Indraprastha Niwasini Bagulamukhi Dharmarth Trust

Indraprastha Niwasini Bagulamukhi Dharmarth Trust Indraprastha Niwasini Bagulamukhi Dharmarth Trust
is a non profitable Organization. The Organization

05/11/2022

देव दीपावली दीपदान का महत्व!
इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा नदी में स्नान करें अगर ऐसा संभव नहीं है चो पानी में गंगाजल डालकर स्नान किया जा सकता है. इसके बाद मंदिर की अच्छे से सफाई करें और भगवान शिव समेत सभी देवताओं का ध्यान करते हुए पूजा करें. इसके बाद शाम के समय किसी नदी के किनारे दीपदान करें. आप आपके आसपास कोई नदी नहीं है तो आर मंदिर में जाकर भी दीपदान कर सकते हैं. इसके बाद भगवान शिव की विधिवत तरीके से पूजा करें.

ॐ नमस्ते गणपतये।। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि।। त्वमेव केवलं कर्ताऽसि।। त्वमेव केवलं धर्ताऽसि।। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।। ...
31/08/2022

ॐ नमस्ते गणपतये।। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि।। त्वमेव केवलं कर्ताऽसि।। त्वमेव केवलं धर्ताऽसि।। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।। त्वमेव सर्व खल्विदं ब्रह्मासि।। त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्।।

27/08/2022

जानें, शनि अमावस्या का महत्व, ऐसे करें पूजन
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का खास महत्व होता है. शनि अमावस्या के दिन इस विधि से पूजन करने से कई लाभ होते हैं.
अमावस्या तिथि विशेष प्रभाव की तिथि मानी जाती है. इस दिन स्नान, दान और पूजा उपासना का विशेष महत्व होता है. अगर यह अमावस्या शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदायी हो जाती है. शनि अमावस्या पर विशेष प्रयोगों से शनि की कृपा आसानी से मिल सकती है. ख़ास तौर से रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी से दूर हो सकती हैं

इस दिन किस तरह करें शनि देव का पूजन?

- शनि देव की पूजा प्रदोष काल या रात्रि में करें.

- चाहें तो इस दिन व्रत भी रख सकते हैं.

- पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

- इसके बाद शनि चालीसा या शनि मंत्र का जाप करें.

- किसी निर्धन को खाने पीने की चीज़ों का दान करें.

- शनिदेव से कृपा पाने की प्रार्थना करें.

नौकरी या रोजगार पाने के लिए इस दिन क्या करें?

- सायंकाल पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

- इसके बाद "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जाप करें.
एक काला धागा पीपल वृक्ष की डाल में बांध दें.

- इसमें तीन गांठ लगाएं.

जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए क्या करें?

- एक कटोरी में सरसों का तेल ले लें.

- उसमे बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली डालकर शनि मंत्र का जाप करें.

- मंत्र होगा - "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"

- सरसों के तेल को पीपल के वृक्ष के नीच रख दें.

साढ़े साती और ढैया से बचने का उपाय-

- एक लोहे का छल्ला ले आएं.

- उसे शनिवार की सुबह सरसों के तेल में डुबा कर रख दें.

- शाम को शनिदेव के मन्त्रों का जाप करें.

- उनकी विधिवत आरती करें.

- इसके बाद लोहे के छल्ले को बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कर लें.

शनिदेव की पूजा में क्या-क्या सावधानी रखें?

- सरसों के तेल की बर्बादी न करें.

- निर्धनों की सेवा और दान जरूर करें.

- जहां तक हो सके आचरण उत्तम रखें.

शनि अमावस्या का महत्व, 4 उपाय और 1 मंत्र
शनिवार को आने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या कहते हैं। इस दिन शनि से पीड़ित व्यक्तियों के लिए दान का महत्व बढ़ जाता है। शनि से प्रभावित व्यक्ति कई प्रकार के अनावश्यक परेशानियों से घिरे हुए रहते हैं। कार्य में बाधा का होना, कोई भी कार्य आसानी से न बनना जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है।

इस समस्या को कम करने हेतु शनिचरी अमावस्या के दिन शनि से संबंधित वस्तुओं का दान करना उत्तम रहता है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में शनि का कुप्रभाव हो उन्हें शनि के पैरों की तरफ ही देखना चाहिए, जहां तक हो सके शनि दर्शन से भी बचना चाहिए।

