Sanatan warrior's

Sanatan warrior's so gaya hai jo hum use utane aaye hai hum bharat mata ka Abhiman Bhadane aaye hai
Jay hind jay Bhara

06/02/2022

कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियों ने हिजाब पहने का प्रोटेस्ट किया तो भगवा शेरनी , भगवा पहन स्कूल जेड कॉलेज में चली गई । यह शुरुआत है

यह चौधरी चरण सिंह के पौत्र व अजीत सिंह के पुत्र,जाटों के नेता जयंत चौधरी हैं।
06/02/2022

यह चौधरी चरण सिंह के पौत्र व अजीत सिंह के पुत्र,
जाटों के नेता जयंत चौधरी हैं।

राष्ट्र सेविका समितिभारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी को सादर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 💐 🙏ईश्वर उनकी आत्मा को अपने चरणों ...
06/02/2022

राष्ट्र सेविका समिति

भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी को सादर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 💐 🙏

ईश्वर उनकी आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे 🙏 🙏 🙏

वर्षों से मैंने मेरी जिंदगी में भारत के प्रधानमंत्रियों को सिर्फ जालीदार टोपी और मजार पर मत्था रगड़ते हुए देखा था...... आ...
06/02/2022

वर्षों से मैंने मेरी जिंदगी में भारत के प्रधानमंत्रियों को सिर्फ जालीदार टोपी और मजार पर मत्था रगड़ते हुए देखा था...... आज यह दृश्य देखकर मन खुशी के मारे बड़ा ही भावुक हो रहा है

मेरे पास शब्द नहीं है कहने के लिए

प्रधानमंत्री Narendra Modi इस समय हैदराबाद के पाटनचेरु में 11वीं सदी के भक्ति शाखा के संत श्री रामानुजाचार्य की स्मृति में मूर्ति अनावरण से पूर्व पूजा अर्चना करते हुए.

संतों की मेहता क्या है जरा इन तस्वीरों में देखिए ......शंकराचार्य पीठ के संत जब पूजा-अर्चना हो रही थी तो उस हवन कुंड का महत्व प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को बता रहे थे और मोदी जी भी एक मीनार से उन शब्दों को सुन रहे थे ...........बीच में कुछ ऐसा वाक्य आया कि प्रधानमंत्री उसके लिए नतमस्तक हुए और उसी क्षण हाथ जोड़ दिए

06/02/2022

एक फर्जी खबर खूब फैलाई जाती है..नेहरू ए मेरे वतन के लोगों सुन रो पड़ा थे

ये नहीं बताया जाता कि लता जी ने सावरकर जी का समर्थन किया था

हरि:ॐ , सादर नमस्कार।भारतरत्न लता मंगेशकर के निधन का  दुःखद समाचार मिला। स्व.लता दीदी ने मराठी भाषा के  *"फुले वेचिता"* ...
06/02/2022

हरि:ॐ ,
सादर नमस्कार।

भारतरत्न लता मंगेशकर के निधन का दुःखद समाचार मिला।

स्व.लता दीदी ने मराठी भाषा के *"फुले वेचिता"* पुस्तक में एक आलेख *"पुनर्जन्म झाला तर "* में लिखा है कि ,
पुनर्जन्म होता है यह कौन सिध्द करके दिखा सकता है ? बहुत कठिन है।
लेकिन मैं हिन्दू हूं। इसलिए मेरा विश्वास है कि पुनर्जन्म होता है। मनुष्य जीवन में जो भी सामान्य इच्छाएं रहती हैं, यश ,कीर्ति , प्रताप , धनदौलत आदि सबकुछ मुझे मिल गया है। मैने सैनिकों के लिए गीत भी गाये हैं, लेकिन मैने स्वयं अपने देश की रक्षा नहीं की है। इसलिए यदि मुझे पुनर्जन्म मिला तो

मैं सैनिक बनूंगी ऐसी मेरी इच्छा है।

अपना भारतवर्ष जब स्वतंत्रता का अमृतमहोत्सव मना रहा है , उस समय भारतरत्न लता दीदी देहरूप में हमारे बीच नहीं रही , इसका तीव्र दुःख होता है ।

विश्वविख्यात गान सम्राज्ञी स्व. लता जी का पुनर्जन्म होगा अथवा नहीं यह तो हम नहीं बता सकते , लेकिन स्व. लता जी की *देश की रक्षा* *इस भावना*
का सम्मान करते हुए भारत के युवक-युवतियों ने प्रेरणा लेकर अपने रुचिनुसार भारतीय सेना में भर्ती होने का निश्चय किया तो यह एक अनोखी श्रद्धांजलि अर्पित होगी ।

