Rishabhdev Religious and Charitable Society

Rishabhdev Religious and Charitable Society we work in Healthcare Education poor and NEEDY persons.Pl contribute and healp community

14/05/2026

निष्ठा से जो सत्य कहें, वे गुरुवर महान,
आतमतत्त्व का दीप दे, करें जीवन कल्याण।
शब्दों में यदि भूल हो, मानवता का भाव,
उसे न समझो छल कभी, न रखो दुर्भाव।
हित की पावन भावना से, देते सत्य उपदेश,
मोह-अंधेरा मिट सके, जागे आत्मप्रदेश।
करुणा जिनकी दृष्टि में, निर्मल जिनका ज्ञान,
ऐसे आचार्य चरण में, शत-शत मेरा प्रणाम।
🙏 जय जिनेन्द्र
सुभाष जैन

01/05/2026

यह शरीर मिट्टी का घर है, टिकने वाला नहीं,
धन-दौलत, रिश्तों का संग भी रहने वाला नहीं।

मोह की नींद में डूबा, जग सारा सोया है,
कर्मों के बंधन में हर जीव कहीं खोया है।

सतगुरु की वाणी जब अंतर में उतर जाती है,
अज्ञान की अँधेरी रात तुरंत ही मिट जाती है।

जागृति का दीपक फिर जीवन में जलता है,
मुक्ति का सच्चा पथ तभी स्पष्ट दिखता है।

27/04/2026

नहीं दिखावे का जो सहारा,
वही सच्चाई का उजियारा।
मन मंदिर को जो सजाता,
वही प्रभु के पास पहुँच जाता।

न तर्कों से जो घबराता,
न भीड़ में खुद को खो जाता।
भीतर झांके, खुद को जाने,
सत्य की राह वही पहचाने।

माथे का तिलक नहीं पहचान,
अंतर का हो सच्चा ज्ञान।
वचन नहीं, आचरण बोले,
जीवन से ही सत्य को तोले।

जो शांत धरा-सा जीता है,
वही अमृत सा पीता है।
मंच नहीं, मन में उजियारा,
सच्चा साधक सबसे न्यारा।
जय जिनेन्द्र

धन कमाने की चाह में, मैंने पाप बढ़ाए,हिंसा के इस जाल में, करुणा भाव भुलाए।तृष्णा में डूबा मन रहा, न दया की पहचान,अज्ञान ...
19/04/2026

धन कमाने की चाह में, मैंने पाप बढ़ाए,
हिंसा के इस जाल में, करुणा भाव भुलाए।

तृष्णा में डूबा मन रहा, न दया की पहचान,
अज्ञान में करता रहा, पापों का संधान।

अनगिन दोष किए प्रभु, गिनती न बतलाई,
अब उनके फल से जीवन, दुख में डूबा भाई।

हे केवलज्ञानी जिनवर! सब कुछ तुम ही जानो,
दुख हर लो, मार्ग दिखाओ, शरण तुम्हारी मानो।
तारनहार तुम ही प्रभु, हम आए दरबार,
क्षमा करो अपराध सब, कर दो जीवन पार।।
जय जिनेन्द्र

हाय जिनवर! मैं अपराधी, नहिं दया उर लाई,त्रस-स्थावर जीवों को, पीड़ा बहुत पहुँचाई।भूमि खोद महल बनवाए, जीव अनंत दुखाए,बिन छ...
17/04/2026

हाय जिनवर! मैं अपराधी, नहिं दया उर लाई,
त्रस-स्थावर जीवों को, पीड़ा बहुत पहुँचाई।

भूमि खोद महल बनवाए, जीव अनंत दुखाए,
बिन छाने जल बहाया, सूक्ष्म जीव बह जाए।

हरित वनस्पति तोड़ी, जीवन उनका हर लिया,
अज्ञानवश भोग लगाकर, पापों से मन भर लिया।

प्रमादवश अग्नि जलाई, जीव अनेक जलाए,
हे अरिहंत! क्षमा करो, हम शरण तुम्हारी आए।

अहिंसा का भाव जगा दो, करुणा भर दो अंतर,
सही मार्ग दिखला दो प्रभु, कटे भवसागर अंतर।।

जय जिनेन्द्र

गूलर फल, मद्य-मांस में, जो मन आस लगाता,संयम छोड़ कुव्यसनों में, जीवन दुःख ही पाता।अष्ट मूलगुण त्यागकर, भटके अज्ञान के पथ...
14/04/2026

गूलर फल, मद्य-मांस में, जो मन आस लगाता,
संयम छोड़ कुव्यसनों में, जीवन दुःख ही पाता।

अष्ट मूलगुण त्यागकर, भटके अज्ञान के पथ,
सही-गलत का भेद न जाने, बढ़े पापों का रथ।

अभक्ष्य भोजन करता , बस उदर भरन की चाह,
हे जिनवर! ऐसी बुद्धि दो, दिखे सच्ची राह।

तेरी भक्ति में मन रमे, मिट जाए हर विकार,
शुद्ध जीवन जीने का दो, प्रभु! अमृत उपहार।।
जय जिनेन्द्र

हिंसा, झूठ और चोरी में, जब मन उलझ जाता है,पराई नारी पर दृष्टि डाल, पापों में फँस जाता है।आरंभ और परिग्रह में, जीवन सारा ...
13/04/2026