शनि जाते हुए अच्छा लगता है ना कि आते हुए। शनि जिनकी पत्रिका में जन्म के समय मंगल की राशि वृश्चिक में हो या फिर नीच मंगल की राशि मेष में हो तब शनि का कुप्रभाव अधिक देखने को मिलता है। बाकि की राशियां सिर्फ सूर्य की राशि सिंह को छोड़ शनि की मित्र, उच्च व सम होती है।
शनि-शुक्र की राशि तुला में उच्च का होता है। शनि का फल स्थान भेद से अलग-अलग शुभ ही पड़ता है। सम में ना तो अच्छा ना ही बुरा फल देता है। मित्र की राशि में शनि मित्रवत प्रभाव देता है। शत्रु राशि में शनि का प्रभाव भी शत्रुवत ही रहता है, जो सूर्य की राशि सिंह में होता है।

शनि के अशुभ प्रभाव को कैसे करें कम, शनिदेव सज्जनों को नहीं करते तंग

1. शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए तिल का तेल एक कटोरी में लेकर उसमें अपना मुंह देखकर शनि मंदिर में रख आएं (जिस कटोरी में तेल हो उसे भी घर ना लाएं)। कहते हैं तिल के तेल से शनि विशेष प्रसन्न रहते हैं।

2. सवापाव साबुत काले उड़द लेकर काले कपड़े में बांध कर शुक्रवार को अपने पास रखकर सोएं। ध्यान रहे अपने पास किसी को भी ना सुलाएं। फिर उसको शनिवार को शनि मंदिर में रख आएं।

3. काला सुरमा एक शीशी में लेकर अपने ऊपर से शनिवार को नौ बार सिर से पैर तक किसी से उतरवा कर सुनसान जमीन में गाड़ देवें।
4. ना तो नीलम पहने, ना ही लोहे का बना छल्ला पहने। इसके पहनने से शनि का कुप्रभाव और बढ़ जाता है।

शनि मंत्र का जप भी किया जाए तो काफी हद तक शनि के कुप्रभाव से बचा जा सकता है।

मंत्र इस प्रकार है- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

शनि देव न्यायप्रिय राजा हैं। अगर आप बुरे काम नहीं करते हैं किसी से धोखा, छल-कपट आदि नहीं करते हैं तो इस ग्रह से डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि शनिदेव सज्जनों को तंग नहीं करते।

08/08/2022

सावन का आखिरी व चौथा सोमवार आज है। आज पुत्रदा एकादशी का संयोग बन रहा है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाता है। ऐसे में एकादशी व सोमवार व्रत होने से इस दिन का महत्व और बढ़ रहा है।

06/08/2022

शिव रुद्राभिषेक ( Shiv Rudrabhishek ) भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। रुद्र अर्थात भूतभावन शिव का अभिषेक। रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं ।

शिव कृपा से आपकी सभी मनोकामना जरूर पूरी होंगी तो आपके मन में जैसी कामना हो वैसा ही रुद्राभिषेक करिए और अपने जीवन को शुभ ओर मंगलमय बनाइए.

शिव को ही ‘रुद्र’ कहा जाता है, क्योंकि रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।


रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं।

वेदों और पुराणों में शिव रुद्राभिषेक के बारे में कहा गया है कि रावण ने अपने दसों सिरों को काटकर उसके रक्त से शिवलिंग का अभिषेक किया था तथा सिरों को हवन की अग्नि को अर्पित कर दिया था जिससे वो त्रिलोकजयी हो गया।

भस्मासुर ने शिवलिंग का अभिषेक अपनी आंखों के आंसुओं से किया तो वह भी भगवान के वरदान का पात्र बन गया।

कालसर्प योग, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यों की बाधाओं को दूर करने के लिए शिव रुद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है।


ज्योतिर्लिंग क्षेत्र एवं तीर्थस्थान तथा शिवरात्रि प्रदोष, श्रावण के सोमवार आदि पर्वों में शिववास का विचार किए बिना भी शिव रुद्राभिषेक किया जा सकता है।

वस्तुत: शिवलिंग का अभिषेक आशुतोष शिव को शीघ्र प्रसन्न करके साधक को उनका कृपापात्र बना देता है और उनकी सारी समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाती हैं। अत: हम यह कह सकते हैं कि रुद्राभिषेक से मनुष्य के सारे पाप-ताप धुल जाते हैं।

विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्र, गोदुग्ध या अन्य दूध मिलाकर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ करते हैं.