स्व. लता जी को हमारी भावपूर्ण श्रद्धांजलि!
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

रवीन्द्र जोशी ,
कुटुम्ब प्रबोधन
अखिल भारतीय संयोजक ,
केन्द्र :: नागपुर
06-02-2022

माँ सरस्वती की वरद पुत्री,असंख्य लोगों के दिलों पर राज करने वाली,स्वर कोकिला,भारत रत्न लता मंगेश्कर जी का निधन अत्यंत पी...
06/02/2022

माँ सरस्वती की वरद पुत्री,असंख्य लोगों के दिलों पर राज करने वाली,स्वर कोकिला,भारत रत्न लता मंगेश्कर जी का निधन अत्यंत पीड़ादायक है।आवागमन तो सृष्टि का शाश्वत नियम है।आया है सो जाएगा,राजा रंक फकीर वाली कहावत सबके ऊपर चरितार्थ होती है।इन्होंने देश व दुनिया में जो अपनी अमिट छाप छोड़ी है व सदा विद्यमान रहेगी। करोड़ों स्वर साधकों की प्रेरणा पुंज लता जी का निधन अपूर्णीय क्षति है।वैसे इस दुनिया में सदा रहने आता नहीं कोई।जैसे गईं आप,वैसे जाता नहीं कोई।ईश्वर से प्रार्थना है कि लता दीदी की दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें व परिवार, प्रशंसकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।ॐ शांति,ॐ शांति,ॐ शांति।
🚩🚩🚩🚩🚩🙏🙏🙏🙏🙏🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️

स्वर्गीय लता दीदी मेरी नियमित दर्शक, बिंदास बोल शैली की समर्थक तथा वीर सावरकर जी पर मेरे बिंदास बोल को स्वयं देख कर दूसर...
06/02/2022

स्वर्गीय लता दीदी मेरी नियमित दर्शक, बिंदास बोल शैली की समर्थक तथा वीर सावरकर जी पर मेरे बिंदास बोल को स्वयं देख कर दूसरों को देखने के लिए कहने वाली प्रचारक, हमारे विचारों की प्रेरक दिव्य आत्मा थीं।

उन्होंने हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्धता और सावरकर,संघ से निकटताओं कभी छिपाया नहीं बल्कि समय समय पर जगज़ाहिर करती रही। अन्य सभी लोग उनसे अवश्य प्रेरणा ले।

06/02/2022

यदि आप स्वयं तलवार उठा कर धर्म की रक्षा नहीं कर सकते, तो सत्ता उसको दो जो तुम्हारे धर्म की रक्षा के लिए लड़ सके।
🚩🙏जय श्री राम 🙏🚩

मां सरस्वती का हिंदू धर्महमारा भारत और हिन्दू धर्म दुनिया से इस मायने में अलग और विलक्षण है कि हमने हमेशा ज्ञान के महत्त...
06/02/2022

मां सरस्वती का हिंदू धर्म

हमारा भारत और हिन्दू धर्म दुनिया से इस मायने में अलग और विलक्षण है कि हमने हमेशा ज्ञान के महत्त्व को सबसे पहले समझा और इसे बाकी सब चीजों के ऊपर रखा।

दुनिया की अलग-अलग सभ्यताओं और संस्कृतियों में जहाँ भोजन, आवास, सुरक्षा आदि को क्रमिक विकास के केंद्र में रखा गया है; वहीं हमारे यहाँ सबसे पहले 'ज्ञान' की बात की गई है.'विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तञ्च मां कुरु' कहते हुये हम जो प्रार्थना करते हैं उसमें भी सबसे पहले हमने 'ज्ञान' ही माँगा है और ज्ञान के बाद बाकी चीजों की इच्छा जताई है।

पश्चिम में इल्हाम होता है, वहां ज्ञान की प्राप्ति के लिये न तो साधना की आवश्यकता है, न ज्ञान की और न ही गुरु की बस जादू की तरह इल्म उतर जाता है। इसलिये आपने सेमेटिक मजहबों के नबियों और पैगम्बरों के बारे में कभी भी नहीं सुना होगा कि उन्होंने ज्ञान अर्जन के लिये कुछ किया या उनके कोई गुरु हुये पर अपने यहाँ ऐसा नहीं है। बिष्णु अवतार राम और कृष्ण भी जब इस धरा पर आये तो कोई जादू नहीं हुआ, उन्हें भी वशिष्ठ, विश्वामित्र और संदीपनी जैसे गुरुओं के चरणों में बैठकर सरस्वती की उपासना करनी पड़ी। मतलब ज्ञान ज्ञान अनायास ही नहीं आ जाता, उसके लिये सरस्वती की साधना करनी पड़ती है।

