Vishwa Sanatan Parishad

Vishwa Sanatan Parishad "विश्व सनातन परिषद"

सोचनेका विषय है की समाज के अंदर हर व्यक्ति की मानवता मर गई है, हर व्यक्ति अपने जिम्मेदारी के प्रति जिम्मेदार नहीं है|नीट...
25/07/2026

सोचनेका विषय है की समाज के अंदर हर व्यक्ति की मानवता मर गई है, हर व्यक्ति अपने जिम्मेदारी के प्रति जिम्मेदार नहीं है|नीट का पेपर लीक हुआ जिसने पेपर बनाया उसी ने लीक कर दिया, मतलब जो जिम्मेदार है उसी ने गैर जिम्मेदार हरकत कर दिया, एक मिनिस्टर के पास उस विभाग की हजारों फाइल रहती है हर फाइल वह पढ़ नहीं सकता तो उसके अंदर कई सचिव और विशेष सचिव रहते हैं जो की अपने सचिव के ऊपर विश्वास करके फाइल पर हस्ताक्षर कर देता है, इसमें तो सभी जिम्मेदार हुए इसलिए इस्तीफा एक का नहीं पूरे विभाग के सम्मिलित लोगों को इस्तीफा के साथ बर्खास्त कर देना चाहिए| जिस प्रकार परिवार का मुखिया व्यक्ति परिवार के किसी एक व्यक्ति के गलती पर उसे एक दो बार माफ कर देता है फिर तीसरी बार उसे घर से निकाल देता है|लेकिन नीट का पेपर कई बार लीक हुआ, इसका मतलब सिस्टम में नीचे से ऊपर तक गड़बड़ी है, इसमें बस शिक्षा मंत्री का ही दोष तो नहीं है, पहले सभी का जांच होना अनिवार्य है उसके बाद इस्तीफा की जरूरत है|अगर आज इस्तीफा हुआ तो सभी अपने जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे| जिस तरह से विपक्ष और कुछ सामाजिक लोग छात्र आंदोलन में बढ़ के हिस्सा ले रहे हैं, और छात्र हित की बात कर रहे हैं छात्र हित तभी संभव है जब आरक्षण हटा करके सभी को एक समान शिक्षा का अधिकार दिया जाए, तभी छात्र का हित संभव है, आरक्षण देकर सभी छात्र के साथ न्याय संभव नहीं है, क्योंकि यह छात्र है किसी जाति के नहीं, लेकिन विपक्ष ऐसा करेगा नहीं उसका वोट बैंक खिसकने का डर है, और जो लोग आरक्षण का मलाई खा रहे हैं जिसे फायदा हो रहा है वह भी तैयार नहीं होंगे? तो किस बात का घड़ियाली आंसू बहाना,? बंद करो यह छात्र हित की नौटंकी|जो छात्र ईमानदारी से मेहनत करके परीक्षा देते हैं उनके साथ इस तरह की घटना हो उनके दिल पर क्या गुजरती होगी वह छात्र ही जानते होंगे, लेकिन यह छछूंदर इन बेचारे सीधे-साधे छात्रों को उकसा करके अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं|इसलिए मैं सरकार से आग्रह करता हूं इस पर कड़ा से कड़ा कानून बनाया जाए, जिससे दोबारा पेपर लीक करने का कोई दुस्साहश नहीं करें , क्योंकि बच्चे ही देश के भविष्य है बस बार-बार घोषणा करने से नहीं होगा इसमें नुकसान छात्रों का हो रहा है| मैं छात्रों से भी कहना चाहता हूं संस्कार अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है|
लेखक: तरुण कुमार शाही (राष्ट्रीय अध्यक्ष )विश्व सनातन परिषद

"विश्व सनातन परिषद"  के (राष्ट्रीय अध्यक्ष) की जनता से अपील कृपया ध्यान दें वाराणसी को 25445 करोड़ की दो परियोजनाएं मिली...
20/07/2026

"विश्व सनातन परिषद" के (राष्ट्रीय अध्यक्ष) की जनता से अपील कृपया ध्यान दें वाराणसी को 25445 करोड़ की दो परियोजनाएं मिली है, स्थानीय प्रतिनिधि लगातार बयान दे रहे हैं जनता भी खुश है, लेकिन करोड़ों की परियोजना लगभग वाराणसी को कई बार मिल चुकी है जिसमें 25% से 50% काम दिख रहा है, इन इन पैसों में काशी अब तक मुंबई बन चुकी होती लेकिन भ्रष्टाचारियों को सरकारी खजाना खाने में कहां परहेज है? इसलिए काशी के स्थानीय लोगों से मेरी अपील है यह एलीवेटर रोड जो काशी में बनने जा रहा है उसके मानक, प्रयोग में लाए जाने वाले पदार्थ, और खर्च ,पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्यों कि यह पुल काशी के ऊपर ऊपर बनने जा रहा है क्योंकि सावधानी हटी दुर्घटना घटी काशी के एक-एक स्थानीय नागरिकों को ईमानदारी से जागरूक होना पड़ेगा क्योंकि स्थानीय प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारी और ठेकेदारों के भरोसे यह परियोजना 12 करोड़ में ही पूरी हो जाएगी बाकी का डकार दिया जाएगा जिस तरह से राम मंदिर में डकार लिया गया हैl क्योंकि अब मीडिया पर भी भरोसा उठ चुका है, इसलिए स्थानीय नागरिक अब जाग जाए और एक-एक काम का हिसाब रखें क्योंकि यह पैसा आपके और हमारे टैक्स का पैसा है l क्योंकि प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी कितने भी ईमानदार हैं वह तो यहां देखने नहीं आएंगे और देखने में आएंगे तो ऊपर से लीपा पोती कर दी जाएगी l इसलिए भारत के प्रत्येक नागरिकों सहित स्थानी नागरिक भी अपने-अपने शहर में जागरूक होकर के हर काम की समीक्षा करें l सादर धन्यवाद

