Guru Vashist Foundation

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24/08/2026
19/05/2026

Harish Rana v. Union of India

​मामला: निष्क्रिय इच्छामृत्यु और सम्मान से मरने का अधिकार।
​विस्तृत कानूनी सिद्धांत: Common Cause (2018) के फैसले को स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने कहा कि 'क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन एंड हाइड्रेशन' (CANH - ट्यूब के जरिए भोजन और पानी देना) एक चिकित्सीय उपचार है। यदि कोई मरीज ऐसी स्थिति में है जहां से वापसी असंभव (Irreversible vegetative state) है, तो 'लिविंग विल' (Living Will) या मेडिकल बोर्ड की सलाह पर इस उपचार को रोकना 'सम्मानजनक मृत्यु' के दायरे में आता है।

19/05/2026

Muddam Raju Yadav v. B. Raja Shanker

​मामला: विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम (Specific Relief Act) के तहत संपत्ति के सौदों को लागू कराना।
​विस्तृत कानूनी सिद्धांत: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशिष्ट अनुपालन के मुकदमों में केवल एग्रीमेंट की वैधता काफी नहीं है। कोर्ट को यह देखना होगा कि वादी (Plaintiff) अनुबंध को पूरा करने के लिए हमेशा 'तैयार और इच्छुक' (Ready and Willing) था या नहीं। गैर-न्यायिक स्टांप पेपरों पर लिखे समझौतों की प्रामाणिकता और पक्षों के वास्तविक आचरण (Bona fide conduct) की गहन जांच अनिवार्य है।

19/05/2026

Pannalal Bhansali v. Bharti Telecom Ltd.

​मामला: कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 66 के तहत शेयर पूंजी में कटौती (Reduction of Share Capital)।
​विस्तृत कानूनी सिद्धांत: कोर्ट ने व्यवस्था दी कि शेयर कैपिटल कम करने के हर मामले में बाहरी वैल्यूएशन रिपोर्ट अनिवार्य वैधानिक दस्तावेज नहीं है। यदि शेयरधारकों ने विशेष प्रस्ताव (Special Resolution) पारित कर दिया है और लेनदारों (Creditors) के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित है, तो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को इस प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा नहीं डालनी चाहिए।

19/05/2026

Rachana Gangu v. Union of India

​मामला: राज्य द्वारा प्रायोजित या अनिवार्य स्वास्थ्य पहलों के कारण हुए नुकसान की भरपाई।
​विस्तृत कानूनी सिद्धांत: कोर्ट ने माना कि कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की जिम्मेदारी है कि यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य की भलाई के लिए चलाए गए किसी अभियान (जैसे अनिवार्य टीकाकरण) के कारण किसी नागरिक को गंभीर स्वास्थ्य क्षति या मृत्यु का सामना करना पड़ता है, तो राज्य इससे पल्ला नहीं झाड़ सकता। कोर्ट ने केंद्र को एक 'नो-फॉल्ट मुआवजा ढांचा' (No-fault compensation framework) विकसित करने को कहा।

19/05/2026

Prabir Purkayastha v. State
​मामला: पुलिस या मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपी को रिमांड पर भेजते समय कारणों को रिकॉर्ड करना।
​विस्तृत कानूनी सिद्धांत: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब भी किसी आरोपी को पुलिस कस्टडी या ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा जाता है, तो रिमांड के लिखित आधार (Grounds of Arrest/Remand) आरोपी और उसके वकील को तुरंत उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसके बिना दी गई कस्टडी अवैध मानी जाएगी, क्योंकि यह आरोपी को प्रभावी ढंग से कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकार से वंचित करती है।

19/05/2026

State of UP v. Anurudh

​मामला: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) / CrPC के तहत जमानत याचिका पर विचार करते समय हाईकोर्ट की शक्तियों की सीमा।
​विस्तृत कानूनी सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जमानत देते या खारिज करते समय अदालतों को 'मिनी-ट्रायल' (मामले का सूक्ष्म परीक्षण) नहीं शुरू कर देना चाहिए। अदालत का काम केवल 'प्रथम दृष्टया साक्ष्य' (Prima Facie Evidence) और आरोपी के भागने या गवाहों को डराने की संभावना को देखना है, न कि गवाहों के बयानों की गहराई से विश्वसनीयता की जांच करना, जो कि मुख्य ट्रायल का विषय है।

19/05/2026

Arvind Dham v. ED

​निर्णय तिथि: जनवरी 2026

​मुख्य कानूनी सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत लंबे समय तक मुकदमे से पहले की हिरासत (Pre-trial incarceration), संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए "त्वरित सुनवाई के अधिकार" (Right to Speedy Trial) का उल्लंघन है। यदि निकट भविष्य में ट्रायल शुरू होने की उम्मीद न हो, तो आरोपी को जमानत दी जा सकती है।

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