ऋषि दयानंद कहते थे कि जब मानव-जाति इस धरती पर आई तब उसके मार्गदर्शन के लिये ब्रह्मा ने अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरस नाम के ऋषियों के हृदय में सबसे पहले वेद का प्रकाश किया था यानि हिन्दू इतिहास का पहला पन्ना वेदमंत्रों से खुलता है, उस वेद से खुलता है जिसका अर्थ ही है ज्ञान। सरस्वती की आराधना का क्रम वेदों के बाद भी नहीं रूकता। हम उपनिषदों की बात करते हैं तो उपनिषद का अर्थ ही है 'समीप उपवेशन' या 'समीप बैठना यानि विद्या की प्राप्ति के लिए शिष्य का गुरु के पास बैठना. हमारे सारे पुराण भी संवाद रूप में ही है। रामायण की कथा भी एक श्लोक "मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः......के विस्तार के नतीजे में ही साकार हुई. महाभारत में ही गीता है जिसमें विस्तार से 'ज्ञान-योग' की बात की गई है.

यानि हिन्दू धर्म में कोई कहीं हो या न हो ज्ञान की देवी 'माँ शारदा' सब जगह हैं।

बृहदारण्यक उपनिषद् में राजा जनक महर्षि याज्ञवल्क्य से पूछते हैं- जब सूर्य अस्त हो जाता है, चंद्रमा की चांदनी भी नहीं रहती और आग भी बुझ जाती है, उस समय मनुष्य को प्रकाश देने वाली कौन-सी वस्तु है? ऋषि उत्तर में कहतें हैं - वह वाक है, उस अवस्था में वाक ही मानव को प्रकाश देता है।

इस वाक् की अधिष्ठात्रि देवी माँ शारदा ही तो हैं वेदों की अधिष्ठात्रि हैं, जो शिव-तांडव स्तोत्र की प्रेरणा हैं। यही शारदा कुम्भकर्ण के निद्रासन वाले वरदान में हैं। यही शारदा भारत को ज्ञान का तलवार लेकर विश्व के सांस्कृतिक दिग्विजय का आदेश देने वाली भी हैं जब वो महर्षि कण्व और महर्षि और्व को मल्लेछ भूमि की ओर भेजतीं हैं। इसलिये उन भूमियों से 'या खुदा...या मौला..या अल्लाह' जैसे संबोधन निकले जिसे हमने अपनी माँ शारदा की स्तुति में रचे थे ....

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना.....

संगीत और राग-रागिनियों में भी माँ सरस्वती ही हैं। हमारे ग्रंथों में माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी) को वाग्देवी सरस्वती के प्राकट्य का दिन माना गया है; इसलिये हमलोग वसंत पंचमी के दिन माँ की आराधना करते हैं और उनसे कहतें हैं कि तू है माँ तो हम शत्रुन्जयीं हैं, तू है तो हम लक्ष्मीवंत हैं, तू है तो हम यशस्वी हैं, तो है तो हम निरोगी हैं, तू है तो हमारा मान है और तू है तो हमें किसी और बात की चिंता नहीं है।

माँ ! तेरे वरदपुत्र महाराज भोज ने धारा नगरी में तेरे दिव्य-स्वरुप को प्रतिमा के रूप में स्थापित किया था। तेरे उस प्राकट्य-स्थली पर स्थित तेरी प्रतिमा को एक दुष्ट अलाऊदीन खिलजी ने खंडित किया था। तूने हमें सामर्थ्यवान बनाया था कि हम तुझे फिर से वहां प्रतिस्थापित करने कर अपने पूर्वजों का संकल्प पूर्ण करें पर कुछ लोगों के सत्ता की हवस आपके सम्मान पर हावी हो गई।

ऐसे सब लोगों में आप सद्बुद्धि का संचार करो माँ.....

अकेले तेरे उपासक बनकर हम शक्ति और लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकतें हैं। हमारे मन को शुभ-संकल्पों की ओर ले चलो माँ ..

'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला............

- अभिजीत सिंह

शनिवार को भाग्यनगर में 11वीं सदी के भक्ति मार्ग के संत  #श्री_रामानुजाचार्य की स्मृति में निर्मित 216 फीट ऊंची प्रतिमा '...
06/02/2022

शनिवार को भाग्यनगर में 11वीं सदी के भक्ति मार्ग के संत #श्री_रामानुजाचार्य की स्मृति में निर्मित 216 फीट ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी' का अनावरण कर राष्ट्र को समर्पित किया गया 💐💐

06/02/2022

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