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 #विश्वग्राम राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीया प्रो. Geeta Singh दीदी ने  #जम्मू_कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्षा  #डॉ.दरख्शां अंद्...
02/08/2026

#विश्वग्राम राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीया प्रो. Geeta Singh दीदी ने #जम्मू_कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्षा #डॉ.दरख्शां अंद्राबी जी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर डॉ. अंद्राबी ने उनका आत्मीय एवं गरिमापूर्ण स्वागत किया...

भेंट के दौरान जम्मू-कश्मीर के सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं समसामयिक विषयों पर विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा हुई। साथ ही समाज में सद्भाव, महिला सशक्तिकरण, युवाओं की सहभागिता तथा प्रदेश के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न आयामों पर भी विचार-विमर्श किया गया...

VishwaGram

03/06/2026

विशाल सम्मेलनों से विश्वग्राम की यह यात्रा रुकी नहीं है, यह तो मात्र एक शुभ आरंभ है।
हमारी योजनाएँ और संकल्प विराम नहीं लेंगे; यह धरातल पर होने वाले दशकों के कार्य की शुरुआत है।
मंच की चर्चाओं से आगे बढ़कर, अब हमारा वास्तविक उद्देश्य राष्ट्र-कल्याण के लिए भूमि पर उतरना है।
वैचारिक मंथन संपन्न हुआ, अब समय निरंतर और अथक धरातलीय पुरुषार्थ (Ground Work) का है।
राष्ट्र निर्माण के इस यज्ञ में हर एक पग, समाज को आत्मनिर्भर और सुदृढ़ बनाने की ओर बढ़ेगा।
संकल्प अभी थमा नहीं है; हमारी योजनाएँ निरंतर गतिशील हैं और नींव का कार्य आज से प्रारंभ होता है।

27/05/2026

हमारा इतिहास केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं है, यह हमारी पहचान है, हमारा गौरव है और हमारी जड़ों की आवाज़ है! 🇮🇳

"शारदा - सभ्यता ज्ञान धरोहर" (Sharda: The First Wisdom University of the World) के सफल लोकार्पण के बाद, हमें जो अपार प्रेम और प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं, वह इस बात का प्रमाण है कि आज का युवा अपनी वास्तविक जड़ों को जानने के लिए कितना उत्सुक है।

किताब की लेखक, प्रोफेसर डॉ. गीता सिंह ने पुस्तक के बारे में बात करते हुए एक बहुत ही गहरी और विचारणीय बात कही है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शारदा पीठ केवल एक स्थान नहीं है, बल्कि यह हमारे प्राचीन 'भारत बोध' का वह केंद्र बिंदु है जहाँ से ज्ञान की अनवरत धारा बही। दुनिया का प्रथम विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त करने वाली यह भूमि आज दुर्भाग्य से पीओके में है, लेकिन इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी हर भारतीय के हृदय में जीवंत है।
हमारा उद्देश्य केवल एक पुस्तक प्रकाशित करना नहीं था...
हमारा ध्येय था उस विस्मृत ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करना। जब तक हम यह नहीं जानेंगे कि "हम कौन हैं?", तब तक हम यह नहीं समझ सकते कि हम कहाँ जा रहे हैं।

प्रो. गीता सिंह के शब्दों में, "सभ्यताएँ और संस्कृति तब समझ में आती हैं जब हम अपनी जड़ों से जुड़ते हैं।" और जड़ों से जुड़ने के लिए हमें अपने उस हिस्से को जानना होगा जो हमें हमारा वास्तविक परिचय कराता है।

"शारदा - सभ्यता ज्ञान धरोहर" इसी खोज, इसी जिज्ञासा और इसी 'भारत बोध' को जगाने का एक विनम्र प्रयास है। यह पुस्तक एक पुल है जो आज की पीढ़ी को उस प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ती है जहाँ से पूरे विश्व ने सीखा था। यह इस बात का भी स्मरण कराती है कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखना और उसे वापस प्राप्त करने की चेतना जगाना क्यों आवश्यक है।

आप सभी पाठकों का हृदय से आभार जिन्होंने इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ को अपनाया है और हमारी इस यात्रा का हिस्सा बने हैं। आइए, अपनी खोई हुई धरोहर को फिर से जानें, समझें और उस ज्ञान की शक्ति को पहचानें जो हमारी शिराओं में दौड़ती है।
जिन्होंने अभी तक इस यात्रा की शुरुआत नहीं की है, वे आज ही इस ऐतिहासिक कृति को पढ़ें और अपनी महान सभ्यता पर गर्व करें।

ज्ञान की देवी माँ शारदे हम सभी का मार्गदर्शन करें!

