Vishv Harela Mahotsav Parivar

Vishv Harela Mahotsav Parivar विश्व हरेला महोत्सव परिवार.

एक पौधा ए?

उत्तराखंड के पहाड़ की संस्कृति और इसके त्योहारों का प्रकृति के साथ खास रिश्ता है। त्योहारों के इन्हीं रिश्तों की डोर से ...
16/07/2025

उत्तराखंड के पहाड़ की संस्कृति और इसके त्योहारों का प्रकृति के साथ खास रिश्ता है। त्योहारों के इन्हीं रिश्तों की डोर से पहाड़ का जनमानस जुड़ा हुआ है। इनमें से ही एक त्योहार है हरेला पर्व। दरअसल हरियाली का प्रतीक हरेला लोकपर्व न सिर्फ एक पर्व है, बल्कि एक ऐसा अभियान है, जिससे जुड़कर तमाम प्रदेशवासी बरसों से संस्कृति और पर्यावरण दोनों को संरक्षित करते आ रहे हैं। हरेला कुमाऊं का प्रमुख त्योहार है, जिसे देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। हरेला उत्तराखंड के परिवेश और खेती के साथ जुड़ा हुआ त्योहार है। इस त्योहार को सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान कुमाऊं के तमाम इलाकों में हरेला मेले का आयोजन भी किया जाता है। श्रावण महीने में इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान भिन्न-भिन्न तरह के पकवान बनाए जाते हैं और लोगों में प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। आइए जानते हैं कुमाऊं के इस मेले के बारे में कुछ खास बातें।

लोक परंपरा का है यह त्योहार- हरेला कार्यक्रम में पर्वतीय संस्कृति और लोक परंपरा का आयोजन किया जाता है। सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थालीनुमा पात्र या टोकरी का चयन किया जाता है। इस पात्र में गेहूं, जौं, धान, उड़द, सरसों आदि 5 से 7 प्रकार के बीज डाले जाते हैं। इस पात्र में हर रोज पानी छिड़का जाता है।

फसल से है इसका संबंध- 4 से 6 इंच लंबे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है। मान्यता है कि हरेला जितना बड़ा होगा, फसल भी उतनी ही अच्छी होगा। हरेला पर्व के दिन इन पौधों को काटा जाता है और भगवान के चरणों में अर्पित कर अच्छी फसल का आशीर्वाद मांगते हैं।

शिव-पार्वती के विवाह दिवस के रूप मनाते हैं- मान्यता है कि भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह दिवस को ही उत्तराखंड के लोग हरेला पर्व के रूप में मनाते हैं। उत्तराखंड एक पहाड़ी प्रदेश है और पहाड़ों पर ही भगवान शंकर का वास माना जाता है। इसलिए भी उत्तराखंड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला का अधिक महत्त्व है।

साल में तीन बार आता है हरेला -कोई भी त्योहार एक बार आता है, लेकिन हरेला सालभर में तीन बार आता है, लेकिन सावन महीने में आने वाले को ही धूमधाम से मनाया जाता है। इससे पहले अश्विनी और चैत्र महीने में भी यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सभी छोटे बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और घर की कुंवारी लड़की रोली का टिका लगाती है। जिसके बदले में उसे कुछ रुपया दिया जाता है।

परिवार को रखता है एकजुट- हरेला का महत्त्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि परिवार में जब भी विभाजन होता है, तो वहां एक ही जगह हरेला बोया जाता है। चाहे परिवार के सदस्य कहीं भी रहते हों। इस तरह यह त्योहार परिवार को एकजुट रखता है।

हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!!

22/07/2024

**दक्षिण अमेरिका के एंडियन क्षेत्र से उत्पन्न आलू को औपनिवेशिक युग के दौरान भारत में लाया गया था। पुर्तगाली 17वीं शताब्दी की शुरुआत में भारत में आलू लाने वाले पहले यूरोपीय लोगों में से थे, उसके बाद डच और ब्रिटिश आए। शुरुआत में, आलू की खेती उत्तरी भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में की जाती थी, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ उनके मूल एंडियन निवास के समान अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ थीं।

समय के साथ, आलू ने विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल होने और अपने पोषण मूल्य के कारण लोकप्रियता हासिल की। ​​वे भारतीय व्यंजनों का एक अभिन्न अंग बन गए, देश भर में विभिन्न व्यंजनों और पाक परंपराओं में अपना स्थान बना लिया। आज, भारत दुनिया के सबसे बड़े आलू उत्पादकों में से एक है, जिसकी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में महत्वपूर्ण खेती होती है।

भारत में आलू की शुरूआत ने न केवल देश के कृषि परिदृश्य को समृद्ध किया, बल्कि इसकी पाक विविधता में भी योगदान दिया, क्षेत्रीय व्यंजनों को प्रभावित किया और कई घरों में मुख्य भोजन बन गया।

विष हरेला महोत्सव 2024! विश्व हरेला महोत्सव के अंतरगत उत्तराखंड में बच्चों के द्वारा भी हरेला पोस्टर वृक्षारोपण, चित्र प...
22/07/2024

विष हरेला महोत्सव 2024!

