18/07/2026
** लोकतंत्र पर प्रश्न**
जब शांतिपूर्ण अनशन करने वालों से सरकार संवाद करने के बजाय पुलिस से जवाब दिलवाने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
सोनम वांगचुक की आवाज़ केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की है जो बेहतर शिक्षा और बेहतर भविष्य चाहते हैं।
लोकतंत्र में असहमति को कुचलना नहीं, सुनना चाहिए।
**संविधान की रक्षा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा है।**
**शिक्षा और युवा**
जो व्यक्ति शिक्षा सुधार और देश के भविष्य की बात कर रहा है, उसके साथ बलपूर्वक व्यवहार करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरकार की असली ताकत आलोचकों को चुप कराने में नहीं, बल्कि उनकी बात सुनकर समाधान निकालने में होती है।
आज सवाल सिर्फ सोनम वांगचुक का नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का है जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहता है।
**जनतंत्र का संदेश**
लोकतंत्र में सत्ता जनता की होती है, सत्ता में बैठे लोगों की नहीं।
यदि शांतिपूर्ण अनशन भी सरकार को असहज कर देता है, तो आत्ममंथन की आवश्यकता सरकार को है, जनता को नहीं।
हर आवाज़ को पुलिस की ताकत से नहीं दबाया जा सकता। इतिहास गवाह है कि सत्य और अहिंसा की शक्ति अंततः जीतती है।
**संवाद ही लोकतंत्र की पहचान है, दमन नहीं।**