Video credits - Ritam News

ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की अनंत परंपरा को पुनः स्मरण कराने वाला एक अत्यंत गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक अवसर —“शारदा पीठ : सभ...
14/05/2026

ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की अनंत परंपरा को पुनः स्मरण कराने वाला एक अत्यंत गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक अवसर —
“शारदा पीठ : सभ्यता, ज्ञान धरोहर” पुस्तक का लोकार्पण समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

शारदा पीठ केवल एक मंदिर या तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, अध्यात्म और शिक्षा का वह दिव्य केंद्र रहा है जिसने सदियों तक सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप को ज्ञान का प्रकाश प्रदान किया। कश्मीर की पावन धरती पर स्थित शारदा पीठ को प्राचीन भारत के महानतम ज्ञान केन्द्रों में गिना जाता है। यह वह स्थान था जहाँ विद्वान, दार्शनिक, शास्त्रार्थकर्ता और साधक दूर-दूर से अध्ययन हेतु आया करते थे।

माँ शारदा, जिन्हें ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, उनके इस पावन पीठ ने भारतीय सभ्यता की उस चेतना को जीवित रखा जिसने “ज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है” का संदेश दिया। कहा जाता है कि यहाँ विशाल ग्रंथालय, शास्त्र अध्ययन और वैचारिक विमर्श की अद्भुत परंपरा थी। आदि शंकराचार्य से लेकर अनेक महान विद्वानों का इस पीठ से संबंध भारतीय इतिहास में वर्णित है। शारदा लिपि का विकास भी इसी महान परंपरा से जुड़ा माना जाता है। आज जब विश्व भारतीय ज्ञान प्रणाली और सभ्यता की ओर पुनः आकर्षित हो रहा है, तब “शारदा पीठ : विरासत ज्ञान धरोहर” जैसी पुस्तकें हमारी जड़ों से पुनः जुड़ने का माध्यम बनती हैं। 

इस महत्वपूर्ण ग्रंथ के लेखक
ख्वाजा फारूख रेंजूशाह
एवं
प्रो. गीता सिंह
ने अत्यंत गंभीर शोध, ऐतिहासिक दृष्टि और सांस्कृतिक चेतना के साथ इस विषय को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया है।

अंग्रेज़ी पुस्तक के हिंदी अनुवाद को जन-जन तक पहुँचाने में
आरिफ ख़ान भारती,
शिखर सरोहा
और
मो. वसीम अहमद
का योगदान अत्यंत सराहनीय और महत्वपूर्ण रहा। यह केवल अनुवाद नहीं, बल्कि ज्ञान की उस विरासत को व्यापक समाज तक पहुँचाने का सांस्कृतिक प्रयास है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य
डॉ इंद्रेश कुमार जी
की गरिमामयी उपस्थिति एवं विशिष्ट सान्निध्य प्राप्त हुआ। समाज में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और संवाद की भावना को सशक्त करने में उनका दीर्घकालिक योगदान अत्यंत प्रेरणादायी रहा है। 

कार्यक्रम में पूज्य
स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी
जी महाराज के आशीर्वचन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया। माँ शारदा की कृपा, भारतीय संस्कृति की निरंतरता और ज्ञान साधना के महत्व पर उनके विचार अत्यंत प्रेरणास्पद रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता
आरिफ मोहम्मद ख़ान जी
ने भारतीय ज्ञान परंपरा, साझा सांस्कृतिक विरासत और शारदा पीठ के ऐतिहासिक महत्व पर अपने विचार रखते हुए यह संदेश दिया कि हमारी सभ्यता का वास्तविक बल उसकी ज्ञान-समृद्धि, सहअस्तित्व और सांस्कृतिक चेतना में निहित है।

यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं था, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, कश्मीर की सांस्कृतिक आत्मा और हमारी सभ्यतागत स्मृतियों के पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।

इस सफल आयोजन हेतु उपस्थित सभी विद्वानों, अतिथियों, शोधकर्ताओं, साहित्य प्रेमियों, सहयोगियों, आयोजन समिति तथा पर्दे के पीछे अथक परिश्रम करने वाले प्रत्येक कार्यकर्ता का हृदय से आभार एवं अभिनंदन।

आप सभी की सहभागिता ने इस आयोजन को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का उत्सव बना दिया।

#ज्ञानपरंपरा #भारतीयसभ्यता

“शारदापीठ” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारत की उस महान ज्ञान परंपरा का पुनर्स्मरण है जिसने सम्पूर्ण विश्व को ज्ञान, दर्शन...
12/05/2026

“शारदापीठ” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारत की उस महान ज्ञान परंपरा का पुनर्स्मरण है जिसने सम्पूर्ण विश्व को ज्ञान, दर्शन और संस्कृति का मार्ग दिखाया।
प्रो. डॉ. गीता सिंह द्वारा लिखित यह महत्वपूर्ण कृति हमारी सभ्यता के उस गौरवशाली अध्याय को सामने लाती है, जहाँ भारत केवल एक भूभाग नहीं था, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा ज्ञान केंद्र था।

शारदापीठ को प्राचीन भारत के महानतम ज्ञानपीठों में स्थान प्राप्त था। यह वह स्थान था जहाँ विद्वान, दार्शनिक, साधक और शोधकर्ता दूर-दूर से अध्ययन हेतु आते थे। भारतीय ज्ञान परंपरा, शास्त्र, दर्शन, साहित्य और आध्यात्मिक चिंतन का यह केंद्र विश्व में भारत की बौद्धिक शक्ति का प्रतीक था।
यह केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक विरासत और सभ्यतागत आत्मविश्वास का जीवंत प्रमाण था।

आज जब नई पीढ़ी अपने इतिहास और जड़ों को जानने का प्रयास कर रही है, तब “शारदापीठ” जैसी पुस्तक अत्यंत प्रासंगिक बन जाती है। यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि भारत की पहचान केवल उसके इतिहास से नहीं, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा, चिंतन और संस्कृति से निर्मित हुई है।

इस पुस्तक के माध्यम से प्रो. डॉ. गीता सिंह ने न केवल इतिहास को पुनर्जीवित किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक वैचारिक दिशा भी प्रस्तुत की है।
यह कृति भारतीय सभ्यता की शक्ति, उसके ज्ञान-विज्ञान और उसकी वैश्विक भूमिका को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

#भारतीयसभ्यता #शारदापीठ

“Operation Sindoor” के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘विश्वग्राम’ द्वारा संचालित “सेना पराक्रम नमन स्मरण शृंखला” के अंतर...
08/05/2026

“Operation Sindoor” के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘विश्वग्राम’ द्वारा संचालित “सेना पराक्रम नमन स्मरण शृंखला” के अंतर्गत Delhi University में एक विशेष संवाद एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल स्मरण का अवसर नहीं था, बल्कि राष्ट्ररक्षा, युवा चेतना और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व पर सामूहिक मंथन का एक प्रेरणादायी मंच बना।

विश्वविद्यालय परिसर के उस जीवंत स्थल पर, जहाँ प्रतिदिन विद्यार्थी, शिक्षक और शोधार्थी एकत्र होकर संवाद, विचार-विमर्श और चाय के साथ राष्ट्र एवं समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हैं, वहीं इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एक आधुनिक चौपाल के रूप में पहचाने जाने वाले इस स्थान पर उपस्थित युवाओं ने भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, अनुशासन और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा “Operation Sindoor” के ऐतिहासिक पराक्रम को स्मरण किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने राष्ट्र, सुरक्षा, समाज और युवाओं की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए। संवाद के माध्यम से यह भाव स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि राष्ट्रनिर्माण केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि विचारों, चेतना और समाज के भीतर भी निरंतर होता है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रीय गौरव, कर्तव्यबोध और भारतीय सभ्यता के प्रति आत्मीय जुड़ाव को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।

