14/05/2026
اُردو ہندوستان کی اہم ترین زبانوں میں سے ایک ہے جو ملک کے مختلف خطّوں میں بولی جاتی ہے۔ مغربی بنگال سے اُردو کا تعلق بہت پرانا ہے۔ بنگال کے دارالحکومت شہر کلکتہ(کولکاتا) اس زبان و ادب کی ترویج و اشاعت کا ایک اہم مرکز رہا ہے۔ اسی شہر سے نسبت رکھنے والی ایک شاعرہ اور Solitaire Litrature Foundation کی بانی محترمہ پروین شغف جی کی آج یوم پیدائش ہے۔ پروین شغف کی شاعری کے بارے میں عہد حاضر کے مقبول ترین شاعر جناب شارق کیفی صاحب نے فرمایا ہے کہ " پروین شغف کی شاعری سے گزرتے ہوئے یہ احساس ہوتا ہے کہ شگفتہ تخیلات کو اداسی کا جامہ پہنا دیا گیا ہو۔ یہ ایک قوی نسوانی آواز ہے جس میں زندگی کے نشیب و فراز، دکھ درد اور دوسرے بہت سے تجربات کو بڑی سنجیدگی سے پرویا گیا ہے۔"
پروین شغف آج دلّی اطراف کے کئی مشاعروں اور نشستوں کا حصہ بن چکی ہیں۔ اُن کے شاعری کا مجموعہ "زندان" کے نام سے شائع ہو چکا ہے۔ Solitaire Litrature Foundation کی ٹیم اُنھیں مبارک باد پیش کرتی ہے اور ان کی کامیابی کے لیے دعا کرتی ہے۔
उर्दू हिंदुस्तान की अहम-तरीन ज़बानों में से एक है जो मुल्क के मुख़्तलिफ़ ख़ित्तों में बोली जाती है। मग़रिबी बंगाल से उर्दू का ताल्लुक़ बहुत पुराना है। बंगाल के दारुल-हुकूमत-ए-शहर कलकत्ता (कोलकाता) इस ज़बान-ओ-अदब की तर्वीज-ओ- इशाअत का एक अहम मरकज़ रहा है। इसी शहर से निस्बत रखने वाली एक शायरा और Solitaire Litrature Foundation की बानी मोहतरमा परवीन शग़फ़ जी की आज यौम-ए-पैदाइश है। परवीन शग़फ़ की शायरी के बारे में अहदे हाज़िर के मक़बूल-तरीन शाइर जनाब शारिक़ कैफ़ी साहब ने फ़रमाया है कि "परवीन शग़फ़ की शायरी से गुज़रते हुए ये अहसास होता है कि शगुफ़्ता तख़य्युलात को उदासी का जामा पहना दिया गया हो। ये एक क़वी निस्वानी आवाज़ है जिसमें जिंदगी के नशेब-ओ-फ़राज़, दुख दर्द और दूसरे बहुत से तजुर्बात को बड़ी संजीदगी से पिरोया गया है।"
परवीन शग़फ़ आज दिल्ली अतराफ़ के कई मुशायरों और नशिस्तों का हिस्सा बन चुकी हैं। उनकी शाइरी का मजमुआ "ज़िंदान" के नाम से शाया हो चुका है। Solitaire Litrature Foundation की टीम उन्हें मुबारकबाद पेश करती है और उनकी कामयाबी के लिए दुआ करती है।
سب دیکھتے رہے ہیں تماشا کھڑے کھڑے
ہنس کر بدن کی خاک اڑاتی رہی ہوں میں
सब देखते रहे हैं तमाशा खड़े खड़े
हँस कर बदन की ख़ाक उड़ाती रही हूँ मैं
Post by- Anees Qalb
#परवीन_शग़फ़