हिंसा, झूठ और चोरी में, जब मन उलझ जाता है,
पराई नारी पर दृष्टि डाल, पापों में फँस जाता है।

आरंभ और परिग्रह में, जीवन सारा बीत जाए,
लोभ-मोह के बंधन में, आत्मा रोती रह जाए।

स्पर्श, रस, गंध, रूप, शब्द—इन्द्रिय विषय लुभाते,
इनके पीछे भाग-भाग कर, सत्य मार्ग खो जाते।

मनमानी में डूबा जीव, न जाने क्या है ठीक,
न्याय-अन्याय भूलकर, चलता पथ अंध-दीख।

हे जिनवर! ऐसी बुद्धि दो, समझे सही विचार,
पापों से दूर रखो प्रभु, कर दो जीवन साकार।।
जय जिनेन्द्र

विनय छोड़ जो चले विपरीत, मन में संशय छाए,अज्ञान के अंधकार में, जीवन व्यर्थ गंवाए।कुगुरु की सेवा में पड़कर, सच्चा मार्ग भ...
12/04/2026

विनय छोड़ जो चले विपरीत, मन में संशय छाए,
अज्ञान के अंधकार में, जीवन व्यर्थ गंवाए।

कुगुरु की सेवा में पड़कर, सच्चा मार्ग भुलाए,
दया-धर्म से दूर होकर, पापों में उलझ जाए।

हे जिनवर! सही पथ दिखाओ, मिटे भ्रम का जाल,
ज्ञान-दीप से रोशन कर दो, अंतर का हर काल।
जय जिनेन्द्र
तेरी शरण में आकर प्रभु, पाऊँ सच्चा ज्ञान,
भव बंधन से मुक्त कर दो, दो मोक्ष का वरदान।।

मन-वचन-काया से जो, पापों का जाल बुनाए,क्रोध-मान-माया-लोभ से, जीवन अंधकार में जाए।समरंभ समारंभ आरंभ में, उलझा रहता जीव,कृ...
11/04/2026

मन-वचन-काया से जो, पापों का जाल बुनाए,
क्रोध-मान-माया-लोभ से, जीवन अंधकार में जाए।
समरंभ समारंभ आरंभ में, उलझा रहता जीव,
कृत-कारित-मोदन से बढ़ता, कर्मों का भारी सीव।
शत-आठ भेदों में फँसकर, करता अघ अपार,
अज्ञानता की घोर रात में, भटके बारंबार।
हे जिनवर! तेरी शरण में, अब मन को मैं लाऊँ,
पापों के इन बंधनों से, खुद को मुक्त बनाऊँ।
तेरा नाम जपूँ हर पल, अंतर ज्योति जलाऊँ,
ज्ञान-संयम के पथ पर चल, जीवन सफल बनाऊँ।
तेरी कृपा से प्रभु मेरे, मिटें सभी अज्ञान,
भवसागर से पार लगाओ, दो मोक्ष का वरदान।।
जय जिनेन्द्र

हे प्रभु! हर जीव में तुम हो, यह भाव हमें समझा दो,छोटे-बड़े सब प्राणियों पर, दया का दीप जला दो।मन, वचन और कर्म से हम, किस...
10/04/2026

हे प्रभु! हर जीव में तुम हो, यह भाव हमें समझा दो,
छोटे-बड़े सब प्राणियों पर, दया का दीप जला दो।
मन, वचन और कर्म से हम, किसी को दुख न पहुँचाएँ,
क्रोध, मान, माया, लोभ से, अपने मन को बचाएँ।
अज्ञान के अंधेरे से प्रभु, ज्ञान का प्रकाश करा दो,
संदेह और भ्रम मिटा कर, सच्ची राह दिखा दो।
तेरी वाणी अमृत बनकर, जीवन को सुख दे जाए,
तेरे चरणों की शरण में, हर भय दूर हो जाए।
पापों के इस गहरे सागर से, पार हमें लगा देना,
हे केवलज्ञानी जिनवर! अपने चरणों में बसा लेना।
जय जिनेन्द

वंदन करूँ गुरु चरणों में,जिनराज बसे मेरे मन में।पावन हो जाए जीवन मेरा,तेरे नाम के सुमिरन में।हे प्रभु! सुन लो विनती मेरी...
09/04/2026

वंदन करूँ गुरु चरणों में,
जिनराज बसे मेरे मन में।
पावन हो जाए जीवन मेरा,
तेरे नाम के सुमिरन में।

हे प्रभु! सुन लो विनती मेरी,
भूलें हुईं बहुत ही भारी।
तेरी शरण में आया आज,
कर दो नैया पार हमारी।

मन के मल को दूर करूँ मैं,
शुद्ध भाव से तुझको धरूँ मैं।
तेरी वाणी दीपक बनकर,
अंधकार को दूर करे अब।

नमो कार मत्र का मिले सहारा,
जीवन हो उजियारा सारा।
तेरी भक्ति में लीन रहूँ मैं,
यही हो मेरा सच्चा सहारा।
जय जिनेन्द्र 🌼🙏

Address

Delhi

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Rishabhdev Religious and Charitable Society posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Rishabhdev Religious and Charitable Society:

Share