03/08/2022

रुद्राभिषेक से प्रसन्न होते हैं शि‍व जी, हर मनोकामना कर देंगे पूरी
भगवान शिव अपने भक्‍तों की पूजा से बहुत जल्‍दी ही प्रसन्‍न हो जाते हैं लेकिन आप अपनी कुछ विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति करना चाहते हैं तो शिव का रुद्राभिषेक करना सबसे शुभ उपाय हो सकता है.

रूद्राभिषेक का महत्वप्राचीन कथा के अनुसार विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई थी।ब्रह्माजी द्वार...
18/07/2022

रूद्राभिषेक का महत्व

प्राचीन कथा के अनुसार विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई थी।
ब्रह्माजी द्वारा अपने जन्म का कारण पूछने पर विष्णुजी ने ब्रह्मा की उत्पत्ति का रहस्य बताया।
यह कहा कि मेरे कारण ही आपका जन्म हुआ है, लेकिन ब्रह्माजी यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हुए और दोनों में युद्ध शुरू हो गया।
भगवान शिव इस युद्ध से नाराज होकर रुद्र लिंग रूप में अवतरित हुए।
इस लिंग का आदि -अंत जब ब्रह्मा और विष्णु को पता नहीं चला तो उन्होंने हार मान ली।
फिर दोनों ने मिलकर लिंग का अभिषेक किया, जिससे भगवान शिव प्रसन्न हो गए और तभी से रुद्राभिषेक का आरम्भ हुआ।

रूद्राभिषेक द्वारा भक्त भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हुए उन्हें प्रसन्न करते है। भगवान शिव को भोलेभंडारी के नाम से भी जाना जाता है और ये अपने भक्तो से जल्दी प्रसन्न हो जाते है।
मनुष्य जिस भी उद्देश्य से रूद्राभिषेक करता है, वह पूर्ण होता है। रूद्राभिषेक करने से आपको सुख-शांति, खुशी, धन और सफलता मिलती है।
पूजा विधि

रूद्राभिषेक ब्राह्मण द्वारा सम्पन्न करवाया जाता है।

इस रूद्राभिषेक में पंचामृत से लेकर गन्ने का रस, दीपक, तेल या घी, फूल, फल इत्यादि सामग्री का प्रयोग होता है।

शिवलिंग को उत्तर दिशा में स्थापित करते हुए भक्त शिवलिंग के निकट पूर्व दिशा की ओर मुंख करके बैठते हैं।

रूद्राभिषेक का प्रारंभ गंगा जल से किया जाता है और गंगा जल के साथ हर तरह के अभिषेक के बीच शिवलिंग को स्नान करवाया जाता है।

इसके बाद अभिषेक के लिए आवश्यक सभी सामग्री शिवलिंग पर अर्पण की जाती है।

अंत में, भगवान की आरती करने के बाद विशेष व्यंजन अर्पित किये जाते हैं।

रूद्राभिषेक की संपूर्ण प्रक्रिया में रूद्राम या ' ॐ नम: शिवाय' का जाप किया जाता है।
रूद्राभिषेक का मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

परमात्मा और मां-बाप से भी ऊंचा स्थान जिसका माना जाता है वो तो होता है गुरु. जीवन में गुरु के महत्व और योगदान के लिए भारत...
13/07/2022

परमात्मा और मां-बाप से भी ऊंचा स्थान जिसका माना जाता है वो तो होता है गुरु. जीवन में गुरु के महत्व और योगदान के लिए भारत में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है

गुप्त नवरात्रि का छठा दिन
05/07/2022

गुप्त नवरात्रि का छठा दिन

04/07/2022

गुप्त नवरात्रि पंचम दिन

03/07/2022

गुप्त नवरात्रि चतुर्थी दिन माँ बगलामुखी की भवन में स्थापना

Address

Khasra No. 342, Wazirabad, Near Kalighat
Delhi
110084

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Indraprastha Niwasini Bagulamukhi Dharmarth Trust posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Indraprastha Niwasini Bagulamukhi Dharmarth Trust:

Share