विश्व हरेला महोत्सव के अंतरगत उत्तराखंड में बच्चों के द्वारा भी हरेला पोस्टर वृक्षारोपण, चित्र प्रदर्शनी आदि की गई हैं ।

Vishv Harela Mahotsav Parivar MYogiAdityanath Narendra Modi Pushkar Singh Dhami ModiNama

20/07/2024

विश्व हरेला महोत्सव 2024!
vishv harela mahotsav 2024!

हरेला पर्व के दौरान, यूपी में लगाए जाएंगे 36 करोड़ से अधिक पौधे। लखनऊ: यूपी में हरित आवरण बढ़ाने के राज्य सरकार के द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज शनिवार को प्रदेश भर में करीब 36.46 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।इसके साथ ही सीएम योगी 'पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ जन अभियान-2024' की शुरुआत करेंगे। वहीं पौधे सुरक्षित रहें, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे और रोपाई वाली जगहों की ‘जियो टैगिंग’ भी की जाएगी।
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विश्व हरेला महोत्सव 2024!vishv harela mahotsav 2024!उत्तरकाशी, 16 जुलाई 2024 (सू. वि.)जिले में हरेला पर्व हर्ष और उल्लास...
19/07/2024

विश्व हरेला महोत्सव 2024!
vishv harela mahotsav 2024!
उत्तरकाशी, 16 जुलाई 2024 (सू. वि.)

जिले में हरेला पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। हरेला पर्व के साथ ही जिले में वृहद वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत हुई। जिले के हर गाँव और विद्यालय तक संचालित इस अभियान के दौरान जिले में दो लाख से अधिक पौधे रोपित किये जाएंगे। आज पहले दिन एक लाख से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। इस अभियान की शुरुआत आज जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने अपर यमुना वन प्रभाग के पौल गांव के हरेला वन में वृक्षारोपण के साथ की गई।

'पर्यावरण की रखवाली, घर घर हरियाली, लाए समृद्धि और खुशहाली' की थीम पर आयोजित हरेला पर्व के वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत बड़कोट के निकट पौल गांव के हरेला वन में जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी, प्रभागीय वनाधिकारी अपर यमुना वन प्रभाग रविन्द्र पुंडीर, उप जिलाधिकारी बड़कोट मुकेश चंद रमोला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों, जन प्रतिनिधियों, आम नागरिकों तथा छात्रों के द्वारा वृक्षारोपण किया गया। जिलाधिकारी ने इस अवसर पर सभी जनपदवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए अभियान के दौरान रोपित पौधों की समुचित देखभाल व सुरक्षा किये जाने के भी अपील की।

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने तुनाल्का गांव स्थित एसडीआरएफ निर्माणाधीन परिसर में भी विभिन्न प्रजाति के पौधे रोपित किये और ग्रामीणों से पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़ों को बचाने की अपील की।

हरेला पर्व पर आज जिला मुख्यालय के नजदीक डांग गांव के हरेला वन में आयोजि वृक्षारोपण कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी जयकिशन , डीएफओ डीपी बलूनी, आर एन पांडेय, अपर जिलाधिकारी रज़ा अब्बासजिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्वेता राणा चौहान, उप जिलाधिकारी भटवाड़ी बृजेश कुमार तिवारी, सीओ आईटीबीपी सचिन कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी बीएस रावत, डीडीओ रमेश चंद्र सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों, आम नागरिकों के द्वारा वृक्षारोपण किया गया।

जिले में सीमावर्ती टकनौर क्षेत्र से लेकर मोरी विकास खंड के सुदूर आराकोट बंगाण तक गांव-गांव में आज हरेला पर्व पर पौधे रोपित किये गए। ग्रामीणों और छात्रों ने इस अभियान में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। सभी विकास खंडों मैं इस अभियान को लेकर के विशेष तैयारी की गई थी। बीते दिन तक सभी गांवों व विद्यालयों में वन विभाग, उद्यान विभाग, कृषि विभाग तथा ग्राम्य विकास विभाग के स्तर से पौधों का वितरण कर अभियान के दौरान दो लाख से अधिक पौधे रोपित करने करने की तैयारी पूरी कर ली गई थी। आज अभियान शुरू हुआ तो व्यापक जन-भागीदारी के चलते पहले ही दिन एक लाख से अधिक पौधे रोपित कर दिए गए। इस अभियान के लिए तय वृक्षारोपण की संख्या का पचास प्रतिशत
शुरुआती तीन दिनों में हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। कुल वृक्षारोपण में पचास प्रतिशत फलदार और चारा प्रजाति के पौधों का रोपण करने तथा हर परिवार से दो पौधे रोपित करने का निश्चय किया गया है। जिले के प्रत्येक गाँव में औसतन तीन सौ से अधिक पेड़ अभियान में रोपित किये जा रहे है। वृक्षारोपण अभियान में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों को दस-दस और प्राथमिक विद्यालयों को पांच-पांच पौध उपलब्ध कराए गए हैं।

