मैदान में एक अनूठा दृश्य था। चारों ओर रंग बिखरे थे, बच्चे और बड़े एक-दूसरे को रंग लगा रहे थे, लेकिन बीच में एक अलग ही माहौल था। डॉ. अरविंद कुमार पांडेय, अपने सादे वेश में, स्वयंसेवकों के साथ मिलकर बुजुर्गों और जरूरतमंदों को गुलाल लगा रहे थे। उन्होंने किसी बड़े नेता की तरह नहीं, बल्कि एक अपनेपन और अपनत्व के साथ सभी का अभिवादन किया।
उन्होंने कहा, "मेरे प्यारे साथियों, आज होली का त्योहार है, रंगों का त्योहार। यह त्योहार हमें सिखाता है कि कैसे विभिन्न रंग मिलकर एक सुंदर तस्वीर बनाते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे हमारे देश के विभिन्न धर्म, जातियाँ और भाषाएँ मिलकर 'हिंदुस्तान' नामक एक सुंदर और मजबूत राष्ट्र का निर्माण करती हैं। होली का रंग हमें भाईचारा और प्रेम का संदेश देता है।"
डॉ. पांडेय ने आगे कहा, "हमारा 'हिंदुस्तान रक्षा धर्म' का उद्देश्य इसी भाईचारे और एकता को बनाए रखना है। हम सभी को मिलकर अपने देश की रक्षा करनी है, न केवल सीमाओं पर, बल्कि समाज के भीतर भी। हमें नफरत, अज्ञानता और अन्याय के खिलाफ भी लड़ना है। होली का यह रंग हमारे भीतर देशभक्ति की भावना को और भी गहरा करे, यही मेरी कामना है।"
उनके भाषण ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वयंसेवकों ने न केवल रंगों का आनंद लिया, बल्कि डॉ. पांडेय के शब्दों से प्रेरित होकर देश सेवा के प्रति अपने संकल्प को भी दोहराया।
एक युवा स्वयंसेवक, रमेश, जिसने अभी हाल ही में 'हिंदुस्तान रक्षा धर्म' की सदस्यता ली थी, डॉ. पांडेय के पास आया। "डॉक्टर साहब, मैं आपके काम से बहुत प्रेरित हूँ। आज होली पर, मैं यह संकल्प लेता हूँ कि मैं हमेशा अपने देश की सेवा में तत्पर रहूँगा।"
डॉ. पांडेय ने रमेश के सिर पर हाथ फेरा और मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, यही 'हिंदुस्तान रक्षा धर्म' की असली भावना है। तुम्हारा यह संकल्प ही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।"
पूरे दिन, डॉ. पांडेय ने गाँव वालों के साथ मिलकर होली खेली। उन्होंने बच्चों को रंग लगाए, बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया, और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सामाजिक कार्यों की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक संगठन के अध्यक्ष नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और जन-नेता हैं, जिनके लिए देश सेवा ही सर्वोपरि है।
शाम ढलने तक, जब रंगों का शोर थोड़ा कम हुआ, तो डॉ. पांडेय ने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर एक बैठक की। उन्होंने गाँव में स्वच्छता अभियान चलाने, शिक्षा को बढ़ावा देने और जरूरतमंदों की सहायता करने की योजनाओं पर चर्चा की।
यह होली वीरपुर गाँव के लिए सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं रही, बल्कि 'हिंदुस्तान रक्षा धर्म' के संकल्प को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन गई, जिसका नेतृत्व स्वयं डॉ. अरविंद कुमार पांडेय कर रहे थे। उन्होंने साबित कर दिया कि होली का त्योहार हमें केवल खुशियाँ ही नहीं देता, बल्कि यह हमें अपने देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी अहसास कराता है।