जनता का सवाल माननीय प्रधानमंत्री जी आप ईमानदार हैं इसमें कोई शक नहीं और होंगे भी क्यों नहीं जनता के टैक्स के पैसे से सार...
28/06/2026

जनता का सवाल माननीय प्रधानमंत्री जी आप ईमानदार हैं इसमें कोई शक नहीं और होंगे भी क्यों नहीं जनता के टैक्स के पैसे से सारी सुविधाएं विदेश यात्रा से लेकर सब कुछ फ्री मिलता हो वही ईमानदार रहेगा ही , हर प्रधानमंत्री स्व लाल बहादुर शास्त्री थोड़ी बन जाएगा, लेकिन सवाल यह है करोना कार्यकाल में आपके नेतृत्व में राम मंदिर का उद्घाटन हुआ आपने राम मंदिर आंदोलन के सभी क्रांतिकारी स्वर्गीय कल्याण सिंह और श्री लाल की आडवाणी से लेकर के सभी कार्यकर्ताओं को करोना का हवाला देकर बाहर कर दिया अपने स्वयं अपना और संघ के प्रमुख दोनों लोग राम मंदिर शिलान्यास से लेकर उद्घघाटन तक का श्रेय ले लियाl आज आपके नेतृत्व में विश्व के तमाम श्रद्धालुओं की आस्थाओं को ठेस लगा करोड़ों रुपए की चंदा चोरी हुई ऐसा कीर्ति किसी भी सरकार में नहीं हुआ था धार्मिक जगह से चंदा चोरी हो आज भारत में काशी विश्वनाथ से लेकर के सभी मंदिर व्यापार का केंद्र बन चुका है, और दिख गया है जब-जब भारत पर विपत्ति आती है तो आप चुप होकर के बैठ जाते हैं अभी तक आप एक भी प्रतिक्रिया नहीं दे पाए हैं इस तरह से आपके नीचे कुछ को छोड़कर तमाम मंत्री और अधिकारी भ्रष्टाचार से भरे हुए हैं सारे मंत्री अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं और कार्यकर्ताओं की और जनता की कोई सुनवाई नहीं हो रही है बिना पैसे लिए कोई काम नहीं हो रहा है आखिर में इतनी बड़ी आस्था से खिलवाड़ की जिम्मेदारी कौन लेगा जनता आपसे पूछती है आखिर में इसकी नैतिक जिम्मेदारी कौन लेगा l विश्व सनातन परिषद की यही मांग है सारे मंदिरों में जो भी चढ़ावा की राशि है उसको जन कल्याण में खर्च किया जाए क्योंकि यह पैसा किसी के बाप की बापौती की नहीं है, जनता से भी यही कहना चाहता हूं कि आप मंदिरों में चढ़ावा बंद करिए दिखावा बंद करिए अगर आपको देना है अपने आसपास किसी भाई बंधु अशहाय की मदद करिए जिसे वास्तव मैं जरूरत है और राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करके जनता की निगरानी में एक नए ट्रस्ट का गठन किया जाए और दोषियों को कठोर से कठोर सजा दी जाए क्योंकि भगवान के साथ धोखा क्षमा योग्य नहीं है यदि मंदिरों मस्जिदों चर्च में चढ़ावा जाता भी है तो भगवान की सेवा में खर्च किए पैसे के अलावा जो पैसा बचता है उसे जन कल्याण में खर्च किया जाए यह पैसा मौज करने के लिए नहीं है, यही "विश्व सनातन परिषद" की मांग है आज हमने गुरुद्वारा में देखा एक-एक पैसा जनता की सेवा में खर्च किया जाता है रात दिन लंगर चलते हैं, और जगह पर तो चप्पल रखने के लिये भी पैसे लिए जाते हैं धर्म के नाम पर लूट मची हुई है इस पर विचार करने योग्य है l सत्य ही सनातन है वही सनातन धर्म है, हिंदू मुस्लिम सिख इसाई जैन सभी संप्रदाय सनातन के ही स्वरुप है l सनातन में धार्मिक स्थल आस्था का केंद्र है ना कि व्यापार का केंद्र l
लेखक:- तरुण कुमार शाह (राष्ट्रीय अध्यक्ष) विश्व सनातन परिषद