‘विश्वग्राम’ की “सेना पराक्रम नमन स्मरण शृंखला” निरंतर देशभर में वीर सैनिकों के सम्मान, राष्ट्रीय एकात्मता और जागरूक युवा नेतृत्व के निर्माण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अभियान के रूप में आगे बढ़ रही है।

3 May 2026 को Srinagar स्थित अंबेडकर भवन में ‘विश्वग्राम’, Kashmir Society International के तत्त्वावधान में “Operation S...
07/05/2026

3 May 2026 को Srinagar स्थित अंबेडकर भवन में ‘विश्वग्राम’, Kashmir Society International के तत्त्वावधान में “Operation Sindoor” विषय पर एक भव्य एवं राष्ट्रचेतना से ओतप्रोत सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक संवाद नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा, अखंडता और भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय पराक्रम के प्रति सामूहिक श्रद्धा का सशक्त प्रकटीकरण था।

सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, धार्मिक प्रतिनिधियों तथा युवा सहभागियों ने उपस्थित होकर भारतीय सेना के साहस, अनुशासन और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया। कार्यक्रम में “Operation Sindoor” को भारत की रणनीतिक दृढ़ता, आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक संकल्प तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में स्मरण किया गया।

वक्ताओं ने अपने संबोधनों में स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजन केवल वीर सैनिकों के सम्मान तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज में राष्ट्रीय एकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रहित सर्वोपरि होने की चेतना को भी सुदृढ़ करते हैं। सम्मेलन में यह विचार विशेष रूप से उभरकर सामने आया कि जम्मू-कश्मीर की धरती सदैव ज्ञान, संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय समरसता की भूमि रही है, जिसे पुनः वैचारिक नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनाया जाना आवश्यक है।

‘विश्वग्राम’ भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और “वसुधैव कुटुम्बकम्” के शाश्वत दर्शन को समर्पित एक सशक्त पहल है, जो युवाओं ...
07/05/2026

‘विश्वग्राम’ भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और “वसुधैव कुटुम्बकम्” के शाश्वत दर्शन को समर्पित एक सशक्त पहल है, जो युवाओं में राष्ट्रनिर्माण, सांस्कृतिक जागरण, संवाद और राष्ट्रीय कर्तव्यबोध की भावना को सुदृढ़ करने हेतु निरंतर कार्यरत है।

इसी भावना के साथ ‘विश्वग्राम’ द्वारा “सेना पराक्रम नमन स्मरण शृंखला” का आयोजन किया जा रहा है। यह शृंखला भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य, साहस और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन करने तथा समाज, शिक्षाजगत और राष्ट्रीय सुरक्षा के मध्य एक सशक्त संवाद स्थापित करने का प्रयास है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व, सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता तथा राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी क्रम में 30 April 2026 को IIT Jammu के Convention Centre में ‘Global Leadership Summit : Vision 2047’ के अंतर्गत “सेना पराक्रम नमन स्मरण शृंखला” का सफल आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वीर सैनिकों के अदम्य साहस और त्याग को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया तथा “Operation Sindoor” के पराक्रम को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भारतीय सशस्त्र बलों की रणनीतिक दक्षता, अनुशासन और राष्ट्ररक्षा के प्रति अटूट संकल्प का यह अभियान भारत की शक्ति, सुरक्षा और स्वाभिमान का प्रतीक बनकर उभरा।

इसी अवसर पर ‘विश्वग्राम’ द्वारा 5-6 November 2025 को SKICC एवं University of Kashmir में आयोजित “Peace, People and Possibilities in Jammu & Kashmir” विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की विस्तृत प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया। इस संगोष्ठी ने जम्मू-कश्मीर में शांति, संवाद, सांस्कृतिक समन्वय, युवा सहभागिता तथा भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर एवं सकारात्मक विमर्श को वैश्विक मंच प्रदान किया था।

जय हिन्द!
भारत माता की जय!

29/04/2026

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24, Drive Rajendra Prasad Road
Delhi
110001

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