इस अभियान के तहत वन विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग, बाल विकास विभाग, युवा कल्याण विभाग सहित विभिन्न विभागों के स्तर से आज गांव-गांव में कार्यक्रम आयोजित कर पौधे रोपित किए गए। अभियान में ग्राम पंचायत वन पंचायत युवक को महिला मंगल डालो महिला समूह आजीविका मिशन के कार्यकर्ताओं आंगनवाड़ी और अन्य ग्राम स्तरीय कार्यकर्ताओं ने अग्रणी भूमिका निभाई। साथ ही पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पीआरडी, होमगार्ड और आईटीबीपी के हिमवीरों ने भी अभियान में बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया।.
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विश्व हरेला महोत्सव 2024!vishv harela mahotsav 2024!पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से हमारा विश्व हरेला महोत्सव...
18/07/2024

विश्व हरेला महोत्सव 2024!
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पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से हमारा विश्व हरेला महोत्सव परिवार।
हम इस महोत्सव को पूरे जुलाई महीने तक मनाते हैं जिसमें हम जितना संभव हो सके उतने पेड़ लगाते हैं.
इस अभियान के अंतरगत उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के वर्तमान सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाई ने वृक्षरोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक किया।

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विश्व हरेला महोत्सव 2024!हरेला पर्व के अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति को रुद्राक्ष का पौध...
17/07/2024

विश्व हरेला महोत्सव 2024!

हरेला पर्व के अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति को रुद्राक्ष का पौध भेट किया!
इस अवसर में पूर्व राष्ट्रपति जी ने हरेला के महत्व का विशेष उल्लेख कर पर्यावरण और प्रकृति के साथ विशेष लगाव को दर्शाया.

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विश्व हरेला महोत्सव 2024!विश्व हरेला महोत्सव  परिवार के वृक्षरोपन अभियान के अंतर्गत देहरादून नगर निगम के लोगों के द्वारा...
17/07/2024

विश्व हरेला महोत्सव 2024!
विश्व हरेला महोत्सव परिवार के वृक्षरोपन अभियान के अंतर्गत देहरादून नगर निगम के लोगों के द्वारा
वृक्षरोपन किया गया। विश्व हरेला महोत्सव परिवार से प्रत्येक वर्ष देश विदेश से कई लोग जुड़कर वृक्षरोपण कर प्रकृति संरक्षण में अपना योगदान देते हैं।

इस वर्ष भी विभिन्न राज्यों के लोग हरेला महोत्सव से प्रेरित होके जोर शोर से वृक्षारोपण कर रहे हैं.

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*हरेला दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ*आज जवाहर लाल यूनिवर्सिटी दिल्ली मैं माननीय *हरीश जी रौतेला* सह संपर्क प्रमुख प...
16/07/2024

*हरेला दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ*
आज जवाहर लाल यूनिवर्सिटी दिल्ली मैं माननीय *हरीश जी रौतेला* सह संपर्क प्रमुख पूर्व प्रांत प्रचारक उत्तराखण्ड और ब्रज की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए वन्या स्टडी सर्किल एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, दिल्ली प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में हरेला पर्व पर साहित्य एवं पर्यावरण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
* संगोष्ठी की अध्यक्षता संस्कृत एवं प्राच्य अध्ययन केंद्र के संकायाध्यक्ष प्रो. बृजेश पांडे जी द्वारा की गई। मुख्य वक्ता के रूप में हरेला फाउंडेशन के संस्थापक *संदीप बालियान जी* एव प्रो. पी.के जोशी जी उपस्थित रहे।
* कार्यक्रम की श्रृंखला में डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर में आम और जामुन का वृक्षारोपण, प्रो. मनुराधा जी , डॉ अंजली गुलाटी जी , डॉ संजीव शर्मा जी, प्रोफ पिऊश जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
* कार्यक्रम के उपरांत संस्कृत सेंटर के प्रांगण में *त्रिवेणी वृक्ष* (नीम, बरगद और पीपल) का वृक्षारोपण किया गया। कार्यक्रम में डॉ संदेसा जी, श्री अनूप खुकुसाल जी, डॉ अतुल जी एवं अन्य उत्तराखंडी लोगों कासहयोग एवं उपस्थित रही. तत्पश्चात वृक्षारोपण कार्य संपन्न हुआ।
* कार्यक्रम में जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय, लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, आई आई टी, एम्स के प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं छात्रों की भागीदारी रही।
* स्त्री प्रतिभागियों द्वारा हरेला पर्व पर लोक गीत एवं नृत्य भी प्रस्तुत किया गया।
Narendra Modi Pushkar Singh Dhami Vishv Harela Mahotsav Parivar Dr. Harish Rautela Ajay Bhatt MYogiAdityanath Ajay Tamta Sandeep Kumar Balyan

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