02/02/2026
12 फरवरी 2026: अखिल भारतीय आम हड़ताल सफल करो!!
मज़दूर विरोधी श्रम कोड कानून रद्द करो!!
संसद में पेश किया गया बजट-2026 एक सीधा संदेश है कि केंद्र सरकार अपने मज़दूर और जनता विरोधी एजेंडे से जरा भी पीछे नहीं हटेगी।
हाल ही में स्विगी, ज़ोमाटो, ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट, ज़ेप्टो जैसी कंपनियां में कार्यरत लाखों डिलीवरी कर्मचारियों द्वारा किए गए विरोध का भी केंद्र सरकार ने कोई हवाला नहीं लिया। "10 मिनिट पर बैन" का सीधा साफ ढकोसला कर, केंद्र सरकार ने डींगें तोह हांकी लेकिन गिग कर्मचारियों के लिए बजट में कोई राशि भी प्रस्तावित नहीं की गई है। ना कंपनियों की कोई जवाबदेही, न सरकार की!
पेश बजट में कंपनियों को टैक्स की सीधी छूट दी गई है। मालिकों और कंपनियों को केंद्र सरकार से मिल रहे अनुदान में पिछले साल के मुकाबले लगभग 50% इजाफा किया गया है। पब्लिक सेक्टर का आक्रामक निजीकरण कर, जन संपत्ति को निजी कंपनियों के हवाले करने की योजना पेश की गई है।
बेरोज़गारी पर काम करने के लक्ष्य 2047 के हैं और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी जन सुविधाओं पर प्रस्तावित खर्च में भारी कटौती की गई है। केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में जनहित के लिए एक भी प्रस्ताव नहीं है।
इन हालातों में यह बात एकदम साफ है कि मोदी सरकार इस देश के लोगों की मेहनत चूसने की तैयारी में सन '47 से पहले की अंग्रेज़ी सत्ता को भी पीछे छोड़ने के लिए तैयार है।
देश के मज़दूरों-किसानो ने मोदी सरकार की इन जन-विरोधी नीतियों का जवाब, 12 फ़रवरी 2026 को होने जा रही देशव्यापी आम हड़ताल से देने का निर्णय कर लिया है। दिल्ली भर के औद्योगिक क्षेत्रों और मज़दूर बस्तियों में लगातार ज़ोरदार प्रचार चलाया जा रहा है। उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर, समयपुर बादली, नरेला, मुकुंदपुर, संत नगर, झड़ौदा, बुराड़ी से लेकर दक्षिणी दिल्ली के ओखला, कुसुमपुर पहाड़ी और पूर्वी दिल्ली के मानसरोवर पार्क, पटपड़गंज समेत कई इलाकों में पर्चा वितरण, रैली, ई रिक्शा प्रचार को मज़दूरों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
मज़दूर-विरोधी, जनता-विरोधी मोदी सरकार मुर्दाबाद!!
हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे!!
मज़दूर एकता जिंदाबाद!!
ऐक्टू जिंदाबाद!!