26/05/2026
भारत की जनता ने इस बार नौटंकी बाजों और मादारियों की सरकार चुन लिया है, जिस प्रकार नाटक कंपनी में किरदार समय-समय रूप बदलत...
15/05/2026

भारत की जनता ने इस बार नौटंकी बाजों और मादारियों की सरकार चुन लिया है, जिस प्रकार नाटक कंपनी में किरदार समय-समय रूप बदलते हैं बात बदलते हैं उसी प्रकार इस सरकार में नेताओं हाल है। अपने जनता के टैक्स के पैसे से मौज कर रहे हैं और जनता को जैसा चाहे वैसा नचा रहे है, जनता भी इस लायक है अपना काम धाम छोड़कर नेताओं के पीछे चमचागिरी में लगी हुई है। जब देश संविधान से चलता है यह नेता आपका क्या कर सकते हैं जो भी कार्य होगा संविधान और नियम के तहत ही होगा इन नेताओं के पीछे चमचागिरी और घूमने से अच्छा अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन करें और इसे हिसाब मांगने की निगरानी करें क्योंकि यह छात्र के जीवन से भी खिलवाड़ कर रहे हैं जो कि देश के भविष्य हैं ऐसा ही संस्कार यदि छात्रों में होगा तो आगे का भविष्य क्या होगा। नेता और जनता को जापान के लोगों से सीखना चाहिए अपने देश के प्रति प्रेम रखना चाहिए हर लोग अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना शुरू कर दें, तो राष्ट्र और समाज वैसे ही आगे निकल जाएगा और देश स्वर्ग बन जाएगा। विचार करिए सोचिए और अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ते रहिए और धर्म का पालन करिए धर्म मतलब सत्य ही धर्म है। इन मादारियों का बहिष्कार करना ही सबसे बड़ा विकल्प है। इज्जत उन्हीं को दीजिए जो इज्जत के लायक हो मदारी और नौटंकी बड़ों को नहीं। जो अपने कर्तव्य का पालन करना ही ना जानते हो।
लेखक तरुण कुमार शाही (राष्ट्रीय अध्यक्ष)

माननीय प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं की शादी में सोना मत खरीदिए, माननीय जी को किसी की शादी तो करनी नहीं है, माननीय जी कह रह...
12/05/2026

माननीय प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं की शादी में सोना मत खरीदिए, माननीय जी को किसी की शादी तो करनी नहीं है, माननीय जी कह रहे हैं डीजल और पेट्रोल का बचत करिए सबसे ज्यादा डीजल पेट्रोल की खपत प्रधानमंत्री से लेकर के सभी राज्यों के मंत्री तक करते हैं उनके साथ कई गाड़ियों का काफिला चलता है, जो की जनता के टैक्स के पैसे से मौज कर रहे हैं ,आम जनता तो एक गाड़ी का इस्तेमाल करती है। विगत दिनों कई राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ हेलीकॉप्टर और गाड़ियों का काफिला पर काफिला चलता रहा उसका हिसाब और बचत कौन करेगा। देश का असली "मालिक किसान" और "व्यापारी" जिनके टैक्स के पैसे से नेता और कर्मचारी मौज कर रहे हैं और यह बेचारे मारे मारे फिर रहे हैं। आखिर जनता द्वारा चुनी हुई सरकार का इन नेताओं और कर्मचारियों की क्या औकात बस यह जनता को मूर्ख बनाकर अपने मौज कर रहे हैं। इससे अच्छा तो राजतंत्र ही था आज के परिवेश में राजतंत्र का मतलब राष्ट्रपति शासन चाहे पक्ष हो या विपक्ष आज के परिवेश किसी के ऊपर भरोसा करने लायक नहीं है। अगर इन नेताओं का फंड और सुविधा बंद कर दिया जाए 90% लोग नेतागिरी छोड़ देंगे जैसे पूर्ववर्ती काल में कोई गांव का प्रधानी नहीं करना चाहता था। इन्हें जनता के टैक्स के पैसे से मौज करने और भौकाल बनाने की लत लग गई है । आज देश में एक नई संवैधानिक क्रांति लाने की जरूरत है। आज के परिवेश में चाहे पक्ष हो या विपक्ष सभी नेता बस जनता को मूर्ख बना रहे हैं और जनता का पैसा उनकी सुरक्षा और उनके घूमने में खर्च हो रहा है, और धरातल पर काम 25 परसेंट है, आखिर यह पैसा जा कहां रहा है। नेता पक्ष और विपक्ष राज्य संपति विभाग के पैसे का जनता को हिसाब दो हिसाब दो सार्वजनिक करो सार्वजनिक करो।
लेखक:तरुण कुमार शाही (राष्ट्रीय अध्यक्ष)

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